परिपत्र सं. 28/2017 : आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत भारत के बाहर ब्याज या शेयर के शोधन की स्थिति में अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 28/2017
परिपत्र की तिथि
07/11/2017
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
07/11/2017
परिपत्र सं. 28/2017
एफ.नं. 500/10/2017-एफटीएंडटीआर-IV
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
दिनांक, 7 नवंबर, 2017
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत भारत के बाहर ब्याज या शेयर के शोधन की स्थिति में अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों पर स्पष्टीकरण
आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 9(1)(i) में शामिल प्रावधानों के अंतर्गत भारत के संबंध में किसी व्यापार के द्वारा या के माध्यम से या भारत में किसी संपत्ति के माध्यम से के द्वारा या भारत में किसी परिसंपत्ति के माध्यम से या के द्वारा या भारत में आय के स्रोत के द्वारा या भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से अर्जित या उपार्जित सभी आय, चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, भारत में अर्जित या उपार्जित होना समझी जाएगी। धारा 9(1)(i) के स्पष्टीकरण 5,6 और 7 आगे कथित प्रावधान के कार्यक्षेत्र को परिभाषित करते हैं।
2. निजी इक्विटी फंड और वेंचर पूंजीगत फंड सहित निवेशगत कोषों द्वारा चिंता व्यक्त की गर्इ है कि अधिनियम में अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों की सीमा के कारण, भारत में निवेश किए जा रहे अनिवासी निवेशगत कोष, जो बहु-स्तरीय निवेश के तौर पर स्थापित है, अनुवर्ती ढ़ांचों के तौर पर स्थापित है, आगामी ऋणमुक्ति या पुर्नखरीद के समय उसी आय के बहु कराधान को झेलता है। ऐसा कराधान पहले तो इसके अल्पकालीन पूंजीगत प्राप्ति/व्यापारिक आय पर भारत में कोष के स्तर पर उत्पन्न होता है और फिर आगामी ऋणमुक्ति या पुर्नखरीद पर कोष श्रृखंला में निवेश के उच्चतम स्तर पर उत्पन्न होता है। बोर्ड ने उन प्रत्यक्ष निवेशक के स्तर से ऊपर के निवेशकों को बाहर रखने का प्रतिनिधित्व प्राप्त किया है जो अधिनियम के अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों की परिधि से ऐसी आय पर भारत में कर हेतु पहले से वसूला जाता है।
3. 1 फरवरी, 2017 को अपने बजटीय भाषण में ऐसी चिंताओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने निर्दिष्ट किया है कि श्रेणी I और श्रेणी II विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआर्इ) को अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों से मुक्त रखा जाएगा। यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि स्पष्टीकरण जारी की जाएगी कि अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधान भारत में निवेश की बिक्री या ऋणमुक्ति में से उत्पन्न होने के परिणामस्वरूप भारत के बाहर ब्याज या शेयरों की ऋणमुक्ति की स्थिति में लागू नहीं होंगे।
4. वित्त अधिनियम, 2017 के द्वारा, श्रेणी I और श्रेणी II एफपीआर्इ को प्रभावी तिथि 01.04.2015 से अधिनियम की धारा 9(1)(i) के स्पष्टीकरण 5 के प्रावधान के समावेशन के माध्यम से अधिनियम के अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों से पहले ही मुक्त किया जा चुका है।
5. बहु-स्तरीय निवेश ढ़ांचे में स्थिति हो सकती है, जहां हित या शेयर एक निवेशगत कोष या एक वेंचर पूंजीगत कंपनी या एक वेंचर पूंजीगत कोष (इसके बाद 'निर्दिष्ट कोष' के तौर पर संदर्भित) में एक अनिवासी द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से संघटित हो, जिसे निर्दिष्ट कोषों, जिसकी आय भारत में कर का विषय हो, द्वारा भारत में संघटित प्रतिभूतियों या शेयरों के स्थानांतरण के परिणामस्वरूप भारत से बाहर एक प्रतिकूल उद्यम में मुक्त किया जाता हो। ऐसे मामलों में, मुक्त उद्यम में शेयर या हित के ऋणमुक्ति पर अप्रत्यक्ष स्थानांतरण प्रावधानों का प्रयोग उसी आय के बहु कराधान का कारण हो सकता है। श्रेणी I और श्रेणी II के संबंध में ऐसा बहु कराधान वित्त अधिनियम, 2017 के माध्यम से अधिनियम की धारा 9(1)(i) के स्पष्टीकरण 5 के परंतुक के समावेशन के कारण स्थान नहीं ले सकेगा।
6. बोर्ड द्वारा मामले की जांच की गर्इ है और यह निर्णय लिया गया है कि उसके स्पष्टीकरण 5 के साथ पठित अधिनियम की धारा 9(1)(i) के प्रावधान निर्दिष्ट कोषों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष (यानी ऐसी आय भारत से बाहर निगमित या पंजीकृत अपस्ट्रीम उद्यमों के माध्यम से) रूप से संघटित इसके शेयर या हित की ऋणमुक्ति या पुर्नखरीद के कारण अनिवासी को अर्जित या उपार्जित आय के संबंध में लागू नहीं होंगे। यदि ऐसी आय निर्दिष्ट कोषों द्वारा भारत में संघटित शेयर या प्रतिभूतियों के स्थानांतरण के परिणामस्वरूप या द्वारा अर्जित या उपार्जित होती है और ऐसी आय भारत में कर के लिए वसूलनीय होती है। हालांकि, उक्त लाभ केवल उन मामलों में लागू होंगे जहां अनिवासी हेतु उत्पन्न पुर्नखरीद या ऋणमुक्ति की प्राप्ति भारत में प्रतिभूतियों या शेयरों के कथित स्थानांतरण से निर्दिष्ट कोषों द्वारा महसूस किए गए कुल प्रतिफल में अनिवासी के प्रो-राटा शेयर से अधिक नहीं होती। आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि निर्दिष्ट कोषों में प्रत्यक्ष रूप से निवेश करने वाला अनिवासी अधिनियम के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार करारोपित होना जारी रहेगा।
इस परिपत्र के लिए
(i) "निवेशगत कोष" का अर्थ अधिनियम की धारा 115पख के स्पष्टीकरण 1 के वाक्यांश (क) में निर्दिष्ट होगा
(ii) '"उद्यम पूंजीगत कंपनी" और "उद्यम पूंजीगत कोष" अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23चख) के स्पष्टीकरण में उनके लिये निर्दिष्ट अर्थ होगा
अमृत अग्रहरी
अवर सचिव [एफटी&टीआर-IV(1) ]
निम्न को प्रति
1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस(आर) का ओएसडी
2. राजस्व सचिव का निजी सचिव
3. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव और उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी के अधिकारी
4. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व प्रधान आयकर महानिदेशक - अपने क्षेत्र/प्रभारों में सभी अधिकारियों के बीच वितरित करने के अनुरोध के साथ
5. प्रधान डीजीआर्इटी (एनएडीटी), प्रधान डीजीआर्इटी(पद्धति) प्रधान डीजीआर्इटी (सतर्कता) प्रधान डीजीआर्इटी (प्रशा.) प्रधान डीजीआर्इटी (एलएंडआर)
6. सीआर्इटी (एमएंडटीपी), सीबीडीटी
7. सीएंडएजी, नर्इ दिल्ली
8. पब्लिक डोमेन पर चस्पा करने के लिए व incometaxindia.gov.in पर अपलोडिंग के लिए वेब मैनेजर
9. irsofficersonline पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ
10. गार्ड फाइल

