आयकर के आयुक्त को अपील (अपीलों)
कर्इ बार यह हो सकता है कि एक कर दाता निर्धारण अधिकारी के एक आदेश से व्यक्ति है। ऐसे मामले में, वह मूल्यांकन अधिकारी के आदेश के विरूद्ध एक अपील आयकर कमिश्नर (अपीलो) के समक्ष दाखिल कर सकता है। इस भाग में आप आयकर आयुक्त (अपीलों) से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष अपील
परिचय
कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि, करदाता कर निर्धारण अधिकारी के आदेश से असंतुष्ट हो। ऐसी स्थिति में, वह आंकलन अधिकारी के आदेश के विरूद्ध संयुक्त आयुक्त (अपील) के समक्ष या आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष अपील कर सकता है।
इस भाग में आप, आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष ऐसी अपील के संबंध में विभिन्न प्रावधानों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
संयुक्त आयुक्त (अपील)
वित्त अधिनियम 2023 ने संयुक्त आयकर आयुक्त (अपील) [जेसीआईटी (अपील)] के समक्ष अपील दाखिल करने के लिए 01-04-2023 से अध्याय XX में एक नई धारा 246 सम्मिलित की है।
जेसीआईटी (अपील) के समक्ष अपील के लिए अपीलीय आदेश
एक निर्धारण अधिकारी (संयुक्त आयुक्त के पद से नीचे) द्वारा पारित आदेशों से असंतुष्ट कोई भी निर्धारिती जेसीआईटी (अपील) के समक्ष ऐसे आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है। हालांकि, एओ द्वारा पारित सभी आदेशों को निर्धारिती द्वारा जेसीआईटी (अपील) के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती है। केवल निर्दिष्ट आदेश (अपील योग्य आदेश) को जेसीआईटी (अपील) के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। इसके अलावा, धारा 246(1) का प्रावधान प्रदान करता है कि जेसीआईटी (अपील) के समक्ष कोई अपील दायर नहीं की जाएगी यदि एक अपीलीय आदेश उपायुक्त के पद से ऊपर के आयकर अधिकारी द्वारा या उसके पूर्व अनुमोदन से पारित किया जाता है।
धारा 246(1) के अनुसार, एक निर्धारण अधिकारी (संयुक्त आयुक्त के पद से नीचे) द्वारा पारित सभी आदेशों को अपील योग्य नहीं बनाया गया है। केवल निर्दिष्ट आदेशों को ही अपील योग्य बनाया गया है।
मूल्यांकन आदेश के खिलाफ अपील
एक निर्धारिती मूल्यांकन से संबंधित निम्नलिखित आदेशों के विरुद्ध जेसीआईटी (अपील) के पास अपील कर सकता है:
(क) धारा 143(1) के तहत जारी एक सूचना जहां निर्धारिती समायोजन करने पर आपत्ति करता है;
(ख) धारा 143 (3) के तहत पारित मूल्यांकन का कोई आदेश या धारा 144 के तहत पारित सर्वोत्तम निर्णय मूल्यांकन आदेश जहां-
• निर्धारिती को निर्धारित आय की राशि पर आपत्ति है या
• निर्धारित कर की राशि या
• हानि की राशि की गणना या
• स्थिति जिसके तहत उसका मूल्यांकन किया गया है;
(ग) धारा 147 के तहत मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना का आदेश;
(क) 200ए की उप-धारा (1) के तहत एक आदेश, यानी टीडीएस स्टेटमेंट की प्रोसेसिंग;
(ख) धारा 206सीबी(1) के तहत एक आदेश, यानी टीसीएस स्टेटमेंट की प्रोसेसिंग);
(ग) धारा 206सी(6ए) के तहत टीसीएस के कलेक्टर को निर्धारिती-इन-डिफॉल्ट मानने वाला एक आदेश;
