परिपत्र सं. 10/2017 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 145(2) के अंतर्गत अधिसूचित आय की गणना और प्रकटीकरण मानकों (आर्इसीडीएस) पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 10/2017
परिपत्र की तिथि
23/03/2017
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
23/03/2017
परिपत्र सं. 10/2017
एफ.नं. 133/23/2016-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
*****
तिथि : 23 मार्च, 2017
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 145(2) के अंतर्गत अधिसूचित आय की गणना और प्रकटीकरण मानकों (आर्इसीडीएस) पर स्पष्टीकरण
1. आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 145 की उप-धारा (1) बताती है कि शीर्षक "व्यापारिक या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत वसूलनीय आय, उप-धारा (2) के प्रावधानों के अनुसार, या तो नगद या निर्धारिती द्वारा नियोजित नियमित लेखांकन के व्यापारिक प्रणाली के अनुसार आंकी जाएगी। धारा 145 की उप-धारा (2) बताती है कि केंद्र सरकार आय की किसी श्रेणी के लिए या निर्धारिती की किसी श्रेणी के लिए आय की गणना और प्रकटीकरण मानक (आर्इसीडीएस) को अधिसूचित कर सकते हैं। तद्नुसार, केंद्र सरकार ने प्रभावी निर्धारण वर्ष 2016-17 से अधिसूचना सं. एस.ओ. 892(र्इ) दिनांक 31 मार्च, 2015 के द्वारा 10 आर्इसीडीएस को अधिसूचित किया है।
आर्इसीडीएस की अधिसूचना के बाद, इसे हितधारकों द्वारा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ('द बोर्ड') के ध्यान में लाया गया है कि आर्इसीडीएस के कुछ प्रावधान उचित क्रियान्वयन के लिए संशोधन/स्पष्टीकरण की मांग कर सकते हैं। मामले को एक विशेषज्ञ समिति को संदर्भित किया गया था। समिति ने इस संबंध में हितधारकों से विधिवत रूप से विचार विमर्श करने के बाद आर्इसीडीएस के निर्विघ्न कार्यान्वयन के लिए दो स्तरीय दृष्टिकोण की सिफारिश की है यानी कुछ मुद्दों के संबंध में आर्इसीडीएस के प्रावधानों का संशोधन और बाकी मुद्दों के लिए एफएक्यू के रूप में स्पष्टीकरण का निगर्मन। तद्नुसार, अधिसूचनां सं. 87 दिनांक 29 सितम्बर, 2016 के द्वारा केंद्र सरकार ने निर्धारण वर्ष 2017-18 से प्रभावी संशोधित आर्इसीडीएस को अधिसूचित किया है।
आगे, मुद्दे जिनको अग्रिम स्पष्टीकरण की आवश्यकता है उस पर बोर्ड द्वारा विचार किया गया है और निम्नलिखित स्पष्टीकरण जारी किए गए हैं :
प्रश्न 1 : आर्इसीडीएस-I की प्रस्तावना निर्दिष्ट करती है कि यह आर्इसीडीएस शीर्षक "व्यापार या पेशे से लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत वसूले जाने वाली आय की गणना के लिए लागू है और बही खातों के अनुरक्षण के लिए नहीं। हालांकि, आर्इसीडीएस I का पैरा 1 निर्दिष्ट करता है कि यह महत्वपूर्ण लेखांकन नीतियों से व्यवहार करता है। लेखांकन नीतियां बही खातों के अनुरक्षण और वित्तीय विवरण तैयार करने के लिए लागू है। आर्इसीडीएस-I और बही खातों के अनुरक्षण के बीच क्या परस्पर क्रिया है ?
