भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 6 मर्इ, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

आयकर विवरणी के र्इ-दाखिलीकरण के पंजीकरण में 19 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

 

मीडिया द्वारा यह गलत सूचना दी जा रही है कि वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान इलैक्ट्रानिक रूप से दी गर्इ आयकर विवरणियों (आर्इटीआर) में कमी आर्इ है। यह तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि वित्त वर्ष 2017-18 और वित्त वर्ष 2018-19 के आंकड़ों की प्रत्यक्ष तौर पर तुलना नहीं की जा सकती।

यह कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल कुल 6.74 करोड़ में से 5.47 करोड़ आर्इटीआर को निर्धारण वर्ष 2017-18 (वर्तमान वर्ष) के दौरान दाखिल किया गया। इसकी तुलना में, वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान, 6.68 करोड़ आर्इटीआर को र्इ-रूप से दाखिल किया गया जिसमें मूल्यांकन वर्ष 2018-19 की 6.49 करोड़ आर्इटीआर शामिल है जो लगभग 19 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है। इसका अर्थ यह है कि वास्तव में वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में वित्त वर्ष 2018-19 में बड़ी संख्या में करदाताओं ने अपनी आर्इटीआर को र्इ-रूप से दाखिल किया।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान, मूल्यांकन वर्ष 2017-18 के लिए विवरणी को छोड़कर, मूल्यांकन वर्ष 2016-17 के लिए लगभग 1.21 करोड़ आर्इटीआर दाखिल की गर्इ। मूल्यांकन वर्ष 2015-16 और उससे पूर्व के मूल्यांकन वर्ष के लिए दाखिल शेष आर्इटीआर 0.06 करोड़ है। इसकी तुलना में, वित्त वर्ष 2018-19 में मूल्यांकन वर्ष 2017-18 के लिए केवल 0.14 करोड़ आर्इटीआर ही दाखिल की गर्इ। इसलिए, पूर्व के वर्षों के संबंध में वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान दाखिल आर्इटीआर की संख्या में प्रत्यक्ष कमी आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(5) में प्रभावी तिथि 01.04.2018 से वित्त अधिनियम, 2017 के द्वारा किए गए संशोधन के कारण हुर्इ। परिणामस्वरूप, मूल्यांकन वर्ष 2017-18 से संबंधित केवल 0.14 करोड़ आर्इटीआर वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान दाखिल की गर्इ चूंकि यह प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के लिए संशोधित आर्इटीआर थी जिसे केवल परिवर्तित कानून के कारण दाखिल किया जा सकता था और किसी पूर्व निर्धारण वर्ष की कोर्इ अन्य आर्इटीआर को कानून के संशोधित प्रावधानों को मद्देनजर दाखिल नहीं किया जा सकता था।

यह आंकड़े र्इ-दाखिलीकरण वेबसाइट पर टैब >'फार्इलिंग ग्रोथ (मूल्यांकन वर्ष)' में भी उपलब्ध है

यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए कागजी आर्इटीआर की संख्या केवल 9.2 लाख (कुल दाखिल आर्इटीआर का 1.5 प्रतिशत) थी और मूल्यांकन वर्ष 2018-19 के लिए कागजी आर्इटीआर की संख्या 4.8 लाख है (कुल दाखिल आर्इटीआर का 0.6 प्रतिशत)। उक्त विवरणों के अनुसार, यह दिखाता है कि अधिकतर करदाताओं ने र्इ-दाखिलीकरण की ओर रूख किया जो पूर्व के वर्षों की तुलना में मूल्यांकन वर्ष 2018-19 के लिए दाखिल कागजी विवरणी की संख्या में कमी को दर्शाता है।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी