शास्तियों, जुर्माने, ब्याज तथा अन्य राशियों की वसूली
शास्तियों, जुर्माने, ब्याज तथा अन्य राशियों की वसूली
229. ब्याज, जुर्माने या शास्ति के रूप में अधिरोपित कोर्इ राशि या कोर्इ अन्य राशि जो इस अधिनियम के अंतर्गत देय है, ऐसी रीति से वसूलनीय होगी जैसी कर की बकाया की वसूली के लिए इस अध्याय में उपबंधित है।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