उत्तर : जैसाकि प्रस्तावना में निर्दिष्ट है, आर्इसीडीएस को बही खातों के अनुरक्षण या वित्तीय विवरण को तैयार करने के लिए नहीं बनाया गया। व्यक्ति को बही खाता अनुरक्षित और उन पर लागू लेखांकन नीतियों के अनुसार वित्तीय विवरण को तैयार करना आवश्यक है। उदाहरण के लिए कंपनियों को कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार बही खातों को बनाए रखने और वित्तीय विवरण को तैयार करना आवश्यक है। आधारभूत प्रकार की होने के नाते आर्इसीडीएस-I में निर्दिष्ट लेखांकन नीतियां शीर्षक "व्यापारिक या पेशे से लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" के लिए लागू होगा।
प्रश्न 2 : कुछ आर्इसीडीएस प्रावधान न्यायिक उदाहरणों के साथ असंगत है। क्या यह न्यायिक उदाहरण आर्इसीडीएस पर प्रबल होंगे ?
आर्इसीडीएस को उचित विचार-विमर्श के बाद और इसके द्वारा कवर किए गए मुद्दों पर निश्चितता लाने के लिए न्यायिक दृष्टिकोण की जांच करने के बाद अधिसूचित किया गया है। कुछ न्यायिक घोषणाएं शीर्षक "व्यापारिक या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत आय की गणना के लिए अधिनियम के अंतर्गत इन मुद्दों पर आधिकारिक दिशानिर्देश में निश्चित की गर्इ थी। चूंकि निश्चितता धारा 145(2) के अंतर्गत आर्इसीडीएस द्वारा अब मुहैया करार्इ गर्इ है, आर्इसीडीएस के प्रावधान निर्धारण वर्ष 2017-18 और उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के संबंध में उसमें निपटाए गए लेनदेन संबंधी मुद्दे पर लागू होगा।
प्रश्न 3 : क्या आर्इसीडीएस उस गैर-निगमित करदाताओं के लिए लागू हो सकता है जिसे बही खातों को अनुरक्षित रखना आवश्यक नहीं है/या जो कराधान अधिनियम की धारा जैसे धारा 44कघ, 44कड़, 44कघक, 44ख, 44खख, 44खखक आदि की प्रकल्पित योजना के अंतर्गत आते हैं ?
उत्तर : आर्इसीडीएस शीर्षक "व्यापारिक या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत वसूलनीय आय रखने वाले निर्दिष्ट व्यक्तियों के लिए लागू है। इसलिए आर्इसीडीएस के प्रासंगिक प्रावधान प्रासंगिक प्रकल्पित कराधान योजना के अंतर्गत आय की गणना करने वाले व्यक्तियों के लिए भी लागू होगा। उदाहरण के लिए, अधिनियम की धारा 44कघ के अंतर्गत सांझेदार फर्म की प्रकल्पित आय की गणना के लिए, निर्माण अनुबंध या राजस्व मान्यता पर आर्इसीडीएस के प्रावधान प्राप्ति या कारोबार, जो भी स्थिति हो, को निर्धारित करने के लिए लागू होगी।
प्रश्न 4 : यदि आर्इसीडीएस और नियमों के नियम 9क, 9ख आदि अन्य जैसे आय के कराधान को शासित करने वाले आयकर नियम, 1962 ('नियम') के अन्य निर्दिष्ट प्रावधानों के बीच विवाद हो तो कौन से प्रावधान प्रचलित होंगे ?
उत्तर : आर्इसीडीएस आय की गणना के लिए सामान्य सिद्वांतों को मुहैया कराता है। नियमों के और आर्इसीडीएस के प्रावधानों के बीच विवाद, यदि हो की स्थिति में नियमों के प्रावधान, जो विशिष्ट परिस्थितियों के साथ व्यवहार करता है, प्रचलित होंगे।
प्रश्न 5 : आर्इसीडीएस को पूर्व कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 211(3ग) के अंतर्गत अधिसूचना सं. जीएसआर 739(र्इ) दिनांक 7 दिसंबर 2006 के द्वारा कार्पोरेट मामला मंत्रालय (एमसीए) द्वारा अधिसूचित लेखांकन मानकों के आधार पर तैयार है। हालांकि, एमसीए ने "भारतीय लेखांकन मानक" (आर्इएनडी-एएस) नामक ममलों के नए संग्रह को फरवरी 2015 में अधिसूचित किया है। आर्इसीडीएस किस प्रकार उन कंपनियों पर लागू होगा जिन्होंने आर्इएनडी-एएस को अपनाया है ?
उत्तर : आर्इसीडीएस आयकर अधिनियम के अंतर्गत शीर्षक "व्यापारिक या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत आय की गणना के लिए लागू होगा। यह कंपनियों द्वारा अपनाए गए लेखांकन मानक के बावजूद है यानी किसी भी लेखांकन मानक या आर्इएनडी-एएस के बावजूद।
प्रश्न 6 : क्या आर्इसीडीएस अधिनियम की धारा 115ञख के अंतर्गत न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) या वैकल्पिक न्यूनतम कर (एमएटी) की गणना के लिए लागू होगा ?
उत्तर : अधिनियम की धारा 115ञख के अंतर्गत मैट 'बही लाभ' पर आंका जाता है जो निविल लाभ है जैसा कुछ निर्दिष्ट समायोजनों के अनुसार कंपनी अधिनियम के अंतर्गत तैयार लाभ और हानि खाते में दर्शाया गया है। चूंकि, आर्इसीडीएस के प्रावधान अधिनियम के नियमित प्रावधानों के अंतर्गत आय की गणना के लिए लागू है, आर्इसीडीएस के प्रावधान मैट की गणना के लिए लागू नहीं होगा।
अधिनियम की धारा 115ञग के अंतर्गत एएमटी समायोजित कुल आय पर आंका जाता है जिसे अधिनियम के नियमित प्रावधानों के अनुसार आंकी गर्इ कुल आय के लिए निर्दिष्ट समायोजन करके प्राप्त किया है। इसलिए आर्इसीडीएस के प्रावधान एएमटी की गणना के लिए लागू होगा।
प्रश्न सं. 7 : क्या आर्इसीडीएस के प्रावधान बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त संस्थान, बीमा कंपनियों, विद्युत क्षेत्र आदि पर लागू होंगे ?
उत्तर : आर्इसीडीएस के सामान्य प्रावधान सभी व्यक्तियों के लिए लागू होंगे जबतक आर्इसीडीएस या अधिनियम में शामिल विशेष क्षेत्र से संबंधित प्रावधान न हों। उदाहरण के लिए, आर्इसीडीएस VIII में बैंक और कुछ वित्तीय संस्थानों के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल होते हैं और अधिनियम की अनुसूची I में बीमा व्यापार के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल हैं।
प्रश्न 8 : आर्इसीडीएस-I का पैरा 4(ii) मुहैया कराता है कि बाजार से बाजार (एमटीएम) हानि या एक संभावित हानि को मान्यता नहीं दी जाएगी जबतक पहचान किसी अन्य आर्इसीडीएस के प्रावधानों के अनुसार न हो। क्या समकक्ष प्रतिफल एमटीएम प्राप्ति या संभावित आय की मान्यता पर लागू होगा?
उत्तर : एमटीएम हानि या एक संभावित हानि से संबंधित आर्इसीडीएस-I में शामिल वही सिद्धांत एमटीएम प्राप्ति या एक संभावित लाभ हेतु यथोचित परिवर्तन सहित लागू होंगे ।
प्रश्न 9 : आर्इसीडीएस-I मुहैया कराता है कि एक लेखांकन नीति 'उपयुक्त कारणों' के बिना परिवर्तित नहीं होगी। शब्द 'उपयुक्त कारण' परिभाषित नहीं है। क्या 'उपयुक्त कारण' को निर्मित करेगा ?
उत्तर : अधिनियम के अंतर्गत, 'उपयुक्त कारण' मौजूदा संकल्पना है और योग्य मामलों में करदाताओं को इच्छित लचीलेपन को प्रदान करते हुए समय के साथ विकसित हो चुकी है।
प्रश्न 10 : कौनसा आर्इसीडीएस व्युत्पन्न साधन को शासित करेगा ?
उत्तर : आर्इसीडीएस-VI(आर्इसीडीएस -VIII के पैरा 3 के अनुसार) व्युत्पन्न अनुबंधों के लिए लेखांकन पर दिशानिर्देश मुहैया कराता है जैसे कि अग्रेषित अनुबंध और अन्य समकक्ष अनुबंध। व्युत्पन्न के लिए, आर्इसीडीएस-VI के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत, आर्इसीडीएस-I के प्रावधान लागू होंगे।
प्रश्न 11 : क्या प्रतिधारण राशि, जिसकी प्राप्ति कुछ प्रदर्शन मापदंड की संतुष्टि पर प्रासंगिक है, की पहचान बिलिंग पर राजस्व के तौर पर स्वीकृत होनी है ?
उत्तर : प्रतिधारण राशि, समग्र अनुबंध राजस्व के भाग के तौर पर, अनुबंधात्मक अनुबंधों पर आर्इसीडीएस-III के पैरा 9 में शामिल इसकी अंतिम अनुबंध एकत्रीकरण शर्त की उपयुक्त रूप से निश्चितता के अनुसार राजस्व के तौर पर स्वीकृत होगी।
प्रश्न 12 : चूंकि रियल एस्टेट डेवलेपर और राजस्व मान्यता पर आर्इसीडीएस-IV द्वारा बिल्ड-ऑपरेशन स्थानांतरण (बीओटी) के लिए कोर्इ विशिष्ट कार्यक्षेत्र अपवर्जन नहीं है, कृपया स्पष्ट करें कि क्या आर्इसीडीएस-III और आर्इसीडीएस-IV रियल एस्टेट और बीओटी संचालकों द्वारा लागू होना चाहिए, साथ ही, क्या आर्इसीडीएस पट्टेदारी के लिए प्रयोज्य है।
उत्तर : वर्तमान में, किसी विशिष्ट आर्इसीडीएस को रियल एस्टेट डेवलेपर, बीओटी परियोजनाओं और पट्टेदारी के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है। इसलिए, अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान और आर्इसीडीएस इन लेनदेनों के लिए लागू होगी जैसा लागू हो।
प्रश्न 13 : अंतिम एकत्रीकरण की उपयुक्त निश्चितता की शर्त ब्याज, रायल्टी और लाभांश के लिए निर्धारित नहीं है। क्या करदाता ऐसी आय के लिए खाते हेतु बाध्य है यहाँ तक कि उसका एकत्रीकरण अनिश्चित हो ?
उत्तर : सिद्धांत के तौर पर, ब्याज समय आधार पर उपार्जित होता है और रायल्टी अनुबंधात्मक शर्तों के आधार पर उपार्जित होती है। इसी प्रकार से किसी भी मामले में गैर-वसूली धारा 36(1)(vii) को देखते हुए कटौती के तौर पर दावा किया जा सकता है। आगे, अधिनियम का प्रावधान आर्इसीडीएस के प्रावधानों पर प्रचलित (उदाहरण धारा 43घ) होगी।
प्रश्न 14 : क्या आर्इसीडीएस उन राजस्वों पर लागू है जो अधिनियम की धारा 155क के अंतर्गत गैर-निवासियों के लिए ब्याज, रॉयल्टी और तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क जैसे सकल आधार पर कर हेतु उत्तरदायी है।
उत्तर : हां, आर्इसीडीएस के प्रावधान कर हेतु वसूलनीय राशि पर आने के लिए सकल आधार पर इन आय की गणना के लिए भी लागू होगी।
प्रश्न 15 : आर्इसीडीएस-V का पैरा 8 टेस्ट रन पर किए गए व्यय सहित परियोजना के प्रवर्तन पर किए गए व्यय को निर्दिष्ट करता है और प्रयोगात्मक उत्पादन पूंजीकृत होगा। यह भी निर्दिष्ट करता है कि प्लांट के वाणिज्यिक उत्पादन यानि बिक्री या सीमित उपभोग के लिए इच्छित उत्पादन, के बाद किए गए व्यय को राजस्व व्यय के तौर पर समझा जाएगा। टेस्ट रन और प्रायोगिक उत्पादन हो सके लेकिन बाद में वाणिज्यिक उत्पादन के वाणिज्यिकीकरण से पहले किए गए व्यय का उपचार क्या होगा ?
उत्तर : जैसा आर्इसीडीएस-V का पैरा 8 में स्पष्ट किया है, संयंत्र के वाणिज्यिक उत्पादन, जो बिक्री या सीमित उपभोग के लिए इच्छित उत्पादन करता है, प्रारंभ करने तक किया गया व्यय पूंजीगत व्यय के तौर पर समझा जाएगा।
प्रश्न 16 : लेखांकन मानक (एएस) 11 के अनुसार स्वीकृत गैर-एकीकृत विदेशी संचालन, यदि हो, से संबंधित विदेशी मुद्रा लेनदेन आरश्रित निधि (एफसीटीआर) की 1 अप्रैल 2016 के अनुसार प्रारंभिक शेष की करदेयता क्या है ?
उत्तर : गैर-एकीकृत संचालनों के लिए मौद्रिक मदों पर विनिमय विभिन्नताओं से संबंधित 1 अप्रैल 2016 के अनुसार एफसीटीआर शेष पिछले वर्ष में आंकी गर्इ आय में प्राधिकृत न होने की सीमा तक निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष में स्वीकृत होगी।
प्रश्न 17 : 1 अप्रैल 2016 से पहले प्राप्त सब्सिडी के लिए लेकिन संबंधित शर्तों के संतुष्टिकरण हेतु लंबित बही में स्वीकृत न हो और प्राप्ति की उपयुक्त निश्चितता को प्राप्त करता हो तो इसे 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद आर्इसीडीएस के अंतर्गत स्वीकृत किया जाएगा ?
उत्तर : आर्इसीडीएस-VII के पैरा 5 से पैरा 9 के साथ पढ़े जाने वाले आर्इसीडीएस-VII के पैरा 4, सरकारी अनुदान की मान्यता के समय निर्धारण के लिए मुहैया कराया गया है। आर्इसीडीएस-VII के पैरा 13 में माध्यमिक प्रावधान बताता है कि एक सरकारी अनुदान जो 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद पहचान मापदंड को पूरा करता हो, आर्इसीडीएस-VII के अनुसार स्वीकृत होगा। 1 अप्रैल 2016 से पहले वास्तविक रूप से प्राप्त किए गए सभी सरकारी अनुदान आर्इसीडीएस-VII के पैरा 4(2) के अनुसार इसकी प्राप्ति पर स्वीकृत होने के तौर पर समझे जाऐंगे और तद्नुसार माध्यमिक प्रावधान से बाहर होंगे और इसलिए 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद प्राप्त सरकारी अनुदान ओैर जिसके लिए आर्इसीडीएस-VII के पैरा 5 से पैरा 9 में मान्यता संबंधी योग्यता मुहैया करार्इ गर्इ है, भी संतुष्ट करनी है उसके बाद, इसे आर्इसीडीएस-VII के प्रावधानों के अनुसार पहचाना जाएगा। 1 अप्रैल 2016 से पहले प्राप्त अनुदान उस तिथि से पहले के प्रचलित कानूनों के अनुसार पहचाना जाना जारी रहेगा।
उदाहरण के लिए, यदि 10 करोड़ की कुल सब्सिडी पात्रता में से 6 करोड़ 31 मार्च 2016 तक बही खातों में मान्य होते हैं और शेष 4 करोड़ की पहचान प्राप्ति की उपयुक्त निश्चितता को हासिल करने और/या संबंधित शर्तों को पूरा करने के स्थगित रूप से अधिनिर्णित हो। शेष 4 करोड़ पर उस वर्ष में कर लगाया जाएगा जिसमें संबंधित शर्तें पूरी होती हैं और उपयुक्त निश्चितता प्राप्त होती है। यदि यह शर्ते दो वर्षों के अंदर पूरी होती है तो 4 करोड़ की राशि पर दो वर्षों में कर लगाया जाएगा। 6 महीने की राशि जिसके लिए मान्यता मापदंड 1 अप्रैल 2016 से पहले पूरे हुए थे, उन पर 1 अप्रैल 2016 से पहले कर नहीं लगेगा।
लेकिन अगर सब्सिडी 1 अप्रैल 2016 से पहले ही प्राप्त हो चुकी हो तो आर्इसीडीएस-VII का पैरा 13 लागू नहीं होगा भले ही कुछ संबंधित शर्तें 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद लागू होती हों। यह आर्इसीडीएस-VII के पैरा 4(2) को देखते हुए है जो मुहैया कराता है कि सरकारी अनुदान को वास्तविक प्राप्ति की तिथि से आगे नहीं किया जा सकता। ऐसा अनुदान 1 अप्रैल 2016 से पहले लागू कानून के प्रावधानों द्वारा शासित होना जारी रहेगा।
प्रश्न 18 : यदि करदाता 30 अप्रैल 2017 को प्रतिभूति बेचता है। ब्याज भुगतान तिथियां दिसंबर और जून हैं। ब्याज की प्राप्ति की वास्तविक तिथि 30 जून 2017 को है लेकिन संग्रहण आधार पर ब्याज 31 मार्च 2017 को आय के तौर पर लेखांकित हुर्इ। क्या करदाता ऐसे ब्याज यानी कर हेतु प्रस्तुति लेकिन पूंजीगत प्राप्ति की गणना के दौरान प्राप्त नहीं, की कटौती का दावा करने के लिए स्वीकृत होगा ?
उत्तर : हाँ, संग्रहण आधार पर ब्याज आय के तौर पर पहले से करारोपित राशि ऐसी बिक्री से उत्पन्न आय की गणना के लिए विचारनीय होगी।
प्रश्न 19 : प्रतिभूतियों पर आर्इसीडीआर-VIII का पैरा 9 अपेक्षा करता है कि व्यापारिक माल के तौर पर इकट्ठी की गर्इ प्रतिभूतियाँ उस पिछले वर्ष की समाप्ति पर निविल वसूल योग्य राशि (एनआरवी) या प्रारंभिक स्तर पर पहचानी गर्इ वास्तविक लागत पर मूल्यांकित होगी, जो भी कम हो। आर्इसीडीएस-VIII का पैरा -क के पैरा 10 श्रेणी वार किए जा रहे कथित कार्य की अपेक्षा करता है। इसे कैसे आंका जाएगा ?
उत्तर : व्यापारिक माल के तौर पर संघटित प्रतिभूतियों के उत्तरगामी परिमाप के लिए, प्रतिभूतियाँ पहले कुल श्रेणी वार है। सकल लागत और प्रतिभूति की प्रत्येक श्रेणी का एनआरवी आंका गया है और दोनों का न्यूनतम आर्इसीडीएस-VIII के अनुसार वहनीय राशि के तौर पर लिया जाना है। इसे निम्न उदाहरण द्वारा दर्शाया है
| प्रतिभूति | श्रेणी | लागत | एनआरवी | लागत का न्यून या एनआरवी | आर्इसीडीएस राशि |
| क | शेयर | 100 | 75 | 75 | |
| ख | शेयर | 120 | 150 | 120 | |
| ग | शेयर | 140 | 120 | 120 | |
| घ | शेयर | 200 | 190 | 190 | |
| कुल | 560 | 535 | 505 | 535 | |
| ड़ | ऋण प्रतिभूति | 150 | 160 | 150 | |
| च | ऋण प्रतिभूति | 105 | 90 | 90 | |
| छ | ऋण प्रतिभूति | 125 | 135 | 125 | |
| ज | ऋण प्रतिभूति | 220 | 230 | 220 | |
| कुल | 600 | 615 | 585 | 600 | |
| कुल प्रतिभूतियाँ | 1160 | 1150 | 1090 | 1135 | |
प्रश्न 20 : नियमों के साथ पठित अधिनियम में विशिष्ट प्रावधान हैं जिसके अंतर्गत ऋण लागत का अनुपात अधिनियम की धाराओं जैसे 14क, 43ख, 40(क)(i), 40(क)(iक), 40क(2)(ख) आदि के अंतर्गत अस्वीकृत हो सकते हैं। क्या आर्इसीडीएस-IX के अंतर्गत पूंजीकृत होने की ऋण लागत उस ऋण लागत के भाग से बाहर होनी चाहिए जो ऐसे विशिष्ट प्रावधानों के अंतर्गत अस्वीकृत होती है ?
उत्तर : चूंकि अधिनियम के विशिष्ट प्रावधान आर्इसीडीएस के प्रावधानों को रद्द करती है, यह स्पष्ट है कि आर्इसीडीएस IX के अंतर्गत पूंजीकृत होने के लिए समझे जाने वाली ऋण लागत उन ऋण लागतों को बाहर करेगा जो अधिनियम के विशिष्ट प्रावधानों के अंतर्गत अस्वीकृत है। ऋण लागत का पूंजीकरण ऋण लागत के उस भाग के लिए लागू होगा जो अधिनियम के अंतर्गत कटौती के तौर पर अन्यथा अस्वीकृत है।
प्रश्न 21 : क्या बिल बट्टाकरण ऋण और अन्य समकक्ष ऋण, ऋण लागत की परिभाषा के अंतर्गत आऐंगे ?
उत्तर : ऋण लागत की परिभाषा एक समावेशी परिभाषा है। बिल बट्टाकरण ऋण और अन्य समकक्ष शुल्क ऋण लागत के तौर पर आवृत्त है।
प्रश्न 22 : विभिन्न अर्ह परिसंपत्तियों हेतु आर्इसीडीएस-IX के पैरा 6 के अंतर्गत मुहैया कराए गए फॉर्मूला के अनुसार आंके गए सामान्य ऋण से संबंधित ऋण लागत का कैसे आवंटन होता है ?
उत्तर : आर्इसीडीएस-IX के अंतर्गत सामान्य ऋण का पूंजीकरण परिसंपत्ति-सह-परिसंपत्ति आधार पर किया जाएगा।
प्रश्न 23 : माध्यमिक प्रावधानों सहित आर्इसीडीएस-X के पैरा 20 के क्या प्रभाव है ?
उत्तर : आर्इसीडीएस X के पैरा 20 मुहैया कराते हैं कि सभी प्रावधान और परिसंपत्तियां और संबंधित आय 31 मार्च 2016 को या उससे पहले समाप्त होने वाले किसी पिछले वर्ष के लिए स्वीकृत राशि, यदि हो, को विचार में लेने के बाद इस मानक के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी पिछले वर्ष के लिए स्वीकृत होना चाहिए।
माध्यमिक प्रावधान का आश्य है कि जहां आर्इसीडीएस के प्रयोग के कारण आय का 'दोहरा कराधान' होना चाहिए ना ही विशेष तिथि से आर्इसीडीएस के प्रयोग के कारण किसी आय का बचाया जाना चाहिए। इसकी निम्नानुसार व्याख्या की जा सकती है -
| 31 मार्च 2016 से आगे लाए गए मदों के लिए 31 मार्च 2017 पर आर्इसीडीएस के अनुसार आपेक्षित प्रावधान......(क) | आर्इएनआर 3 करोड़ |
| वित्त वर्ष 2016-17 के लिए आर्इसीडीएस के अनुसार प्रावधान......(ख) | आर्इएनआर 5 करोड़ |
| कुल सकल प्रावधान......(ग)=(क)+(ख) | आर्इएनआर 8 करोड़ |
| घटा वित्त वर्ष 2016-17 या उससे पहले में कराधान आय की गणना के लिए पहले से स्वीकृत प्रावधान......(घ) | आर्इएनआर 2 करोड़ |
| माध्यमिक प्रावधान के अनुसार स्वीकृत होने के लिए वित्त वर्ष 2016-17 में आर्इसीडीएस के अनुसार निविल प्रावधान............(ड़)=(ग)-(घ) | आर्इएनआर 6 करोड़ |
प्रश्न 24 : सबसे बाद की सेवानिवृत्ति पर व्यय जैसे भविष्य निधि, ग्रेचुएटी आदि विशिष्ट प्रावधानों के अंतर्गत हैं। कंपनियों द्वारा अन्य परा-सेवानिवृत्ति लाभ भी दिए जाते हैं जैसे चिकित्सा लाभ। ऐसे लाभ एएस-15 के अंतर्गत है जिसके लिए कोर्इ समानंतर आर्इसीडीएस अधिसूचित नहीं किया गया है। क्या इन देयताओं के लिए प्रावधान आर्इसीडीएस X के कार्यक्षेत्र से बाहर है ?
उत्तर : यह स्पष्ट है कि कर्मचारी लाभ के लिए प्रावधानीकरण एस 15 के अंतर्गत है जो अधिनियम के विशिष्ट प्रावधानों द्वारा शासित है और आर्इसीडीएस-X के साथ व्यवहार नहीं करता।
प्रश्न 25 : आर्इसीडीएस-I विशिष्ट लेखांकन नीतियों के प्रकटीकरण की अपेक्षा करता है और और अन्य आर्इसीडीएस विशिष्ट प्रकटीकरण की। करदाता को आर्इसीडीएस में निर्दिष्ट किए गए ऐसे प्रकटीकरण को कहां करने की आवश्यकता है ?
उत्तर : आर्इसीडीएस के प्रयोग के कारण आय पर निविल प्रभाव आय की विवरणी में प्रकट होना है। आर्इसीडीएस के अंतर्गत आपेक्षित प्रकटीकरण प्रपत्र 3गघ में कर लेखांकन रिपोर्ट में किया जाएगा। हालांकि, उन व्यक्तियों जो कर लेखांकन के लिए उत्तरदायी नहीं हैं, के लिए कोर्इ पृथक प्रकटीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।
लक्ष्मी नारायण
अवर सचिव टीपीएल
सीबीडीटी
निम्न को प्रति
1. अध्यक्ष, सदस्य और सीबीडीटी में अवर सचिव तथा अपर के समस्त अधिकारी
2. सभी प्रधान आयकर आयुक्त व सभी प्रधान आयकर महानिदेशक समस्त अधिकारियों के ध्यान में लाने वितरित करने के अनुरोध के साथ
3. प्रमुख महानिदेशक, राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, नागपुर
4. प्रमुख महानिदेशक (पद्धति), एआरए सेंटर, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली
5. एडीजी (पीआर, पीपी व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली, सामान्य मेलिंग सूची वितरण के लिए तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन में मुद्रण के लिए
6. आर्इटीओ वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए एडीजी (पद्धति)
7. गार्ड फाइल
लक्ष्मी नारायण
अवर सचिव टीपीएल
सीबीडीटी

