भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 28 अगस्त, 2019

 

सीबीडीटी द्वारा एफपीआर्इ और घरेलू निवेशकों के कथित अंतर कराधान पर स्पष्टीकरण जारी

 

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के ध्यान में आया है कि मीडिया के एक वर्ग में ऐसी एक गलत धारणा बनार्इ जा रही है कि क्योंकि पिछले शुक्रवार को माननीय वित्त मंत्री द्वारा घोषणाएं की गई थीं, जिनमें अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ी संख्या में उत्तरदायी संरचनात्मक उपाय किए गए थे, एआर्इएफ श्रेणी III सहित एफपीआर्इ और घरेलू निवेशकों के बीच अंतर व्यवस्था गठित हो गर्इ है।

सोसल मीडिया सहित मीडिया के कुछ वर्गों में बनार्इ जा रहे इस गलत धारणा को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि घरेलू निवेशकों (एआर्इएफ श्रेणी III सहित) और एफपीआर्इ के बीच अंतर व्यवस्था 2019 बजट से पहले भी मौजूद थी और इसलिए वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 या अंतिम शुक्रवार को वित्त मंत्री द्वारा की गर्इ घोषणा का नतीजा नहीं है।

इस संबंध में, आगे यह निदिष्ट किया जाता है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआर्इ) के मामले में, आयकर अधिनियम, 1961 ('ए एक्ट') में डेरेवेटिव से आय के कराधान के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं (अधिनियम की धारा 2(14) के साथ पठित धारा 115कघ)। इस व्यवस्था के अंतर्गत, डेरेवेटिव से उत्पन्न एफपीआर्इ की आय को पूंजी प्राप्ति के तौर पर समझा गया और अधिनियम की धारा 115कघ के अनुसार कर की विशेष दर के लिए उत्तरदायी है। हालांकि, वैकल्पिक निवेशगत कोष (एआर्इएफ) श्रेणी-III साथ ही साथ उन विदेशी निवेशकों के लिए जो एफपीआर्इ नहीं है, सहित घरेलू निवेशकों के लिए डेरेवेटिव से उत्पन्न आय को हमेशा व्यापारिक आय के तौर पर समझा गया है और नाकि पूंजी प्राप्ति के तौर पर और आय की कर की दर पर लागू होने वाली सामान्य दर पर लागू होती है। इसलिए अंतर व्यवस्था धारा 115कघ के माध्यम से एफपीआर्इ के लिए पहले से मौजूद है। इसलिए कहा जाता है कि एफपीआर्इ और घरेलू निवेशकों के बीच पिछले शुक्रवार को गठित एक अंतर व्यवस्था की वित्त मंत्री की घोषणा या इस साल के बजट में घोषणा गलत है।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी