आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

754

परिपत्र की तिथि

10/06/1997

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

10/06/1997

 
परिपत्र संख्या : 754
जारी करने की तारिख : 10.6.1997
उल्लिखित अनुभाग : वीडीआर्इएस
संविधी : आयकर अधिनियम

वित्त अधिनियम 1997 ने स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना, 1997 पेश की है। इस योजना के बारे में कर दाताओं के मस्तिष्क में काफी कुछ प्रश्न घूम रहे हैं और हमें इस योजना के विस्तार और प्रक्रिया के बारे में असंख्य प्रश्न प्राप्त हुए हैं। बोर्ड ने इन सारे प्रश्नों पर विचार किया है और सारे मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए, सलग्न के अनुसार, प्रश्नों और उत्तरों का एक प्रपत्र जारी किया है।

(अनिरुद्ध कुमार )

उपसचिव, भारत सरकार।

स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना, 1997 के बारे में कुछ स्पष्टीकरण।

प्रश्न 1 : क्या 01/04/1987 से पूर्व अधिगृहीत आभूषणों की अप्रकटित आय को 01/04/1987 के बाज़ार भाव के अनुसार प्रकट करना आवश्यक है ? (कृपया करके वित्त अधिनियम के अनुभाग 64 और 73 पर एक –ष्टी डालें)

उत्तर : हाँ।

प्रश्न 2 : 01/04/1987 से पूर्व अधिग्रहित किये हुए फ़्लैट/भूमि/मशीन/शेयर वगैरह का प्रितिनिधित्व करती आय को 01/04/1987 के बाज़ार भाव के अनुसार प्रकट करने की आवश्यकता है? (कृपया करके अनुभाग 64 और 73 पर –ष्टी डालें)

उत्तर : नहीं। संपत्ति का मूल्य संपत्ति के अभिग्रहण करने की तारीख के अनुसार प्रकट करना चाहिए।

प्रश्न 3 : क्या एक अल्पव्यस्क द्वारा उसकी आय का प्रकटन निर्धारण वर्ष 1992-1993 के बाद किया जा सकता है या उसके माता-पिता द्वारा किया जा सख्त अहै जिनके हाथ में वह आय कर-योग्य है ?

उत्तर : एक अल्पवयस्क 1992-1993 की या उसके पूर्व के निर्धारण वर्ष की अपनी अप्रकटित आय प्रकट कर सकता है। वर्ष 1993-1994 से उसकी आय उसके माता-पिता की आय के साथ सम्मिलित है, और उसे आयकर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है। निर्धारण वर्ष 1993-1994 या उसके बाद के निर्धारण वर्षों की आय सिर्फ उसके माता-पिता घोषित कर सकते हैं।

प्रश्न 4 : क्या निर्धारण वर्ष 1992-1993 के पूर्व के निर्धारण वर्ष के लिए, अल्पवयस्क अपने हाथ की अप्रकटित आय को प्रकट कर सकता है ? (कृपया अनुभाग 64 और 73 देखें)

उत्तर : हाँ। प्रश्न 3 में दिए गए कारणों पर –ष्टी डालें।

प्रश्न 5 : अगर एक कंपनी के पास गुप्त आय है, तो क्या भागिदार/हिस्सेदार ऐसी गुप्त आय की घोषणा कर सकते हैं ?

उत्तर : घोषणा कंपनी के द्वारा की जायेगी जो प्रबंध भागिदार द्वारा सत्यापित की जाएगी। अगर प्रबंध भागीदार नहीं है तो किसी एक भागीदार द्वारा सत्यापित की जा सकती है। भागीदारों/हिस्सेदारों को अपने हिस्से की आय की घोषणा करने की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न 6 : जहाँ वित्तीय वर्ष 1995-1996 में तलाशी और ज़ब्ती की कार्यवाही की गर्इ हो, और ब्लॉक अवधि 1985-1986 से 1995-1996 हो, तो क्या 1985-1986 के पूर्व के निर्धारण वर्ष में तलाशे गए व्यक्ति द्वारा, वर्तमान योजना के तहत प्रकटन किया जा सकता है ?

उत्तर : नहीं। अगर किसी भी वित्तीय वर्ष में तलाशी की कार्यवाही की गयी है, तो व्यक्ति उस वर्ष के पूर्व वर्ष में घोषणा नहीं कर सकता जिस वर्ष में तलाशी की कार्यवाही की गयी हो।

प्रश्न 7 : अगर निर्धारण वर्ष 1990-1991 एक शेयरों द्वारा सीमित निजी कंपनी ने अपने बहीखातों के अनुसार आयकर रिटर्न दर्ज नहीं किये हैं, तो क्या वह इस योजना के तहत अपनी आय की घोषणा कर सकती है और 35 % कर का भुगतान कर सकती है ?

उत्तर : हाँ।

प्रश्न 8 : क्या घोषक के लिए, बही खातों में घोषित आय जमा करने के लिए और निर्धारण प्राधिकारी को सूचित करने के लिए, स्वैच्छिक आय प्रकटन योजने के तहत किसी प्रकार की समयावधि का प्रावधान है ?

उत्तर : स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना, 1997 के अनुभाग 64 के तहत, आय को जमा करने की किसी भी प्रकार की समयावधि नहीं है।

प्रश्न 9 : क्या स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना 1997 के तहत, घोषित आय को बहीखातों में जमा करना अनिवार्य है ? और अगर है तो किस वर्ष के बहीखातों में जमा करना होगा-उस निर्धारण वर्ष के बहीखातों में जिसमें वह आय घोषित किया गया है या वित्तीय वर्ष 1997-1998 से संबधित निर्धारण वर्ष में जमा करना होगा ?

उत्तर : घोषक द्वारा घोषित आय को उसके बहीखातों में या किसी अन्य रिकॉर्ड में जमा करने की अपेक्षा की जाती है। जमा करने का वर्ष घोषक के विकल्प पर निर्भर करता है।

प्रश्न 10 : क्या इस योजना के तहत, आयकर आयुक्त के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की समय-सीमा होगी ?

उत्तर : प्रकट रूप से, सर्टिफिकेट जारी करने की कोर्इ समय-सीमा नहीं बाँधी गर्इ है। लेकिन अगर घोषित आय अनिणÊत निर्धारण से संबधित है, तो समय-सीमा के कारण, कथित निर्धारण के बाधित होने की तारीख से पहले आयकर आयुक्त को मजबूरन सर्टिफिकेट जारी करना ही होगा।

प्रश्न 11 : क्या इस योजना के तहत किया गया प्रकटन अपने आप में निर्णायक होगा, या आयकर आयुक्त के द्वारा स्वीकार होने के बाद ही निर्णायक होगा ?

उत्तर : वैध प्रकटन के मामले में, वह तब निर्णायक होगा जब आयकर आयुक्त सर्टिफिकेट जारी करेगा।

प्रश्न 12 : इस योजना के तहत अनुमत उन्मुक्ति, आयकर अधिनियम के अनुभाग 245एच की तर्ज पर होना चाहिए, यानि कि इसका विस्तार भारतीय दंड संहिता और अन्य केंद्रीय अधिनियमों के तहत, दंड और अभियोग से उन्मुक्ति तक प्रसारित करना चाहिए । केंद्रीय सरकार ने राज्य सरकार से सिफारिश करनी चाहिए कि स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना, 1997 के तहत किये गए प्रकटनों के परिणामस्वरूप बहीखातों में जमा की गर्इ प्रविष्टि राज्य अधिनियम के तहत बिक्री कर और राज्यकर (एक्ज़ाइज़) के लिए राज्य सरकार को किसी पर भी मुकदमा दायर नहीं करना चाहिए।

उत्तर : राज्य सरकारों को बिक्री कर अधिनियम के तहत मुकदमा न दायर करने की सिफारिश करने का प्रश्न ही नहीं उठता, क्यूंकि घोषित आय एक मुश्त राशि मानी जाती है जो किसी व्यवसाय या पेशे या पूँजीगत लाभ या अन्य स्रोतों के शीर्ष के तहत नहीं आती। इसीलिए यह संभावना नहीं है कि प्रकटित आय किसी दबी हुर्इ बिक्री या किसी दबे हुए विनिर्माण से संबधित है।

प्रश्न 13 : कंपनी के उन निर्देशकों, भागीदारों या एओपी के सदस्यों को भी उन्मुक्ति प्रदान करनी चाहिए जो इस योजना के तहत घोषणा करते हैं।

