आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 3/2024

परिपत्र की तिथि

06/03/2024

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

06/03/2024

 परिपत्र सं. 3/2024

परिपत्र सं. 3/2024

एफ.नं. 370142/5/2024-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(टीपीएल प्रभाग)

दिनांक : 06 मार्च, 2024

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119 के अंतर्गत परिपत्र - संबंधित

आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) (इसके बाद पहली व्यवस्था के रूप में संदर्भित) की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के उप-वाक्यांश (iv) या उप-वाक्यांश (v) या उप-वाक्यांश (vi) या उप-वाक्यांश (viक) में संदर्भित किसी फंड या संस्थान या न्यास या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान या अधिनियम (इसके बाद दूसरी व्यवस्था के रूप में संदर्भित) की धारा 12कक या 12कख के अंतर्गत पंजीकृत कोई न्यास या संस्थान की आय को छूट दी गई है बशर्ते वे अधिनियम की दोनों  व्यवस्थाओं के लिए दी गई कुछ शर्तों को पूरा करते हो। इन शर्तों में अन्य विषयों के साथ-साथ उद्यमों के लिए निम्नलिखित शामिल है (तत्पश्चात् दोनों व्यवस्थाओं में न्यास/संस्थान के तौर पर संदर्भित)

(क) न्यास/संस्थान की आय का कम से कम 85 प्रतिशत वर्ष के दौरान धार्मिक या धर्मांर्थ उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए

(ख) न्यास या संस्थान को अपनी आय का 85 प्रतिशत आवश्यक तौर पर प्रयोग करने की अनुमति है चाहे वह खुद के लिए करें या इसी प्रकार के उद्देश्यों के लिए न्यास को दान करके करें

(ग) यदि अन्य, न्यास/संस्थान को दान की जाती है तो दान यह सुनिश्चित करने के लिए कॉपर्स हेतु नहीं दिया जाना चाहिए कि दान धार्मिक या धर्मांर्थ उद्देश्यों के लिए दान पाने वाले न्यास/संस्थान द्वारा प्रयोग किया गया है

2. धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए इच्छित आवेदन सुनिश्चित करने के लिए, वित्त अधिनियम, 2023 में यह प्रावधान किया गया है कि न्यास/संस्था द्वारा किए गए पात्र दान को ऐसे दान के केवल 85 प्रतिशत तक की सीमा तक धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग के तौर पर माना जाएगा। तदनुसार, वित्त अधिनियम, 2023 ने निम्नलिखित संशोधन किए हैं: -

(क) अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 2 में वाक्यांश (iii) शामिल किया गया है

(ख) अधिनियम की धारा 11 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण 4 में वाक्यांश (iii) को शामिल किया गया है

इन संशोधनों को निम्नानुसार पढ़ा जा सकता है -

(क) धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 2 में वाक्यांश (iii)

उप-वाक्यांश (iv) या उप-वाक्यांश (v) या उप-वाक्यांश (vi) या उप-वाक्यांश (viक) में निर्दिष्ट किसी फंड या न्यास या संस्थान या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान की आय में से जमा या भुगतान की गई कोई भी राशि, बारहवें परंतुक में संदर्भित राशि को छोड़कर, जो उप-वाक्यांश (iv) या उप-वाक्यांश (v) या उप-वाक्यांश (vi) या उप-वाक्यांश (vi) या उप-वाक्यांश (viक) या धारा 12कख, जो भी हो, के अंतर्गत पंजीकृत न्यास या संस्थान में निर्दिष्ट किसी अन्य फंड या ट्रस्ट या संस्थान या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान को दी गई हो उसे ऐसे क्रेडिट या भुगतान की गई राशि के 85 प्रतिशत तक की सीमा तक ही धर्मिक या धर्मांर्थ उद्देश्यों के लिए प्रयोग के तौर पर समझा जाएगा।

(ख) धारा 11 के उप-वाक्यांश (1) स्पष्टीकरण 1 में वाक्यांश (iii)

कोई जमा की गई या दी गई राशि, स्पष्टीकरण 2 में सदर्भित किसी राशि को छोड़कर, धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के उप-वाक्यांश (iv) या उप-वाक्यांश (v) या उप-वाक्यांश (vi) या उप-वाक्यांश (viक) में निÆदष्ट किसी फंड या ट्रस्ट या संस्थान या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान या अधिनियम की धारा 12कख के अंतर्गत पंजीकृत अन्य न्यास या संस्थान, जो भी हो, को जमा या भुगतान की गई कोई भी राशि, स्पष्टीकरण 2 में संदर्भित राशि को छोड़कर, ऐसे क्रेडिट या भुगतान की गई राशि के 85 प्रतिशत तक की सीमा तक ही धर्मिक या धर्मांर्थ उद्देश्यों के लिए प्रयोग के तौर पर समझी जाएगी।

3. ऐसे अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें यह चिंता व्यक्त की गई है कि क्या अन्य न्यास/संस्था को किए गए दान का शेष 15 प्रतिशत कर योग्य होगा या वह 15 प्रतिशत संचय के योग्य होगा, चूँकि वह धन उपलब्ध नहीं होगा क्योंकि वह पहले ही वितरित किया जा चुका है।

4. इस मामले की जांच पैराग्राफ 3 में उठाए गए मुद्दों के संदर्भ में की गई है और यह दोहराया गया है कि पैरा 2 में उल्लिखित दो व्यवस्थाओं में से किसी एक के तहत एक न्यास/संस्था द्वारा दूसरे न्यास/संस्थान को किए गए पात्र दान को ऐसे दान का 85 प्रतिशत तक की सीमा तक ही धर्मार्थ या धार्मिक प्रयोग के रूप में माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि जब कोई न्यास/संस्था किसी भी व्यवस्था में 100 रुपये का दान करता है किसी अन्य न्यास/संस्था को करता है तो उसे धर्मार्थ या धार्मिक गतिविधि के उद्देश्य के लिए 85 प्रतिशत (85 रुपये) तक प्रयोग किया गया है माना जाएगा। यह स्पष्ट किया गया है कि दाता न्यास/संस्था द्वारा ऐसे दान का 15 प्रतिशत (15 रुपये) अधिनियम की धारा 11(5) के तहत निर्दिष्ट मोड में निवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि 100 रुपये की पूरी राशि अन्य न्यास/संस्था को दान किया गया है और तदनुसार पहली या दूसरी व्यवस्था के तहत छूट के लिए पात्र है।

इसे निम्नलिखित उदारण से समझाया गया है जहां न्यास 1, न्यास 2 और न्यास 3 किसी भी दो व्यवस्थाओं के अंतर्गत न्यास या संस्थान है। इसके अलावा, न्यास 1, न्यास 2 को योग्य दान करता है और न्यास 2 आगे न्यास 3 को योग्य दान करता है।

क्र.सं. विवरण न्यास 1 न्यास 2 न्यास 3
1 आय (ए) 300   100   100  
2 आय जो प्रयोग की जानी आवश्यक है (बी = ए का 85 प्रतिशत)   255   85   85
3 आय का प्रयोग            
4 पहली या दूसरी व्यवस्था के अंतर्गत अन्य न्यासों को दान (सी) 100   100     शून्य
5 पंक्ति 3 में किए गए दान के समक्ष आय के प्रयोग के तौर पर विचारनीय राशि [धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 2 के वाक्यांश (iii) या अधिनियम की धारा 11 के उप-वाक्यांश (1) के स्पष्टीकरण 4 के वाक्यांश (iii) के अनुसार] (डी = सी का 85 प्रतिशत)   85   85    
6 प्रयोग के लिए शेष आय (ई = ए-सी) 200   शून्य   100  
7 क्र.सं. 4 को छोड़कर प्रयोग (एफ = ई का 85 प्रतिशत)   170   शून्य   85
8 शेष आय जिसे प्रपत्र सं. 10/9क के बिना संचित किया जा सकता है (जी = ई का 15 प्रतिशत)   30   शून्य   15
9 धारा 11 में निवेश किए जाने वाले फंड (एच = जी)   30   शून्य   15
10 आय की छूट (आई = सी + एफ + जी) 300   100   100  

(सौरभ जैन)

अवर सचिव (टीपीएल) - I, सीबीडीटी

निम्न को प्रति :

1. एफएम का ओएसडी/पोएसी/एमओएस (एफ) का पीएस/ओएसडी

2. वित्त सचिव का पीएस

3. अध्यक्ष और सदस्य, सीबीडीटी

4. संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव, सीबीडीटी

5. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

6. जेएस व कानूनी सलाहकार, विधि व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली

7. भारतीय चार्टेड अकाउंटेंट संस्थान

8. वेब मैनेजर, आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय, विभागीय वेबसाइट incometaxindia.gov.in पर अपलोड के अनुरोध के साथ

9. प्रधान आयकर आयुक्त (मीडिया व तकनीकी नीति) और आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी, नई दिल्ली

10. संयुक्त आयकर आयुक्त, डेटाबेस प्रकोष्ठ irsofficersonline.gov.in पर अपलोडिंग के लिए