आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

4/2008

परिपत्र की तिथि

28/04/2008

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

28/04/2008

 

सर्कुलर

आय-कर अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 194-झ - स्रोत पर टैक्स की कटौती-किराया- धारा 194-झ के तहत किराये की आमदनी पर सेवा कर के स्रोत पर टैक्स कटौती (टीडीएस) का स्पष्टीकरण

सर्कुलर संख्या 4/ 2008, दिनांक 28-4-2008

बोर्ड में इस संबंध में प्रतिनिधियों की ओर से जानकारी गई/ पत्र प्राप्त किए गए हैं जिसमें इस बात का स्पष्टीकरण किया गया है कि आयकर अधिनियम की धारा 194-झ के तहत किए गए टीडीएस प्रावधान देय किराये की सकल राशि (सेवा कर समेत) पर या देय किराये की शुद्ध राशि (सेवा कर समेत) पर लागू होगी।

2. बोर्ड ने इस तथ्य का परीक्षण किया है. धारा 194-झ के प्रावधानों तहत, किसी निवासी के किराया भुगतान की अवस्था में आय के स्रोत पर कर कटौती योग्य होगा। वैसे किराये को व्यापक तौर पर धारा 194-झ के तहत परिभाषित किया गया है।

''किराया'' का मतलब कोई ऐसा भुगतान, चाहे वह किसी नाम से किया गया हो, किसी पट्टे, उप-पट्टे, किसी अन्य मसौदे के किराये या इनमें से किसी चीज का उपयोग (या तो पृथक तौर पर या किसी के साथ संलग्न होते हुए) किया गया हो,

(ए) भूमि, या

(बी) भवन (फैक्टरी भवन समेत), या

(सी) भवन से संबंधित स्थायी भूमि (फैक्टरी भवन समेत), या

(डी) मशीनरी, या

 (ई) प्लांट, या

(एफ) उपकरण, या

(जी) फर्नीचर, या

(एच) फिटिंग्स, या

भुगतानकर्ता इनमें से कोई या सभी का मालिक हो,

3. किरायेदार द्वारा चुकाया गया सर्विस टैक्स जमीन के मालिक के खाते में 'आय' की प्रकृति में शामिल नहीं किया जा सकता है। जमीन या मकान मालिक सर्विस टैक्स वसूल करने के लिए महज सरकार की एक एजेंसी के तौर पर कार्य करता है, इसलिए, यह फैसला लिया गया है कि आयकर अधिनियम की धारा 194-झ के तहत स्रोत पर टैक्स की कटौती (टीडीएस) सर्विस टैक्स समेत चुकाये गये किराये/ भुगतान योग्य किराये के मुताबिक लागू होगा।

4. ये निर्देश सभी कार्यरत अधिकारियों को ध्यानार्थ भेजे गए हैं और उन्हें इसका पालन करना होगा।

5. आंतरिक अंकेक्षण के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को भी ये तमाम निर्देश भेजे गए हैं और अंकेक्षण करने वालों को इसकी भलीभांति जांच करनी चाहिए।

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