(घ) धारा 201 के तहत कटौतीकर्ता को चूककर्ता निर्धारिती के रूप में मानते हुए एक आदेश;
(ड) अध्याय XXI (धारा 270क से 275) के तहत जुर्माना लगाने का आदेश; और
(च) धारा 154 या धारा 155 के तहत उपरोक्त वर्णित किसी भी आदेश में संशोधन।
आदेश जिसके विरुद्ध अपील जेसीआईटी (अपील) के समक्ष दायर नहीं की जा सकती
धारा 246(1) का प्रावधान प्रदान करता है कि जेसीआईटी (अपील) के समक्ष कोई अपील दायर नहीं की जाएगी यदि धारा 246(1) में निर्दिष्ट एक आदेश डिप्टी के पद से ऊपर के आयकर अधिकारी द्वारा या उसके पूर्व अनुमोदन से पारित किया गया हो। आयुक्त। इस प्रकार, जेसीआईटी के रैंक से ऊपर के एओ द्वारा पारित सभी आदेश और उपायुक्त के रैंक से ऊपर के आयकर अधिकारी के पूर्व अनुमोदन से पारित सभी आदेश सीआईटी (अपील) के समक्ष अपील योग्य होंगे न कि जेसीआईटी (अपील)।
सीआईटी (अपील) से जेसीआईटी(अपील) में लंबित अपील का स्थानांतरण
जेसीआईटी (अपील) को नई और लंबित अपीलों पर विचार करने के लिए अधिकृत किया गया है। धारा 246 की उप-धारा (2) और (4) के प्रावधानों के अनुसार लंबित अपील को सीआईटी (अपील) से जेसीआईटी (अपील) में स्थानांतरित किया जा सकता है। लंबित अपील को सीआईटी (अपील) से जेसीआईटी (अपील) में स्थानांतरित किया जा सकता है।, अगर:
(क) धारा 246(1) में संदर्भित अपील योग्य आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई है;
(ख) बोर्ड (या इस तरह अधिकृत एक आयकर प्राधिकरण) ऐसी अपील को जेसीआईटी (अपील) में स्थानांतरित करता है। बोर्ड (या इस प्रकार प्राधिकृत आयकर प्राधिकारी) ऐसी लंबित अपील से उत्पन्न या उससे संबंधित किसी अन्य मामले को भी स्थानांतरित कर सकता है।
(ग) लंबित अपीलों को सीआईटी (अपील) से जेसीआईटी (अपील) में स्थानांतरित करने से पहले, अपीलकर्ता को फिर से सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
(घ) अपील के स्थानांतरण पर, जेसीआईटी (अपील) इस तरह की अपील या मामले के साथ उस चरण से आगे बढ़ सकता है जो इस तरह के हस्तांतरण से पहले था
चेहरारहित तरीके से अपीलों का निपटान
धारा 246(5) केंद्र सरकार को अधिकृत करती है कि वह संयुक्त आयुक्त (अपील) के समक्ष कार्यवाही के लिए एक ऐसी योजना बना सकती है, जिसे फेसलेस तरीके से संचालित किया जाएगा, जिसे आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा।
इसके अलावा, बोर्ड को किसी भी मामले या मामलों की श्रेणी को निर्दिष्ट करने का अधिकार दिया गया है, जिस पर धारा 246(1) के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
धारा 250(6क) के प्रावधान को वित्त अधिनियम 2023 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है, और यह प्रदान करता है कि जेसीआईटी (अपील) और आयुक्त (अपील), यदि संभव हो तो, उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 1 वर्ष के भीतर अपील सुन सकते हैं और निर्णय ले सकते हैं जिसमें अपील दायर की गई थी। सीमा अवधि निम्नलिखित अपीलों पर लागू होगीः
(क) धारा 246(1) के तहत जेसीआईटी (अपील) के समक्ष अपील दायर की गई;
(ख) धारा 246(2) के तहत सीआईटी (अपील) से जेसीआईटी (अपील) को स्थानांतरित अपील;
