आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 11/2015

परिपत्र की तिथि

11/06/2015

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

11/06/2015

 परिपत्र सं. 11/2015

परिपत्र सं. 11/2015

एफ. नं. 325/02/2014-डब्ल्यूटी

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

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नर्इ दिल्ली, 11 जून 2015

 

संपत्ति कर अधिनियम की धारा 10(2)(ख) के अंतर्गत आदेश

 

वित्त अधिनियम 2013 द्वारा संशोधन से पूर्व, संपत्ति कर अधिनियम 1957 (अधिनियम) की धारा 2 के वाक्यांश (ड़क) हेतु स्पष्टीकरण 1 का उप वाक्यांश (ख) मुहैया कराता है कि शहरी भूमि संपत्ति कर हेतु वसूलनीय होगी। अन्य बातों के साथ शामिल यह भूमि ऐसे किसी क्षेत्र में स्थित हो जो नगरपालिका अथवा छावनी बोर्ड के क्षेत्राधिकार के भीतर शामिल हो तथा अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना के अनुसार जिसकी जनसंख्या दस हजार से कम न हो अथवा भूमि किसी ऐसे क्षेत्र में स्थित हो जिसकी दूरी ऐसी किसी नगरपालिका अथवा छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमा से आठ किलोमीटर से अधिक न हो जैसा केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट अन्य प्रासंगिक प्रतिफल तथा उस क्षेत्र के शहरीकरण के लिए क्षेत्र तथा इस सीमा से संबंधित कर सकती हैं। तत्पश्चात्, वित्त अधिनियम 2013 द्वारा वाक्यांश (ड़क) के स्पष्टीकरण 1 का कथित उप-वाक्यांश (ख) इसे मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया था कि शब्द "शहरी भूमि" सरकार के रिकॉर्ड में कृषि भूमि के तौर पर वर्गीकृत नही होगा तथा कृषि प्रयोजन के लिए प्रयुक्त होगा। तद्नुसार, ऐसी भूमि को संपत्ति कर से छूट प्राप्त होगी। यह संशोधन 1.4.1993 से पूर्वप्रभावी प्रभाव के साथ पूर्ण किया गया था।

2. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (द बोर्ड) को इस संबंध में विभिन्न प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए हैं कि निर्धारिती ने अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसी कृषि भूमि पर संपत्ति कर का भुगतान किया हैं जैसा वित्त अधिनियम 2013 से पूर्व अस्तित्व में था। 1.4.1993 से प्रभावी वित्त अधिनियम 2013 द्वारा लाए गए संशोधन के अनुसार ऐसी भूमि पर संपत्ति कर का भुगतान किया गया था, ऐसी भूमि के संबंध में दिया गया संपत्ति कर का प्रतिदाय आपेक्षित है। हालांकि, प्रतिदाय दावे के प्रयोजन के लिए संशोधन हेतु संशोधित विवरणी अथवा आवेदन को दाखिल करने के लिए समय सीमा कर्इ मामलों में समाप्त हो चुकी है।

3. वास्तविक कठिनार्इ परिहार तथा संपत्ति कर अधिनियम की धारा 10(2)(ख) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के उद्देश्य से बोर्ड ने एतद्द्वारा कानून के अनुसार योग्यता पर इसके साथ व्यवहार करने के लिए तथा कथित धारा के अंतर्गत निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् उक्तकथित संशोधन के कारण उत्पन्न प्रतिदाय की मांग करने वाले निर्धारिती द्वारा अधिनियम की धारा 25 के अंतर्गत संशोधन के लिए आवेदन जमा करने हेतु प्रधान संपत्तिकर आयुक्त/संपत्तिकर आयुक्त को प्राधिकृत किया है।

4. प्रधान संपत्ति कर आयुक्त/संपत्ति कर आयुक्त वित्त वर्ष जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से एक वर्ष के भीतर ऐसे आवेदनों का निपटान करेंगे। हालांकि, प्रधान आयुक्त/आयुक्त किसी आदेश को रद्द नही करेंगे। आवेदन का निपटान करने के दौरान, प्रधान आयुक्त/आयुक्त मामले का निर्णय करने के लिए निर्धारण अधिकारी से रिपोर्ट की मांग कर सकते हैं तथा निर्धारिती से प्रासंगिक सूचना की मांग कर सकते हैं। यदि ऐसे आदेश का परिणाम प्रतिदाय है तो निर्धारिती इस संबंध में अधिनियम में निर्दिष्ट दर पर ऐसे प्रतिदाय पर ब्याज के लिए पात्र होंगे।

5. ऐसे दावे के लिए आवेदन इस आदेश के निगर्मन की तिथि से एक वर्ष के भीतर निर्धारिती द्वारा किया जाएगा। कथित अवधि की समाप्ति के पश्चात् ऐसा कोर्इ दावा पेश नही होगा।

 

(एकता जैन)

उप सचिव, भारत सरकार

 

निम्न को प्रति :

  1. उप सचिव व उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के समस्त अधिकारी

  2. वकील परिषद् व सनदी लेखाकार परिषद् (लोकल चैप्टर) सहित उनके क्षेत्र में वितरण के लिए समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त

  3. आर्इआरएस वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ

  4. आर्इटीसीसी प्रभाग, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

  5. आयकर निदेशक (पीआर, पीपी एंड ओएल), (100 प्रतियां)

  6. भारतीय नियंत्रक एंव महालेखा परिषद् (40 प्रतियां)

  7. गार्ड फाइल