परिपत्र सं. 23/2016 : वित्त अधिनियम 2016 के द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 206ग में संशोधन - स्पष्टीकरण संबंधित
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 23/2016
परिपत्र की तिथि
24/06/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
24/06/2016
परिपत्र सं. 23/2016
एफ. नं. 370142/17/2016-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
नर्इ दिल्ली, दिनांक 24 जून, 2016
विषय : वित्त अधिनियम 2016 के द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 206ग में संशोधन - स्पष्टीकरण संबंधित
नगदी अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए, वित्त अधिनियम 2016 में मुहैया कराने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 206ग को संशोधित किया है कि विक्रेता दो लाख रूपए से अधिक की सेवाओं के प्रावधान अथवा कुछ उत्पादों के नकद में बिक्री पर खरीददार से एक प्रतिशत की दर से कर की वसूली करेगा। उत्तरगामी संशोधन हेतु, अधिनियम की धारा 206ग के संशोधित प्रावधानों की स्थिति में अनुसरित होने वाली प्रक्रिया तथा प्रावधानों के क्षेत्र के संबंध में विभिन्न हितधारकों से कर्इ प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए थे। बोर्ड ने हितधारकों के प्रतिनिधियों की जाँच करने के पश्चात्, परिपत्र सं. 22/2016 दिनांक 8 जून, 2016 के द्वारा एफएक्यू जारी किए थे। बोर्ड ने टीसीएस के उद्ग्रहण से संबंधित प्रावधानों की प्रयोज्यता से संबंधित मुद्दे को निम्नानुसार प्रश्न तथा उत्तर के रूप में उक्त परिपत्र हेतु संशोधन के निगर्मन द्वारा जहाँ प्राप्त प्रतिफल बिक्री आंशिक रूप से नकद में तथा आंशिक रूप से चेक द्वारा होती है को आगे स्पष्ट करने का निर्णय लिया है :
प्रश्न 1 : क्या 1 प्रतिशत की दर पर धारा 206ग(1घ) के अंतर्गत स्रोत पर कर संग्रहण उन मामलों में लागू होगा जहाँ प्राप्त बिक्री प्रतिफल आंशिक रूप से नकद में तथा आंशिक रूप से चेक में होती है तथा नकद प्राप्ति दो लाख रूपए से कम होती है ?
उत्तर : नहीं। स्रोत पर कर कटौती को नहीं लगाया जाएगा यदि नकद प्राप्ति दो लाख रूपए से अधिक नहीं होती भले ही बिक्री प्रतिफल दो लाख रूपए से अधिक हो।
उदाहरण : रू. 5 लाख की कीमत वाले उत्पादों को बेचा जाता है जिसके लिए रू. 4 लाख की राशि वाला प्रतिफल चेक द्वारा प्राप्त हो गया है तथा रू. 1 लाख नकद में प्राप्त हो गया है। जैसा कि नकद प्राप्ति रू. 2 लाख से अधिक नहीं है, किसी कर को धारा 206ग(1घ) के अनुसार स्रोत पर एकत्रित करने की आवश्यकता नहीं है।
प्रश्न 2 : क्या धारा 206ग(1घ) के अंतर्गत स्रोत पर कर एकत्रीकरण केवल नकदी अवयव अथवा पूर्ण बिक्री प्रतिफल के संबंध में ही लागू होगी ?
उत्तर : धारा 206ग(1घ) के अंतर्गत, कर को बिक्री प्रतिफल के नकद अवयव पर स्रोत पर एकत्रित किया जाना आपेक्षित है तथा ना कि पूर्ण बिक्री प्रतिफल को।
उदाहरण : रू. 5 लाख की कीमत वाले उत्पादों को बेचा जाता है जिसके लिए रू. 2 लाख की राशि वाला प्रतिफल चेक द्वारा प्राप्त हो गया है तथा रू. 3 लाख नकद में प्राप्त हो गए हैं। कर को रू. 3 लाख की नकद प्राप्ति पर ही धारा 206ग(1घ) के अंतर्गत एकत्रित किया जाना आपेक्षित है तथा ना कि रू. 5 लाख के पूर्ण बिक्री प्रतिफल पर
(पीताम्बर दास)
निदेशक (टीपीएल-III)
निम्न को प्रति :-
1. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अधिकारी
2. ओएसडी से राजस्व सचिव
3. समस्त अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए अनुरोध के साथ समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त तथा समस्त आयकर महानिदेशक
4. प्रधान महानिदेशक, राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, नागपुर
5. प्रधान पद्धति महानिदेशक, एआरए, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली
6. प्रधान सर्तकत महानिदेशक
7. साधारण मेलिंग सूची के अनुसार प्रचार के लिए तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन में मुद्रण के लिए एडीजी (पीआर, पीपी तथा ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली
8. भारतीय नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक
9 आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए एडीजी (पद्धति)
10. गार्ड फाइल
(पीताम्बर दास)
निदेशक (टीपीएल-III)

