परिपत्र सं. 5/2024 : आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण, उच्च न्यायलय के समक्ष विभाग द्वारा अपील करने और उच्चतम न्यायालय के समक्ष एसएलपी/अपील करने के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 268क के अंतर्गत परिपत्र - मुकद्मेबाजी को कम करने के लिए उपाय
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 5/2024
परिपत्र की तिथि
15/03/2024
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
15/03/2024
परिपत्र सं. 5/2024
F.No. 279/Misc.142/2007-ITJ (Pt.)
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नई दिल्ली, 15 मार्च, 2024
विषय : आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण, उच्च न्यायलय के समक्ष विभाग द्वारा अपील करने और उच्चतम न्यायालय के समक्ष एसएलपी/अपील करने के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 268क के अंतर्गत परिपत्र - मुकद्मेबाजी को कम करने के लिए उपाय - संबंधित
संदर्भ 1 : परिपत्र सं. 3/2018 दिनांक 11.07.2018
संदर्भ 2 : परिपत्र सं. 17/2019 दिनांक 08.08.2019
संदर्भ 3 : F.NO. 279/Misc.142/2007-ITJ (Pt.) dated 20.08.2018 में बोर्ड का पत्र
उक्त हेतु संदर्भ आमंत्रित है जिसमें आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी), माननीय उच्च न्यायलय (एचसी) के समक्ष आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् अधिनियम के तौर पर संदर्भित) विभागीय अपील करने के लिए और माननीय उच्चतम न्यायालय (एससी) के समक्ष विशेष अवकाश याचिका (एसएलपी)/अपील करने के लिए मौद्रिक सीमा और अन्य शर्तें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी या बोर्ड) द्वारा निर्दिष्ट की गई थी।
2. सीबीडीटी द्वारा निर्दिष्ट उक्त निर्दिष्ट संप्रेषण को जारी रखते हुए आईटीएटी और एचसी के समक्ष विभागीय अपील और एससी के समक्ष एसएलपी/अपील के संदर्भ में निम्नलिखित को नोट किया जा सकता है :
3.1 अपील/एसएलपी को प्रस्तुत करने के संदर्भ में पैराग्राफ 4 में दी गई मौद्रिक सीमा निम्नलिखित अपवादों के साथ अधिनियम के अंतर्गत टीडीएस/टीसीएस से संबंधितों को शामिल करते हुए सभी मामलों पर लागू होगी जहाँ अपील/एसएलपी हेतु निर्णय प्रभावी कर और मौद्रिक सीमा को छोड़कर मैरिट पर लिया जाएगा।
क. जहाँ इसके अंतर्गत जारी किए गए अधिनियम या नियमों या अधिसूचनाओं के कोई प्रावधान को संवैधानिक तौर पर अमान्य किया गया हो या
ख. जहाँ विभाग का कोई आदेश, अधिसूचना, निर्देश या परिपत्र या सरकार ने अधिनियम को अमान्य या अधिकाराती किया हो या अन्यथा सैंवधानिक तौर पर अमान्य किया हो
ग. जहाँ मूल्यांकन किसी अन्य कानून के तहत कथित अपराध के संबंध में किसी भी कानूनी प्रवर्तन या खुफिया एजेंसियों जैसे कि सीबीआई, ईडी, डीआर, एसएफआईओ, एनआईए, एनसीबी, डीजीजीआई, राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां जैसे राज्य पुलिस, राज्य सतर्कता ब्यूरो, राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राज्य उत्पाद शुल्क विभाग, राज्य बिक्री/वाणिज्यिक कर या जीएसटी विभाग से प्राप्त जानकारी पर आधारित है या
घ. जहाँ मामला ऐसा है जिसमें संबंधित मामले में विभाग द्वारा अभियोजन दायर किया गया है और मुकदमा किसी भी न्यायालय में लंबित है या दोषसिद्धि आदेश पारित किया गया है और उसे क्षमा नहीं किया गया है, या
ङ. जहाँ राजस्व विभाग, सीबीडीटी या उनके अधिकारियों के खिलाफ सख्त/प्रतिकूल टिप्पणियां पारित की गई हैं और/या लागत लगाई गई है, या
च. जहां कर प्रभाव मात्रात्मक नहीं है या इसमें शामिल नहीं है, जैसे अधिनियम की धारा 10(23ग), 12क/12कक/12कख के तहत ट्रस्टों या संस्थानों के पंजीकरण का मामला, अधिनियम की धारा 263 के तहत पारित आदेश आदि। यहां संदर्भित धाराओं को शामिल करते हुए मामलों हेतु संदर्भ, जहां कर प्रभाव की मात्रा निर्धारित करना संभव नहीं है या कर प्रभाव शामिल नहीं है, केवल चित्रण के उद्देश्य के लिए है।
छ. जहां अतिरिक्त राशि अघोषित विदेशी आय/अघोषित विदेशी संपत्ति (वित्तीय संपत्ति सहित)/अघोषित विदेशी बैंक खाते से संबंधित है, या
ज. संगठित कर चोरी से जुड़े मामले जिनमें पेनी स्टॉक के माध्यम से फर्जी पूंजीगत लाभ/हानि के मामले और आवास प्रविष्टियों के मामले शामिल हैं, या
झ. जहां न्यायालय के निर्देश द्वारा अनिवार्य है या
ञ. रिट मामले या
ट. संपित्त कर, फ्रिंज लाभ कर, ईक्वलाईजेशन लेवी से संबंधित मामले और आयकर अधिनियम को छोड़कर कोई अन्य मामला
ठ. दोनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कराधान प्रभारों में टीडीएस/टीसीएस से संबंधित मामलों में से उत्पन्न मुकद्मेबाजी के संदर्भ में
i. जहां विवाद लेन-देन की प्रकृति के निर्धारण से संबंधित है, जैसे कि उस पर टीडीएस/टीसीएस काटने या अन्यथा करने का दायित्व प्रश्न के अंतर्गत है, या
ii. अंतर्राष्ट्रीय कराधान शुल्क की अपील जहाँ विवाद दोहरे कराधान बचाव समझौते के प्रावधानों की प्रयोज्यता या अन्यथा से संबंधित है
ड कोई अन्य मामला या मामलों का वर्ग जहां बोर्ड की राय में न्याय या राजस्व के हित में चुनाव लड़ना आवश्यक है और इस संबंध में बोर्ड द्वारा जारी एक परिपत्र द्वारा निर्दिष्ट किया गया है।
3.2 अधिनियम की धारा 158कख के अंतर्गत अपील के स्थगित होने के संदर्भ में F.NO. 279/Misc/M-93/2018-ITJ(Pt.) dated 31.05.2023 के द्वारा परिपत्र सं. 8/2023 पर ध्यान दिया जा सकता है। ऐसे मामलों में अपवाद निम्नानुसार संचालित होता है
क. अधिनियम की धारा 158कख के अंतर्गत विलंबित अपील के संदर्भ में, दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जैसा पूर्ववर्ती पारस में निर्दिष्ट है, यह सुनिश्चित किया जाना है कि जब न्यायिक अंतिमता अन्य मामले में राजस्व के पक्ष में प्राप्त होती है तो राजस्व मामले में अपील बढ़ाई गई मौद्रिक सीमा के बावजूद अन्य मामले में निर्णय हेतु अनुवर्ती योग्यता पर विवादित होना चाहिए।
ख. यदि अन्य मामले में न्यायिक निर्णय राजस्व के पक्ष में न हो और विभाग द्वारा स्वीकृत न हो तो इसके विरूद्ध की गई अपील न्यायिक अंतिमता को प्राप्त करने के लिए बढ़ाई गई मौद्रिक सीमा के बावजूद अन्य मामले में योग्यता पर विवादित हो सकती है।
4.1 अपील/एसएलपी, अपवाद के अंतर्गत न आता हो जैसा उक्त पैरा 3 में परिभाषित है, दाखिल नही किया जाएगा यदि जहां प्रभावी कर इसके अंतर्गत दी गई मौद्रिक सीमा से अधिक न हो
| क्र.सं. | आयकर मामलों में अपील/एसएलपी | मौद्रिक सीमा (रू.) |
| 1 | अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष | 50,00,000 |
| 2 | उच्च न्यायालय के समक्ष | 1,00,00,000 |
| 3 | उच्चतम न्ययालय के समक्ष | 2,00,00,000 |
4.2 यह स्पष्ट किया जाता हैं कि अपील को केवल इसलिए ही नहीं दाखिल करना चाहिए क्योंकि प्रभावी कर उक्त निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से अधिक हैं। ऐसे मामलों में अपील का दाखिलीकरण मामले की पात्रता के आधार पर अधिनिर्णित होना हैं। संबंधित अधिकारी अपील करने के संबंध में निर्णय लेते समय अनावश्यक मुकदूमेबाजी को कम करने और करदाताओं को उनके आयकर आंकलन पर निश्चितता प्रदान करने के समग्र उद्देश्य को ध्यान में रखेंगे।
5.1 इस उद्देश्य के लिए, "प्रभावी कर" का अर्थ कुल मूल्यांकित आय पर कर तथा ऐसे कर के बीच का अंतर है जो वसूलनीय होता जब ऐसी कुल आय को मुद्दे, जिसके विरूद्ध अपील की जानी है (तत्पश्चात् "विवादित मुद्दे के तौर पर संदर्भित"), के संबधं में आय की राशि द्वारा घटाया गया था। आगे, 'प्रभावी कर' में लागू होने वाले अधिभार और अधिकर शामिल होंगे। हालांकि कर में आगे से कोई ब्याज शामिल नहीं होगा केवल तब छोड़कर जब ब्याज को वसूला जाना स्वयं विवाद में हो। यदि ब्याज को वसूलनें का मुद्दा विवादित हो तो ब्याज की राशि कर प्रभावी होगी। यदि प्रतिदाय हानि को कम किया जाता हैं अथवा आय के तौर पर मूल्यांकित किया जाता हैं तो कर प्रभाव में विवादित वृद्धि पर काल्पनिक कर शामिल होगा। जुर्माना आदेश की स्थिति में, कर प्रभाव का अर्थ विरूद्धात्मक अपील किए जाने वाले आदेश में जुर्माने को हटाना अथवा कम करने होगा।
5.2 आगे, जहाँ आय की गणना 'प्रभावी कर' को निर्धारित करने के लिए धारा 115ञ'ख या धारा 115ञ´ग के प्रावधानों के अंतर्गत की जाती है तो निर्धारित की गई कुल आय पर कर निम्नलिखित सूत्र के अनुसार आंका जाएगा -
(क-ख) + (ग-घ)
जहां,
क = धारा 115ञ´ख या धारा 115ञ´ग (यहां सामान्य प्रावधानों के तौर पर ज्ञात) में शामिल प्रावधानों को छोड़कर अन्य प्रावधानों के अनुसार आंकी गई कुल आय
ख = कुल आय जो वसूलनीय होती सामान्य प्रावधानों के अनुसार मूल्यांकित कुल आय को सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत विवादित मुद्दों की राशि द्वारा कम किया गया था
ग = धारा 115ञ´ख या धारा 115ञ´ग में शामिल प्रावधानों के अनुसार निर्धारित कुल आय
घ = कुल आय जो वसूलनीय होती धारा 115ञ´ख या धारा 115ञ´ग में शामिल प्रावधानों के अनुसार मूल्यांकित कुल आय को कथित प्रावधानों के अंतर्गत विवादित मुद्दों की राशि द्वारा कम किया गया था
हालांकि, जहां विवादित मुद्दों की राशि दोनों धारा 115ञ´ख या धारा 115ञ´ग में शामिल प्रावधानों के अंतर्गत और सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत विचारनीय है, ऐसी राशि मद घ के अंतर्गत राशि को निर्धारित करने के दौरान कुल आय से कम नहीं की जाएगी।
5.3 निर्धारण अधिकारी प्रत्येक निर्धारिती के मामले में विवादित मुद्दों के संबंध में प्रत्येक निर्धारण वर्ष के लिए अलग से प्रभावी कर की गणना करेंगे। यदि एक निर्धारिती के मामले में एक निर्धारण वर्ष से अधिक में विवादित मुद्दा उठता है तो अपील ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के संबंध में दाखिल की जा सकती है जिसमें विवादित मुददों के संबंध में प्रभावी कर पैरा 3 में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से अधिक हो। एक ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के संबंध में कोई अपील नहीं की जा सकती जिसमें प्रभावी कर पैरा 4.1 में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम हो। आगे, किसी उच्च न्यायालय या अपीलीय प्राधिकारी के संयुक्त आदेश के मामले में जिसमें एक से अधिक निर्धारण वर्ष और एक निर्धारण वर्ष से अधिक सामान्य मुद्दे शामिल है तो उस एक निर्धारण वर्ष या निर्धारण वर्षों के संबंध में कोई अपील नहीं की जाएगी जिसमें प्रभावी कर पैरा 4.1 में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम हो। यदि जहां एक समग्र आदेश/निर्णय में एक से अधिक निर्धारिती शामिल हो तो प्रत्येक निर्धारिती से अलग से निपटा जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस पैराग्राफ के विषय उक्त पैरा 3.2 के अनुसार है।
5.4 टीडीएस/टीसीएस से जुड़े मामलों के कर प्रभाव की गणना के लिए, कटौतीकर्ता के मूल्यांकन वर्ष के लिए पारित सभी आदेशों के संचयी प्रभाव को ध्यान में रखा जाएगा और इसमें अधिनियम की धारा 201(1क) के तहत ब्याज शामिल होगा।
6.1 ऐसे मामले में जहां किसी न्यायाधिकरण या न्यायालय के समक्ष अपील केवल इस आधार पर दायर नहीं की जाती है कि कर प्रभाव ऊपर निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम है, प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त विशेष रूप से इसे रिकॉर्ड करेंगे
"यद्यपि निर्णय स्वीकार्य नहीं हैं, अपील केवल इस विचार पर नहीं की जा रही कि प्रभावी कर सीबीडीटी परिपत्र दिनांक < > में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम हैं"
6.2 इसके अलावा, ऐसे मामलों में, कोई परिकल्पना नहीं होगी कि आयकर विभाग विवादित मुद्दे पर निर्णय से संतुष्ट नहीं हुआ हैं। आयकर विभाग किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए उसी निर्धारिती अथवा उसी के लिए किसी अन्य निर्धारिती की स्थिति में अथवा किसी अन्य निर्धारण वर्ष की स्थिति में विवादित मुद्दे के समक्ष अपील के दाखिलीकरण से अलग नहीं होगा, यदि कर प्रभाव निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से अधिक होता हैं।
7. पहले भी, बोर्ड के संज्ञान में ऐसे कई मामले आ चुके हैं जिसमें एक निर्धारिती ने इस आधार पर ही न्यायाधिकरण अथवा न्यायलय से राहत का दावा किया कि विभाग ने किसी दूसरे निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती अथवा उसी अथवा अन्य निर्धारण वर्ष के लिए किसी अन्य निर्धारिती ने न्यायाधिकरण अथवा न्यायलय का निर्णय उसी विवादित मुद्दे पर अपील न करके निसंदेह स्वीकार कर लिया। विभागीय प्रतिनिधि/अधिवक्ता को न्यायाधिकरण अथवा न्यायालय के ध्यान में लाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि ऐसे मामलों में अपील नहीं की गई या केवल इसलिए अनुमति नहीं की गई थी कि प्रभावी कर निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम था और इसलिए, ऐसा कोई अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए कि उसमे प्र्रस्तुत निर्णय विभाग को स्वीकार्य था। तद्नुसार, उन्हें न्यायाधिकरण अथवा न्यायालय को यह समझाना चाहिए कि ऐसे मामले का कोई पूर्व उदाहरण नहीं हैं और साथ ही न्यायाधिकरण/न्यायलय के संज्ञान में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 268क की उप-धारा (4) के प्रावधानों भी लाया जाना चाहिए जिनको निम्नानुसार पढ़ा जा सकता है :
"(4) ऐसी अपील या संदर्भ की सुनवाई करने वाले अपीलार्थी न्यायाधिकरण या न्यायालय के उप-धारा (1) के अंतर्गत या परिस्थिति जिसके अंतर्गत ऐसी अपील या संदर्भ के लिए आवेदन किसी मामले में किया गया था या नहीं किया गया था, के अंतर्गत जारी आदेशों, निर्देशों या आज्ञा का सम्मान होगा"
8. इसलिए इस परिपत्र के कारण अपील दाखिल न करने का प्रमाण न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है, प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त कार्यालय में न्यायिक पुस्तिका आसान क्षतिपूर्ति के लिए प्रणालीगत तरीके संभाली जानी चाहिए। ऐसे मामलों में सीबीडीटी की निर्देश सं. 1/2024 दिनांक 09.02.2024 (F.NO. 279/Misc/33/2014-ITJ) के क्रमश: अनुलग्नक -ए1 और ए2 के अनुसार जहां अपील आयकर आयुक्त (न्यायिक)/अपर/संयुक्त आयकर आयुक्त (न्यायिक) कार्यालय को गुण-दोष के आधार पर स्वीकार्य नहीं होने के बावजूद कम कर प्रभाव के कारण अपील दायर नहीं की जा रही है या अपील अपवादों को देखते हुए कम कर प्रभाव के बावजूद की जा रही है। इसके अलावा, आयकर आयुक्त (न्यायिक)/अपर/संयुक्त आयकर आयुक्त (न्यायिक) कार्यालय क्षेत्र के भीतर ऐसी अपीलों में शामिल मुद्दों के संबंध में अपील दायर करने के संबंध में विभागीय रुख को एकत्रित और प्रसारित करेगा।
9. उक्त को सभी संबंधितों के ध्यान में लाया जा सकता है।
10. इसे अधिनियम की धारा 268क के अंतर्गत जारी किया गया है और इस परिपत्र की निगर्मन की तिथि से प्रभावी होगी। यह परिपत्र उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालय/न्ययाधिकरण के समक्ष इसलिए दाखिल किए जाने वाले एसएलपी/अपील पर लागू होगा।
11. हिदीं संस्करण का अनुसरण किया जाना है।
(तनय शर्मा)
संयुक्त आयकर आयुक्त (ओएसडी)-आईटीजे, सीबीडीटी
नई दिल्ली
निम्न को प्रति :
1. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में उससे ऊपर के पद के अन्य समस्त अधिकारी
2. समस्त अधिकारियों के ध्यान में लाने के अनुरोध के साथ समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त तथा समस्त आयकर महानिदेशक
3. भारतीय नियत्रंक एवं महालेखा परीक्षक
4. अतिरिक्त महानिदेशक (सर्तकता), मयूर भवन, नई दिल्ली
5. संयुक्त सचिव एवं कानूनी सलाहकार, विधि एवं न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली
6. समस्त आयक महानिदेशालय तथा आयकर महानिदेशक (राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी), नागपुर
7. अनुवाद के लिए हिन्दी प्रकोष्ठ
8. गार्ड फाइल
संयुक्त आयकर आयुक्त (ओएसडी)-आईटीजे, सीबीडीटी
नई दिल्ली