(ग) धारा 246(3) के तहत जेसीआईटी (अपील) से सीआईटी (अपील) को स्थानांतरित अपील;
(घ) धारा 246क(1) के तहत सीआईटी (अपील) के समक्ष दायर की गई अपील।
संयुक्त आयुक्त (अपील) की शक्तियां
वित्त अधिनियम 2023 ने धारा 251 में एक नई उप-धारा (1क) शामिल की है जो अपील का निपटान करने के लिए जेसीआईटी (अपील) को निम्नलिखित शक्तियां प्रदान करती हैः
(क) मूल्यांकन के आदेश के खिलाफ अपील में, वह मूल्यांकन की पुष्टि, कमी, वृद्धि या रद्द कर सकता है;
(ख) जुर्माना लगाने वाले आदेश के खिलाफ अपील में, वह इस तरह के आदेश की पुष्टि या रद्द कर सकता है या जुर्माना बढ़ाने या कम करने के लिए इसे बदल सकता है;
(ग) किसी अन्य मामले में, वह अपील में ऐसे आदेश पारित कर सकता है जो वह उचित समझे।
जेसीआईटी (अपील) की अन्य शक्तियां सीआईटी (अपील) के समान हैं, जो अतिरिक्त मामलों या सबूतों के प्रवेश, आदेश के सुधार आदि के संबंध में हैं।
जुर्माना लगाने के लिए संयुक्त आयुक्त (अपील) के अधिकार
वित्त अधिनियम 2023 जेसीआईटी (अपील) को निम्नलिखित प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाने का अधिकार देता हैः
(क) आय की अंडर-रिपोर्टिंग और गलत रिपोर्टिंग के लिए धारा 270क के तहत जुर्माना;
(ख) बही खातों कों रखने, बनाए रखने या अनुरक्षित रखने में विफल रहने पर धारा 271क के तहत जुर्माना;
(ग) अघोषित आय के मामले में धारा 27ककग के तहत जुर्माना;
(घ) धारा 271ककघ के तहत झूठी या प्रवेश की चूक के लिए जुर्माना; और
(ङ) रिपोर्ट या प्रमाण पत्र में गलत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए धारा 271´ के तहत जुर्माना।
जुर्माना लगाने की सह अधिकार सीआईटी (अपील) के बराबर हैं।
आयुक्त (अपील)
अपीलयोग्य आदेश
आयकर आयुक्त(अपील) पहला अपीलीय प्राधिकारी है। धारा 246क उन आदेशों को निर्दिष्ट करती है जिनके विरूद्ध आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष अपील दायर की जा सकती है। उन प्रमुख आदेशों की सूची जिनके विरूद्ध आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष अपील दायर की जा सकती है, नीचे दी गई है:
• करदाता के विरूद्ध पारित आदेश अगर जहां करदाता आयकर अधिनियम के तहत कर निर्धारण के दायित्व को अस्वीकार करता है।
• धारा 143(1)/(1ख) के तहत जारी प्रज्ञापन जहां समायोजन आय की विवरणी में कर हेतु प्रस्तुत आय में किया गया हो।
• धारा 200क(1) के तहत जारी प्रज्ञापन जिसमें समायोजन दाखिल किए गए विवरण में दिए गए हो
• धारा 143(3) के अंतर्गत पारित मूल्यांकन आदेश, विवाद हल पैनल के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारित आदेश की स्थिति में
• धारा 144 के तहत पारित निर्धारण आदेश।
• धारा 147 तहत निर्धारण के पुन: खोले जाने के बाद पारित निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना का आदेश विवाद हल पैनल के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारित आदेश को छोड़कर
• धारा 150 में संदर्भित आदेश
• तलाश/जब्ती के मामले में धारा 153क या 158खग के तहत पारित निर्धारण अथवा पुन: निर्धारण आदेश।
• धारा 92गघ(3) के तहत दिया गया आदेश।
• धारा 154 या 155 के तहत पारित संशोधन आदेश।
• धारा 163 के तहत पारित एक करदाता को अनिवासी का एजेंट माने जाने का आदेश।
• धारा 170(2)/(3)के तहत पूर्वाधिकारी द्वारा अर्जित आय के संबंध में व्यवसाय के उत्तराधिकारी के निर्धारण का आदेश।
• धारा 171 के तहत हिन्दू अविभिजित परिवार के विभाजन के बारे में ज्ञात तथ्यों का दर्ज करने का आदेश।
• धारा 115फत(3) के तहत पारित, पात्र जहाजरानी कंपनियों को टनभार-कर योजना अपनाने की स्वीकृति को नकारने का आदेश।
• धारा 201/206ग(6क) के तहत पारित, स्रोत पर कर कटौती में या स्रोत पर संग्रह में या उसे सरकार के क्रेडिट में जमा करने पर विफल रहने के कारण स्रोत पर कर कटौती के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को चूककर्ता-निर्धारिती माने जाने का आदेश।
• धारा 237 के तहत पारित वापसी निर्धारण करने का आदेश।
• धारा(ओं)221/271/271क/271ककक/271च/271चख/272क/272कक/272ख/272खख/275(1क)/158खचक(2)/271ख/271खख/271ग/271गक/271घ/271ड़/271ककख के तहत दंड आरोपित करने का आदेश।
• अध्याय XXI के तहत दंड आरोपित करने का आदेश।
• धारा 239क के तहत एओ द्वारा पारित आदेश
अपील प्रस्तुत किए जाने की समय-सीमा
धारा 249(2) के अनुसार, अपील निम्नलिखित तिथियों के 30 दिन के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए:
(1) जहां अपील का संबंध किसी निर्धारण या दंड से है, निर्धारण या दंड संबंधी मांग की नोटिस दिए जाने की तिथि से हो
(2) जहां धारा 248 के अंतर्गत हो अर्थात् धारा 195 के अंतर्गत कर कटौती हेतु देयता को मना करने वाले व्यक्ति अपील का संबंध कर भुगतान की तिथि।
(3) किसी भी अन्य मामले में, वह तिथि जिस पर अपील किए जाने वाले आदेश का प्रज्ञापन सौंपा गया है।
आयकर आयुक्त(अपील) पर्याप्त कारण दर्शाये जाने पर विलंबित अपील भी स्वीकार कर सकता है। अपील दायर करने में देरी की क्षमा के लिए आवेदन, आवश्यक साक्ष्यों के साथ देरी का कारण बताते हुए फॉर्म सं. 35 (अर्थात् अपील के लिए फार्म) में किया जाना चाहिए। देरी के लिए युक्तियुक्त कारण होने पर आयकर आयुक्त(अपील), देरी को माफ कर सकता है।
अपील का प्रारूप
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर (तीसरा संशोधन) नियम, 2016 के द्वारा आयकर आयुक्त (अपील) को अपील के प्रपत्र को दाखिल करने से संबंधित आयकर नियम, 1962 के नियम 45 को संस्थापित किया था।
ऐसे संशोधन के आधार पर, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर आयुक्त (ए) के समक्ष अपील को दाखिल करने के लिए नई प्रपत्र सं. 35 को जारी किया था। आगे, प्रपत्र को ई-रूप से दाखिल करना उन व्यक्तियों के लिए अनिवार्य किया गया है जिनके लिए आय का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है।
अपील पर हस्ताक्षर
अपील का प्रारूप, अपील का आधार और सत्यापन का प्रारूप धारा 140 के तहत आयकर विवरणी हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित व सत्यापित होना चाहिए। दूसरे शब्दों में, अपील का प्रारूप निम्नलिखित के द्वारा हस्ताक्षरित व सत्यापित होना चाहिए:
(1) व्यक्तिगत करदाता द्वारा अपील किए जाने की स्थिति में, स्वयं व्यक्तिगत करदाता द्वारा अथवा उसके द्वारा विधिवत अधिकृत व्यक्ति द्वारा जो कि एक वैध मुख्तारनामा धारित करता है।
(2) हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में, परिवार के कर्ता द्वारा अथवा कर्ता भारत में उपस्थित नही है अथवा हस्ताक्षर करने में सक्षम नही है तो उस परिवार का अन्य कोई व्यस्क सदस्य द्वारा
(3) एक कंपनी के मामले में, प्रबंध निदेशक द्वारा अथवा प्रबंध निदेशक उपलब्ध नही है अथवा जहां कोई प्रबंध निदेशक नही है तो कंपनी के किसी निदेशक द्वारा
(4) विदेशी कंपनी के मामले में कोई व्यक्ति जो ऐसी कंपनी से पावर अटॉर्नी रखता हो
(5) फर्म के मामले में प्रबंध सहभागी द्वारा अथवा यदि प्रबंध सहभागी उपलब्ध नहीं है अथवा जहां कोई प्रबंध सहभागी नही है तो किसी भी सहभागी द्वारा (नाबालिग के तौर पर नही)
(6) एल एस पी की स्थिति में, नामित साझेदार द्वारा अथवा यदि नामित साझेदार उपलब्ध न हो तो किसी भी साझेदार द्वारा
(7) स्थानीय प्राधिकरण की स्थिति में, उसके प्रधान अधिकारी द्वारा
(8) राजनीतिक दल की स्थिति में ऐसे दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा
(9) अन्य किसी एसोसिएशन की स्थिति में, उसके प्रधान अधिकारी द्वारा अथवा एसोसिएशन के किसी सदस्य द्वारा
(10) अन्य किसी व्यक्ति की स्थिति में उस व्यक्ति द्वारा अथवा उसकी ओर से कार्य करने वाले सक्षम व्यक्ति द्वारा
कर का पूर्व-जमा
अपील दायर करने से पूर्व, करदाता को उसके द्वारा दायर की गई आय विवरणी के अनुसार कर की अदायगी की जानी चाहिए।
यदि कोई आयकर विवरणी दाखिल नहीं की गई है, तो करदाता को उसके द्वारा देय अग्रिम कर की राशि का भुगतान करना चाहिए। हालांकि, करदाता द्वारा आवेदन किए जाने पर, आयकर आयुक्त(अपील), अपील किए जाने से पूर्व करदाता को कर अदायगी से छूट प्रदान कर सकता है। करदाता द्वारा अपील किए जाने से पूर्व कर की गैरअदायगी के लिए अच्छे व प्र्याप्त कारण सिद्ध किए जाने पर ऐसा लाभ प्रदान किया जा सकता है।
अपील के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज
• फॉर्म सं. 35 (अपील के आधार व तथ्यों के विवरण सहित) की प्रतिलिपि। हालांकि, ई-दाखिलीकरण को उन व्यक्तियों के लिए अनिवार्य किया गया है जिनके लिए प्रभावी तिथि 1-3-2016 से आय की विवरणी का ई-दाख़िलीकरण अनिवार्य है।
• उस आदेश की एक सत्यापित प्रति जिसके विरूद्ध अपील की गई है।
• मांग नोटिस की मूल प्रति।
• शुल्क अदायगी के चालान की प्रति तथा चालान का विवरण (अर्थात बीएसआर कोड, शुल्क अदायगी की तिथि, क्रमांक संख्या तथा शुल्क की राशि) अपील के रूप में ई-दाख़िलीकारण के मामले में प्रस्तुत करना आवश्यक है।
शुल्क
आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष अपील दायर करने के लिए शुल्क निम्नवत हैं:
जहां निर्धारित आय (अर्थात् निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारितानुसार कुल आय) निम्न है:-
| • 1,00,000 रु. के बराबर या उससे कम | :- | 250 रु. |
| • 1,00,000 रु. से अधिक परंतु 2,00,000 रु. से कम | :- | 500 रु. |
| • 2,00,000 रु. से अधिक | :- | 1,000 रु. |
जहाँ अपील की विषयवस्तु किसी अन्य मुद्दे से संबंधित है, अर्थात् उपरोक्त से भिन्न:- 250 रु.
