भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 22 मार्च, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

सीबीडीटी द्वारा मीडिया रिपोर्ट का खंडन

 

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 के अंतर्गत कर्नाटक व गोवा आयकर अन्वेषण निदेशालय द्वारा 2 अगस्त 2017 को श्री डी.के. शिवकुमार एवं समूह के मामलों में एक खोजी कार्रवार्इ की गर्इ। श्री डी.के. शिवकुमार और उसकी कंपनी के विरूद्ध लगाए गए आरोपों के संबंध में बड़ी मात्रा में प्रमाण मिले।

खोज के दौरान, छापा मारने वाली पार्टी को कुछ लूज पेपर दिए गए। वह कर्नाटक विधानसभा, 2009 के विधायक की डायरी के कागज की फोटोकॉपी थी जिसमें कुछ व्यक्ति के नामों के समक्ष अंक लिए हुए थे। इन दस्तावेजों की मूल प्रति कभी नहीं दी गर्इ।

इसे 19/10/2017 को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 131 के अंतर्गत रिकॉर्ड किए गए विवरण में श्री डी.के. शिवकुमार को दिखाया गया।

  ➢  जवाब में, उन्होंने कहा कि यह उनकी डायरी की प्रति थी जिसपर श्री बीएस येदुयरप्पा द्वारा लिया गया था और विधायकों को श्री बीएस येदुयरप्पा की ओर से भुगतान किया गया और विभिन्न नेताओं, एमएलए, मंत्रियों से प्राप्त किया था जब वह सत्ता में थे

  ➢  पूछे जाने पर कि उनके पास यह लूज शीट्स कैसे आर्इ तो श्री डी. के. शिवकुमार ने जवाब में कहा कि राजनेता होने के नाते वह अन्य दलों, नेताओं और सदस्यों के बारे में सूचना प्राप्त करते हैं और चूंकि कथित लूज शीट्स में राजनीतिक सूचना शामिल है इसलिए वह सूचना के स्रोत का खुलासा नहीं कर सकते। आगे, उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसी जानकारी सामान्य लोगों से भी प्राप्त करते रहते हैं

  ➢  उन्होंने यह भी कहा कि वह उस समय नहीं जानते थे कि कथित लेनदेन हो रही है और उनके पास कथित लूज शीट्स की मूल प्रति नहीं थी

  ➢  जब उनसे पूछा गया कि यह मामला कर्नाटक के एसीबी या लोकायुक्त के ध्यान में क्यों नहीं लाया गया तो श्री डी.के. शिवकुमार का कहना था कि वह कथित लूज शीट्स की वास्तविकता के बारे में नहीं जानते थे, उन्होंने इसकी जानकारी प्रवर्तन एजेंसियों को भी नहीं दी

  ➢  उन्होनें आगे कहा कि श्री बीएस येदुयरप्पा द्वारा लिए गए विभिन्न दस्तावेजों और लूज शीट्स में हाथों की लिखावट के बीच तुलना के आधार पर हाथों की लिखावट श्री बी.एस. येदुयरप्पा की हो सकती है

श्री डी.के. शिवकुमार की कथित जब्त सामग्री और विवरण आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 131 के अंतर्गत रिकॉर्ड विवरण में 25.11.2017 को श्री बी.एस. येदुयरप्पा को दिखार्इ गर्इ थी।

  ➢  उन्होंने कहां कि उनको डायरी लिखने की आदत नहीं थी और लूज शीट्स में प्रश्न उनके द्वारा नहीं लिए गए। उन्होंने लूंज शीट्स पर हाथ की लिखार्इ और हस्ताक्षर से मना कर दिया

  ➢  साथ ही, चूंकि हाथों की लिखावट उनकी नहीं है इसलिए उनको कथित लूज शीट्स के विषय के बारे में जानकारी नहीं है

  ➢  उन्होंने आगे कहा कि लूज शीट्स की सामग्री नकली है और मनगढ़ंत है और उनके राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए उनका नाम का प्रयोग किया गया है

  ➢  उन्होंने कथित लूज शीट्स की वास्तविकता को सत्यापित करने के लिए उनकी हाथों की लिखावट का नमूना भी उपलब्ध कराया। आगे, उन्होंने कहा कि लूज शीट्स का मकसद उनकी राजनीतिक छवि को बर्बाद करने के इरादे से दी गर्इ है।

कथित तथ्यों को देखते हुए, निदेशक, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, अंबरपेट पोस्ट, रामनाथनपुर, हैदराबाद-500013 को 18.04.2018 को इसकी जांच के लिए दस्तावेज विश्लेषण और प्रक्रिया समय के उपलब्ध होने पर संपर्क किया गया।

जवाब में, पत्र सं. सीएफएसएल(एच)/दस्तावेज/2018/410 दिनांक 24.04.2018 के द्वारा 24.04.2018 को सीएफएसएल, हैदराबाद ने कहा कि हाथ की लिखार्इ और हस्ताक्षर का परीक्षण कथित प्रयोगशाला में किया गया है और सभी विवादित दस्तावेजों को मूल रूप में भेजा जाना चाहिए। श्री डी.के. शिवकुमार द्वारा कोर्इ मूल दस्तावेज नहीं दिए गए।

इससे स्पष्ट होता है कि विवादित लिखार्इ के फोरेंसिक विश्लेषण की प्रमाणिकता को साबित करने के लिए इसकी मूल प्रति की आवश्यकता होगी। विवादित लिखार्इ की मूल प्रति को प्राप्त करने के लिए संबंधित व्यक्ति से

आयकर विभाग द्वारा संपर्क करके प्रयास किए गए है। हालांकि, मूल लिखावट, यदि मूल लिखावट मौजूद है, के स्थान या वह किसके पास है, इस बारे में कोर्इ जानकारी उपलब्ध नहीं हो पार्इ है। कुछ लूज शीट्स पहली नजर में संदेहास्पद लगती है और उस व्यक्ति द्वारा दी गर्इ है जिस पर कर का उल्लंघन करने के लिए छापा मारा गया था।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी