एफ.नं. 225/15/2019/आर्इटीए.II

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग (सीबीडीटी)

 

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, दिनांक 27 फरवरी, 2019

 

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119(2) के अंतर्गत आदेश

 

डब्ल्यूपी सं. 35382, 32954, 33135 व 37052 दिनांक 19.12.18 में माननीय केरल उच्च न्यायालय के आदेश के परिणाम में केरल के करदाताओं द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 119(2) के अंतर्गत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (बोर्ड) के समक्ष क्षमा याचिकाओं को दाखिल किया गया है। इन याचिकाओं में, यह बताया गया है कि 31.10.18 तक अंकेक्षण रिपोर्ट और विवरणियों को दाखिल करने के लिए सामान्य रूप से एक महीनें की बढ़ार्इ जाने वाली अवधि को केरल के करदाताओं की स्थितियों में आगे बढ़ाएं जाने की आवश्यकता है क्योंकि अगस्त, 2018 में भीषण बाढ़ आर्इ थी। कर्इ व्यापारियों और कारोबारियों के दस्तावेज/खाते खो चुके थे जिसके कारण खातों को अंतिम रूप देने में देरी हुर्इ और 31.10.18 तक कर अंकेक्षण और आयकर विवरणी को दाखिल करने में काफी कठिनार्इयां हुर्इ।

2. मामले पर उचित विचार करने पर केरल में करदाताओं द्वारा महसूस की गर्इ की वास्तविक कठिनार्इयों को कम करने के लिए बोर्ड अधिनियम की धारा 119(2) के अंतर्गत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा निर्देश देते हैं कि केरल के करदाताओं की स्थिति में जिनकी निर्धारण वर्ष 2018-19 से संबंधित लेखांकन रिपोर्ट और आय की विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि 31.10.2018 थी, अंकेक्षण की रिपोर्ट और आय की सभी विवरणियों जिन्हें 28.02.2019 तक दाखिल किया जाना है उसे 31.10.18 तक दाखिल किए जाने के तौर पर समझा जाएगा।

3. आगे, उक्त पैरा 2 में रियायत के अनुसार एफ.सं. 225/358/2018/आर्इटीए.II में बोई के आदेश दिनांक 24.09.18 व 08.10.18 के आंशिक संशोधन में केंरल के करदाताओं जिनके लिए आय की विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि 31.10.18 थी, द्वारा 01.10.18 से 31.10.18 के बीच दाखिल आय की सभी विवरणियां अधिनियम की धारा 234क के प्रावधानों के अनुसार ब्याज को लगाने के लिए उत्तरदायी नहीं होंगी।

4. इस आदेश में कवर केरल के करदाताओं द्वारा विवरणी उक्त पैरों में शामिल निर्देशों के अनुसार प्रसंस्कृत होगी यदि वह अभी तक प्रसंस्कृत न हुर्इ हो तो। यदि विवरणी पहले से ही प्रसंस्कृत हो गर्इ हो तो इसे उक्त पैरों में निर्देशों के अनुसार अधिनियम की धारा 154 के अंतर्गत सांविधिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए सीआर्इटी-सीपीसी, बेंगलुरू या संबंधित क्षेत्राधिकारी आयकर प्राधिकारी, जो भी मामला हो, द्वारा परिशोधित किया जाएगा।

5. यह आदेश केरल के केवल उन करदाताओं पर ही लागू होता है जिसे 31.10.18 तक निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए अंकेक्षण रिपोर्ट और अपनी आय की विवरणी को दाखिल करना आवश्यक था।

कृते

(राजेश्वरी आर.)

अवर सचिव, भारत सरकार

 

निम्न को प्रति

  1. एफएम हेतु पीएस/एफएम हेतु ओएसडी/एमओएस (आर) हेतु पीएस/एमओएस (आर) हेतु ओएसडी

  2. सचिव (राजस्व) हेतु पीएस

  3. अध्यक्ष (सीबीडीटी), सभी सदस्य, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

  4. प्रधान सीसीआर्इटी, केरल

  5. सभी संयुक्त सचिव/सीआर्इटी, सीबीडीटी

  6. आधिकारिक वेबसाइट पर आदेश को चस्पा करने के अनुरोध के साथ एडीजी (पद्धति)-4

  7. अपर आयकर आयुक्त, irsofficers वेबसाइट पर आदेश के चस्पा करने के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ

  8. सीआर्इटी (एमएंडटीपी), सीबीडीटी

 

(राजेश्वरी आर.)

अवर सचिव, भारत सरकार