भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 22 अगस्त, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

सीबीडीटी द्वारा कर से छूट का लाभ लेने वाली छोटी स्टार्ट-अप्स की पात्रता पर स्पष्टीकरण

 

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आज स्पष्ट किया है कि रू. 25 करोड़ तक का कारोबार करने वाले छोटे स्टार्ट-अप्स को कर से छूट दी जाएगी जैसा आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 80-झकग में निर्दिष्ट है, जिसे योग्य स्टार्ट-अप्स के शुरू होने के वर्ष से 7 वर्षों में से 3 वर्षों के लिए इसकी आय के 100 प्रतिशत की कटौती के लिए उपलब्ध कराया गया है।

सीबीडीटी आगे स्पष्ट करता है कि डीपीआर्इआर्इटी द्वारा मान्यताप्राप्त सभी स्टार्ट-अप्स जो डीपीआर्इआर्इटी अधिसूचना में निर्दिष्ट शर्तों का पालन करती है वह अधिनियम की धारा 80-झकग के अंतर्गत कटौती के लिए अपने आप ही योग्य नहीं हो गर्इ थी। एक स्टार्ट-अप को इस कटौती का दावा करने के लिए धारा 80-झकग में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करना होगा। इसलिए, कटौती का दावा करने वाले छोटे स्टार्ट-अप्स के लिए कारोबारी सीमा को अधिनियम की धारा 80-झकग कें प्रावधानों द्वारा निर्धारित किया जाना है नाकि डीपीआर्इआर्इटी अधिसूचना के द्वारा।

सीबीडीटी ने विसंगति का दावा करने वाली कुछ मीडिया रिपोर्ट द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करते हुए कहा है कि आर्इटी कानून को डीपीआर्इआर्इटी के रू. 100 करोड़ के उच्च शुरूआती कारोबार को प्रतिबिंबित करना बाकी था। सीबीडीटी ने कहा है कि डीपीआर्इआर्इटी अधिसूचना दिनांक 19.02.2019 और कथित अधिसूचना के पैरा 3 के कारण आर्इटी अधिनियम, 1961 की धारा 80-झकग में कोर्इ विरोधाभास नहीं था, यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जा चुका है कि एक स्टार्ट-अप केवल तभी अधिनियम की धारा 80-झकग के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए अंतर मंत्रालयीय प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण के लिए आवेदन कर सकेंगे जब स्टार्ट-अप धारा 80-झकग के स्पष्टीकरण के उप-वाक्यांश (i) और उप-वाक्यांश (ii) में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करते हो। इसलिए, डीपीआर्इआर्इटी की अधिसूचना के अनुसार अधिनियम की धारा 80-झकग के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए कारोबारी सीमा भी रू. 25 करोड़ है।

आगे यह निर्दिष्ट किया जाता है कि धारा 80-झकग में योग्य स्टार्ट-अप की ब्यौरेवार परिभाषा शामिल है जो अन्य विषयों के साथ-साथ बताती है कि जो स्टार्ट-अप योग्य व्यापार करती है वह कटौती के योग्य होगी यदि (i) इसे 1 अप्रैल 2016 को या उसके बाद गठित किया गया हो (ii) इसका कारोबार कटौती के वर्ष में रू. 25 करोड़ से अधिक न हो (iii) अंतर मंत्रालयीय प्रमाणन बोर्ड की ओर से प्रमाणपत्र मिला हो।

यह बताया गया था कि यह मुख्य कारण है जिसके कारण डीपीआर्इआर्इटी द्वारा मान्यताप्राप्त स्टार्ट-अप्स की संख्या और अधिनियम की धारा 80-झकग के अंतर्गत कटौती के लिए योग्य स्टार्ट-अप्स के बीच बेहद अंतर था। यह बताना भी उचित होगा कि धारा 80-झकग को स्टार्ट-अप्स के संचालन के प्रारंभिक वर्ष के दौरान उनको बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध प्रोफिट लिंक्ड कटौती की निर्दिष्ट सरकारी नीति के अपवाद के तौर पर वित्त अधिनियम, 2016 के द्वारा शामिल किया गया था। चूंकि उद्देश्य छोटे स्टार्ट-अप्स का समर्थन करना था इसलिए रू. 25 करोड़ की कारोबारी सीमा को प्रोफिट लिंकिंग कटौती देने के लिए उपयुक्त समझा गया।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी