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पहली अनुसूची
(धारा 2 देखिए)
भाग 1
आय-कर
पैरा क
(I) इस पैरा की मद (II) और मद (III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो ऐसी दशा नहीं है, जिसमें इस भाग का कोई अन्य पैरा लागू होता है,—
आय-कर की दरें
| (1) | जहां कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) | जहां कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक है किंतु 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 5 प्रतिशत, जिससे कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) | जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | 12,500 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (4) | जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,12,500 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
(II) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है,—
आय-कर की दरें
| (1) | जहां कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) | जहां कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 5 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) | जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | 10,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (4) | जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,10,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
(III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है—
आय-कर की दरें
| (1) | जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) | जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है; | |
| (3) | जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,00,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में,—
| (क) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश के रूप में आय या आय सम्मिलित है) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से ; | |
| (ख) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश के रूप में आय या आय सम्मिलित है) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ; | |
| (ग) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश के रूप में आय या आय सम्मिलित नहीं है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ; | |
| (घ) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश के रूप में आय या आय सम्मिलित नहीं है) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से ; और | |
| (ङ) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश के रूप में आय या आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु वह खंड (ग) और खंड (घ) के अंतर्गत नहीं आती है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से, |
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उस दशा में, जहां कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश के रूप में आय या आय सम्मिलित है, वहां आय के उस भाग के संबंध में संगणित आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परंतु यह और कि व्यक्तियों के संगम की दशा में, जो केवल कंपनियों से उसके सदस्यों के रूप में मिलकर बना है, आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी:
परंतु यह भी कि ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में, —
| (क) | जिनकी कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, पचास लाख रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पचास लाख रुपए से अधिक है, आधिक्य में है; | |
| (ख) | जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है; | |
| (ग) | जिनकी कुल आय दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दो करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दो करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है; और | |
| (घ) | जिनकी कुल आय पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, पांच करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पांच करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है। |
पैरा ख
प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, —
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 10,000 रुपए से अधिक नहीं है: | कुल आय का 10 प्रतिशत; | |
| (2) जहां कुल आय 10,000 रुपए से अधिक है किंतु 20,000 रुपए से अधिक नहीं है: | 1,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत जिससे कुल आय 10,000 रुपए से अधिक हो जाती है; | |
| (3) जहां कुल आय 20,000 रुपए से अधिक है: | 3,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत जिससे कुल आय 20,000 रुपए से अधिक हो जाती है। |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, —
| (क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रतिशत की दर से; | ||
| (ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से। |
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परंतु यह और कि प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है।
पैरा ग
प्रत्येक फर्म की दशा में, —
आय-कर की दर
| संपूर्ण कुल आय पर | 30 प्रतिशत । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु ऊपर उल्लिखित प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है।
पैरा घ
प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, —
आय-कर की दर
| संपूर्ण कुल आय पर | 30 प्रतिशत । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु ऊपर उल्लिखित प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है।
पैरा ङ
किसी कंपनी की दशा में, —
आय-कर की दरें
I. देशी कंपनी की दशा में,-
| (i) जहां पूर्ववर्ष 2021-2022 में इसका कुल आवर्त या कुल प्राप्तियां चार अरब रुपए से अधिक न हो - | कुल आय का 25 प्रतिशत ; | |
| (ii) मद (i) में निर्दिष्ट के सिवाय - | कुल आय का 30 प्रतिशत । |
II. देशी कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में, -
| (i) कुल आय के उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में है, - | 50 प्रतिशत ; | |
| (क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व; या | ||
| (ख) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त फीस, |
और जहां, ऐसा करार दोनों में से प्रत्येक दशा में, केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है
| (ii) कुल आय के अतिशेष पर, यदि कोई हो - | 40 प्रतिशत । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में निम्नलिखित दर से, -
| (i) | प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में, - |
| (क) | जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रतिशत की दर से ; और | |
| (ख) | जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से ; |
| (ii) | देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में, - |
| (क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दो प्रतिशत की दर से ; और | ||
| (ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से, |
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परन्तु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस रकम से, उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
भाग 2
कतिपय दशाओं में स्रोत पर कर की कटौती की दरें
ऐसी प्रत्येक दशा में, जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 193, धारा 194क, धारा 194ख, 194खक, धारा 194खख, धारा 194घ, धारा 194ठखक, धारा 194ठखख, धारा 194ठखग और धारा 195 के उपबंधों के अधीन कर की कटौती प्रवृत्त दरों से की जानी है, आय में से कटौती निम्नलिखित दरों पर कटौती के अधीन रहते हुए की जाएगी :-
| आय-कर की दर | ||
| 1. कंपनी से भिन्न व्यक्ति की दशा में,- | ||
| (क) जहां व्यक्ति भारत में निवासी है,— | ||
| (i) "प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर | 10 प्रतिशत | |
| (ii) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत (आनलाइन खेल से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत | |
| (iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत | |
| (iv) आनलाइन खेलों से जीत के रूप में आय | 30 प्रतिशत | |
| (v) बीमा कमीशन के रूप में आय पर | 5 प्रतिशत | |
| (vi) निम्नलिखित पर संदेय ब्याज के रूप में आय पर, | 10 प्रतिशत | |
| (अ) किसी केंद्रीय राज्य या प्रतिय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी स्थानीय प्राधिकरण या नियम द्वरा या उसकी ओर से धन के लिए पुरोधृत किए गए कोई डिबेंचर या प्रतिभूतियां | ||
| (आ) किसी कंपनी द्वारा पुरोधृत किए गए कोई डिबेंचर, जहां ऐसे डिबेंचर, भारत में मान्यताप्राप्त किसी स्टाक एक्सचेंज में प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसार सूचीबद्ध हैं ; | ||
| (इ) केन्द्रीय या राज्य सरकार की कोई प्रतिभूति ; | ||
| (vii) किसी अन्य आय पर | 10 प्रतिशत | |
| (ख) जहां व्यक्ति भारत में निवासी नहीं है, — | ||
| (i) किसी अनिवासी भारतीय की दशा में, — | ||
| (अ) विनिधान से किसी आय पर | 20 प्रतिशत | |
| (आ) धारा 115ङ में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय जो,— | ||
| (i) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 10 प्रतिशत | |
| (ii) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है। | 12.5 प्रतिशत | |
| (खक) धारा 112 की उपधारा (1) का खंड (ग) का उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय जो, - | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है; | 10 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (इ) धारा 112क में निर्दिष्ट एक लाख पच्चीस हजार से अनधिक दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय जो, — | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 10 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (ई) दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों [जो धारा 10 के खंड (33) और खंड (36) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं हैं] के रूप में किसी अंतरण पर आय जो,— | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 20 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (उ) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय जो,— | 15 प्रतिशत ; | |
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 15 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 20 प्रतिशत ; | |
| (ऊ) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है) | 20 प्रतिशत ; | |
| (ऋ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परन्तुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है। | 20 प्रतिशत ; | |
| (ए) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [जो उपमद (ख)(i)(ऋ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है], आय पर | 20 प्रतिशत ; | |
| (ऐ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर | 20 प्रतिश | |
| (ओ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत ; | |
| (औ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत ; | |
| (अं) आनलाइन खेलों से जीत से आय पर | 30 प्रतिशत ; | |
| (अ:) धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (अ) के परंतुक में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय पर | 10 प्रतिशत ; | |
| (र) उपमद (ख)(i)(अ:) में निर्दिष्ट आय से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर | 20 प्रतिशत ; | |
| (ल) अन्य सम्पूर्ण आय पर | 30 प्रतिशत ; | |
| (ii) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में,— | ||
| (अ) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है) | 20 प्रतिशत ; | |
| (आ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परन्तुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है. | 20 प्रतिशत ; | |
| (इ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां यह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [जो उपमद (ख) (ii) (आ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है], आय पर | 20 प्रतिशत ; | |
| (ई) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, वहां उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा प्रत्येक तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर | 20 प्रतिशत ; | |
| (उ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत ; | |
| (ऊ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत ; | |
| (ऋ) आनलाइन खेल से जीत के रूप में आय | 30 प्रतिशत ; | |
| (ए) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय जो, — | 15 प्रतिशत ; | |
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 15 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 20 प्रतिशत ; | |
| (ऐ) धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय जो,— | - | |
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है; | 10 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (ओ) धारा 112क में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में एक लाख रुपए से अधिक किसी अंतरण पर आय, जो | 10 प्रतिशत ; | |
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 10 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (औ) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय [जो धारा 10 के खंड (33) और खंड (36) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है] जो | 20 प्रतिशत; | |
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है | 20 प्रतिशत | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है | 12.5 प्रतिशत | |
| (अं) धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (अ) के परंतुक में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय पर | 10 प्रतिशत | |
| (अः) उपमद (ख)(ii)(अं) में निर्दिष्ट आय से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर | 20 प्रतिशत | |
| (र) अन्य सम्पूर्ण आय पर | 30 प्रतिशत | |
| 2. किसी कंपनी की दशा में, — | ||
| (क) जहां कंपनी देशी कंपनी है, | ||
| (i) "प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर | 10 प्रतिशत | |
| (ii) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत | |
| (iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत | |
| (iv) आनलाइन खेल से जीत के रूप में आय | 30 प्रतिशत | |
| (v) किसी अन्य आय पर | 10 प्रतिशत | |
| (ख) जहां कंपनी देशी कंपनी नहीं है,— | ||
| (i) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत | |
| (ii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर | 30 प्रतिशत | |
| (iii) आनलाइन खेलों से जीत के रूप में आय | 30 प्रतिशत | |
| (iv) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा किसी विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है) | 20 प्रतिशत | |
| (v) उसके द्वारा 31 मार्च, 1976 के पश्चात् सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परन्तुक में निर्दिष्ट विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कंप्यूटर साफ्टवेयर के. संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है | 20 प्रतिशत | |
| (vi) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है वहां वह करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसरण में है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर [जो मद (ख) (v) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है]- | ||
| (अ) जहां करार 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है | 50 प्रतिशत ; | |
| (आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है | 20 प्रतिशत ; | |
| (vii) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए, संदेय फीस के रूप में आय पर - | ||
| (अ) जहां करार 29 फरवरी, 1964 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है | 50 प्रतिशत ; | |
| (आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है | 20 प्रतिशत ; | |
| (viii) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय जो — | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है | 15 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है | 20 प्रतिशत ; | |
| (ix) धारा 112(1)(ग)(iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय जो — | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है | 10 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है | 12.5 प्रतिशत | |
| (x) धारा 112क में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में एक लाख रुपए से अधिक किसी अंतरण पर आय जो- | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 10 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (xi) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी अंतरण पर आय [जो धारा 10 के खंड (33) और खंड (36) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है] जो- | ||
| (I) 23 जुलाई, 2024 से पूर्व किया गया है ; | 20 प्रतिशत ; | |
| (II) 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् किया गया है ; | 12.5 प्रतिशत; | |
| (xii) धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (अ) के परंतुक में निर्दिष्ट, लाभांश के रूप में आय पर | 10 प्रतिशत | |
| (xiii) मद (ख) (xii) में निर्दिष्ट आय से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर | 20 प्रतिशत : | |
| (xiv) किसी अन्य आय पर | 35 प्रतिशत | |
स्पष्टीकरण- इस भाग की मद 1 (ख) (i) के प्रयोजनों के लिए, "विनिधान से आय" और " अनिवासी भारतीय" के वही अर्थ हैं, जो आयकर अधिनियम के अध्याय 12क में उनके हैं ।
आय-कर पर अधिभार
निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कटौती की गई आय-कर की रकम में,—
| (i) | इस भाग की मद 1 के उपबंधों के अनुसार— |
| (क) | प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम, उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्ति-निकाय की दशा के सिवाय, या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो अनिवासी है,— |
| I. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ; | |
| II. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ; | |
| III. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश..के रूप में आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ; | |
| IV. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से ; और | |
| V. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु वह उपखंड III और उपखंड IV के अंतर्गत नहीं आती है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से : |
| परन्तु उस दशा में, जिसमें कुल आय में लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में कटौती किए गए आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी : | ||
| परंतु यह और कि जहां ऐसे व्यक्ति की आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, अधिभार की दर पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ; | ||
| (ख) | प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, जो अनिवासी है, की दशा में, — |
| I. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, वहां ऐसे कर के सात प्रतिशत की दर से ; | |
| II. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, दस करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से ; |
| (ग) | किसी व्यक्तियों के संगम, जो अनिवासी है, और उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बना है, की दशा में, — |
| I. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, वहां ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ; | |
| II. | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ; |
| (घ) | प्रत्येक फर्म, जो अनिवासी है, की दशा में जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ; |
| संगणित अधिभार | ||
| (ii) | इस भाग की मद 2 के उपबंधों के अनुसार, संघ के प्रयोजनों के लिए, किसी देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में, — |
| (क) | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से ; | |
| (ख) | जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से, |
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ।
भाग 3
कतिपय दशाओं में आय-कर के प्रभारण, "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय से आय-कर की कटौती और "अग्रिम कर" की संगणना के लिए दरें
उन दशाओं में, जिनमें आय-कर, प्रवृत्त दर या दरों से, आय-कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है अथवा "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय में से उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन काटा जाना है या उस पर संदाय किया जाना है या उक्त अधिनियम की धारा 194त के अधीन काटा जाना है अथवा जिसमें उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना की जानी है, यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" [आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चख या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के अधीन, उस अध्याय या धारा में विनिर्दिष्ट दरों पर कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में "अग्रिम कर" नहीं है या धारा 115क या धारा 115कख या धारा 115कग या धारा 115कगक या धारा 115कघ या धारा 115ख या धारा 115खक या धारा 115खकक या धारा 115खकख या धारा 115खकग या धारा 115खकघ या धारा 115खकङ या धारा 115खख या धारा 115खखक या धारा 115खखग या धारा 115खखङ या धारा 115खखच या धारा 115खखछ या धारा 115खखज या धारा 115खखझ या धारा 115खखञ या धारा 115ङ या धारा 115ञख या धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में ऐसे "अग्रिम कर" पर अधिभार नहीं है] निम्नलिखित दर या दरों से, प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगा :—
पैरा क
(I) इस पैरा की मद (II) और मद (III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो ऐसी दशा नहीं है, जिसे इस भाग का कोई अन्य पैरा लागू होता है, —
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) जहां कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक है किंतु 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 5 प्रतिशत, जिससे कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | 12,500 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (4) जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,12,500 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
(II) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है—
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) जहां कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 5 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | 10,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (4) जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,10,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
(III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है—
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,00,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, —
| (क) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से ; | |
| (ख) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ; | |
| (ग) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ; | |
| (घ) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से ; | |
| (ङ) | जिसकी कुल आय (जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु वह खंड (ग) और खंड (घ) के अंतर्गत नहीं आती है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से, |
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उस दशा में, जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन, कोई आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में संगणित आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परंतु यह और कि व्यक्तियों के संगम की दशा में, जो केवल कंपनियों से उसके सदस्यों के रूप में मिलकर बनी है, आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह भी कि ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय,—
| (क) | पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, पचास लाख रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पचास लाख रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ; | |
| (ख) | एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ; | |
| (ग) | दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दो करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दो करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ; और | |
| (घ) | जिसकी कुल आय पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, पांच करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पांच करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है । |
पैरा ख
प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, —
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 10,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुल आय का 10 प्रतिशत ; | |
| (2) जहां कुल आय 10,000 रुपए से अधिक है किंतु 20,000 रुपए से अधिक नहीं है | 1,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 20,000 रुपए से अधिक है | 3,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 20,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, —
| (क) | जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रतिशत की दर से ; | |
| (ख) | जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से, |
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु प्रत्येक ऐसी सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परन्तु यह और कि प्रत्येक ऐसी सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ग
प्रत्येक फर्म की दशा में, —
आय-कर की दर
| संपूर्ण कुल आय पर | 30 प्रतिशत । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम को, ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु ऊपर उल्लिखित फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है।
पैरा घ
प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, —
आय-कर की दर
| संपूर्ण कुल आय पर | 30 प्रतिशत |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु ऊपर उल्लिखित स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है।
पैरा ङ
कंपनी की दशा में, —
आय-कर की दरें
1. देशी कंपनी की दशा में, —
| (i) जहां पूर्ववर्ष 2022-2023 में उसका कुल आवर्त या सकल प्राप्तियां चार सौ करोड़ रुपए से अधिक नहीं है | कुल आय का 25 प्रतिशत ; | |
| (ii) मद (i) में निर्दिष्ट से भिन्न | कुल आय का 30 प्रतिशत ; | |
| II. देशी कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में,— | ||
| (i) कुल आय के उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में है,— | ||
| (क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व ; या. | ||
| (ख) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात्, किंतु 1
अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार
के अनुसरण में तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार या भारतीय समुत्थान
से प्राप्त फीस, और जहां, ऐसा करार दोनों में से प्रत्येक दशा में, केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है | 50 प्रतिशत ; | |
| (ii) कुल आय के अतिशेष पर, यदि कोई हो | 35 प्रतिशत |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में निम्नलिखित दर से, —
| (i) | प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में, — |
| (क) | जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रतिशत की दर से ; और | |
| (ख) | जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से ; |
| (ii) | देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में, — |
| (क) | जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से ; और | |
| (ख) | जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से, |
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परन्तु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है।
भाग 4
[धारा 2(13)(ग) देखिए]
शुद्ध कृषि-आय की संगणना के नियम
नियम 1—आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1क) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि-आय इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय हो और उस अधिनियम की धारा 57 से धारा 59 के उपबंध, जहां तक हो सके, तद्नुसार लागू होंगे :
परन्तु धारा 58 की उपधारा (2) इस उपांतरण के साथ लागू होगी कि उसमें धारा 40क के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत धारा 40क की उपधारा (3), उपधारा (3क) और उपधारा (3क) और उपधारा (4) के प्रति निर्देश नहीं हैं ।
नियम 2–आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1क) के उपखंड (ख) या उपखंड (ग) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि आय [जो ऐसी आय से भिन्न है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्न होती है, जिसकी उक्त उपखंड (ग) में निर्दिष्ट भाटक या आमदनी के पाने वाले को या खेतिहर को या वस्तु रूप में भाटक के पाने वाले को निवास गृह के रूप में आवश्यकता हो] इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन " कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ " शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय हो और आय कर अधिनियम की धारा 30, धारा 31, धारा 32, धारा 36, धारा 37, धारा 38, धारा 40, धारा 40क [उसकी उपधारा (3), उपधारा (3क) और उपधारा (4) से भिन्न] धारा 41, धारा 43 धारा 43क, धारा 43ख और धारा 43ग के उपबंध, जहां तक हो सके, तद्नुसार लागू होंगे
नियम 3 – आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1क) के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि - आय, जो ऐसी आय है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्न होती है, जिसकी उक्त उपखंड (ग) में निर्दिष्ट भाटक या आमदनी के पाने वाले को या खेतिहर को या वस्तु रूप में भाटक के पाने वाले को निवास गृह के रूप में आवश्यकता हो, इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन "गृह-संपत्ति से आय" शीर्ष के अधीन आय कर से प्रभार्य आय हो और उस अधिनियम की धारा 23 से धारा 27 के उपबंध, जहां तक हो सके, तद्नुसार लागू होंगे ।
नियम 4 इन नियमों के किन्हीं अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, उस दशा में-
| (क) | जहां निर्धारिती को भारत में उसके द्वारा उपजाई गई और विनिर्मित चाय के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय, आय-कर नियम, 1962 के नियम 8 के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के साठ प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि आय समझा जाएगा : | |
| (ख) | जहां निर्धारिती को, भारत में उसके द्वारा उगाए गए रबड़ के पौधों से उसके द्वारा विनिर्मित या प्रसंस्कृत तकनीकी रूप से विनिर्दिष्ट ब्लाक रबड़ के सेंट्रीफ्यूज लेटेक्स या सिनेक्स या क्रेप्स पर आधारित लेटेक्स (जैसे पेल लेटेक्स क्रेप) या ब्राउन क्रेप (जैसे एस्टेट ब्राउन क्रेप, रिमिल्ड क्रेप, स्माक्ड ब्लेन्केट क्रेप या फ्लेट बार्क क्रेप) के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय, आय-कर नियम, 1962 के नियम 7क के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के पैंसठ प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि आय समझा जाएगा ; | |
| (ग) | जहां निर्धारिती को भारत में उसके द्वारा उपजाई गई और विनिर्मित कॉफी के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय, आय-कर नियम, 1962 के नियम 7ख के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के, यथास्थिति, साठ प्रतिशत या पचहत्तर प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि आय समझा जाएगा । |
नियम 5–जहां निर्धारिती किसी ऐसे व्यक्ति संगम या व्यष्टि-निकाय (हिन्दू अविभक्त कुटुंब, कंपनी या फर्म से भिन्न) का सदस्य है, जिसकी पूर्ववर्ष में आयकर अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य या तो कोई आय नहीं है या जिसकी कुल आय किसी व्यक्ति संगम या व्यष्टि-निकाय (हिंदू अविभक्त कुटुंब, कंपनी या फर्म से भिन्न) की दशा में कर से प्रभार्य न होने वाली अधिकतम रकम से अधिक नहीं है किंतु जिसकी कोई कृषि आय भी है वहां उस संगम या निकाय की कृषि आय या हानि, इन नियमों के अनुसार संगणित की जाएगी और इस प्रकार संगणित कृषि आय या हानि में निर्धारिती के अंश को निर्धारिती की कृषि आय या हानि समझा जाएगा ।
नियम 6–जहां कृषि आय के किसी स्रोत के संबंध में पूर्ववर्ष के लिए संगणना का परिणाम हानि है, वहां ऐसी हानि, कृषि आय के किसी अन्य स्रोत से उस पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की आय के प्रति, यदि कोई हो, मुजरा की जाएगी :
परन्तु जहां निर्धारिती किसी व्यक्ति संगम या व्यष्टि - निकाय का सदस्य है और यथास्थिति, संगम या निकाय की कृषि आय में निर्धारिती का अंश हानि है, वहां ऐसी हानि, कृषि आय के किसी अन्य स्रोत से निर्धारिती की किसी आय के प्रति मुजरा नहीं की जाएगी ।
नियम 7–राज्य सरकार द्वारा कृषि आय पर उद्गृहीत किसी कर मद्धे निर्धारिती द्वारा संदेय राशि की, कृषि आय की संगणना करने में कटौती की जाएगी ।
नियम 8 – (1) जहां निर्धारिती की, 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में कोई कृषि आय है और 1 अप्रैल, 2016 या 1 अप्रैल, 2017 या 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, -
| (i) | 1 अप्रैल, 2016 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2017 या 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है; | |
| (ii) | 1 अप्रैल, 2017 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है; | |
| (iii) | 1 अप्रैल, 2018 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है; | |
| (iv) | 1 अप्रैल, 2019 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है; | |
| (v) | 1 अप्रैल, 2020 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है; | |
| (vi) | 1 अप्रैल, 2021 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है; प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (vii) | 1 अप्रैल, 2022 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (viii) | 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, |
1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि-आय के प्रति मुजरा की जाएगी ।
(2) जहां निर्धारिती की, 1 अप्रैल, 2025 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में या, यदि आय-कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर, आय-कर उस पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है तो, ऐसी अन्य अवधि में, कोई कृषि-आय है और 1 अप्रैल, 2017 या 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि-आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (10) के प्रयोजनों के लिए,—
| (i) | 1 अप्रैल, 2017 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (ii) | 1 अप्रैल, 2018 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (iii) | 1 अप्रैल, 2019 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (iv) | 1 अप्रैल, 2020 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (v) | 1 अप्रैल, 2021 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (vi) | 1 अप्रैल, 2022 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (vii) | 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ; | |
| (viii) | 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, |
1 अप्रैल, 2025 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि-आय के प्रति मुजरा की जाएगी ।
(3) जहां किसी स्रोत से कृषि-आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति का, कोई अन्य व्यक्ति, विरासत से भिन्न रीति से, उसी हैसियत में उत्तराधिकारी हो गया है, वहां उपनियम (1) या उपनियम (2) की कोई बात, हानि उठाने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को, यथास्थिति, उपनियम (1) या उपनियम (2) के अधीन मुजरा कराने का हकदार नहीं बनाएगी ।
(4) इस नियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी हानि, जिसे निर्धारण अधिकारी द्वारा इन नियमों के या वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2017 (2017 का 7) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2018 (2018 का 13) की पहली अनुसूची या वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2019 (2019 का 23) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2020 (2020 का 12) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2021 (2021 का 13) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2022 (2022 का 6) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2023 (2023 का 8) की पहली अनुसूची में अंतर्विष्ट नियमों के उपबंधों के अधीन अवधारित नहीं किया गया है, यथास्थिति, उपनियम (1) या उपनियम (2) के अधीन मुजरा नहीं की जाएगी ।
नियम 9—जहां इन नियमों के अनुसार की गई संगणना का अंतिम परिणाम हानि है, वहां इस प्रकार संगणित हानि पर ध्यान नहीं दिया जाएगा और शुद्ध कृषि-आय को शून्य समझा जाएगा ।
नियम 10—आय-कर अधिनियम के निर्धारण की प्रक्रिया से संबंधित उपबंध (जिनके अंतर्गत आय के पूर्णांकन से संबंधित धारा 288क के उपबंध भी हैं) आवश्यक उपारोपणों सहित, निर्धारिती की शुद्ध कृषि-आय की संगणना के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे वे कुल आय के निर्धारण के संबंध में लागू होते हैं ।
नियम 11—निर्धारिती की शुद्ध कृषि-आय की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, निर्धारण अधिकारी को वही शक्तियां होंगी, जो उसे कुल आय के निर्धारण के प्रयोजनों के लिए आय-कर अधिनियम के अधीन हैं ।

