भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 7 अक्टूबर, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

आयकर विभाग में फेसलेस मूल्यांकन का शुभारंभ और राष्ट्रीय र्इ-मूल्यांकन केंद्र (एनर्इएसी) का उद्घाटन

 

यह स्मरण किया जा सकता है कि माननीय वित्त मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में 2019 में एक योजना के शुभारंभ की घोषणा की थी जो बिना किसी मानवीय दखल के एक चरणबद्ध तरीके से इलैक्ट्रानिक विधि में आयकर का र्इ-मूल्यांकन मुहैया कराएगा। माननीय वित्त मंत्री के बजट भाषण में करदाताओं को किए गए वादे को निभाते हुए राजस्व सचिव, डा. अजय भूषण पांडे ने मल्टीमीडिया वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से दिल्ली, मुंबर्इ, चेन्नर्इ, कोलकाता, अहमदाबाद, हैदराबाद, बैंगलूरू और पुणे में स्थित आयकर विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में नर्इ दिल्ली में सोमवार, 7 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रीय र्इ-मूल्यांकन केंद्र (एनर्इएएसी) का शुभारंभ करते हुए आयकर विभाग में फेसलेस र्इ-मूल्यांकन की शुरूआत की।

इस अवसर पर बोलते हुए अध्यक्ष, सीबीडीटी श्री पी.सी. मोदी ने कहा कि आयकर विभाग के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था जब विभाग करदाताओं को पारदर्शी, दक्ष और फेसलेस मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रदान करते हुए माननीय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के सपनों को वास्तविक रूप दे सकेंगे।

एनर्इएसी का शुभारंभ करते हुए राजस्व सचिव, डा. पांडे ने कहा कि विभाग के लिए यह गर्व की बात थी कि विभाग ने इतने कम समय में एनर्इएससी को स्थापित किया। उन्होंने महत्वपूर्ण दर्शकों को सूचित किया कि फेसलेस मूल्यांकन के शुरूआत की बात वास्तव में सबसे पहले 2017 में आयोजित राजस्व ज्ञान संगम में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा कही गर्इ थी। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के सपनों को जल्द से जल्द वास्तविकता में परिवर्तित करने के लिए विभाग की सराहना की। उन्होंने विभाग के अधिकारियों और अफसरों को उनको दी गर्इ चुनौतियों और उच्च आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का आवाह्न किया।

र्इ-मूल्यांकन योजना 2019 के अंतर्गत:—

  (i) आयकर अधिकारियों के विवेक के स्कोप के मूल्यांकन करने को देखते हुए स्वचालित परीक्षण टूल के रूप में जोखिम प्रबंधन के लिए नवीनतम डिजिटल टैक्नालॉजी, कृत्रिम बुद्धिमता और मशीन लर्निंग होगी

 (ii) र्इ-मूल्यांकन योजना के द्वारा क्रियाशील क्षेत्राधिकार वाले समूह आधारित निर्धारण की संकल्पना को प्रस्तुत किया गया जिसका मकसद पारदर्शिता, दक्षता और करदाता और आयकर विभाग के बीच मानवीय दखल को समाप्त करते हुए प्रक्रियाओं का मानकीकरण करना है।

(iii) दिल्ली में एक एनर्इएसी होगा जिसकी अध्यक्षता प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त करेंगे।

(iv) दिल्ली, मुंबर्इ, चेन्नर्इ, कोलकाता, अहमदाबाद, पुणे, बैंगलूरू और हैदराबाद में 8 क्षेत्रीय र्इ-मूल्यांकन केंद्र (आरर्इएसी) होंगे हां मूल्यांकन इकार्इ, समीक्षा इकार्इ, तकनीकी इकार्इ और सत्यापन इकार्इ होंगी।

 (v) निर्दिष्ट कार्य के लिए मामलों को स्वचालिक आवंटन प्रणाली के माध्यम से विभिन्न इकार्इयों को एनर्इएसी द्वारा निर्दिष्ट किया जाएगा।

क्रियाशीलता और एनर्इएसी और आरर्इएसी के सभी अधिकारियों के सूंपर्ण भारत के क्षेत्राधिकार को देखते हुए अधिकारियों के इस प्रकार के संयोजक और सहयोगी प्रयासों के चलते बेहतर गुणवत्ता के मूल्यांकन हो सकेगा।

पहले चरण में, आयकर विभाग ने र्इ-मूल्यांकन योजना 2019 के अंतर्गत संवीक्षा के लिए 58,322 मामलों को चुना है और निर्धारण वर्ष 2018-19 के मामलों के लिए 30 सितंबर, 2019 से पहले र्इ-नोटिस को जारी कर दिया गया है।

करदाताओं को अपने पंजीकृत र्इ-दाखिलीकरण खातों/र्इ-मेल आर्इडी की जांच करने का सलाह दी गर्इ है और 15 दिनों के अंदर प्रतिउत्तर देने का अनुरोध किया गया है। विभाग आशा करता है कि करदाताओं के अनुपालन को सुविधाजनक बनाने के साथ मामलों का जल्द से जल्द निपटान किया जाएगा।

फेसलेस मूल्यांकन की इस नर्इ पहल से करदाताओं के लिए अनुपालन की सुविधा में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है क्योंकि इससे करदाताओं को होने वाली परेशानी और कीमत को बेहद कम किया जा सकता है। ह्यूमन इंटरफेस विभाग के लिए किसी भी प्रकार से मददगार साबित नही होने वाला। पारदर्शिता और कार्यक्षमता के परिणामस्वरूप मुकद्मेबाजी को कम करने में मदद मिलेगी। कार्यात्मक विशेषीकरण कर मामलों में निश्चितता का कारण बनेगा जिसके चलते व्यापार करने में आसानी होगी। समूह आधारित निर्धारण में जोखिम आधारित और क्रेंद्रित दृष्टिकोण को अपनाने से ह्यूमन इंटरफेस को समाप्त करके प्रक्रिया का मानकीकरण किया जा सकता है। करदाताओं द्वारा उच्चस्तरीय मूल्यांकन की शिकायतों को बहुत कम किया जा सकता है और आय का बेहतर मूल्यांकन राजस्व संग्रहण का कारण हो सकता है इसलिए यह भारत के लोगों के लिए कल्याण कार्य को करने का महत्वपूर्ण जरिया है। इससे मामलों के तुरंत निपटान का कारण होने की संभवना भी है इस तथ्य के साथ कि "यह वह सरकार है जो त्वरित कार्य करती है"।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी