जुर्माने को कम या माफ करने के लिये आयुक्त के अधिकार
अभिनति जुर्माना प्रावधानों से अलग, आयकर विभाग ने वास्तविक मामलों में करदाताओं के लिये जुर्माना से राहत देने के लिये आयकर आयुक्त को सशक्त बनाने के लिये भी प्रावधान बनाया। ऐसे अधिकार धारा 273अ और धारा 273 अ अ के तहत प्रदान किये जाते है। इस भाग में आप धारा 273 अ और 273 अ अ से सम्बन्धित प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
|
अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
|
|
जुर्माने को कम या छूट देने के लिए प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त के अधिकार
''आयकर अधिनियम के अंतर्गत जुर्माना'' पर ट्यूटोरियल में हमने आयकर कानून के तहत आरोप्य विभिन्न चूकों के संबंध में विभिन्न जुर्मानों पर चर्चा की। जुर्माने के प्रावधानों को अधिनियमित करने के अलावा, आयकर कानून ने सही मामलों में करदाताओं को जुर्माने से राहत देने के लिए प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त को सशक्त बनाने का प्रावधान किया है। ऐसी शक्ति धारा 273क और धारा 273कक के तहत दी गयी है। इस भाग में आप धारा 273क और धारा 273कक के प्रावधानों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं
आयकर अधिनियम के तहत प्रमुख जुर्मानों का संक्षिप्त विवरण
धारा 273क और 273कक के प्रावधानों को समझने से पहले, आयकर कानून के तहत दंडात्मक प्रावधानों का एक सिंहावलोकन आवश्यक है। निम्न तालिका आयकर कानून के तहत आरोप्य प्रमुख जुर्मानों पर प्रकाश डालती है-
| चूक/विफलता का प्रकार | धारा | जुर्माना |
| किसी भी देय कर की अदायगी में चूक | धारा 221(1) | ऐसी राशि जोकि निर्धारण अधिकारी आरोपित करे परंतु कर की राशि से अधिक नहीं। |
| अवरोध अवधि की अघोषित आय का निर्धारण | धारा 158खचक(2) | अघोषित आय के संबंध में आरोपित कर का 50 प्रतिशत |
| आय की सूचना देने में विफल और गलत सूचना देना | धारा 270क(1) |
आय की सूचना न देने पर देययोग्य कर की राशि के 50 प्रतिशत के समान राशि। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति द्वारा उसकी किसी गलत सूचना के परिणामस्वरूप आय की सूचना नहीं दी जाती है तो जुर्माना आय की सूचना न देने पर देययोग्य कर की राशि के 200 प्रतिशत के समान होगी |
| धारा 142(1) या धारा 143(2) के तहत जारी नोटिस और धारा 142 (2क) के तहत जारी लेखा परीक्षा निर्देश के अनुपालन में विफलता। | धारा 271(1)(ख) |
प्रत्येक विफलता के लिए 10,000 रुपये यह धारा 1 अप्रैल, 2017 को अथवा उनके बाद प्रारम्भ निर्धारण वर्ष के लिए किसी मुल्यांकन के संबंध में और के लिए लागू नहीं होगा। |
| आय छिपाना या आय का गलत विवरण प्रस्तुत करना | धारा 271(1)(ग) |
अपवंचित कर का 100% से 300% यह धारा 1 अप्रैल, 2017 को अथवा उनके बाद प्रारम्भ निर्धारण वर्ष के लिए किसी मुल्यांकन के संबंध में और के लिए लागू नहीं होगा। |
| जिस साझेदार की देय आय वास्तविक आय से कम हैं अतिरिक्त साझेदार होने के परिणाम स्वरूप तथा सांझेदारी विलेख के अनुसार पंजीकृत फर्म द्वारा लाभ का वितरण | धारा 271(4) |
हिस्सेदार की आय और उसपर कर के बीच के कर का अंतर 150 प्रतिशत से अधिक न हो, देय योग्य कर के अलावा यह धारा 1 अप्रैल, 2017 को अथवा उनके बाद प्रारम्भ निर्धारण वर्ष के लिए किसी मुल्यांकन के संबंध में और के लिए लागू नहीं होगा। |
| धारा 44कक के तहत आवश्यक, लेखा बही, दस्तावेज, आदि को रखने, बनाए रखने या धारित करने में विफलता | धारा 271क | 25,000 रु. |
| अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन या निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन के संदर्भ में आवश्यक सूचना और दस्तावेजों को बनाए रखने या अनुरक्षित रखने में विफल होना, ऐसे लेनदेन आदि की रिपोर्ट न कर पाना | धारा 271कक | करदाता द्वारा किए गए निर्दिष्ट घरेलू तथा प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन की कीमत का 2 प्रतिशत हो |
| धारा 92घ(4) के अंतर्गत आपेक्षितानुसार सूचना और दस्तावेज की प्रस्तुति में विफलता | धारा 271कक(2) | रू. 5,00,000/- |
| तलाश के मामले में जुर्माना (यदि खोज 1 जुलाई, 2012 को या उसके बाद लेकिन 1 सितंबर, 2024 से पहले की जाती है) | धारा 271ककख | अघोषित आय का 10%, 20% और 60%, जो भी स्थिति हो |
| खोज की स्थिति में जुर्माना (यदि खोज 15 दिसंबर, 2016 को या उसके बाद की जाती है | धारा 271ककख | अघोषित आय का 30 प्रतिशत या 60 प्रतिशत, जो भी स्थिति हो |
| जुर्माने जहां आय में धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग या धारा 69घ हेतु संदर्भित कोई आय शामिल है | धारा 271ककग | अघोषित आय पर देययोग्य कर का 10 प्रतिशत |
| बही खाते में 'गलत प्रविष्टि' या कर देयता से बचने के लिए छोडी गई प्रविष्टि | धारा 271ककघ | गलत एंट्री या छोड़ी गई प्रविष्टि की राशि के बराबर राशि |
| धारा 44कख के तहत आवश्यक लेखों की लेखापरीक्षा या लेखापरीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफलता | धारा 271ख | कुल बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियों, आदि, का डेढ़ प्रतिशत या 1,50,000 रुपये जो भी कम हो। |
| धारा 92ड़ के तहत आवश्यक लेखाकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफलता | धारा 271खक | 1,00,000 रु. |
| पूर्ण या आंशिक रूप से, स्रोत पर कर काटने में विफलता या धारा 115-ण(2) के तहत पूर्ण या आंशिक रूप से कर का भुगतान करने में विफलता | धारा 271ग | कटौती न किए जाने (टीडीएस के मामले में) या कर न अदा करने (लाभांश वितरण कर के मामले में) पर, कर के बराबर राशि |
| स्रोत पर कर संग्रह करने में विफलता | धारा 271गक | संग्रह न किये गये कर के बराबर राशि |
|
धारा 269धध के उपबंधों के उल्लंघन में कुछ ऋण व जमा अथवा निर्दिष्ट राशि* को लेना या स्वीकार करना *"निर्दिष्ट राशि" का अर्थ अचल संपत्ति के स्थानांतरण के संबंध में, चाहे स्थानांतरण हुआ हो अथवा नहीं, प्राप्तनीय राशि, चाहे उधार हो अथवा अन्यथा, है |
धारा 271घ | ऋण या जमा लेने या निर्दिष्ट राशि को स्वीकारने के बराबर राशि |
| धारा 269धन के उल्लंघन में रू. 2,00,000 या उससे अधिक का नकद स्वीकार करना | धारा 271घक | नकद प्राप्ति के बराबर राशि |
| भुगतान की निर्धारित इलैक्ट्रानिक विधियों के माध्यम से भुगतान को स्वीकृत करने के लिए सुविधा न देने पर जुर्माना | धारा 271घख | रू. 5,000 हर दिन जब तक गलती जारी रहती है |
|
धारा 269न के उपबंधों के उल्लंघन में ऋण या जमा अथवा निर्दिष्ट उधार को चुकाना *"निर्दिष्ट राशि" का अर्थ अचल संपत्ति के स्थानांतरण के संबंध में, चाहे स्थानांतरण हुआ हो अथवा नहीं, उधार, चाहे जिस भी नाम से बुलाया जाए, के रूप में कोई राशि है। |
धारा 271ड | चुकाये गये ऋण या जमा या निर्दिष्ट उधार के बराबर राशि |
| निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पूर्व आयकर विवरण प्रस्तुत करने में विफलता | धारा 271च | 5000 रु. [1 अप्रैल, 2018 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए लागू नहीं] |
| धारा 285खक(1) के अंतर्गत आपेक्षितानुसार वित्तीय लेनदेन अथवा प्रतिवेदन खाते (पहले वार्षिक सूचना विवरणी के तौर पर ज्ञात)की प्रस्तुति में विफलता | धारा 271चक | चूक से प्रति दिन 500 रु. अथवा 1,000 रु. जो भी स्थिति हो |
| वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य लेखा का उचित विवरण प्रस्तुति करने में विफलता | धारा 271चकक | रू. 50,000 |
| निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पात्र निवेशगत कोष द्वारा विवरण अथवा सूचना अथवा दस्तावेज की प्रस्तुति में विफलता (जैसा धारा 9क(5) द्वारा आपेक्षित है) | धारा 271चकख | रू. 5,00,000 के बराबर राशि |
| धारा 92घ(3) के तहत आवश्यक कोई भी जानकारी या दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफलता | धारा 271छ |
ऐसी प्रत्येक विफलता पर प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन या निर्दिष्ट घरेलू लेन-देन के मूल्य का 2% |
|
एक भारतीय कंपनी द्वारा धारा 285क* के अंतर्गत सूचना अथवा दस्तावेज की प्रस्तुति में विफलता *धारा 285क मुहैया कराता है कि जहां विदेशी कंपनी के किसी शेयर अथवा हित भारत में स्थित परिसंपत्ति से इसकी वास्तविक राशि से प्राप्त होते हैं और ऐसी कंपनी भारतीय कंपनी के माध्यम से भारत में ऐसी परिसंपत्ति का अधिकार रखती है तो ऐसी भारतीय कंपनी आयकर प्राधिकारी को निर्धारित सूचना प्रस्तुत करेगी |
धारा 271छक |
लेनदेन जिसके संबंध में ऐसी विफलता हुई हो, की राशि के 2 प्रतिशत के समान राशि, यदि ऐसे लेनदेन पर भारतीय कंपनी के संबंध में प्रबंधन अथवा नियंत्रण के अधिकार को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से स्थानांतरित करने का प्रभाव था, किसी अन्य मामले में रू. 5,00,000 के समान राशि |
| धारा 286(2) के अंतर्गत रिपोर्ट की प्रस्तुति में विफलता | धारा 271छख(1) | रू. 5,000 प्रति दिन यदि विफलता की अवधि एक महीने से अधिक न हो और रू. 15,000 प्रति दिन यदि अवधि 1 महीने से अधिक हो |
| धारा 271छख(6) के अंतर्गत स्वीकृत अवधि के भीतर सूचना और दस्तावेजों की प्रस्तुति में विफलता | धारा 271छख(2) | प्रतिदिन के लिए रू. 5,000 जिसके दौरान विफलता जारी रहती है |
| धारा 271छख(1) अथवा 271छख(2) के अंतर्गत आदेश जारी करने के बाद धारा 286 के अंतर्गत सूचना/दस्तावेजों की प्रस्तुति में विफलता अथवा सूचना की प्रस्तुति में विफलता | धारा 271छख(3) | रू. 50,000 प्रतिदिन जिसके लिए ऐसी विफलता ऐसे आदेश को तामील करने की तिथि से प्रारंभ करते हुए जारी रहती है |
| धारा 286(6) के अंतर्गत जारी नोटिस के प्रतिउत्तर में गलत सूचना अथवा दस्तावेज की प्रस्तुति अथवा धारा 286(2) के अंतर्गत प्रस्तुत रिपोर्ट में गलती के बारे में सूचना देने में विफलता | धारा 271छख(4) | रू. 5,00,000 |
| टीडीएस/टीसीएस विवरणी दाखिल करने में विफलता | धारा 271ज | 10,000 रु. से कम नहीं और 1,00,000 रु. तक |
| गैर-निवासियों को किए गए भुगतान के संबंध में धारा 195(6) के अंतर्गत गलत सूचना की प्रस्तुति अथवा सूचना की प्रस्तुति में विफलता | धारा 271-झ | रू. 1,00,000 के बराबर राशि |
| ब्यौरा आदि प्रस्तुत न करने पर जुर्माना | धारा 271ट | रू. 10,000 से रू. 1 लाख यदि निर्धारिती ब्यौरा प्रस्तुत करने मे विफल होता है या धारा 35 या धारा 80छ के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में विफल रहता है |
| एक रिपोर्ट या प्रमाणपत्र में एक पंजीकृत राशिकर्ता या मर्चेंड बैंकर या एक चार्टर्ड अकांउटेंट द्वारा गलत सूचना की प्रस्तुति | धारा 272ञ | ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट या प्रमाणपत्र के लिए रू. 10,000 |
| कर प्राधिकारियों के साथ सहयोग करने में विफलता, अर्थात, किसी भी प्रश्न का जवाब न देना, विवरणों पर हस्ताक्षर न करना, आदि। अथवा धारा 142(1)143(2) के अंतर्गत जारी नोटिस का अनुपालन करने में विफलता अथवा धारा 142(2क) के अंतर्गत जारी निर्देशों का अनुपालन करने में विफलता | धारा 272क(1) | प्रत्येक विफलता/चूक के लिए 10,000 रुपये |
| धारा 272क (2) के तहत जुर्माना | धारा 272क(2) | चूक जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए 100 रु. प्रति दिन |
| धारा 133ख के अनुपालन में विफलता | धारा 272कक(1) | 1,000 रु. से अनाधिक राशि |
| स्थायी खाता संख्या (पैन) या आधार से संबंधित प्रावधानों के अनुपालन में विफलता | धारा 272ख | प्रत्येक चूक के लिए 10,000 रु |
| कर कटौती खाता संख्या या कर संग्रह खाता संख्या से संबंधित प्रावधानों का पालन करने में विफलता | धारा 272खख(1) | 10,000 रु. |
| कर संग्रहण खाता संख्या से संबंधित प्रावधानों का अनुपालन करने में विफलता | धारा 272खखख | रू. 10,000 |
धारा 273क(1) 273क(4) तथा 273कक के अंतर्गत जुर्माना कम अथवा माफ करने हेतु प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त की शक्तियां
धारा 273क(1) के अंतर्गत जुर्माने को माफ करना अथवा कम करना
धारा 273क (1)आयुक्त अथवा प्रधान आयुक्त को 270क (यानी सूचना न देने और आय की गलत सूचना देने के लिए जुर्माना) और धारा 271(1)(ग) (अर्थात् आय के गलत विवरण की प्रस्तुति अथवा आय के विवरणों को छुपाने हेतु जुर्माना) के अंतर्गत को आरोप्य किसी भी जुर्माने को माफ करने या कम करने का अधिकार देती है
प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त अथवा करदाता द्वारा की जाने वाली शुरुआत
धारा 273क (1) के तहत छूट या कमी प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा उसके स्वयं के प्रस्ताव पर या अन्यथा दी जा सकती है अर्थात, करदाता द्वारा किए गए एक आवेदन पर।
राहत प्रदान करने के लिए शर्तें
निम्न शर्तें के संतुष्ट होने पर धारा 273क(1) के तहत राहत प्रदान की जाती है:
(1) आय का विवरण छुपाने या ऐसी आय का गलत विवरण प्रस्तुत करने की पहचान कर निर्धारण अधिकारी द्वारा किए जाने से पूर्व, करदाता स्वेच्छा से और सद्भाव में, ऐसे ब्यौरे का पूरा और सही प्रकटीकरण करता है।
धारा 273क(1) के प्रयोजन हेतु, किसी भी मामले में किसी व्यक्ति द्वारा अपनी आय या उससे संबंधित विवरण का पूर्ण व सही प्रकटीकरण तब माना जायेगा जहां विवरणी में आय से अधिक निर्धारित आय ऐसी प्रकृति की है, जिस पर धारा 271(1)(ग) अथवा धारा 270 क तहत जुर्माना आरोपित नहीं किया जा सकता है।
(2) करदाता ने निर्धारण से संबंधित संचालित किसी भी जांच में सहयोग किया है।
(3) प्रासंगिक वर्ष के संबंध में अधिनियम के तहत पारित आदेश के परिणामस्वरूप करदाता ने कोई भी कर या ब्याज या तो अदा कर दिया है या भुगतान के लिए संतोषजनक व्यवस्था कर दी है।
प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक का पूर्व अनुमोदन
यदि आय की रकम जिसके संबंध में प्रासंगिक वर्ष में जुर्माना आरोपित किया गया है या आरोप्य है या, जहां ऐसा प्रकटीकरण एक से अधिक वर्ष से संबंधित है, उन वर्षों के लिए ऐसी आय की कुल रकम 5,00,000 रु. से अधिक है, प्रधान आयुक्त, मुख्य आयुक्त, प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक जैसा भी मामला हो, के पूर्व अनुमोदन बिना प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 273क(1) के तहत जुर्माना कम करने या माफ करने का आदेश जारी नहीं किया जा सकेगा।
आदेश की अन्तिम होना
धारा 273क के तहत जारी प्रत्येक आदेश अंतिम होगा और उस पर किसी भी अदालत या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जा सकेगा।
पूर्व में माफी का दावा किए जाने पर कोई राहत नहीं
धारा 273क(3)के अनुसार, जहां धारा 273क(1) के तहत किसी व्यक्ति के पक्ष में आदेश किया गया है, चाहे वह एक या अधिक वर्षों से संबंधित हो, वह किसी अन्य वर्ष के संबंध में ऐसा आदेश किये जाने के बाद किसी भी समय धारा 273क के तहत किसी भी राहत का हकदार नहीं होगा ।
इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति ने धारा 237क(1) के तहत राहत का दावा किया है तो वह इसके बाद, धारा 273क के तहत [अर्थात, 273क (1) तथा धारा 273क(4)] राहत का दावा नहीं कर सकता है।
धारा 273क(4) के तहत जुर्माने की माफी या कमी
धारा 273क(4) प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त को आयकर अधिनियम के तहत आरोप्य किसी भी जुर्माने को माफ करने या कम करने के साथ ही जुर्माने की वसूली के लिए किसी भी कार्यवाही का निपटान या स्थगन के लिए सशक्त करती है।
करदाता द्वारा किया जाने वाला प्रारंभ
छूट या कमी या स्थगन प्राप्त करने के लिए या जुर्माने की वसूली के लिए किसी भी कार्यवाही के निपटान के लिए, करदाता को प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त के पास आवेदन करना होगा।
राहत प्रदान करने के लिए शर्तें
निम्न शर्तें के संतुष्ट होने पर धारा 273क(4) के तहत राहत प्रदान की जाती है:
(1) जुर्माना आरोपित करने से करदाता के लिए वास्तविक परेशानी उत्पन्न होगी।
(2) करदाता ने निर्धारण संबंधी किसी भी जांच में या उसकी ओर से देय किसी भी राशि की वसूली की किसी भी कार्यवाही में सहयोग किया है।
मुख्य आयुक्त या महानिदेशक का पूर्व अनुमोदन
यदि जुर्माने की कोई भी राशि या, जहां ऐसा आवेदन एक से अधिक जुर्माने से संबंधित है और ऐसे जुर्माने की कुल राशि 1,00,000 रुपए से अधिक है तो प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक जैसा भी मामला हो, के पूर्व अनुमोदन बिना प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा धारा 273क(4) के तहत इसकी वसूली के लिए किसी उत्तरगामी राशि अथवा समझौता को कम करने या माफ करने का आदेश जारी किया जा सकेगा।
धारा 273क(4) के अंतर्गत आदेश को पारित करने के लिए समय-सीमा
प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त, जो भी मामला हो, माह, जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ हो, की समाप्ति से 12 महीनों की अवधि के अंदर आदेश पारित करेगा, जुर्माना कम करने अथवा छूट देने के लिए निर्धारिती के आवदेन को चाहे स्वीकार करे अथवा अस्वीकार करे। हालांकि, आदेश को 1 जून, 2016 के अनुसार लंबित आवेदन की स्थिति में 31 मई, 2017 को अथवा उससे पहले पारित किया जाएगा।
आगे, आवेदन को अस्वीकार करने वाला कोई आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जबतक निर्धारिती को सुनवाई का अवसर न दिया जाए।
आदेश की अन्तिम होना
धारा 273क के तहत जारी प्रत्येक आदेश अंतिम होगा और उस पर किसी भी अदालत या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जा सकेगा।
पूर्व में छूट का दावा किए जाने पर कोई राहत नहीं
धारा 273क(1) प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त को, धारा 270क (अर्थात आय की सूचना न देने अथवा गलत सूचना देने के लिए जुर्माना) धारा 271(1)(ग) (अर्थात आय के गलत विवरणों की प्रस्तुति अथवा आय के विवरणों को छुपाने के लिए जुर्माना) के तहत आरोपित किए गये या आरोप्य जुर्माने को माफ करने या कम करने की शक्ति प्रदान करती है।
धारा 273क(3)के अनुसार, जहां धारा 273क(1) के तहत किसी व्यक्ति के पक्ष में आदेश किया गया है, चाहे वह एक या अधिक वर्षों से संबंधित हो, वह किसी अन्य वर्ष के संबंध में ऐसा आदेश किये जाने के बाद किसी भी समय धारा 273क के तहत किसी भी राहत का हकदार नहीं होगा ।
इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति ने धारा 237क(1) के तहत राहत का दावा किया है तो वह इसके बाद, धारा 273क के तहत (अर्थात, 273क (1) तथा धारा 273क(4)) राहत का दावा नहीं कर सकता है।
धारा 273कक के तहत जुर्माने की छूट
धारा 273कक आयुक्त को आयकर अधिनियम के तहत ऐसे मामले में कोई भी जुर्माना लगाये जाने से उन्मुक्ति प्रदान करने की शक्ति प्रदान करती है जहां करदाता ने धारा 245ग के तहत निपटान के लिए एक आवेदन किया है और धारा 245जक के तहत निपटान की कार्यवाही समाप्त कर दी गयी है और जुर्माने की कार्यवाही आयकर अधिनियम के तहत शुरू की गयी है।
करदाता द्वारा की जाने वाली शुरुआत
राहत प्राप्त करने के लिए, करदाता को आयुक्त के पास आवेदन करना होगा
धारा 273कक के अंतर्गत आदेश को पारित करने के लिए समय-सीमा
प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त, जो भी मामला हो, माह, जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ हो, की समाप्ति से 12 महीनों की अवधि के अंदर आदेश पारित करेगा, जुर्माना कम करने अथवा छूट देने के लिए निर्धारिती के आवदेन को चाहे स्वीकार करे अथवा अस्वीकार करे। हालांकि, आदेश को 1 जून, 2016 के अनुसार लंबित आवेदन की स्थिति में 31 मई, 2017 को अथवा उससे पहले पारित किया जाएगा।
आगे, आवेदन को अस्वीकार करने वाला कोई आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जबतक निर्धारिती को सुनवाई का अवसर न दिया जाए।
धारा 273कक के तहत छूट के मामलों पर लागू अन्य प्रावधान
• समापन पर जुर्माना लगाने के बाद राहत के लिए आयुक्त को आवेदन नहीं किया जायेगा।
• आयुक्त, ऐसी शर्तें के अधीन जैसा कि वह आरोपित करना उचित समझे, आयकर अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने से किसी भी व्यक्ति को उन्मुक्ति प्रदान कर सकता है।
• राहत प्रदान करने से पहले, आयुक्त को यह समाधान होना चाहिए कि, करदाता ने, समापन के बाद, उसके समक्ष कार्यवाही में आयकर प्राधिकरियों के साथ सहयोग किया है और अपनी आय व ऐसी आय प्राप्त करने के तरीके का पूर्ण व सही प्रकटीकरण किया है।
• धारा 273कक के तहत प्रदत्त उनमुक्ति, वापस समझी जायेगी, यदि ऐसा व्यक्ति उन शर्तों का अनुपालन करने में विफल रहता है जिनके अधीन उन्मुक्ति प्रदान की गई थी और उन्मुक्ति वापसी के बाद, इस अधिनियम के प्रावधान इस प्रकार लागू होगें जैसे कि ऐसी उन्मुक्ति प्रदान ही नहीं की गयी थी।
• धारा 273कक के तहत दी गयी उन्मुक्ति, किसी भी समय, प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा वापस ली जा सकती है यदि उसे यह समाधान हो जाता है कि ऐसे व्यक्ति ने, कार्यवाही के दौरान, समापन के बाद, आयकर प्राधिकारी से निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण विवरण छिपाया है या गलत साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, और इसके उपरांत ऐसा व्यक्ति अधिनियम के तहत जुर्माना आरोपित करने के लिए उत्तरदायी हो जायेगा जिसके लिए वह उत्तरदायी रहा होता, ऐसी उन्मुक्ति प्रदान नहीं की गयी होती।
जुर्माने को कम अथवा छूट देने हेतु आयुक्त के अधिकार पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. प्रमुख आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त को वास्तविक मामलों में करदाताओं को जुर्माने से छूट देने का अधिकार दिया गया है। ऐसे अधिकार धारा 273क तथा धारा................के अंतर्गत दी गई है
(क) 274 (ख) 273कक
(ग) 273ख (घ) 273कख
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
अभिनीत जुर्माना प्रावधान को छोड़कर, आयकर अधिनियम को वास्तविक मामलों में करदाता को जुर्माने से राहत देने के लिए प्रमुख आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त को अधिकार देने वाले प्रावधान के लिए बनाया गया है। ऐसी अधिकार धारा 273क तथा धारा 273कक के अंतर्गत दिए गए ।
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 2. धारा 273क(1), धारा 271च अर्थात् आय की विवरणी दाखिल करने में असफता के लिए जुर्माना के अंतर्गत आरोपित अथवा अरोप योग्य जुर्माने को सीमित करने अथवा माफ करने के लिए प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त को शक्ति प्रदान करता है।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273क(1) धारा 270क (अर्थात आय की सूचना न देने तथा गलत सूचना के लिए जुर्माना) अथवा धारा 271(1)(ग) (अर्थात् आय का गलत विवरण प्रस्तुत करने अथवा आय के ब्यौरे को संवृत्त करने के लिए जुर्माना) के अंतर्गत आरोपित अथवा अरोप योग्य जुर्माने को सीमित करने अथवा माफ करने के लिए प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त को शक्ति प्रदान करता है। राहत इस संबंध में निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 3. धारा 273क(4) प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त को आयकर अधिनियम के अंतर्गत लगाए गए किसी जुर्माने को माफ अथवा सीमित करने साथ ही साथ जुर्माने की वसूली के लिए किसी प्रक्रिया को माफ अथवा रोकने की शक्ति प्रदान करती है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273क(4) प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त को आयकर अधिनियम के अंतर्गत लगाए गए किसी जुर्माने को माफ अथवा सीमित करने साथ ही साथ जुर्माने की वसूली के लिए किसी प्रक्रिया को माफ अथवा रोकने की शक्ति प्रदान करती है। यह राहत इस संबंध में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के अनुसार दी जाती है।
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 4. धारा 273कक प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त को उस स्थिति में जुर्माने को माफ करने की शक्ति प्रदान करती है जहां करदाता ने धारा 245ग के अंतर्गत निपटान के लिए आवेदन किया हो तथा तथा निपटान के लिए कार्यवाही पूर्ण की गई हो तथा आयकर अधिनियम के अंतर्गत जुर्माना कार्यवाही शुरू की गई हो।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273कक प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त को उस स्थिति में जुर्माने को माफ करने की शक्ति प्रदान करती है जहां करदाता ने धारा 245ग के अंतर्गत निपटान के लिए आवेदन किया हो तथा निपटान के लिए कार्यवाही धारा 245जक के अंतर्गत समाप्त की गई हो तथा आयकर अधिनियम के अंतर्गत जुर्माना कार्यवाही शुरू की गई हो।
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 5. धारा 273क(1) के अंतर्गत माफी अथवा सीमित करना अपने समावेदन पर प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा स्वीकृत की जाएगी लेकिन करदाता द्वारा आवेदन देने पर नही
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273क(1) के अंतर्गत माफी अथवा सीमित करना अपने समावेदन अथवा अन्यथा अर्थात् करदाता द्वारा किए जाने वाले आवेदन पर प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा स्वीकृत की जाएगी
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 6. यदि प्रासंगिक वर्ष के लिए जिस पर जुर्माना आरोपित अथवा आरोप योग्य है के संबंध में आय की राशि कुल रू...........से अधिक है तो धारा 273क(1) के अंतर्गत जुर्माने को माफ करना अथवा सीमित करना का कोई आदेश प्रधान मुख्य आयुक्त/मुख्य आयुक्त अथवा प्रधान महानिदेशक अथवा महानिदेशक, जो भी स्थिति हो, के पूर्व अनुमोदन को छोड़कर प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त के द्वारा किया जाएगा
(क)1,00,000 (ख) 5,00,000
(ग) 10,00,000 (घ) 20,00,000
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
