भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 10 अगस्त, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

सीबीडीटी द्वारा स्टार्टअप के संबंध में मूल्यांकन की प्रक्रिया का सरलीकरण

 

वित्त मंत्रालय ने स्टार्ट अप उद्यमों के मामले में निर्धारण की प्रक्रिया को सरल कर दिया है।

यदि जहां स्टार्ट अप उद्यमों के संवीक्षा निर्धारण लंबित है सीबीडीटी ने निर्णय लिया है कि :

   i) यदि स्टार्टअप कंपनियों को डीपीआर्इआर्इटी द्वारा मान्यता दी गर्इ हो जिन्होंने प्रपत्र सं. 2 को दाखिल किया हो और जिनके मामले में धारा 56(2)(viiख) की प्रयोज्यता के एक मुद्दे पर "सीमित संवीक्षा" के अंतर्गत हो तो निर्धारिती के तर्क सरसरी तौर पर स्वीकृत किए जाएगें।

  ii) यदि स्टार्टअप कंपनियों को डीपीआर्इआर्इटी द्वारा मान्यता दी गर्इ हो जिन्होंने प्रपत्र सं. 2 को दाखिल किया हो और जिनके मामले में धारा 56(2)(viiख) की प्रयोज्यता सहित कर्इ मुद्दों की जांच करने के लिए संवीक्षा के अंतर्गत चुने गए हों तो यह मुद्दे मूल्यांकन प्रक्रियाओं के दौरान नहीं अपनाए जाएंगे और अन्य मुद्दों पर पूछताछ पर्यवेक्षी प्राधिकारी के अनुमोदन प्राप्ति के बाद ही निर्धारण अधिकारी द्वारा की जाएगी।

  iii) यदि स्टार्टअप कंपनियों को डीपीआर्इआर्इटी द्वारा मान्यता दी गर्इ हो जिन्होंने प्रपत्र सं. 2 को दाखिल न किया हो लेकिन संवीक्षा को चुना हो तो ऐसे मामलों में यह पूछताछ पर्यवेक्षी प्राधिकारी के अनुमोदन प्राप्ति के बाद ही निर्धारण अधिकारी द्वारा की जाएगी।

उक्त के अलावा, केंद्र सरकार ने आगे डीपीआर्इआर्इटी अधिसूचना सं. 127(र्इ) दिनांक 19.02.2019 के पैरा-6 को राहत देने का निर्णय लिया है और यह साफ किया है कि यह अधिसूचना उन स्टार्टअप कंपनियों के लिए भी लागू होगी जहां परिवर्धन धारा 56(2)(viiख) के अंतर्गत की गर्इ हो और निर्धारिती को डीपीआर्इआर्इटी द्वारा प्राधिकृत किया गया हो और तत्पश्चात् प्रपत्र सं. 2 को दाखिल किया हो। सीबीडीटी की एफ.नं. 173/149/2019-आर्इटीए-1 दिनांक 8 अगस्त, 2019 में इसे प्रभावी करने का परिपत्रwww.incometaxindia.gov.inपर चस्पा किया गया है।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी