परिपत्र सं. 7/2022 : स्थाई खाता संख्या (पैन) को निष्क्रिय करने को तरीके को निर्धारित करते हुए आयकर नियम, 1962 के नियम 114ककक के प्रावधानों की छूट के संबंध में स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 7/2022
परिपत्र की तिथि
30/03/2022
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
30/03/2022
2022 की परिपत्र सं. 7
एफ.नं. 370142/14/2022-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
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नई दिल्ली, दिनांक 30 मार्च, 2022
विषय : स्थाई खाता संख्या (पैन) को निष्क्रिय करने को तरीके को निर्धारित करते हुए आयकर नियम, 1962 के नियम 114ककक के प्रावधानों की छूट के संबंध में स्पष्टीकरण - संबंधी
आयकर विभाग के सामने ऐसे कई मामले आए हैं कि एक व्यक्ति को कई परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) आवंटित किए गए हैं या एक पैन एक से अधिक व्यक्तियों को आवंटित किया गया है। पैन डेटा बेस के डी-डुप्लीकेशन की मजबूत प्रक्रिया के लिए, प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2017 से वित्त अधिनियम, 2017 की मदद से आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) में धारा 139कक को शामिल किया गया है ताकि वह करदाता, जो आधार प्राप्त करने के योग्य है, के लिए पैन के लिए आवेदन करते समय और आय की विवरणी के समय आधार को उद्धृत करना अनिवार्य किया जा सके।
2. अधिनियम की धारा 139कक की उप-धारा (2) उस प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपना आधार नंबर सूचित करना अनिवार्य कर दिया गया है जिसको 1 जुलाई, 2017 तक पैन आवंटित किया गया है ताकि आधार और पैन को लिंक किया जा सके। यह अधिसूचित तिथि को या उससे पहले पूरा करना आवश्यक है जिसके बाद पैन निष्क्रिय हो जाएगा।
3. तद्नुसार, अंतिम बार बढ़ाई गई तिथि यानी 31.03.2022 तक आधार नंबर की सूचना न देने पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार व्यक्ति को आवंटित किया गया पैन निष्क्रिय हो जाएगा। आगे, वित्त अधिनियम, 2021 के माध्यम से नकली पैन की पहचान के लिए पैन-आधार लिंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिनियम में नईधारा 234ज को शामिल किया गया है। यह धारा बताती है कि जहां एक व्यक्ति, जिसे धारा 139कक की उप-धारा (2) के अंतर्गत अपना आधार बताने की आवश्यकता है, अंतिम तिथि तक ऐसा करने में असफल रहता है तो उसे उक्त तिथि के बादधारा 139कक की उप-धारा (2) के अंतर्गत सूचना देते समय अधिक से अधिक एक हजार रूपए, जिसे निर्धारित किया जा सकता है, का शुल्क देना होगा।
4. आगे, आयकर नियमों के नियम 114ककक बताता है कि यदि एक व्यक्ति का पैन निष्क्रिय हो जाता है तो वह अपना पैन प्रस्तुत, सूचित या उद्धृत नहीं कर सकेगा और उसे ऐसी विफलता के लिए अधिनियम के अंतर्गत सभी परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इसमें कई आशय शामिल हैं जैसे :-
(i) व्यक्ति निष्क्रिय पैन का प्रयोग करते हुए विवरणी प्रस्तुत नहीं कर सकेगा
(ii) लंबित विवरणियां प्रसंस्कृत नहीं हो सकेंगी
(iii) लंबित प्रतिदाय निष्क्रिय पैन के लिए जारी नहीं की जा सकती
(iv) एक बार पैन निष्क्रिय होने पर लंबित प्रक्रियाएं, जैसाकि स्थगित की गई विवरणियों के मामले में है, को पूरा नहीं किया जा सकता
(v) पैन निष्क्रिय होने पर कर उच्च दर पर काटा जाना आवश्यक है
4.1 इसके अलावा, करदाता को विभिन्न फोरम जैसे बैंक और अन्य वित्तीय पोर्टल पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है चूंकि पैन सभी प्रकार के वित्तीय लेनदेनों में एक महत्वपूर्ण केवाईसी मापदंड का हिस्सा है।
5. इसलिए,धारा 234ज और मौजूदा नियम 114ककक को आसानी से लागू करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि नियम 114ककक यानी जहां एक व्यक्ति, जिसका परमैनेंट अकाउंट नंबर उप-नियम (1) के अंतर्गत निष्क्रिय हो गया है, को अधिनियम के अंतर्गत अपना परमैनेंट अकाउंट नंबर प्रस्तुत, सूचित या उद्धृत करना आवश्यक है, यह समझा जाएगा कि उसने अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार परमैनेंट अकाउंट नंबर प्रस्तुत, सूचित या उद्धृत, जो भी मामला हो, नहीं किया है और वह परमैनेंट अकाउंट नंबर को प्रस्तुत, सूचित या उद्धृत न करने के लिए सभी परिणाम भुगतने के लिए जिम्मेदार होगा, के उप-नियम (2) 1 अप्रैल, 2023 से प्रभावी होगा और 1 अप्रैल, 2022 को शुरू होने वाली और 31 मार्च, 2023 को समाप्त होने अवधि वह अवधि होगी जिसके दौरान उक्त कथित-नियम के उक्त पैरा 4 और 4.1 में निर्दिष्ट या उक्त उप-नियम में संदर्भि प्रकार के नकारात्मक परिणाम नहीं होंगे। हालांकि, करदाता नियम 114 के उप-नियम (5क) के अनुसार शुल्क देने के लिए उत्तरदायी होगा।
6. हिंदी संस्करण का अनुसरण किया जाएगा।
शैफाली सिंह
अवर सचिव (टीपीएल-IV), सीबीडीटी