अपील की प्रक्रिया
• फॉर्म सं. 35 की प्राप्ति के बाद, आयकर आयुक्त(अपील) अपील की सुनवाई की तिथि व स्थान नियत करेगा।
• तिथि व स्थान करदाता को और उस कर-निर्धारण अधिकारी को जिसके आदेश के विरूद्ध अपील की गई है, को सूचित किया जायेगा। यह सूचना दोनों पक्षों को नोटिस जारी करने के द्वारा दी जायेगी।
• अपील की कार्यवाहियों में करदाता अथवा करनिर्धारण अधिकारी या तो व्यक्तिगत रूप से या प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित हो सकते हैं।
• आयकर आयुक्त(अपील) अपील की सुनवाई करेगा और सुनवाई के समाप्त होने तक समय-समय पर अपील को स्थगित कर सकेगा।
• आदेश पारित करने से पूर्व, आयकर आयुक्त(अपील) ऐसी अन्य जांच भी कर सकता है जैसाकि वह उचित समझे या कर-निर्धारण अधिकारी को ऐसी अन्य जांच करने व उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित कर सकता है।
• अपील की कार्यवाही के दौरान, आयकर आयुक्त(अपील) करदाता को अपील के अतिरिक्त आधार (*) में जाने की अनुमति दे सकता है। हालांकि, अतिरिक्त आधार तभी स्वीकार किए जाएगें जब आयकर आयुक्त(अपील) को यह समाधान हो जाता है कि अपील के प्रारूप से उन आधारों का विलोपन जानबूझकर या अनुचित कारणों से नहीं किया गया था।
(*) अतिरिक्त आधार से अभिप्रेत उन आधारों से है जिन्हें फॉर्म सं. 35 में निर्दिष्ट नहीं किया गया है।
अतिरिक्त साक्ष्य दाखिल करना
आयकर आयुक्त(अपील) द्वारा अपील की कार्यवाहियों के दौरान, करदाता को केवल उन्हीं साक्ष्यों (मौखिक या अभिलेखीय) को प्रस्तुत करने की अनुमति होगी जो उसके द्वारा कर निर्धारण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। दूसरे शब्दों में, आयकर आयुक्त(अपील) करदाता को कोई अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं देगा जो उसके द्वारा कर-निर्धारण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए थे। हालांकि, निम्नलिखित परिस्थितियों में आयकर आयुक्त(अपील) द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य स्वीकार किए जाएगें।
(क) जहां कर निर्धारण अधिकारी ने ऐसे साक्ष्य को स्वीकार करने से मना कर दिया हो जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए था; या
(ख) जहां कर-निर्धारण अधिकारी द्वारा प्रस्तुत करने के लिए कहे जाने पर अपीलाथ्री को पर्याप्त कारणों से साक्ष्य प्रस्तुत करने से रोका गया था; या
(ग) जहां अपीलार्थी को पर्याप्त कारणों से कर-निर्धारण अधिकारी के समक्ष कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत करने से रोका गया था जो कि अपील के किसी आधार के लिए प्रासंगिक था; या
(घ) जहां कर-निर्धारण अधिकारी ने अपीलार्थी को किसी अपील के लिए प्रासंगिक साक्ष्य को प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए बिना अपील किया जाने वाला आदेश जारी किया है।
• सामान्यत:, करदाता को अतिरिक्त साक्ष्यों को स्वीकार किए जाने के लिए आवेदन करना होता है। दूसरे शब्दों में, अतिरिक्त साक्ष्यों के साथ उन्हें शामिल किए जाने के कारणों को बताते हुए आवेदन किया जाना चाहिए।
• ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर आयकर आयुक्त(अपील), इन साक्ष्यों को शामिल किए जाने का कारण लिखित रूप में दर्ज करने के बाद इन्हें शामिल कर सकता है।
• करदाता द्वारा दाखिल किए गए अतिरिक्त साक्ष्यों को संज्ञान में लेने से पूर्व आयकर आयुक्त(अपील) को, अतिरिक्त साक्ष्यों या सबूतों के परीक्षण के साथ ही करदाता द्वारा प्रस्तुत किए गए अतिरिक्त साक्ष्यों के खंडन के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु कर-निर्धारण अधिकारी को समुचित अवसर प्रदान करना होगा।
करदाता द्वारा दाखिल किए गए अतिरिक्त साक्ष्य पर विचार करने से पहले, आयकर आयुक्त (अपील) को अतिरिक्त साक्ष्य या गवाह की जांच करने के साथ-साथ अतिरिक्त साक्ष्यों का खंडन करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए मूल्यांकन अधिकारी को एक उचित अवसर प्रदान करना होगा। करदाता द्वारा उत्पादित।
आयकर आयुक्त(अपील) का निर्णय
मामले/तर्क की सुनवाई के बाद, आयकर आयुक्त(अपील) अपना आदेश पारित करेगा। यह आदेश लिखित में होगा। आदेश अपील के निस्तारण के लिए पारित किया जायेगा और कारण सहित अपील के प्रत्येक आधार पर निर्णय दिया जायेगा।
मूल्यांकन आदेश के समक्ष अपील की स्थिति में आयकर आयुक्त (अपील) निर्धारण को पुष्ट, कम, बढ़ा अथवा समाप्त कर सकता है (मूल्यांकन सहित जिसके संबंध में निपटान आयोग के समक्ष कार्यवाही समाप्त कर सकता है)
जुर्माना आदेश के विरूद्ध अपील के मामले में, आयकर आयुक्त(अपील) जुर्माने की पुष्टि, कमी या वृद्धि कर सकता है।
किसी निर्धारण या जुर्माने में वृद्धि करने से पूर्व आयकर आयुक्त(अपील), करदाता को ऐसी वृद्धि के विरूद्ध अपने मामले का प्रतिनिधित्व करने का पर्याप्त अवसर प्रदान करेगा।
अपील का निस्तारण करते समय, आयकर आयुक्त(अपील) अपील किए जाने वाले आदेश पर कार्यवाही के दौरान उत्पन्न होने वाले किसी मुद्दे पर विचार कर सकता है व उस पर निर्णय दे सकता है, भले ही वह मुद्दा करदाता द्वारा आयकर आयुक्त(अपील) के समक्ष न उठाया गया हो।
अपील का निस्तारण
जहां संभव होगा, आयकर आयुक्त(अपील) अपील का निस्तारण, अपील दायर किए जाने वाले वित्तीय वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर करेगा। आदेश अंतिम सुनवाई से 15 दिनों के भीतर जारी किया जाना चाहिए। [निर्देश सं. 20/2003 (फाइल सं. 279/विविध 53/2003-आईटीजे), दिनांक 23.12.2003].
चेहराराहित अपील
वित्त अधिनियम, 2020 ने केंद्र सरकार को अपील के निपटान के लिए एक ई-अपील योजना अधिसूचित करने के लिए अधिकृत किया है ताकि अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रदान की जा सकेः
क) सीआईटी (ए) और अपीलकर्ता के बीच अपीलीय कार्यवाही के दौरान तकनीकी रूप से संभव सीमा तक इंटरफेस को खत्म करना
ख) पैमाने और कार्यात्मक विशेषज्ञता की अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से संसाधनों के उपयोग का अनुकूलन;
ग) गतिशील क्षेत्राधिकार के साथ एक अपीलीय प्रणाली शुरू करना जिसमें अपील का निपटान एक या एक से अधिक सीआईटी (अपील) द्वारा किया जाएगा
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अधिसूचना संख्या 76/2020, दिनांक 25-09-2020 के तहत चेहरारहित अपील योजना, 2020 प्रभावी तिथि 25.09.2020 को अधिसूचित किया है।
आयकर आयुक्त (अपील) को अपील पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. आयकर आयुक्त (अपील) ........... अपीलीय प्राधिकारी है
(क) पहला (ख) दूसरा
(ग) तीसरा (घ) चौथा
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर आयुक्त (अपील) पहला अपीलीय प्राधिकारी है
इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 2. धारा ....... आदेश को निर्दिष्ट करती है जिसमें आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दाखिल की जा सकती है।
(क) 261 (ख) 260क
(ग) 253 (घ) 246क
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 246क आदेश को निर्दिष्ट करती है जिसमें आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दाखिल की जा सकती है
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
प्रश्न 3. जहां अपील किसी मूल्यांकन अथवा जुर्माने से संबंधित हो तो इसे मूल्यांकन अथवा जुर्माने से संबंधित मांग सूचना को तामील करने की तिथि से 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
अपील निम्नलिखित तिथि से 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए
(क) जहां अपील किसी मूल्यांकन अथवा जुर्माने से संबंधित हो, मूल्यांकन अथवा जुर्माने से संबंधित मांग सूचना के तामील किए जाने की तिथि से
(ख) जहां धारा 248 के अंतर्गत अपील अर्थात् धारा 195 के अंतर्गत कटौती हेतु देयता को मना करने वाले व्यक्ति द्वारा अपनी, कर के भुगतान की तिथि
(ग) अन्य किसी स्थिति में, तिथि जिस पर आदेश की सूचना अपील के लिए मांगी हो, के विरूद्ध तामील
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 4. अपील को भरने में देरी की माफी के लिए आवेदन, आवश्यक प्रमाण सहित देरी के लिए कारण बताते हुए, प्रपत्र सं. 34ग में भरे जाने चाहिए।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
अपील को भरने में देरी की माँफी के लिए आवेदन, आवश्यक प्रमाण सहित देरी के लिए कारण बताते हुए, प्रपत्र सं. 35 (अर्थात् अपील के रूप में) में भरे जाने चाहिए ।
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 5. आयकर आयुक्त (अपील) को अपील प्रपत्र सं..........में दी जानी चाहिए
(क) 34ख (ख) 35
(ग) 34ग (घ) 28
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर आयुक्त (अपील) को अपील प्रपत्र सं 35 में दी जानी चाहिए
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 6. हिंदु अविभाजित परिवार के मामले में, अपील का प्रकार, अपील के आधार पर तथा मूल्यांकन के रूप में परिवार के कर्ता द्वारा सत्यापित अथवा हस्ताक्षरित की जानी चाहिए।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
हिंदु अविभाजित परिवार के मामले में, अपील का प्रकार, अपील के आधार पर तथा मूल्यांकन के रूप में परिवार के कर्ता द्वारा सत्यापित अथवा हस्ताक्षरित की जानी चाहिए
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 7. देय शुल्क के चालान की प्रति प्रपत्र सं. 35 (अर्थात् अपील के रूप में) के साथ जमा की जानी आपेक्षित नहीं है ।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता:
अपील के लिए जमा किए जाने वाले दस्तावेज निम्नानुसार हैं :
• प्रतिरूप में प्रपत्र सं. 35 (तथ्यों का विवरण तथा अपील के आधार सहित) सत्यापित में
• आदेश, जिसके विरू़द अपील की गई, की एक सत्यापित प्रति
• मूल में मांग सूचना
• शुल्क के चालान की प्रति
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 8. जहां निर्धारिती की आय (अर्थात् निर्धारण में निर्धारितानुसार कुल आय) रू. 1,00,000 से अधिक है लेकिन रू. 2,00,000 से कम है तो आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दाखिल करने के लिए शुल्क................. है
(क) रू. 250 (ख) रू. 500
(ग) रू. 1,000 (घ) रू. 10,000
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील को दाखिल करने के लिए शुल्क निम्नानुसार है :
जहां निर्धारक आय (अर्थात् मूल्यांकन में निर्धारितानुसार कुल आय) है :-
• रू. 1,00,000 से कम अथवा बराबर :- रू. 250
• रू. 1,00,000 से अधिक अथवा रू. 2,00,000 से कम :- रू. 500
• रू. 2,00,000 से अधिक :- रू. 1,000
• जहां अपील का विषयागत मामला अन्य किसी मामले अर्थात् रू. 250 को अधिक को छोड़कर से अधिक हो
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 9. अपील के दौरान आयकर आयुक्त (अपील) करदाता को अपील के अतिरिक्त कारण की अनुमति नहीं देते।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
अपील के दौरान आयकर आयुक्त (अपील) करदाता को अपील के अतिरिक्त कारण की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि अतिरिक्त कारण केवल तभी स्वीकार किया जाएगा जब आयकर आयुक्त (अपील) यह संतुष्ट करें कि अपील के रूप में इन कारणों की चूक जानबूझकर अथवा अकारण नही की गई थी
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 10. आयकर आयुक्त (अपील) वित्त वर्ष जिसमें अपील दी गई थी की समाप्ति से ..................की अवधि के भीतर अपील को समाप्त करेंगे।
(क) 3 माह (ख) 6 माह
(ग) 1 वर्ष (घ) 2 वर्ष
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
जहां संभव हो, आयकर आयुक्त (अपील) वित्त वर्ष जिसमें अपील दी गई थी की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर अपील को समाप्त करेंगे
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न11. धारा उन आदेशों को निर्दिष्ट करता है जिनके खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर की जा सकती है।
(क) 261 (ख) 260क
(ग) 246 (घ) 246क
सही उत्तर : (ग) सही उत्तर का औचित्य :
धारा 246 उन आदेशों को निर्दिष्ट करती है जिनके विरुद्ध संयुक्त आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर की जा सकती है
इस प्रकार, विकल्प (ग) सही विकल्प है।

