755 : परिपत्र: सं 755, 25-7-1997 दिनांकित
परिपत्र सं.
755
परिपत्र की तिथि
25/07/1997
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
25/07/1997
| परिपत्र संख्या | : | 755 |
| जारी करने की तारिख | : | 25.7.1997 |
| निर्दिष्ट धारा | : | वीडीआर्इएस |
| संविधी | : | आय कर अधिनियम |
स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना, 1997 (II) का स्पष्टीकरण
प्रश्न 26 : अगर निर्धारण वर्ष 1988-1989 के संदर्भ में आय का स्वैच्छिक प्रकटीकरण किया गया है, और जिसका प्रतिनिधित्व ऐसी संपत्ति करती है, जिसका खुलासा संपत्ति कर के इरादे से नहीं किया गया है, या जिसका मूल्य अधिक करके बताया गया है, क्या उसके लिए संपत्ति कर का भुगतान करना आवश्यक है ? और अगर है तो किस निर्धारण वर्ष के लिए ?
उत्तर : प्रश्न 19 के उत्तर ने काफी अस्पष्टताओं को जन्म दिया है। इसलिए इस उत्तर में यह बात स्पष्ट की जा रही है कि अगर इस योजना के संचालन के दौरान, किसी भी निर्धारण वर्ष के संबध में घोषणा की जाती है तो निर्धारण वर्ष 1997-1998 तक के किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए, अनुभाग 73(1) के तहत संपत्ति कर चुकता करने की आवश्यकता नहीं होगी। फिर भी, अनुभाग 73 के खंड (ऐ) (बी) या (सी) के तहत 1998-1999 और उसके बाद के वर्षों के संपत्ति कर के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किसी भी देय घोषित आय से संबधित संपत्ति कर भुगतान करना आवश्यक होगा।
प्रश्न 27 : क्या आयकर अधिनियम के अनुभाग 133 ए (5) के तहत किये गए सर्वेक्षण के कारण, एक व्यक्ति के खुलासे पर पाबंदी लग जाएगी ?
उत्तर : हाँ ! उस पिछले वर्ष में जब सर्वेक्षण किया गया था।
प्रश्न 28 : क्या जेवरात की खरीदी का कोर्इ प्रमाण दर्ज करना आवश्यक होगा ?
उत्तर : खरीदी/अभिग्रहण के सही वर्ष का खुलासा करना घोषक के हित में ही होगा। अगर निर्धारण वर्ष 1987-1988 के पूर्व के निर्धारण वर्ष में जेवरात की घोषणा के लिए, घोषणा के उद्येश के लिए मूल्य 1 अप्रैल 1987 के दिन की निर्धारित की जाएगी। जेवरात की घोषणा के मामले में, अभिग्रहण के वर्ष का कोर्इ न कोर्इ प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
प्रश्न 29 : क्या आयकर अधिनियम के अनुभाग 132 के तहत की गर्इ तलाशी एक व्यक्ति पर तलाशी के वर्ष के पहले के और उसके पहले के वर्ष में किसी भी खुलासे पर पाबंदी लगाती है ? और अगर एक व्यक्ति के नाम पर तलाशी वारंट जारी किया गया है, तो क्या उसके साथ रह रहे बाक़ी लोगों को, जिनके बयान लिए गए हैं, क्या वे भी अपनी आय का खुलासा कर सकते हैं ?
उत्तर : बिलकुल कर सकते हैं, पर उस आय, उस संपत्ति वगैरह का खुलासा नहीं कर सकते जो तलाशी के दौरान ज़ब्त की गर्इ है, या तलाशी के दौरान खोजी गर्इ है।
प्रश्न 30 : क्या अनावृत की गर्इ आय पर भुगतान किया जानेवाला कर उस आय पर स्रोत पर चुकता किये गए कर के सामने समायोजित किया जा
उत्तर : नहीं।
प्रश्न 31 : पहले किये गए स्पष्टीकरण के अनुसार, यह बताया गया था कि निर्धारण वर्ष 1993-1994 और उसके बाद के वर्षों के लिए सिर्फ बच्चों के माता-पिता ही बच्चों की घोषणा कर सकते हैं। क्या यह वाकर्इ में सही है ?