उत्तर : जहाँ तक कंपनियों और एओपी का प्रश्न है, यह काफी होगा अगर कंपनियां और एओपी घोषणा करते हैं। कंपनी या एओपी द्वारा घोषित की गर्इ आय को, भागीदारों/हिस्सेदारों या सदस्यों को अलग से आय घोषित करने की आवश्यकता नहीं है। और कंपनी के द्वारा आय के प्रकटन के संबध में, कंपनी के किसी भी निर्देशक पर मुकदमा दायर नहीं किया जाएगा।

प्रश्न 14 : महिलाओं और अल्पव्यस्कों के मामले में, जब वे आय की घोषणा करते हैं और जो बाद में कंपनी के बहीखातों में जमा की जाती है, इस बात को स्पष्ट करना आवश्यक है कि विभाग का क्या नजरिया होगा विशेषकर की क्या निर्धारण प्राधिकारी जमा की गर्इ राशि के स्रोत के बारे में पूछताछ कर सकता है ? (रतन लाल के केस में सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय पर –ष्टी डालें)

उत्तर : घोषक महिला या अल्पव्यस्क ने पहले उस राशि को अपने बहीखातों या किसी अन्य रिकॉर्ड में जमा करना चाहिए। उसके बाद अन्य लोगों को अग्रिम राशि दी जा सकती है। जहाँ अन्य लोगों के बहीखातों में जमा की गर्इ राशि, महिला या अल्पव्यस्क द्वारा घोषित की गर्इ राशि के सामान या काम है तो निर्धारण प्राधिकारी ने कंपनी के बहीखातों में जमा पृविष्टि स्वीकार करनी चाहिए। अगर जमा की हुर्इ राशि घोषित राशि से अधिक पार्इ जाती है तो निर्धारण प्राधिकारी को इस अधिकता के बारे में पूछताछ करने का पूरा अधिकार है।

प्रश्न 15 : इस योजना के अनुभाग 68 के तहत, ऐच्छिक रूप से प्रकट की गर्इ आय की राशि किसी भी निर्धारण वर्ष की कुल आय में सम्मिलित नहीं की जा सकती (अ) अगर ऐसी राशि बहीखातों या किसी अन्य रिकॉर्ड में जमा की जाती है और इसकी सूचना निर्धारण प्राधिकारी को दी जाती है; और (ब) इस राशि पर आयकर चुकाया गया है। ऐसे मामले में तीन प्रश्न उठते हैं : (i) ‘किसी अन्य रिकॉड’ के मायने क्या हैं, विशेषकर जब घोषक किसी भी प्रकार का रिकॉर्ड बनाये नहीं रखता;

(ii) निर्धारण प्राधिकारी कौन होगा ? क्या वह नियमित निर्धारण प्राधिकारी होगा या आयकर आयुक्त के कार्यस्थल में नामित अफसर होगा ? और

(iii) ‘बहीखातों में जमा करने’ के मायने क्या हैं ?

उत्तर : (i) जहाँ घोषक द्वारा बहीखाते नहीं रखे जाते हैं, वहां ‘अन्य किसी रिकॉड’ का मतलब है एक पृविष्टि या एंट्री जो घोषित राशि की उपलब्धता प्रमाणित करेगी;

(ii) क्षेत्र का नियमित निर्धारण प्राधिकारी, ना कि आयकर आयुक्त के कार्यालय में नामित अफसर होगा;

(iii) ‘बहीखातों में जमा करने’ के मायने हर मामले में भिन्न हैं, और प्रकटन की प्रकृति पर निर्भर करते हैं कि क्या वह स्टॉक या शेयर के तहत बयान है, या बिक्री के तहत बयान है या संपत्ति के निमित्त बिक्री के तहत बयान है, वगैरह ।

प्रश्न 16 : क्या घोषक द्वारा घोषित किया गया संपत्ति का मूल्य विभाग द्वारा घोषित रूप में ही स्वीकार किया जायेगा या घोषणा के साथ मूल्यांकक का सर्टिफिकेट जोड़ना आवश्यक होगा ? या क्या यह मामला विभाग द्वारा मूल्यांकन कक्ष को सौंपा जायेगा ? क्या आभूषण या अन्य संपत्ति की खरीदी का प्रमाण जैसे कि खरीदी का वर्ष वगैरह दाखिल करने की आवश्यकता होगी ? क्या 01/04/1987 के दिन आभूषण का मूल्य सिर्फ ऐच्छिक आय प्रकटन योजना के उद्देश के लिए स्वीकृत किया जायेगा या बाद के वर्षों लिए उसे संपत्ति-कर के लिए भी स्वीकारा जायेगा ?

उत्तर : जहाँ तक उचल संपत्ति का प्रश्न है, विभाग, घोषणा के साथ मूल्यांकक सर्टिफिकेट दर्ज करने पर ज़ोर नहीं डालेगा। सही मूल्य घोषित करना घोषक का उत्तरदायित्व बनता है। और अगर आभूषण 01/04/1987 से पहले अधिगृहीत किये गए हैं, तो उसका मूल्य, मूल्यांकक द्वारा प्रमाणित किया गया, 01/04/1987 के दिन का माना जायेगा। आगे, 01/04/1987 के दिन स्वीकृत किया गया मूल्य इस योजना के सीमित उद्देश के लिए ही है।

प्रश्न 17 : अचल संपत्ति के मामले में (अ) अगर खरीददार, खरीदी राशि के काले धन के हिस्से का खुलासा करता है, तो उस मामले में बेचनेवाले की स्थिति क्या होगी ? क्या विभाग उसके (बेचनेवाले) के विरुद्ध कार्यवाही करेगा ? (ब) अगर बाद में संपत्ति बेचीं जाती है तो अभिग्रहण का मूल्य क्या होगा ? (क) अगर संपत्ति के वास्तविक मूल्य की घोषणा के परिणाम स्वरुप, उसका मूल्य अध्याय एक्सएक्स-सी में उल्लिखित निर्धारित मूल्य से अधिक पाया जाता है तो क्या उसके विरुद्ध उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा कार्यवाही की जाएगी ?

उत्तर : (अ) बिलकुल नहीं। (ब) आयकर विभाग के समक्ष घोषित अभिग्रहण का मूल्य और इस योजना के तहत घोषित राशि जोड़कर संपत्ति का मूल्य बढ़ाया गया। (क) एक बार उपयुक्त प्राधिकारी, अनुभाग 269 यू एल (1) के तहत अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करता है तो उस लेन-देन पर से उसका क्षेत्राधिकार समाप्त हो जाता है। उपयुक्त प्राधिकारी आगे कोर्इ भी कार्यवाही नहीं कर सकता।

प्रश्न 18 : इस योजना के अनुभाग 65 (3) के अनुसार, सिर्फ एक ही घोषणा की अनुमति दी है। लेकिन कुछ स्थितियों के मामलों में गुणज घोषणों की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि ऐसी स्थितियों को संभाला जा सके , जैसे कि देनदारों से अप्रकटित राशियों की वसूली थोड़ी थोड़ी करके की जाती है।

उत्तर : सिर्फ एक ही घोषणा की अनुमति है। और जहाँ तक देनदारों से थोड़ा थोड़ा करके अप्रकटित राशि की वसूली का प्रश्न है, तो योजना की समाप्ति से पहले घोषक को अंतिम वसूली की प्रतीक्षा करने के बाद घोषित करना चाहिए।

प्रश्न 19 : क्या संपत्ति कर सिर्फ निर्धारण वर्ष 1997-1998 में घोषित संपत्ति पर आदेय होगा या उससे पूर्व निर्धारण वर्षों के लिए भी आदेय होगा ? क्या घोषणा के वर्ष के बाद के वर्षों के लिए भी संपत्ति कर में छूट उपलब्ध होगी ? निर्धारण वर्ष 1997-1998 में की गर्इ घोषणा के मामले में, क्या संपत्ति कर में छूट, निर्धारण वर्ष 1988-1989 से लेकर निर्धारण वर्ष 1997-1998 के लिए भी उपलब्ध होगी की नहीं ? क्या 1: की दर से संपत्ति-कर का शुल्क एक ही समय का होगा या बार बार चुकता करनेवाला शुल्क होगा ? (यह प्रावधान रद्द कर दिया गया है )

