आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 06/2017

परिपत्र की तिथि

24/01/2017

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

24/01/2017

परिपत्र सं. 06/2017

2017 की परिपत्र सं. 6

 

एफ.नं. 142/11/2015-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

*****

 

24 जनवरी, 2017

 

विषय : कंपनी के प्रभावी प्रंबंधन के स्थान (पीओर्इएम) के निर्धारण के लिए दिशानिर्देश सिद्धांत

 

आयकर अधिनियम, 1961 (द एक्ट) की धारा 6(3), वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा इसके संशोधन से पूर्व, मुहैया कराती है कि एक कंपनी को किसी पिछले वर्ष में भारत में निवासी के तौर पर कहा जाएगा यदि यह भारतीय कंपनी हो अथवा यदि उस वर्ष के दौरान, इसकी कार्यवाही के नियंत्रण तथा प्रबंधन भारत में पूरी तरह से स्थित हो। यह भारत से बाहर नियंत्रण तथा प्रबंधन से संबंधित पृथक अथवा महत्वपूर्ण रूप से स्थानांतरण द्वारा इन प्रावधानों के अंतर्गत आवासीय स्थिति को कृत्रिम निकासी हेतु कंपनियों के लिए कर परिहार अवसरों की स्वीकृति देता है। इन चिंताओं का संबोधन करते हुए, अधिनियम की धारा 6(3) के मौजूदा प्रावधान यह मुहैया कराने के लिए 1 अप्रैल, 2016 से प्रभावी वित्त अधिनियम, 2015 के द्वारा संशोधित किया गया था कि एक कंपनी को किसी पिछले वर्ष में निवासी होने के तौर पर कहा जाएगा यदि -

  (i) यह भारतीय कंपनी हो; अथवा

 (ii) उस वर्ष में प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत में हो

2. "प्रभावी प्रबंधन का स्थान" अधिनियम में अर्थ के लिए परिभाषित है एक स्थान जहां प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय जो पूर्ण रूप से, अर्थ में, लिए गए हैं एक उद्यम के व्यापार करने के लिए आवश्यक है।

3. वित्त अधिनियम, 2016 ने अधिनियम की धारा 6(3) हेतु कथित संशोधन की प्रभावनात्मकता को परिवर्तित किया है। इसलिए, संशोधित प्रावधान 1 अप्रैल, 2017 से प्रभावी होगा और निर्धारण वर्ष 2017-18 तथा उत्तरगामी निर्धारण वर्षों के लिए लागू होगा।

4. 'प्रभावी प्रबंधन का स्थान '(पीओर्इएम) विदेशी क्षेत्राधिकार में निगमित एक कंपनी के निवासी के निर्धारण के लिए अंतर्राष्ट्रीय रूप से मान्यताप्राप्त है। भारत द्वारा की गर्इ अधिकतर कर संधियां दोहरे कराधान के परिहार के लिए टार्इ-ब्रेकर के तौर पर एक कंपनी के निवासी के निर्धारण के लिए 'प्रभावी प्रबंधन के स्थान' की संकल्पना को मान्यता देता है। पीओर्इएम के निर्धारण के लिए अनुसरित होने वाले दिशानिर्देश सिद्धांत निम्नलिखित पैराग्राफों में प्रगणित हैं।

5. इन दिशानिर्देशों के लिए,—

(क) एक कंपनी 'भारत से बाहर सक्रिय व्यापार' में कथित रूप से संलग्न होने के तौर पर कहा जाएगा यदि निष्क्रिय आय इसकी कुल आय के 50 प्रतिशत से अधिक न हो; तथा

   (i) इसकी कुल परिसंपत्तियों के 50 प्रतिशत से कम भारत में स्थित हो; तथा

  (ii) कर्मचारियों की कुल संख्या के 50 प्रतिशत से कम भारत में स्थित हो अथवा भारत में निवासी हो; तथा

 (iii) ऐसे कर्मचारियों पर किए गए पेरोल व्यय कुल पेरोल व्यय के 50 प्रतिशत से कम होता है।

स्पष्टीकरण : उक्तकथित उद्देश्य के लिए,—

 (क) आय होगी -

(क) जैसा निगमन के राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर उद्देश्य के लिए आंका गया हो; अथवा

(ख) बही खातों के अनुसार, जहां निगमन के राष्ट्र के कानूनों को ऐसे आंकलन की आवश्यकता न हो।

 (ख) परिसंपत्ति की राशि,—

(क) व्यक्तिगत मूल्यह्रास परिसपंत्ति की स्थिति में, पिछले वर्ष की शुरूआत में अथवा समाप्ति पर कंपनी के निगमन के राष्ट्र में कर उद्देश्यों के लिए इसकी राशि का औसत होगी; और

(ख) मूल्यह्रास के खंड के तौर पर समझे जा रही निश्चित परिसंपत्ति के समूह की स्थिति में, वर्ष की शुरूआत में तथा समाप्ति पर कंपनी के निगमन के राष्ट्र में कर उद्देश्यों के लिए इसकी राशि का औसत होगी;

(ग) किसी अन्य परिसंपत्ति की स्थिति में, इसकी राशि बही खाते के अनुसार होगी;

 (ग) कर्मचारियों की संख्या वर्ष की शुरूआत में अथवा समाप्ति पर कर्मचारियों की संख्या का औसत होगी तथा वह व्यक्ति शामिल होंगे जो, हालांकि कंपनी द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नियोजित नहीं है, कर्मचारियों द्वारा नियोजित समकक्ष कार्यों को पूरा करते हैं;

 (घ) शब्द "वेतन निधि" में नियोक्ता द्वारा वहन की गर्इ पेंशन तथा सामाजिक लागत से संबंधित सहित वेतन, पारिश्रमिक, बोनस तथा अन्य समस्त कर्मचारियों का मुआवजे की लागत शामिल होगी।

(ख) एक कंपनी का "मुख्यालय" वह स्थान होगा जहां कंपनी का वरिष्ठ प्रबंधक तथा उनका प्रत्यक्ष सहायक कर्मचारी स्थित है अथवा यदि वह एक से अधिक स्थान पर स्थित है तो स्थान जहां वह मुख्य रूप से अथवा प्रभावी रूप से स्थित है। एक कंपनी का मुख्यालय जरूरी नहीं कि वह स्थान हो जहां उनके अधिकतर कर्मचारी कार्य करते हों अथवा जहां इसके बोर्ड आमतौर पर बैठक करते हों

(ग) एक कंपनी की "निष्क्रिय आय" निम्न का कुल होगी -

   (i) लेनदेन से आय जहां दोनों क्रय तथा उत्पाद की बिक्री इसके संबद्ध उद्यमों से/को होती है; तथा

  (ii) रायल्टी, लाभांश, पूंजीगत प्राप्ति, ब्याज अथवा किराया आय के रूप में आय;

हालांकि, ब्याज के रूप में कोर्इ आय उस कंपनी की स्थिति में निष्क्रिय आय के तौर पर समझी जाएगी जो बैंकिंग के व्यापार में संलग्न है अथवा एक सार्वजनिक वित्त संस्थान है तथा इसकी गतिविधियां नियमित है जैसे निगमन राष्ट्र के उचित कानूनों के अंतर्गत हो

(घ) एक कंपनी के संबंध में "वरिष्ठ प्रबंधन" का अर्थ व्यक्ति जो कंपनी के लिए नीतियों तथा प्रमुख रणनीतियों को विकसित करने तथा तैयार करने के लिए सामान्य रूप से उत्तरदायी है और नियमित आधार पर तथा चालू आधार पर उन रणनीतियों के क्रियान्वयन तथा निष्पादन को सुनिश्चित करने अथवा देखरेख के लिए उत्तरदायी हो, इन व्यक्तियों में शामिल हो सकता है:

   (i) प्रबंध निदेशक अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी;

  (ii) वित्त निदेशक अथवा मुख्य वित्त अधिकारी;

 (iii) मुख्य संचालन अधिकारी; तथा

 (iv) विभिन्न प्रभाग अथवा विभागों के प्रमुख (उदाहरण के लिए मुख्य सूचना अथवा प्रौद्योगिकी अधिकारी, बिक्री अथवा विपणन निदेशक)

6. पीओर्इएम का कोर्इ निर्धारण दिए गए मामले के तथ्यों तथा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। पीओर्इएम संकल्पना फार्म पर एक सत्व है। यह ध्यान दिया जा सकता है कि एक उद्यम के एक से अधिक प्रबंधन के स्थान हो सकते हैं, लेकिन किसी समय पर प्रभावी प्रबंधन का एक ही स्थान हो सकता है। चूंकि "निवास" प्रत्येक वर्ष के लिए निर्धारित किया जा सकता है, पीओर्इएम को वर्ष दर वर्ष पर निर्धारित किया जाना आवश्यक है। पीओर्इएम के निर्धारण की प्रक्रिया प्रमुख रूप से तथ्य पर आधारित होगी जहां तक हो न हो कंपनी भारत के बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न है।

7. भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न एक कंपनी की स्थिति में प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत के बाहर परिकल्पित होगा यदि कंपनी के बोर्ड निदेशकों की अधिकतर बैठकें भारत से बाहर होती हों।

7.1 हालांकि, यदि तथ्यों तथा परिस्थितियों के आधार पर यह संस्थापित हो कि कंपनी के बोर्ड निदेशक अलग हों और प्रबंधन के अपने अधिकारों का प्रयोग न करते हों तथा ऐसे अधिकार या तो भारत में निवासी संघटन कंपनी अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए जाते हों तो प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत में होने के तौर पर समझा जाएगा। इसके लिए, केवल इस कारण से कि निदेशक मंडल मूल कंपनी जो पे रोल कार्य, लेखांकन, मानव संसाधन (एचआर) कार्यों, आर्इटी अवसंरचना और नेटवर्क प्लेटफार्म, सप्लार्इ चेन कार्य, नियमित बैंिकंग संचालन प्रक्रिया तथा वास्तव में किसी उद्यम अथवा उद्यमों के समूह में विशिष्ट तौर पर न हो, द्वारा निर्धारित समूह की वैश्विक नीति के सामान्य तथा उद्देश्यात्मक सिद्धांतों का अनुसरण करती है, पृथक कंपनियों के निदेशक मंडल की स्थिति में संस्थापित नहीं होगा।

7.2 यह निर्धारित करने के लिए कि क्या कंपनी भारत के बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न हैं, पिछले वर्ष तथा उससे दो वर्ष पूर्व के डाटा का औसत पर विचार किया जाएगा। यदि कंपनी अल्प अवधि के लिए बनार्इ गर्इ हो तो ऐसी अवधि का डाटा पर विचार किया जाएगा। जहां कर उद्देश्यों के लिए लेखांकन वर्ष, कंपनी के निगमन के राष्ट्र के कानून के अनुसार, पिछले वर्ष से अलग हो तो लेखांकन वर्ष जो प्रासंगिक पिछले वर्ष तथा उसके बाद के दो लेखांकन वर्षों के दौरान खत्म हुए, पर विचार किया जाएगा।

8. पैरा 7 में संदर्भित भारत के बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न को छोड़कर कंपनियों की स्थिति में, पीओर्इएम का निर्धारण दो प्रक्रिया पर होगा जिनके नाम हैं :-

  (i) पहला स्तर उन व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की पहचान करेगा अथवा सुनिश्चित करेगा जो पूर्ण के तौर पर कंपनी के व्यापार करने के लिए प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय करता है।

 (ii) दूसरा स्तर स्थान का निर्धारण होगा जहां यह निर्णय वास्तव में लिए जा रहे हैं।

8.1 स्थान जहां यह प्रबंधन संबंधी निर्णय लिए जाते हैं उस स्थान से अधिक महत्वपूर्ण होंगे जहां ऐसे निर्णयों को कार्यान्वित किया जाता है। पीओर्इएम के निर्धारण के उद्देश्य से यह अर्थ है जो रूप की बजाय निर्णायक होगा।

8.2 कुछ दिशानिर्देश सिद्धांत जिस पर पीओर्इएम को निर्धारित करने के लिए विचार किया जा सकता है निम्नानुसार हैं :

(क) स्थान जहां एक कंपनी का मंडल नियमित तौर पर मिलते हैं और निर्णय करते हैं कंपनी के प्रभावी प्रबंधन का स्थान हो सकता है बशर्ते कि बोर्ड-

   (i) कंपनी को शासित करने के लिए इसके प्राधिकरण को बनाए रखने तथा प्रयोग करने के लिए हो; तथा

  (ii) अर्थ में, पूर्ण के तौर पर कंपनी के व्यापार को करने के लिए आवश्यक प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय करता हो।

यह निर्दिष्ट किया जा सकता है कि केवल एक स्थान पर बोर्ड की औपचारिक बैठक करना ही अपने आप में उस स्थान पर स्थित पीओर्इएम के निर्धारण के लिए अंतिम नहीं होगा। यदि निदेशकों द्वारा प्रमुख निर्णय वास्तव में उस स्थान को छोड़कर एक स्थान पर लिए जा रहे हों जहां औपचारिक बैठक हो रही है, ऐसा स्थान पीओर्इएम के लिए प्रासंगिक होगा। ऐसे उदाहरण के तौर पर यह वह मामला हो सकता है जहां बोर्ड की बैठक उस स्थान से अलग स्थान पर होती है जहां कंपनी का मुख्यालय स्थित है अथवा ऐसा स्थल उस स्थान से संबंधित है जहां कंपनी की प्रबल गतिविधि की जा रही हो।

यदि एक बोर्ड शेयरधारक, प्रोत्साहक, रणनीति अथवा कानूनी अथवा वित्तीय सलाहकार आदि सहित वरिष्ठ प्रबंधन अथवा किसी अन्य व्यक्ति को कंपनी के लिए प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय करने के लिए प्राधिकारी को वास्तव में नामित किया हो तथा निर्णय जो किए गए हैं को दैनिक रूप से पुष्ट करने से अधिक कुछ और न करता हो तो कंपनी का प्रभावी प्रबंधन का स्थान सामान्य रूप से वह स्थान होगा जहां यह वरिष्ठ प्रबंधक अथवा अन्य व्यक्ति वह निर्णय लेते हैं।

(ख) एक कंपनी के बोर्ड वरिष्ठ प्रबंधन के प्रमुख सदस्यों को शामिल करते हुए एक कार्यकारी समिति के तौर पर ऐसी एक अथवा अधिक समितियों के लिए इसके कुछ अथवा समस्त प्राधिकारों को सौंप सकती है। इन स्थितियों में, स्थल जहां कार्यकारी समिति के सदस्य स्थित है तथा जहां वह समिति पूरे मंडल द्वारा मात्र औपचारिक अनुमति के लिए प्रमुख रणनीतियों तथा नीतियों को विकसित तथा तैयार करती है प्राय: प्रभावी प्रबंधन के कंपनी के स्थान होने के तौर पर समझा जाता है।

प्राधिकारी का शिष्ट मंडल या तो कानूनी प्रकार से (औपचारिक संकल्प अथवा हितधारक समझौते द्वारा) अथवा वास्तव में (बोर्ड तथा कार्यकारी समिति के वास्तविक संघटन के आधार पर) हो सकता है।

(ग) कंपनी के मुख्यालय की स्थिति कंपनी के प्रभावी प्रबंधन के स्थान के निर्धारण में अति महत्वपूर्ण पहलू होगा क्योंकि यह प्राय: उस स्थान का प्रतिनिधित्व करता हैं जहां कंपनी के प्रमुख निर्णय लिए जाते हैं। निम्नलिखित बिंदुओं को कंपनी के मुख्यालय के स्थल को निर्धारित करने के लिए विचारे जाने की आवश्यकता है :-

   •  यदि कंपनी का वरिष्ठ प्रबंधन तथा उनके सहायक कर्मचारी एक स्थान पर स्थित हो तथा कंपनी के व्यापार का प्रमुख स्थान अथवा मुख्यालय स्थान के तौर पर जनसाधारण तक फैला हो तो स्थान वह स्थल है जहां मुख्यालय स्थित है।

   •  यदि कंपनी अधिक विकेंद्रीकृत (उदाहरण के लिए जहां वरिष्ठ प्रबंधन के विभिन्न सदस्य विभिन्न राष्ट्रों में स्थित कार्यालयों पर समय-समय पर संचालन कर सकते हों) है तो कंपनी का मुख्यालय वह स्थल होगा जहां यह वरिष्ठ प्रबंधक,—

  (i) मुख्यत: अथवा मुख्य रूप से आधारित हो; अथवा

 (ii) अन्य स्थलों तक उत्तरगामी यात्रा करने के लिए सामान्य रूप से वापस आता हो; अथवा

 (iii) जब पूर्ण के तौर पर प्रमुख रणनीतियों को कार्यान्वित करने अथवा निर्णय करता हो

अथवा कंपनी के लिए नीतियां पूरा करता हो।

   •  वरिष्ठ प्रबंधक के सदस्य अधिक अथवा कम स्थार्इ आधार पर विभिन्न स्थलों से संचालन कर सकता है और सदस्य विशेष स्थान पर बैठक में वास्तविक रूप से उपस्थित होने के बजाय टेलीफोन अथवा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से विभिन्न बैठकों में भाग ले सकता हो। ऐसी स्थिति में मुख्यालय वह स्थान है,यदि हो, जहां उच्चतम स्तर का प्रबंधन (उदाहरण के लिए प्रबंध निदेशक तथा वित्त निदेशक) तथा उनका प्रत्यक्ष सहायता कर्मचारी वर्ग स्थित हो।

   •  उन स्थितियों में जहां वरिष्ठ प्रबंधन बेहद विकेंद्रीकृत हो कि निश्चितता के साथ कंपनी के मुख्यालय को निर्धारित करना संभव न हो तो उस कंपनी के प्रभावी प्रबंधन का स्थान को निर्धारित करने में कंपनी के मुख्यालय की स्थिति अधिक प्रासंगिक नहीं होगी

(घ) नर्इ तकनीक का प्रयोग कर्इ तरीकों में प्रभावी प्रबंधन के स्थान को प्रभावित करता है। एक विशेष स्थान पर वास्तविक रूप से उपस्थित होना निर्णय लेने वाले व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं है। इसलिए बोर्ड की बैठक अथवा कार्यकारी समिति की बैठक अथवा वरिष्ठ प्रबंधन की बैठक के वास्तविक स्थान वह नहीं हो सकता जहां प्रमुख निर्णय अर्थ के रूप में लिया जा रहा हो। ऐसे मामलों में स्थान जहां निदेशक अथवा व्यक्ति निर्णय लेते हों अथवा उनमें से अधिकतर सामान्य रूप से हो प्रासंगिक पहलू भी हो सकते हैं।

(ड़) परिपत्र प्रस्ताव अथवा आवेदन पत्र पहलू जैसे आवृत्ति जिसके साथ यह प्रयोग किया जाता है, उस तरीके में किए गए निर्णय के प्रकार तथा जहां उन निर्णयों में शामिल पक्ष स्थित है आदि पर विचार किया जाता है। यह नहीं कहा जा सकता कि अकेले निर्णय के कथित प्रस्तापक प्रासंगिक होगा लेकिन पूर्व अभ्यास तथा सामान्य आयोजन के आधार पर, उस व्यक्ति को निर्धारित करना आपेक्षित होगा जिसके पास प्राधिकरण है तथा जो निर्णय लेने के लिए प्राधिकारी हैं ऐसे व्यक्ति के स्थल का स्थान अधिक महत्वपूर्ण है।

(च) उस मामलों पर हितधारक द्वारा लिए गए निर्णय जो कंपनी के कानूनों के अंतर्गत हितधारक निर्णय के लिए आरक्षित हैं। ऐसे निर्णयों में कंपनी की परिसंपत्ति की समस्त अथवा वास्तव में स्थित बिक्री, कंपनी का विघटन, परिसमापन अथवा डिरजिस्ट्रेशन, शेयर की विभिन्न श्रेणियों से संबंद्ध अधिकारों का संशोधन, शेयर आदि की नर्इ श्रेणी का निगर्मन आदि शामिल हो सकता है। यह निर्णय आमतौर पर अपने आप में कंपनी की मौजूदगी अथवा ऐसे शेयरधारकों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं नाकि एक प्रबंधन अथवा वाणिज्यिक परिपेक्ष्य से कंपनी के व्यापार को संघटन को प्रभावित करता है और इसलिए, प्रभावी प्रबंधन के कंपनी के स्थान के निर्धारण के लिए प्रासंगिक नहीं है।

हालांकि, शेयरधारकों की भागीदारी, कुछ स्थितियों में, प्रभावी प्रबंधन में परिवर्तित हो सकती है। यह शेयरधारक अनुबंध आदि के रूप में औपचारिक व्यवस्था के माध्यम से अथवा वास्तविक व्यवहार के रूप में भी हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि शेयरधारक कंपनी के प्राधिकारी मंडल तथा वरिष्ठ प्रबंधक को सीमित करता है और तत्पश्चात् निर्णय करने के लिए कंपनी की वास्तविक प्राधिकारी को हटाता है तो शेयरधारक का अनाधिकार ग्रहण में दिशानिर्देश परिवर्तन तथा ऐसे अनुचित प्रभाव शेयरधारक द्वारा प्रयोग किए जा रहे प्रभावी प्रबंधन का परिणाम हो सकता है।

इसलिए, यदि शेयरधारक की भागीदारी उसमें सीमा को पार करती हो प्रभावी प्रंबंधन एक तथ्य है और केवल मामला दर मामला आधार पर निर्धारित होना है।

(छ) यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कनिष्ठ तथा मध्य प्रबंधन द्वारा लिए गए दैनिक संचालनात्मक निर्णय पीओर्इएम के निर्धारण के उद्देश्य के लिए प्रासंगिक नहीं होंगे। दैनिक व्यापार निर्णय तथा कंपनी की गतिविधियों के निरीक्षण से संबंधित संचलानात्मक निर्णय जहां प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय विस्तृत रणनीति तथा नीति निर्णय के साथ संबंधित हो। उदाहरण के लिए, मुख्य नर्इ विनिर्माण सुविधा को खोलने के लिए अथवा प्रमुख उत्पाद लाइन का हटाया जाना समग्र रूप से कंपनी के व्यापार को प्रभावित करने वाले प्रमुख वाणिज्यिक निर्णय का उदाहरण होगा। इसके विपरीत, उस सुविधा को देन, संबंधी मरम्मत तथा रखरखाव, कंपनी वार गुणवत्ता नियंत्रण का कार्यान्वयन तथा मानव संसाधन नीतियों के लिए वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा नियुक्त संयंत्र प्रबंधक द्वारा निर्णय दैनिक संचालनात्मक निर्णयों का उदाहरण है। कुछ स्थितियों में यह भी हो सकता है कि संचालनात्मक निर्णय के लिए उत्तरदायी व्यक्ति वही व्यक्ति हो जो प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय के लिए उत्तरदायी हो। ऐसी स्थिति में दो प्रकार के निर्णयों का अंतर करना आवश्यक होगा और तत्पश्चात् उस स्थिति का अवलोकन करेगा जहां प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय लिए जाते हैं।

8.3 यदि उक्त पहलू पीओर्इएम की स्पष्ट पहचान नहीं कर पाता तो निम्नलिखित द्वितीय पहलू पर विचार किया जाएगा :-

  (i) स्थान जहां कंपनी की मुख्य तथा वस्तुत गतिविधि की जाती है; अथवा

 (ii) स्थान जहां कंपनी के लेखांकन रिकॉर्ड को रखा जाता है।

9. इस बात पर जोर देने की आवश्यकता है कि पीओर्इएम का निर्धारण कंपनी के प्रबंधन तथा नियंत्रण से संबंधित समस्त प्रासंगिक तथ्यों पर आधारित होने है और पृथक तथ्यों के आधार पर निर्धारित नहीं होना है जो स्वयं प्रभावी प्रबंधन को संस्थापित नहीं करता, जैसा निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा दर्शाया गया है :

  (i) तथ्य है कि एक विदेशी कंपनी जो एक भारतीय कंपनी द्वारा पूरी तरह खरीदी गर्इ हो निर्णायक सबूत नहीं होगा कि भारत में पीओर्इएम को संस्थापित करने के लिए शर्तों को पूरा किया गया है।

 (ii) तथ्य है कि भारत में विदेशी उद्यम का स्थार्इ संस्थापन मौजूद हो स्वयं निर्णायक सबूत नहीं होगा कि भारत में पीओर्इएम को संस्थापित करने के लिए शर्तों को पूरा किया गया है।

(iii) तथ्य है कि भारत में निवासित विदेशी कंपनी के एक अथवा कुछ निदेशक निर्णायक सबूत नहीं होंगे कि भारत में पीओर्इएम को संस्थापित करने के लिए शर्तों को पूरा किया गया है।

(iv) तथ्य कि, भारत में विदेशी कंपनी द्वारा की गर्इ गतिविधियों के संबंध में भारत में स्थित हो रहे स्थानीय प्रबंधन, अपने आप, निर्णायक प्रमाण नहीं होगा कि पीओर्इएम को संस्थापित करने के लिए शर्तों के निर्णायक प्रमाण को संतुष्ट किया गया है।

 (v) सहायता कार्यों की भारत में मौजूदगी जो प्रारंभिक और सहायक प्रकार का है निर्णायक प्रमाण नहीं होगा कि भारत में पीओर्इएम को संस्थापित करने के लिए शर्तों को पूरा किया गया है।

10. इस बात को दोहराया जाता है कि पीओर्इएम को निर्धारित करने के लिए उक्त सिद्धांत केवल दिशानिर्देश के लिए ही है। कोर्इ एकल सिद्धांत अपने आप में निर्णायक नहीं है। उक्त सिद्धांत समय रहते किसी विशेष पल के संदर्भ में नहीं देखा जाना है बल्कि पिछले वर्ष के दौरान समय अवधि पर की गर्इ गतिविधियों पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। अन्य शब्दों में एक "स्नैपशॉट" दृष्टिकोण को नहीं अपनाना है। आगे, तथ्यों तथा परिस्थितियों के आधार पर यदि यह निर्धारित होता है कि पिछले वर्ष के दौरान पीओर्इएम भारत में है और भारत के बाहर भी है तो पीओर्इएम को भारत में होना समझा जाएगा यदि यह भारत में मुख्यत:/मुख्य रूप से है।

11. निर्धारण अधिकारी (एओ), भारत में निवासी के तौर पर, पीओर्इएम के आधार पर, भारत से बाहर निगमित कंपनी के संघटन के लिए किसी कार्यवाही को करने से पहले प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त, जो भी मामला हो, की अनुमति लेगा।

11.1 आगे, यदि एओ भारत में निवासी के तौर पर, इसके पीओर्इएम के आधार पर, भारत से बाहर निगमित कंपनी का प्रस्ताव रखता है तो ऐसी किसी खोज को इस संबंध में संबंधित क्षेत्र के प्रधान मुख्य आयुक्त द्वारा संस्थापित करने हेतु प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त, जो भी स्थिति हो, को शामिल करते हुए तीन सदस्यों के कॉलेजियम के पूर्व अनुमोदन के बाद निर्धारण अधिकारी द्वारा दिया जाएगा। ऐसा संस्थापित कॉलेजियम मामले में किसी निर्देश को जारी करने से पहले कंपनी को सुनवार्इ का अवसर देगा।

12. उदाहरण :

निम्नलिखित कुछ उदाहरण दिशानिर्देशों के पूववर्ती पैराग्राफ में प्रगणित कुछ सिद्धांतों की स्वीकार्यता को समझाने का प्रयास करते हैं। स्वीकृत तथ्यों को सिद्धांतों को स्पष्ट करने के लिए सरल किया गया है। कंपनी के पीओर्इएम का वास्तविक निर्धारण समस्त प्रासंगिक तथ्यों पर निर्भर करेगा।

उदाहरण 1 : कंपनी क कॉर्पो. राष्ट्र X में निगमित स्रोत कंपनी है, भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह के लिए, तथा भारतीय कंपनी (ख कार्पो.) की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी है। उनमें वेयरहाउस और स्टाक केवल कपंनी की परिसंपत्ति है और राष्ट्र X में स्थित है। कंपनी के समस्त कर्मचारी राष्ट्र X में भी है। तीन वर्षों के लिए कंपनी की कुल आय का औसत आय विभाजन निम्नानुसार है :-

  (i) आय का 30 प्रतिशत लेनदेन से है जहां खरीद पार्टियों द्वारा की जाती हैं जो गैर-संबंद्ध हैं और संबंद्ध उद्यमों को बेची जाती हैं

 (ii) आय का 30 प्रतिशत लेनदेन से है जहां खरीद संबंद्ध उद्यमों द्वारा की जाती है और संबंद्ध उद्यमों को बेची जाती हैं।

 (iii) आय का 30 प्रतिशत लेनदेन से है जहां खरीद संबंद्ध उद्यमों द्वारा की जाती है और संबंद्ध उद्यमों को बेची जाती हैं।

 (iv) आय का 10 प्रतिशत ब्याज के रूप में

व्याख्या : यदि निष्क्रिय आय कंपनी की कुल आय का 40 प्रतिशत है। निष्क्रिय आय में शामिल है -

  (i) लेनदेन द्वारा 30 प्रतिशत जहां दोनों खरीद और बिक्री संबंद्ध उद्यम द्वारा/को की जाती है;  और

 (ii) ब्याज से 10 प्रतिशत।

क कं. भारत से बाहर सक्रिय व्यापार के परीक्षण की पहली अनिवार्यता को संतुष्ट करता है। चूंकि क कं. की कोर्इ परिसंपत्ति अथवा कर्मचारी भारत में नहीं है परीक्षा की अन्य अनिवार्यता

को भी पूरा किया जाता है। इसलिए कंपनी भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न है।

उदाहरण 2 : अन्य तथ्य वही रहेंगे जैसा परिवर्तन के साथ उदाहरण 1 में है कि क कं. के पास 50 कर्मचारी है, 47 कर्मचारी, वेयरहाउस, स्टोरकिपिंग और कंपनी के खातों का प्रबंधन करते हैं, राष्ट्र X में स्थित हैं। प्रबंध निदेशक (एमडी), मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीर्इओ) और बिक्री प्रमुख भारत में निवासित हैं। इन 50 कर्मचारियों पर कुल वार्षिक पेरोल व्यय रू. 5 करोड़ है। एमडी, सीर्इओ तथा बिक्री प्रमुख के संबंध में वार्षिक पेरोल व्यय रू. 3 करोड़ है।

व्याख्या : यद्यपि सक्रिय व्यापार की पहली शाखा क कं. द्वारा पूरी होती है चूंकि केवल इसकी कुल आय का 40 प्रतिशत निष्क्रिय प्रकार का है। आगे, 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी भी भारत से बाहर स्थित है। समस्त परिसंपत्ति भारत से बाहर स्थित है। हालांकि, भारत में निवासित कर्मचारियों के तौर पर एमडी, सीर्इओ तथा बिक्री प्रमुख के संबंध में पेरोल व्यय कुल पेरोल व्यय के 50 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए, क कं. भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न नहीं है।

उदाहरण 3 : मूल तथ्य वही है जैसा उदाहरण 1 में है। अग्रिम तथ्य है कि क कं. के समस्त निदेशक भारतीय निवासी हैं। निदेशक मंडल के प्रासंगिक पिछले 5 वर्षों की बैठक संघटित हुर्इ है जिसके दो बैठक भारत में और 3 बैठक भारत से बाहर राष्ट्र X में 2 और राष्ट्र Y में 1 बैठक आयोजित हुर्इ है।

व्याख्या : क कं. भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न है जैसा उदाहरण 1 में इंगित तथ्यों को संस्थापित किया गया है। अधिकतर बोर्ड की बैठक भारत से बाहर हुर्इ है। इसलिए, क कार्पो. का पीओर्इएम भारत से बाहर होना समझा जाएगा।

उदाहरण 4 : तथ्य वही है जैसा उदाहरण 3 में है लेकिन निर्धारण अधिकारी द्वारा संस्थापित है कि यद्यपि क कं. का वरिष्ठ प्रबंधन समस्त अनुबंधों पर हस्ताक्षर करता है, रू. 10 लाख से अधिक के सभी अनुबंध पर क. कं. को ख कं. को इसकी सिफारिशों को जमा करना होगा और ख कं. निर्णय करता है कि अनुबंध को स्वीकार किया गया या नहीं। पिछले वर्ष के दौरान यह भी देखा गया है कि अनुबंध का 99 प्रतिशत से अधिक रू. 10 लाख से अधिक है और पिछले वर्षों के दौरान रू. 10 लाख से अधिक के अनुंबध के मूल्य के अंशदान के संबंध में यह प्रवृत्ति देखी गर्इ है।

व्याख्या : यह तथ्य सुझाते हैं कि क कं. के प्रभावी प्रबंधन प्रमुख कंपनी ख कं. द्वारा छीना जा सकता है। इसलिए, क कं. का पीओर्इएम ऐसे मामलों में भारत से बाहर होना नहीं समझा जा सकता है भले ही क कं. भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न है और अधिकतर बोर्ड की बैठक भारत से बाहर होती है।

उदाहरण 5 : एक भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह के पास राष्ट्र X में स्थानीय संघटन कंपनी क कं. है। क कं. की राष्ट्र X में ख कं. और ग कं. और राष्ट्र Y में घ कं. के 100 प्रतिशत डाउनस्ट्रीम सहायक कंपनी है। क कं. के प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत में है और समूह के अंतिम मुख्य कंपनी द्वारा प्रयोग होती है। ख, ग तथा घ की सहायक कंपनी भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में संलग्न है। ख कं., ग कं. तथा घ कं. के निदेशक मंडल की बैठक क्रमश: X तथा Y में संघटित होती है।

व्याख्या : केवल इसलिए कि मध्यवर्ती संघटन कंपनी का प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत में है इसकी सहायक कंपनी का पीओर्इएम भारत में होना नहीं समझी जाएगी। प्रत्येक सहायक कंपनी को पृथक रूप से जांचा जाएगा। जैसा तथ्यों में दर्शाया गया है चूंकि कंपनियां ख कं., ग कं., तथा घ कं. भारत से बाहर सक्रिय व्यापार में स्वतंत्र रूप से संलग्न हैं तथा इन कंपनियों की अधिकतर बोर्ड की बैठकें भारत से बाहर होती है। ख कं. तथा घ कं. का पीओर्इएम भारत से बाहर होना समझा जाएगा।

 

(राजेश कुमार केडिया)

निदेशक (कर नीति व विधि)

के प्रति

  1. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी में अन्य समस्त अधिकारी

  2. राजस्व सचिव का निजी सचिव

  3. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व समस्त आयकर महानिदेशक - अपने क्षेत्रों/प्रभारों में सभी अधिकारियों के ध्यान में लाने के अनुरोध के साथ

  4. प्रधान आयकर महानिदेशक, एनएडीटी, नागपुर

  5. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति), प्रधान आयकर महानिदेशक (सतर्कता), प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)/प्रधान आयकर महानिदेशक (एलएंडआर)

  6. एडीजी (पीआर, पीआई व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली मेलिंग लिस्ट के अनुसार वितरण तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन के मुद्रण के लिए (100 प्रतियां)

  7. सीएंडएजी, नर्इ दिल्ली

  8. www.incometaxindia.gov.in पर अपलोडिंग के लिए वेब मैनेजर व पब्लिक डोमेन पर चस्पा करने के लिए

  9. irsofficersonline.gov.in पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ

10. गार्ड फाइल

 

निदेशक (कर नीति व विधि)