उत्तर : बिलकुल ! फिर भी आयकर अधिनियम के अनुभाग 64 (1 ए) के तहत कुछ अपवाद हैं, और अनुगामी मामलों में, अल्पव्यस्क की आय माता-पिता की आय में सम्मिलित नहीं की जाएगी:
(1) जहाँ बच्चा अनुभाग 80 यू के तहत निर्दिष्ट किसी विकलांगता के स्वरुप से पीड़ित है;
(2) जहाँ बच्चा निम्नलिखित कारणों से आय अर्जित या उपार्जित करता है : (अ) हाथ से किये गए काम के कारण; (ब) उसके विशिष्ट ज्ञान और अनुभव के आधार पर की गर्इ किसी गतिविधि के कारण;
प्रश्न 32 : आय के अनावरण पर लगाये गए जुर्माने से उन्मुक्ति, सिर्फ आयकर अधिनियम के अनुभाग 271 (1)(सी) के तहत लगाये गए जुर्माने तक ही सीमित है ?
उत्तर : नहीं। निर्धारण वर्ष/वर्षों से संबधित खुलासों के लिए, अन्य अनुभागों के तहत जुर्माना नहीं लगाया जायेगा।
प्रश्न 33 : अगर स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना के तहत अप्रकटित दीर्घ-कालीन पूँजीगत लाभ, कर निर्धारण के लिए प्रस्तुत किये जाते हैं, तो कर का भुगतान किस दर पर करना होगा ?
उत्तर : वित्त अधिनियम 1997 के अनुभाग 64 में उल्लिखित कर का भुगतान करना होगा, यानी कि, कंपनी या व्यवसाय संघ को स्वैच्छिक रूप से प्रकट की हुर्इ आय के 35% की दर से कर का भुगतान करना होगा, और अन्य लोगों को 30% की दर से कर का भुगतान करना होगा।
प्रश्न 34 : अमुक व्यक्ति ने सर्वक्षमा यानि कि एमनेस्टी स्कीम के तहत निर्धारण वर्ष 1984-1985 से 1987-1988 आयकर रिटर्न जमा किये थे और कर का भी भुगतान किया। क्या वह स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना का लाभ उठाकर उपरोक्त वर्षों के लिए आगे की आय भी घोषित कर सकता है ?
उत्तर : बिलकुल कर सकता है।
प्रश्न 35 : आयकर अधिनियम 1932 के अनुभाग 132 के तहत, श्री अमुक के विरुद्ध कार्यवाही की गयी थी, और यह कार्यवाही 30 मार्च 1992 को संपन्न हुर्इ। क्या वह निर्धारण वर्ष 1993-1994 और उसके बाद के वर्षों के लिए स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना का लाभ उठा सकता है ?
उत्तर : वित्त अधिनियम 1997 के अनुभाग 64(2)(ii) के अनुसार उस वित्तीय वर्ष के लिए आय का अनावरण नहीं किया जा है, जिस वर्ष में तलाशी शुरू की गयी थी, या उसके पहले के वर्षों के लिए भी ऐसा नहीं किया जा सकता। उपरोक्त मामले में तलाशी की शुरुआत निर्धारण वर्ष 1992-1993 में की गयी थी। इसीलिए तलाश के दौरान खोजी/ज़ब्त की गयी आय/संपत्ति को छोड़कर, वर्ष 1993-1994 और उसके बाद के वर्षों के मामले में प्रकटन किया जा सकता है।
प्रश्न 36 : 30 सितम्बर 1993 के दिन, श्री अमुक के मामले में, आयकर अधिनियम के अनुभाग 133ए के तहत, सर्वेक्षण संचालित किया गया था। क्या वह स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना के तहत, निर्धारण वर्ष 1993-1994 या उसके गत वर्षों के लिए अपनी आय का प्रकटन कर सकते हैं ?
उत्तर : अगर सर्वेक्षण की कार्यवाही 30 सितम्बर 1993 को की गयी थी, यानी कि ‘गत वर्ष 1993-1994’ में की गयी थी, तो निर्धारण वर्ष 1994-1995 के लिए प्रकटन नहीं किया जा सकता। आय की घोषणा निर्धारण वर्ष 1993-1994 और गत निर्धारण वर्षों के लिए की जा सकती है। आय की घोषणा निर्धारण वर्ष 1995-1996 और उसके बाद के वर्षों के लिए की जा सकती है।
प्रश्न 37 : क्या स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना के चलते, एक ही व्यक्ति के द्वारा विभिन्न निर्धारण वर्षों के लिए गुणज घोषणांएँ की जा सकती हैं ?
उत्तर : बिलकुल नहीं।
प्रश्न 38 : अगर एक व्यक्ति निर्धारण वर्ष 1997-1998 के रिटर्न दाखिल करने में चूक जाता है, क्या वह व्यक्ति उसी निर्धारण वर्ष के लिए आय का प्रकटन कर सकता है ?
उत्तर : हाँ ! निर्धारण वर्ष 1997-1998 के लिए वह घोषणा दाखिल कर सकता है।
प्रश्न 39 : अगर निर्धारण वर्ष 1997-1998 के लिए रिटर्न दाखिल किया गया है, क्या उसे दाखिल करने वाला व्यक्ति इस निर्धारण वर्ष के लिए आय का प्रकटन कर सकता है ?
उत्तर : हाँ ! बिलकुल।
प्रश्न 40 : अनुभाग 148 के तहत 15 मर्इ 1997 के दिन, निर्धारण वर्ष 1992-1993 के लिए एक कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। अगले 30 दिनों में रिटर्न दाखिल करने हैं। क्या वह कंपनी निर्धारण वर्ष 1992-1993 से 1994-1995 की आय का खुलासा कर सकती है ?
उत्तर : वित्त अधिनियम 1997 के अनुभाग 64 (2) के तहत, एक व्यक्ति को उस निर्धारण वर्ष की आय की घोषणा करने की मनाही है जिस निर्धारण वर्ष उसे अनुभाग 148 के तहत नोटिस जारी किया गया है, और जिस मामले में इस योजना की शुरुआत से पहले यानी कि 1 जुलार्इ 1997 से पहले रिटर्न दाखिल नहीं किये गए हैं। अगर रिटर्न 1 जुलार्इ 1997 से पहले दाखिल किये जाते, तो निर्धारण वर्ष 1992-1993 से 1994-1995 के लिए आय का खुलासा किया जा सकता है।
प्रश्न 41 : एक अमुक व्यक्ति निर्यात व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। पर निर्यात की आय का खुलासा नहीं किया गया है। क्या वह प्रकट नहीं की गर्इ आय अब प्रकट की जा सकती है ? क्या वह सकल राशि यानी कि निर्यात की आय प्रकट की जानी चाहिए, या अनुभाग 80एच एच सी के तहत कटौती या निगमन की संगणना के बाद की निवल आय प्रकट की जानी चाहिए ?
उत्तर : अगर प्रकट न की गर्इ आय सिर्फ निर्यात व्यवसाय से अर्जित की गर्इ है, तो स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना, 1997 के तहत, उस आय के प्रकटन की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन, अगर प्रकट न की गर्इ आय, आंशिक रूप से निर्यात और आंशिक रूप से आंतरिक बिक्री से अर्जित की गर्इ है, तो आय घोषित करनेवाले को, अनुभाग 80 एच एच सी के तहत कटौती की अनुमति देने के बाद, निवल आय घोषित करनी चाहिए। घोषित की जानेवाली आय कराधीन होनी चाहिए। बेहतर होगा कि घोषक अपने पास लेखे जोखे का कागज़ रखे।
प्रश्न 42 : क्या वे कर निर्धारिती, जिनके मामले में आयकर अधिनियम के अनुभाग 143 (3) के तहत परिमाण वृद्धि की गर्इ है, और जिनका मामला पुनर्विचार किया जा रहा है, यानि कि अपील में है, क्या वे स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना के तहत घोषणा कर सकते हैं ?
उत्तर : घोषणा की जा सकती है, लेकिन घोषक को कर निर्धारण से संबधित अपील, संदर्भ या कार्यवाही में राहत नहीं मिल सकती। इसलिए, अगर कर निर्धारण प्राधिकारी ने दंड कार्यवाही की शुरुआत कर दी है, और परिमाण वृद्धि अनवरत रही है, तो दंड लगाया जायेगा।
प्रश्न 43 : अमुक श्रीमान ऐ ने अपने अल्पव्यस्क पोते को वर्ष 1988 में 2 लाख रुपयों का तोहफा दिया। उसका पोत उस समय 10 वर्ष का था। यह राशि यू टी आर्इ की र्इकाइयों में निवेश की गर्इ। यू टी आर्इ से कमाया हुआ लाभांश, हर वर्ष पोते के बैंक खाते में जमा किया गया। यह व्यवहार आयकर विभाग से छुपाया गया। श्रीमान ऐ अब यह जानना चाहते हैं कि इस मामले को वैध करने के लिए स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना का प्रयोग कैसे किया जा सकता है ?
उत्तर : अगर अल्पव्यस्क पोते को 2 लाख रुपयों का तोहफा अप्रकटित आय से दिया गया था, तो पोते के दादा द्वारा, निर्धारण वर्ष से संबधित कथित अप्रकटित आय की घोषणा करनी होगी । इसलिए, निर्धारण वर्ष 1992-1993 तक, दादा को यू टी आर्इ की र्इकाइयों से मिली आय घोषित करनी होगी। पर निर्धारण वर्ष 1993-1994 से, माता-पिता के हाथ में आर्इ, यू टी आर्इ की र्इकाइयों से अर्जित की गर्इ आय, पोते के वयस्क बनने तक घोषित करनी होगी।
प्रश्न 44 : क्या उन सारे मामलों में जहाँ घोषणा दाखिल की गर्इ है, कमिश्नर ही सर्टिफिकेट जारी कर सकता है या सिर्फ उस मामले में जहाँ निवेदन दाखिल किया गया है ?
उत्तर : सर्टिफिकेट तब जारी किया जा सकता है जब घोषणा के संबध में कुल कर चुकाया गया होता है। और सर्टिफिकेट, निवेदन मिलने के बाद जारी किया जा सकता है। निवेदन एक सादे कागज़ पर किया जा सकता है।
प्रश्न 45 : क्या एक व्यक्ति जो हिन्दू संयुक्त परिवार के कर्ता के रूप में घोषणा करता है, क्या उससे घोषित आय के रूप में कमार्इ गर्इ आय से संबधित दर्जे की सत्यता के बारे सवाल-जवाब किये जा सकते हैं ?
उत्तर : नहीं।
प्रश्न 46 : एक व्यक्ति घोषणा करता है कि उसकी सारी अप्रकटित आय एक बिल्डिंग के निर्माण में निवेश की गर्इ है। क्या बाद में, आयकर विभाग उस बिल्डिंग का मूल्य निकाल सकता है ? और क्या विभाग उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है अगर उसमे निवेश की अतिरिक्त आय पार्इ जाती है ?
उत्तर : यह अपेक्षा की जाती है कि योजना के तहत वास्तविक निवेश की घोषणा की जाए। जिसके परिणाम स्वरुप विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का मूल्य निर्धारण नहीं किया जायेगा । फिर भी, अन्य जानकारी के आधार पर अगर यह पाया जाता है कि प्रकट की हुर्इ राशि से कहीं अधिक राशि निवेश की गर्इ है, तो नवेश के सही मूल्य और प्रकट की हुर्इ राशि के बीच के अंतर के कारण, अधिनियम के तहत उचित कार्यवाही की जा सकती है।
प्रश्न 47 : अमुक व्यक्ति ने निर्धारण वर्ष 1993-1994 से संबधित गत वर्ष 1992-1993 में 25 लाख के मूल्य के शेयर ख़रीदे थे। निर्धारण वर्ष 1994-1995 में शेयर उसके नाम स्थानांतरित किये गए जब शेयरों का बाज़ार भाव 28 लाख रुपये हो गया था। शेयरों का वर्तमान बाज़ार भाव 5 लाख रुपये है। तो प्रश्न यह है कि किस मूल्य का प्रकटन किया जाए?
उत्तर : निवेश निर्धारण, अप्रकटित आय से वर्ष 1993-1994 से संबधित गत वर्ष 1992-1993 में किया गया था। अप्रकटित आय सिर्फ निर्धारण वर्ष 1993-1994 से संबधित होगी, जिस मामले में प्रकटन 25 लाख का होना चाहिए।
प्रश्न 48 : अगर प्रकटन 31 दिसंबर के दिन किया जाए, तो क्या घोषणा/प्रकटन वैध होगा अगर कुल कर भुगतान 31 मार्च 1998 को किया जाए ?
उत्तर : बिलकुल वैध होगा।
प्रश्न 49 : ऐसे भी मामले होंगे जहाँ घोषणा पत्र में घोषित की गर्इ आय, सकल आमदनी से काम दिखार्इ गर्इ है। बही खतों में प्रस्तुत की जानेवाली नगदी, परिणामस्वरुप, उच्च राशि की होगी। बाद में जाकर यह समस्याएं खड़ी कर सकते है, जब कर निर्धारण प्राधिकारी सिर्फ वही राशि स्वीकार करेगा जो घोषणा पत्र में घोषित की गर्इ है। ऐसे मामलों में क्या करना चाहिए ?
उत्तर : कर से उन्मुक्ति सिर्फ घोषित आय पर ही दी जाती है। आयकर आयुक्त घोषित आय की संगणना नहीं करेंगे। बेहतर होगा कि घोषक गणना का कागज़ अपने साथ रखे।
प्रश्न 50 : अगर घोषणा करने के बाद तलाशी ली जाती है, तो घोषक को किस तरह के परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं ?
उत्तर : स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना के तहत आवृत राशि पर किसी भी तरह का कर चुकाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। घोषक को दंड भरने से छुटकारा मिलेगा और उसके विरुद्ध कोर्इ भी मुकदमा नहीं चलाया जायेगा। लेकिन अगर, तलाशी के दौरान घोषित आय के आलावा कोर्इ अन्य आय पार्इ जाती है या प्रमाणों के आधार पर किसी अन्य आय की गणन होती है, तो कर निर्धारिती कर, सूद, दंड और अभियोग का पात्र होगा।
प्रश्न 51 : अगर किसी संपत्ति का लाभप्रद मालिक, ग्रहण की हुर्इ बेनामी संपत्ति घोषित करता है, तो क्या वह बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 के तहत, कर उन्मुक्ति का पात्र होगा ?
उत्तर : स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना के तहत, बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 के तहत, किसी भी प्रकार की कर उन्मुक्ति का प्रावधान नहीं है। तो भी, ऐसे मामलों में आयकर विभाग निर्धारिती की घोषणा स्वीकार करेगा और संपत्ति को घोषक की संपत्ति के रूप में व्यवहार करेगा।
प्रश्न 52 : क्या किसी निर्धारण वर्ष के रद्द किये हुए या अलग से रखे हुए निर्धारण के संबध में घोषणा की जा सकती है ?
उत्तर : जिस मामले में निर्धारण आदेश पूर्ण रूप से रद्द या अलग रखा गया है तो निर्धारिती उस वर्ष के लिए घोषणा कर सकता है, क्यूंकि घोषणा के दिन किसी भी प्रकार का जीवित निर्धारण मौजूद नहीं है। जहाँ निर्धारण आदेश आंशिक रूप से अलग से रखा गया है, घोषणा उन वस्तुओं के बारे में की जा सकती है जो वस्तुएं निर्धारण की विषय-वास्तु नहीं थीं, और वे जो अलग से रखी गर्इं हैं ।

