आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 16/2019

परिपत्र की तिथि

07/08/2019

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

07/08/2019

 परिपत्र सं. 16/2019

परिपत्र सं. 16/2019 (एफ.नं. 173/149/2019-आईटीए-I), दिनांक 7-8-2019

 

बोर्ड के ध्यान में ऐसे मामले आए हैं कि धारा 143(2)/147 के अंतर्गत नोटिस स्टार्टअप कंपनियों के संबंध में निर्धारण अधिकारियों द्वारा जारी किए गए हैं, औद्योगिक और आंतरिक व्यापार उन्नति विभाग (अब से 'डीपीआईआईटी' के तौर पर संदर्भित) दिनांक 19.2.2019 की अधिसूचना के निगर्मन से पूर्व या बाद में भी जो निपटान के लिए वर्तमान में लंबित हैं। इन कंपनियों को उनकी अधिसूचना दिनांक 19.02.2019 के निगर्मन के बाद डीपीआईआईटी द्वारा प्राधिकृत किया गया है।

2. अधिसूचना सं. जी.एस.आर 127(ई), दिनांक 19.02.2019 के द्वारा डीपीआईआईटी द्वारा निर्दिष्ट किया गया है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 56(2)(viiख) स्टार्टअप कंपनी द्वारा प्राप्त किसी प्रतिफल के लिए लागू नहीं होगी यदि स्टार्ट अपन कंपनी कथित अधिसूचना के पैरा 4(i) और 4(ii) में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करती है और डीपीआईआईटी द्वारा प्राधिकृत होती है।

3. उक्त का पालन करते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने यह जोर देते हुए अधिसूचना सं. 13/2019/एफ.नं. 370142/5/2018-टीपीएल(पीटी.), दिनांक 5 मार्च, 2019 जारी किया था कि कथित अधिनियम की धारा 56 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (viiख) के प्रावधान उन शेयरों के निगर्मन हेतु एक कंपनी द्वारा प्राप्त प्रतिफल के तौर पर लागू नहीं होगा जो ऐसे शेयरों के अंकित मूल्य से अधिक है यदि कथित प्रतिफल एक कंपनी द्वारा एक व्यक्ति, एक व्यक्ति के तौर पर, से प्राप्त हुआ हो जो डीपीआईआईटी द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 19.02.2019 के पैरा 4 में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करता है।

4. उक्त को देखते हुए, निम्नलिखित प्रक्रिया धारा 56(2)(viiख) के निगर्मन को शामिल करते हुए ऐसे स्टार्टअप उद्यमों के निर्धारण के संदर्भ में निर्दिष्ट है

 (i) जहां स्टार्ट अप कंपनी को डीपीआईआईटी द्वारा प्राधिकृत किया गया हो लेकिन मामले को धारा 56(2)(viiख) की एकल प्रयोज्यता के मुद्दे पर "सीमित संवीक्षा" के अंतर्गत चुना जाता है तो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 143(3)/147 के अंतर्गत कार्यवाहियों के दौरान निर्धारण अधिकारी द्वारा ऐसे मुद्दे पर कोई सत्यापन नहीं किया जाएगा और मुद्दे पर ऐसी प्राधिकृत स्टार्ट अप कंपनियों के तर्क को सरसरी तौर पर स्वीकृत किया जाएगा

(ii) जहां स्टार्ट अप कंपनी को डीपीआईआईटी द्वारा प्राधिकृत किया गया हो लेकिन बहु मुद्दों सहित "सीमित संवीक्षा" के अंतर्गत या 56(2)(viiख) के अंतर्गत निर्गम सहित "पूर्ण संवीक्षा" के अंतर्गत चुना गया हो तो धारा 56(2)(viiख) की प्रयोज्यता के मुद्दे निर्धारण कार्यवाही के दौरान नहीं अपनाए जाऐंगे और ऐसे मामलों में अन्य मुद्दों के संबंध में पूछताछ या सत्यापन अपने पर्यवेक्षक अधिकारी की अनुमति के बाद ही निर्धारण अधिकारी द्वारा किया जाएगा। आयकर अधिनियम के अनुसार की जाने वाली कार्यवाही उन अन्य मुद्दों के साथ अनुसरित की जाएगी जिसके लिए मामले को चुना गया है।

(iii) जहां स्टार्टअप कंपनी को डीपीआईआईटी की अनुमति न मिली हो और संवीक्षा, अन्य विषयों के साथ-साथ धारा 56(2)(viiख) की प्रयोज्यता के आधार पर या किसी अन्य मुद्दे के आधार पर चुनी गई हो तो ऐसे मामलों में पूछताछ या सत्यापन भी उसके पर्यवेक्षक अधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही निर्धारण अधिकारी, नियत प्रक्रिया के अनुसार द्वारा की जाएगी