आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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रिलीज़ दिनांक

01/03/2016

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प्रेस विज्ञप्ति

 

मान्यताप्राप्त भविष्य निधि एवं एनपीएस के लिए कर उपचार में किए गए परिवर्तनों के बारे में स्पष्टीकरण

उक्त निर्दिष्ट विषय पर बजट में किए गए परिवर्तनों के बारे में समझने में कमी देखी गर्इ है। इस मामले में निम्नलिखित स्पष्टीकरण दिये गये हैं :-

  (i) कर व्यवस्था में परिवर्तन करने के इस सुधार का उद्देश्य भविष्य निधि खाते से पूर्ण राशि को निकालने के स्थान पर सेवानिवृत्ति के पश्चात् पेंशन सुरक्षा के लिए जाने हेतु निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को अधिक संख्या में प्रोत्साहित करना है।

 (ii) इस उद्देश्य की ओर, सरकार ने घोषणा की है कि सेवानिवृत्ति के समय निकाले गए कुल कोष के चालीस प्रतिशत मान्यताप्राप्त भविष्य निधि तथा एनपीएस के अंतर्गत कर से मुक्त होगी।

(iii) यह अपेक्षा की जाती है कि निजी कंपनियों के कर्मचारी वार्षिकी में कोष के शेष 60 प्रतिशत को रखेंगे जिसमें से वह नियमित पेंशन को प्राप्त कर सकते हैं। जब शेष कोष का 60 प्रतिशत वार्षिकी में निवेश किया जाता है तो कोर्इ कर नहीं वसूला जाएगा। इसका अर्थ हुआ कि पूर्ण कोष कर से मुक्त होगा यदि इसे वार्षिकी में निवेशित किया जाता है।

(iv) इस बजट में सरकार ने अन्य परिवर्तन भी किए हैं जो कहते हैं कि जब व्यक्ति वार्षिकी में निवेश करने वाला व्यक्ति मर जाता है तथा जब मूल कोष उसके वारिस के हाथों में जाता है तो पुन: कोर्इ कर नहीं लगेगा।

 (v) इस तंत्र के पीछे मकसद सेवानिवृत्ति के पश्चात् पूरे कोष को निकालने तथा प्रयोग करने की बजाय पेंशन उत्पादों में निवेश करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है।

(vi) लोगों, जिनके लिए र्इपीएफ योजना को बनाया गया था, की मुख्य श्रेणी र्इपीएफओ के वह सदस्य हैं जो रू. 15,000 प्रति माह की सांविधिक पारिश्रमिक सीमा के अंतर्गत हैं। जिनमें से आज के अनुसार लगभग 3.7 करोड़ र्इपीएफओ के अंशधारक सदस्य में से, लगभग 3 करोड़ अंशधारक इस श्रेणी में हैं। इन श्रेणी के लोगों के लिए नर्इ व्यवस्था में कोर्इ परिवर्तन नहीं होने जा रहा।

(vii) हालांकि, र्इपीएफओं में लगभग 60 लाख अंशधारक सदस्य हैं जिन्होंने र्इपीएफ को स्वेच्छा से स्वीकृत किया है तथा जो निजी क्षेत्र की कंपनियों के अति-उच्च आय पाने वाले कर्मचारी हैं। लोगों की इस श्रेणी के लिए, वर्तमान में राशि को किसी कर देयता के बिना निरस्त किया जा सकता है। हम इसे परिवर्तित कर रहे हैं। हम क्या कर रहे हैं कि ऐसा कर्मचारी कर देयता के बिना निरस्त कर सकता है बशर्ते वह वार्षिकी उत्पाद में 60 प्रतिशत का अंशदान करे जिससे पेंशन सुरक्षा को उसके अर्जन स्तर के अनुसार उसके लिए बनाया जा सके। हालांकि, यदि वह वार्षिकी उत्पाद में किसी राशि का न डालने का विकल्प का चुनाव करता है तो कर 40 प्रतिशत पर नहीं वसूला जाएगा।

(viii) सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) के मौजूदा कर उपचार में कोर्इ परिवर्तन नहीं है।

 (ix) वर्तमान में, र्इपीएफ के अंतर्गत कर्मचारी अंशदान पर कोर्इ मौद्रिक सीमा नहीं है केवल इस सीमा के तौर पर कि यह कर्मचारी सदस्य के वेतन का 12 प्रतिशत होगी। इसी प्रकार, एनपीएस के अंतर्गत कर्मचारी अंशदान पर कोर्इ मौद्रिक सीमा नहीं हैं, केवल वेतन के 10 प्रतिशत को छोड़कर

 (x) अब वित्त विधेयक 2016 मुहैया कराता हैं कि कर्मचारी अंशदान के 12 प्रतिशत की दर की सीमा के साथ विचार किए गए कर्मचारी अंशदान पर रू. 1.5 लाख की मौद्रिक सीमा होगी।

(xi) हमने विभिन्न विभागों से आज सुझाव प्राप्त किए हैं कि यदि कोष के 60 प्रतिशत की राशि को वार्षिकी उत्पादों में निवेशित नहीं किया जाता है तो कर केवल कोष पर संचित विवरणी पर ही लगाया जाएगा तथा नाकि अंशदान आय पर। हमने र्इपीएफ के अंतर्गत कर्मचारी अंशदान पर किसी मौद्रिक सीमा न होने वाले प्रतिनिधित्वों को प्राप्त किया हैं क्योंकि ऐसी सीमा एनपीएस में नहीं है। वित्त मंत्री इन समस्त सुझावों पर विचार करेंगे तथा यथासमय इन समस्त सुझावों का अवलोकन करेगें।