आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 11/2017

परिपत्र की तिथि

24/03/2017

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

24/03/2017

परिपत्र सं. 11/2017

परिपत्र सं. 11/2017

 

एफ.नं. 275/56/2016-आर्इटी (बी)

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली

24 मार्च, 2017

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119(2)(क) के अन्तर्गत आदेश

 

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 201(1क)(i) के अंतर्गत लगाए गए ब्याज की छूट के लिए दिशानिर्देश

 

आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 119 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (क) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (द बोर्ड), एतद्द्वारा निर्देश देता है कि मुख्य आयकर आयुक्त और आयकर महानिदेशक अवधि के लिए और जहां तक मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक ठीक समझे इस आदेश के पैराग्राफ 2 में निर्दिष्ट मामलों की श्रेणी में अधिनियम की धारा 201(1क)(i) के अंतर्गत लगाए गए ब्याज को कम या छूट दे सकते हैं। हालांकि, ऐसे ब्याज की कमी या छूट का आदेश तबतक नहीं दिया जाएगा जबतक धारा 200क, 201(1) या 234ड़, जो भी स्थिति हो, के अंतर्गत प्रमुख मांग को पूरा भुगतान न हो या इन धाराओं के अंतर्गत प्रमुख मांग के भुगतान के लिए संतुष्टिजनक व्यवस्था न की गर्इ हो। मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर महानिदेशक ब्याज की कथित कटौती या छूट के लिए किसी अन्य शर्त को लागू कर सकता है जो उसे ठीक लगे।

2. मामलों की श्रेणी जिसमें धारा 201(1क)(i) के अंतर्गत ब्याज की कटौती या छूट पर विचार किया जा सकता है, निम्नानुसार है :

  (i) जहां आयकर अधिनियम की धारा 132 या अन्यथा के अंतर्गत खोज और जब्ती की कार्यवाही के दौरान बही खाते और अन्य दस्तावेजों जो अधिनियम के अध्याय XVIIख के अंतर्गत कटौती करने के लिए आवश्यक है को जब्त किया गया था और निर्धारिती निर्दिष्ट समय के अंतर्गत अपने बही खाते में किसी खाते (चाहे "'संदेही खाता" हो या किसी अन्य नाम से जाना जाए') में किसी जमा से स्त्रोत पर कर कटौती न करता हो।

 (ii) जहां कोर्इ दी गर्इ या दी जाने वाली राशि क्षेत्राधिकारी उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आधार पर कटौतीकर्ता की स्थिति में स्त्रोत पर कर की कटौती के लिए उत्तरदायी नहीं थी और परिणामस्वरूप, वह ऐसी राशि के संबंध में स्त्रोत पर कर कटौती नहीं की, कानून के किसी पूर्वव्यापी संशोधन या भारत की उच्चतम न्यायालय या किसी कार्यवाही में क्षेत्राधिकारी उच्च न्यायालय की बड़ी बेंच(जिसका उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती न दी गर्इ हो और अंतिम हो गया हो), जो भी स्थिति हो, का निर्णय के परिणामस्वरूप, कर ऐसे वित्त वर्ष के दौरान कटौतीकर्ता द्वारा काटे जाने वाले या काटा गया था ऐसी दी गर्इ राशि या देययोग्य राशि पर कर कटौती से कम होना पाया गया था।

(iii) जहां धारा 201 के अंतर्गत चूक भारत के निर्दिष्ट क्षेत्र से बाहर जिसके साथ भारत ने अधिनियम की धारा 90 या 90क के संबंध में या एक देश के निवासी के तौर पर एक गैर-निवासी (एक विदेशी कंपनी सहित) को किए गए भुगतान के संबंध में अधिनियम की धारा 195 के अंतर्गत कर की न्यून कटौती या गैर-कटौती से संबंधित हो और जहां—

 (ड़) कथित भुगतान के संबंध में भारत में देययोग्य कर से संबंधित एक विवाद अधिनियम की धारा 90 या 90क के अंतर्गत कथित समझौते के अंतर्गत आयकर नियम, 1962 के नियम 44ज में निर्दिष्ट भारत में सक्षम प्राधिकारी को संदर्भित किया गया था;

 (च) ऐसा संदर्भ तिथि जिस पर देययोग्य कर को निर्धारित करने वाला मांग पत्र धारा 201 के अंतर्गत चूककर्ता व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया था, से दो वर्षों की अवधि के अंदर भारत में सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्राप्त की गर्इ हो;

 (ड) विवाद को कथित समझौते में मुहैया करार्इ गर्इ आपसी समझौता प्रक्रिया (एमएपी) के अंतर्गत प्राप्त समाधान के रूप में मुहैया कराया गया हो;

 (ज) धारा 201 के अंतर्गत चूककर्ता व्यक्ति समाधान को स्वीकृति दी हो और आयकर नियम के नियम 44ज की उप-धारा (4) के अर्थ के अंतर्गत मुद्दे पर लंबित उसकी अपील को निरस्त किया हो तिथि जिस पर समाधान उसे संप्रेषित किया गया हो से एक महीने के अंदर।

3. भले धारा 201(1क)(i) के अंतर्गत ब्याज कटौतीदाता द्वारा दिया गया हो, इसे छूट के लिए विचार किया जा सकता है, उक्त शर्तों के अनुसार और एक प्रतिदाय कटौतीदाता को दी जा सकती है, यदि छूट का आदेश दिया गया हो।

4. इस आदेश के अंतर्गत ब्याज की छूट के लिए एक आवेदन की जांच करने वाले मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर महानिदेशक आवेदक को सुनवार्इ का उपयुक्त अवसर दिए जाने के बाद एक सकारण आदेश पारित कर सकते हैं

5. बोर्ड के पास मुख्य आयकर आयुक्त या आयकर महानिदेशक, जो भी स्थिति हो, द्वारा एक पारित आदेश या पारित न होने वाले आदेश में से उठे हुए मुद्दों की जांच का अधिकार है और इस आदेश के उचित क्रियान्वयन के लिए इन प्राधिकारियों को उपयुक्त निर्देश देने का अधिकार है। हालांकि, ऐसे प्राधिकारियों पर पारित आदेश के समक्ष अपील को कोर्इ मूल्यांकन बोर्ड द्वारा विचारनीय नहीं होगा।

 

हिदी संस्करण अनुसरित होगा।

 

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार

दूरभाष : 23094182

र्इमेल : sandeep.singh68@nic.in

 

  1. अध्यक्ष, सदस्य और सीबीडीटी में अन्य समस्त अधिकारी

  2. प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेश - अपने क्षेत्रों/प्रभारों में समस्त अधिकारियों के बीच वितरित करने के अनुरोध के साथ

  3. आयुक्त (मीडिया व तकनीकी नीति) और आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी

  4. अतिरिक्त आयकर महानिदेशक (पीआर, पीपी व ओएल)

  5. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय

  6. एडीजी (पद्धति)-IV विभागीय वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए

  7. आर्इआरएस कार्यालय वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए डाटाबेस प्रकोष्ठ

  8. गार्ड फाइल