यदि प्रासंगिक वर्ष के लिए जिस पर जुर्माना आरोपित अथवा आरोप योग्य है अथवा ऐसा प्रकटीकरण एक वर्ष से अधिक है के संबंध में उन वर्षों के लिए ऐसी आय की कुल राशि रू 5,00,000 से अधिक है तो धारा 273क(1) के अंतर्गत जुर्माना कम अथवा माफ करने संबंधी आदेश प्रधान मुख्य आयुक्त अथवा मुख्य आयुक्त अथवा प्रधान महानिदेशक अथवा महानिदेशक, जो भी स्थिति हो, के पूर्व अनुमोदन को छोड़कर प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त के द्वारा किया जाएगा
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 7. धारा 273क के अंतर्गत दिया गया प्रत्येक आदेश अंतिम होगा तथा किसी न्यायालय अथवा किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जाएगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273 क के अंतर्गत दिया गया प्रत्येक आदेश अंतिम होगा तथा किसी न्यायालय अथवा किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जाएगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 8. धारा 273क(3) के अनुसार जहां किसी व्यक्ति के पक्ष में धारा 273क(1) के अंतर्गत दिया गया आदेश, चाहे ऐसा आदेश एक अथवा अधिक वर्षों से संबंधित हो, ऐसे आदेश को देने के पश्चात् किसी समय में किसी वर्ष से संबंधित धारा 273क के अंतर्गत कियी राहत को पाने का हकदार नही होगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273क(3) के अनुसार जहां किसी व्यक्ति के पक्ष में धारा 273क(1) के अंतर्गत दिया गया आदेश, चाहे ऐसा आदेश एक अथवा अधिक वर्षों से संबंधित हो, ऐसे आदेश को देने के पश्चात् किसी समय में किसी वर्ष से संबंधित धारा 273क के अंतर्गत कियी राहत को पाने का हकदार नही होगा।
यद्यपि, यदि एक व्यक्ति किसी समय में धारा 237क(1) के अतर्गत राहत का दावा करता है तो वह इसके बाद धारा 273क के अंतर्गत राहत का दावा नहीं कर सकता (अर्थात् 273क(1) साथ ही साथ धारा 273क(4))
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 9. धारा 273क (4) के अंतर्गत राहत स्वीकृत की जाती है यदि जुर्माने का उदग्रहण करदाता की वास्तविक मेहनत के कारण होती है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273क(4) के अंतर्गत राहत स्वीकृत की जाती है यदि निम्नलिखित शर्ते पूरी की जाती है तो :
(1) जुर्माने का उदग्रहण करदाता पर वास्तविक मेहनत के कारण उत्पन्न होती है
(2) करदाता ने उसके द्वारा देय किसी राशि की वसूली के लिए किसी कार्यवाही अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी पूछताछ में सहयोग किया हो
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 10. धारा 273कक के अंतर्गत दी गई छूट किसी भी समय प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा निरस्त की जा सकती है यदि वह संतुष्ट हो कि ऐसा व्यक्ति ने समाप्ति के पश्चात् किसी कार्यवाही के दौरान आयकर प्राधिकरण द्वारा मूल्यांकन हेतु किसी विशेष सामग्री को छिपाया था अथवा गलत प्रमाण दिया था
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 273कक के अंतर्गत दी गई छूट किसी भी समय प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा निरस्त की जा सकती है यदि वह संतुष्ट हो कि ऐसा व्यक्ति ने समाप्ति के पश्चात् किसी कार्यवाही के दौरान आयकर प्राधिकरण द्वारा मूल्यांकन हेतु किसी विशेष सामग्री को छिपाया था अथवा गलत प्रमाण दिया था तथा इसके बाद ऐसा व्यक्ति अधिनियम जिसके मुताबिक ऐसे व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराया गया होता के अंतर्गत किसी जुर्माने के आरोपण के लिए उत्तरदायी होगा, को ऐसी छूट प्रदान नही की गई थी
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