उत्तर : वि डी आर्इ इस-97 के अनुभाग 73(1)(सी) के तहत जहाँ संपत्ति का मूल्य वास्तविक मूल्य से काम बताय गया है, और उसके बाद ऐसे मूल्यांकन का प्रकटन किया गया है तो घोषणा के वर्ष के लिए उस हद तक संपत्ति-कर देय होगा जिसके साथ पूर्व का निर्धारण वर्ष भी जोड़ा जायेगा जब वह संपत्ति अस्तित्व में थी। बिलकुल भी न प्रकट की गयी संपत्ति के मामले में, बाद के निर्धारण वर्षों के लिए संपत्ति-कर डे होगा। और बाद के वर्षों में, मूल्य में बदलाव हो सकता है।

प्रश्न 20 : वि डी आर्इ इस के तहत घोषित संपत्ति की बिक्री के मामले में, क्या सूचीकरण का लाभ उपलब्ध होगा ? अगर हाँ, तो क्या अभिग्रहण की कीमत वास्तविक कीमत होगी या 01/04/1987 के दिन की अनुमानित कीमत होगी?

उत्तर : हाँ। आभूषण के मामले में, अभिग्रहण का मूल्य वास्तविक मूल्य होगा ना कि 01/04/1987 का अनुमानित मूल्य होगा।

प्रश्न 21 : योजना का अनुभाग 64(2)(i) उस व्यक्ति को एक निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा करने के लिए रोकता है अगर उस व्यक्ति को उस निर्धारण वर्ष में अनुभाग 142 या 148 तहत नोटिस जारी किया गया है। और अगर अनुभाग 143(2) के तहत नोटिस जारी किया गया है तो उस समय क्या स्थिति होगी? क्या वह कर-निर्धारिती को उस निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा करने के लिए वह नोटिस रोकेगा?

उत्तर : अनुभाग 143(2) के तहत नोटिस जारी होने से उस कर-निर्धारिती पर किसी प्रकार की रोक नहीं होगी।

प्रश्न 22 : अगर एक अपील के द्वारा, निर्धारण को अलग रखा गया है, तो उस निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा की अनुमति दी जानी चाहिए। अगर निर्धारण कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार का व्यय नामंज़ूर किया गया है, तो क्या अपील वापस लेने के बाद, योजना के तहत वह व्यय पेश किया जा सकता है ?

उत्तर : ऐसा नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 23 : इस योजना का प्रसार विस्तारित करना चाहिए ताकि ऐसे मामलों को सम्मिलित किया जा सके जहाँ (अ) अनुभाग 132, 133अए के तहत कार्यवाही की गयी है; (ब ) अपील वापस ली गर्इ है, जिससे मुकदमों में कमी होगी।

उत्तर : ऐसा नहीं किया जा सकता। अनुभाग 133ए के सर्वेक्षण के तहत, घोषक उसी निर्धारण वर्ष से वंचित किया जाता है।

प्रश्न 24 : अगर वि डी आर्इ इस के तहत विदेश में 100 रुपये हाथ में हैं, तो भारत में या भारत का बाहर भेजने के बाद, कर के रूप में 30 रुपये चुकता किये जाते हैं। तो क्या 70 रुपये या पूर्ण रूप से 100 रुपये विदेश में रखे जा सकते हैं, या उस राशि को 31-12-1997 से पहले भारत में लाना आवश्यक है ?

उत्तर : अभियोग से उन्मुक्ति, फेरा के तहत किये गए अपराध के लिए है, न कि रखने की अनुमति है।

प्रश्न 25 : इस योजना के तहत, उन्मुक्ति सिर्फ दंड और अभियोग के लिए दी गर्इ है, पर इसमें किसी ब्याज का ज़िक्र नहीं किया गया है। क्या यह स्पष्ट करना आवश्यक नहीं है कि घोषणाओं से संबधित ब्याज इस योजना के तहत किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए देय नहीं होगा।

उत्तर : घोषित आय के मामले में 30 % से 35 % की एक समान दर के रूप में देय होगा। बाकी कोर्इ ब्याज देय नहीं होगा सिवाय उस ब्याज के जो घोषित आय के देरी से भुगतान करने पर लागू होगा।