भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 27 जून, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

आयकर विभाग द्वारा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में कार्रवार्इ जारी

 

आयकर विभाग ने 27.06.2019 को श्रीनगर स्थित एक प्रसिद्ध व्यापारिक समूह की तलाशी और जब्ती का अभियान चलाया जिसमें कश्मीर घाटी में 4 परिसर और जम्मू क्षेत्र में 6 परिसर शामिल है। जम्मू-कश्मीर के अलावा उस पार्टी से संबंधित 10 अन्य व्यापारिक परिसर लुधियाना, एनसीआर और जम्मू में भी मौजूद है जो कर अपवंचकों की आय को छुपाने में मदद करने में मुख्य रूप से सक्रिय रहा है और ऐसी गैरकानूनी गतिवधियों में संलिप्तता को भी सर्वेक्षण कार्रवार्इ के अंतर्गत कवर किया गया है। यह समूह रियल एस्टेट और सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापार में संलग्न है। इन पर जम्मू कश्मीर बैंक से लिए गए ऋण के बड़ी मात्रा में हेराफेरी और दुरूपयोग करने का आरोप है।

जांच के दौरान यह पता लगा कि जम्मू-कश्मीर बैंक द्वारा कर अपवंचक को गैरकानूनी रूप से रू. 60 करोड़ का लाभ पहुंचाया गया। उसके रू. 190 करोड़ के बकाया ऋण को रू. 130 करोड़ पर व्यवस्थित किया गया जबकि वह किसी रियायती मदद का हकदार नहीं था। इसके अलावा, कम की गर्इ बैंक देनदारी को या तो उसके द्वारा डिफॉल्ट किया गया या पुर्नभुगातान को ऐसे बैंक अधिकारियों की सक्रिय अनदेखी से मदद पहुंचार्इ गर्इ जिसने ऐसी थर्ड पार्टी को उधार देकर उसके ऋण खाते की स्वीकृति दी हो जिसके बदले उसने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के माध्यम से कर अपवंचक को अपना ऋण कोष दिया हो।

जांच के दौरान, यह सबूत मिला था कि मुख्य प्रमोटर दुबर्इ में स्थित एक कंपनी में निदेशक था। उसके पास भी एक विदेशी बैंक खाता था जिसका वह संचालन कर रहा है। ना तो उसका दुबर्इ की कपंनी में कोर्इ हित है ना ही अपनी कर विवरणी में उसने कभी भी विदेशी बैंक खाते का जिक्र किया। उसे काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के अंतर्गत साथ ही साथ कानून द्वारा आवश्यक विदेश निवेश की घोषणा करने में जानबूझकर गलती करने के लिए भूमि के अन्य प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत सजा मिल सकती है।

क्षेत्रीय पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ कि कर अपवंचक ने बेहिसाब नकद के लिए जम्मू के निकट पैराडाइज एवेन्यू की रियल एस्टेट परियोजना के कुछ हिस्से को बेच/बुक कर दिया है। नकद सामग्री का ना तो पैराडाइज एवेन्यू के फ्लैटों के खरीददार द्वारा कर विवरणी में जिक्र किया गया ना ही उसने इसका खुलासा अपने बही खाता की रसीद में किया।

पैराडाइज एवेन्य परियोजना के अलावा, कर अपवंचक खुद के नाम पर या परिवार के सदस्यों के नाम पर रियल एस्टेट लेनदेन भी कर चुका है जिसमें कथित तौर पर रू. 7 करोड़ से अधिक के बेहिसाब नकद का हस्तांतरण किया गया।

विमुद्रीकरण के दौरान, समूह ने नकद में रू. 1.44 करोड़ जमा किए। जांच के दौरान मुख्य प्रमोटर इन नकद जमा के स्रोत के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे सका।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी