एम. पी. लोहिया संयोजक
पूर्व भारतीय राजस्व सेवा मैट-भारतीय लेखांकन मानक समिति

 

मुंबर्इ, 18 मार्च, 2016

श्री अतुलेश जिंदल

अध्यक्ष,

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड,

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली-110001

 

महोदय,

 

विषय : अभिग्रहण तथा तत्पश्चात् के वर्ष में भारतीय लेखांकन मानक (भारतीय एएस) शिकायत कंपनियों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115ञख के अंतर्गत न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के उद्ग्रहण के उद्देश्यों के लिए बही लाभ की गणना के लिए ढ़ांचे से संबंधित रिपोर्ट - संबंधी

 

कृपया अभिग्रहण तथा तत्पश्चात् के वर्ष में भारतीय लेखांकन मानक (भारतीय एएस) शिकायत कंपनियों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 ('द एक्ट') की धारा 115ञख के अंतर्गत न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के उद्ग्रहण के उद्देश्य के लिए बही लाभ की गणना के लिए ढ़ांचे से संबंधित परस्पर सुझाव हेतु इस समिति सहित एफ. नं. 133/23/2015-टीपीएल दिनांक 8 जून, 2015 से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आदेश को संदर्भित करें। समिति ने भारतीय एएस शिकायत कंपनियों के बही लाभ की गणना के लिए ढ़ांचे को सुझाने के लिए आयोजित इसकी बैठक के दौरान कंपनी अधिनियम, 2013 की प्रासंगिक धाराओं तथा भारतीय एएस तथा अधिनियम की धारा 115ञख के प्रावधानों पर ब्यौरेवार चर्चा की है।

2. "बही लाभ" अर्थात् कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार तैयार लाभ तथा हानि खाते में चर्चित निविल लाभ, के आधार पर मैट के उदग्रहण के लिए मुहैया अधिनियम की धारा 115ञख के प्रावधान। बही लाभ को निर्धारित करने के लिए, अधिनियम की धारा 115ञख को अग्रेषित हानि/अनवशोषित मूल्यह्रास, परिसंपत्तियों की पुर्नमूल्यांकन, लाभांश का वितरण आदि के लिए मुख्यत: आयकर, लाभों का विनियोग, समायोजन से संबंधित मदों के लिए कुछ समायोजनओं के लिए मुहैया कराया गया है। अग्रेषित हानि/अनवशोषित मूल्यह्रास को लाने के लिए समायोजन कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 205 में शामिल प्रावधानों के आधार पर मुहैया कराया गया है जो लाभांश के वितरण के लिए उपलब्ध राशि को निर्धारित करने के लिए गणना तंत्र को मुहैया कराती हैं। समायोजन इंगित करता है कि अधिनियम की धारा 115ञख के प्रावधान कर से पहले सांधित लाभ की गणना की मांग करते हैं जो उपयुक्तता/वितरण के लिए उपलब्ध हैं। इसलिए, वितरणीय लाभ के बीच अंतनिर्हित संबंध होना दिखार्इ देता है जो अधिनियम की धारा 115ञख के अंतर्गत उदग्रहण मैट के लिए कर आधार तथा कंपनियों के अंतर्गत लाभांश के भुगतान के लिए उपलब्ध हैं।

3. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 129 वार्षिक साधारण बैठक में वित्तीय विवरण की अविशेषज्ञता की अपेक्षा करती हैं। भारतीय एएस शिकायत कंपनियों के लिए, वित्तीय विवरण में इक्विटी में परिवर्तन के तुलन पत्र, लाभ व हानि खाता तथा विवरण शामिल होगा। एक भारतीय एएस शिकायत कंपनी को निम्नलिखित दो भागों में अपने लाभ तथा हानि खाते को द्विभाजन हेतु आपेक्षित होगा।

 क. वर्ष के लिए निविल लाभ अथवा हानि

 ख. निविल अन्य विस्तृत आय (इसमें दोनों (i) उत्तरगामी अवधियों में लाभ अथवा हानि हेतु पुर्नवर्गीकृत करने हेतु मद तथा (ii) उत्तरगामी अवधि में लाभ अथवा हानि हेतु पुर्नवर्गीकृत न करने हेतु मदें)

4. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 123 में एक कंपनी द्वारा लाभांश की घोषणा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। यह धारा परस्पर मुहैया कराती है कि लाभांश वर्तमान वर्ष के लिए लाभों में से अथवा पूर्व के वर्ष के लाभ में से घोषित किया जाएगा। आगे यह मुहैया कराया जाता है कि लाभ की अपर्याप्तता की स्थिति में, लाभांश को पूर्व के वर्षों के संचित लाभों में से घोषित किया जा सकता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस उद्देश्य के लिए वह निग्रह का अर्थ केवल निशुल्क निग्रह होगा। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(43) मुहैया कराती है कि निशुल्क निग्रह उचित कीमत पर देयता अथवा परिसंपत्ति के परिमाप पर लाभ अथवा हानि में अतिरिक्त सहित इक्विटी में प्राधिकृत देयता के अथवा एक परिसंपत्ति की वहनीय राशि में किसी परिवर्तन अथवा परिसंपत्ति के पुर्नमूल्यांकन, काल्पनिक प्राप्ति अथवा अचेतन लाभ प्रदर्शित करते हुए किसी राशि को शामिल नहीं करेगा। इसलिए, धारा 2(43) के साथ पठित धारा 123 काल्पनिक/अचेतन लाभों के साथ निग्रह में से लाभांश के वितरण को रोकता है। समिति ने अवलोकन किया है कि उचित कीमत लेखांकन निविल लाभ के अनुसार तथा भारतीय एएस में सर्वाधिक हैं तथा वर्तमान वर्ष की निविल अन्य व्यापक आय में काल्पनिक/अचेतन लाभ अथवा हानि की बड़ी राशि शामिल हो सकती है। इसलिए, यह प्रतीत होता है कि लाभांश काल्पनिक/अचेतन लाभों के संबंध में किसी समायोजन के बिना वर्तमान वर्ष के लाभों में से दिए जाने के लिए स्वीकृत है।

5. आगे, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(43) के अंतर्गत निशुल्क निक्षेप की परिभाषा को केवल काल्पनिक/अचेतन लाभों के निष्काषन के लिए मुहैया कराया गया है तथा यह काल्पनिक/अचेतन हानियों के बारे में निष्क्रिय है।

6. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 197 मुहैया कराती हैं कि एक सार्वजनिक कंपनी द्वारा देययोग्य कुल प्रबंधकीय पारिश्रमिक उस वर्ष के लिए निविल लाभ के 11 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। कंपनी अधिनियम की धारा 198 जिसमें इस उद्देश्य के लिए लाभ की गणना के लिए तंत्र शामिल है परस्पर मुहैया कराती है कि इस उद्देश्य के लिए लाभ उचित कीमत पर देयता अथवा परिसंपत्ति के परिमापन पर लाभ तथा हानि के खाते में अतिरिक्त राशि सहित इक्विटी में प्राधिकृत देयता अथवा परिसंपत्ति की वहन राशि में कोर्इ परिवर्तन शामिल नहीं होगा।

7. अचेतन/काल्पनिक लाभ तथा हानि के उपचार के लिए कंपनी अधिनियम में विभिन्न अनिवार्यताओं को देखते हुए, समिति ने कार्पोरेट मामला मंत्रालय (एमसीए) द्वारा जारी इन मुद्दों पर स्पष्टीकरण की मांग के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से अनुरोध करते हुए एक पत्रांक दिनांक 27, जुलार्इ, 2015 (परिशिष्ट क के साथ संलग्न) जारी किया।

8. फाइल नं. 17/134/2015 सीएल V दिनांक 11 जनवरी, 2016 (परिशिष्ट ख के तौर पर संलग्न) द्वारा पत्रांक के मार्फत एमसीए सूचित करता है कि निविल, अन्य व्यापक आय में शामिल समस्त काल्पनिक/अचेतन प्राप्ति को लाभांश की गणना के लिए साथ ही साथ प्रबंधकीय पारिश्रमिक के लिए लाभ हेतु वितरणनीय लाभों पर आने के उद्देश्य के लिए अपवर्जित करने हेतु आपेक्षित हैं। एमसीए द्वारा सूचीबद्ध मदें निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत करनी है।

    i. पुर्नमूल्यांकन अतिरिक्त (भारतीय एएस 16 तथा भारतीय 38) में परिवर्तन :

   ii. परिभाषित लाभ योजना का पारिश्रमिक (भारतीय एएस 19)

  iii. विदेशी संचालन के वित्तीय विवरण के स्थानांतर से उत्पन्न लाभ तथा हानि (भारतीय एएस 21) :

  iv. उचित कीमत पर नामित इक्विटी साधनों में निवेश से लाभ तथा हानि (भारतीय एएस 109)

  v. उचित कीमत पर परिमापित वित्तीय परिसंपत्तियों पर लाभ तथा हानि (भारतीय एएस 109)

  vi. हेजिंग साधनों पर प्राप्ति तथा हानि तथा नकद प्रवाह हेजिंग में हेजिंग साधनों पर प्राप्ति तथा हानि का प्रभावी भाग जो इक्विटी साधानों में हेज निवेश भारतीय एएस 109 के पैराग्राफ 5.7.5 के अनुसार अन्य व्यापक आय के माध्यम से उचित कीमत पर परिमापित होता है (भारतीय एएस 109)

 vii. लाभ अथवा हानि के माध्यम से उचित कीमत पर नामित विशेष देयता के लिए, उचित कीमत में परिवर्तन की राशि जो देयता के ऋण जोखिम में परिवर्तन हेतु रोप्य है (भारतीय एएस 109)

viii. विकल्पों की समय की कीमत के मूल्य में परिवर्तन जब विकल्प ग्रहण तथा पद की सयम कीमत तथा आंतरिक मूल्य पृथक होती हो जैसे हेजिंग साधन केवल आंतरिक मूल्य में परिवर्तन करता हो (भारतीय एएस 109 का अध्याय 6)

  ix. अग्रेषित ग्रहण के अग्रेषित पहलुओं की राशि में परिवर्तन जब अग्रेषित अनुबंध तथा पद के अग्रेषित पहलू तथा स्थान पहलू को पृथक करता हो चूंकि हेजिंग साधन वित्तीय साधन के विस्तार के आधार पर विदेशी मुद्रा की राशि में परिवर्तन तथा तत्व पहलू में ही परिवर्तन करता है जब इसे उस वित्तीय संस्थान के पद से हटाया जाता है जैसे हेजिंग साधन से (भारतीय एएस 109 का अध्याय 6)

एमसीए सुझाव देता है कि उक्त सिद्धांत मैट के प्रावधानों के उद्देश्यों के लिए बही लाभ की गणना के लिए विस्तारित किया जा सकता है।

9. समिति ने निम्नलिखित के निगर्मन तथा सिफारिशों पर विचार किया -

  I. एमसीए द्वारा इनपुट के आधार पर कि वर्तमान वर्ष के लाभ (अन्य निविल व्यापक आय को छोड़कर) वितरणीय लाभों के बीच अस्पष्ट संबंध पर विचार करते हुए तथा लाभांश के तौर पर वितरण के लिए उपलब्ध होंगे जो उद्ग्रहण होने वाले मैट के लिए कर आधार तथा कंपनी अधिनियम के अंतर्गत लाभांश के भुगातन के लिए उपलब्ध हैं, अधिनियम की धारा 115ञख के अंतर्गत पहले से निर्दिष्ट उनको छोड़कर भारतीय एएस शिकायती कंपनियों के निविल लाभ (अन्य निविल व्यापक आय को छोड़कर) हेतु किए जाने हेतु आपेक्षित हैं।

 II. जैसा की चर्चा की है, भारतीय एएस के अंतर्गत (अन्य निविल व्यापक लाभ को छोड़कर) निविल लाभ में काल्पनिक/अचतेन लाभ अथवा हानियों की बड़ी राशि शामिल हो सकती है। यदि एमसीए वितरणीय लाभों की गणना के लिए वर्तमान वर्ष के लाभ (अन्य निविल व्यापक आय को छोड़कर) हेतु किसी अग्रिम समायोजन को निर्धारित करता है तो धारा 115ञख के अंतर्गत बही लाभ हेतु अतिरिक्त समायोजन के लिए अनिवार्यता को जांचा जा सकता है।

III. जैसा की उक्त पैरा 3 में चर्चा की है, अन्य निविल समग्र आय में कुछ मदें शामिल हैं जो निग्रह में स्थार्इ रूप से अभिलिखित होती हैं इसलिए बही लाभों की गणना में शामिल लाभ तथा हानि के खाते के विवरण हेतु कभी पुर्नवर्गीकृत नहीं किया जाता। समिति सिफारिश करती है कि ये मदे सही समय पर मैट उद्देश्यों के लिए बही लाभ में शामिल होनी चाहिए। मैट के लिए सिफारिशी उपचार सहित ऐसी मदों की उदाहरणात्मक सूची नीचे दी गर्इ है -

  क्र.सं. मदें सिफारिशी उपचार
  1 पुर्नमूल्यांकन निक्षेप में परिवर्तन (भारतीय एएस 16 तथा भारतीय एएस 38 ) प्राप्ति/निपटान/सेवानिवृत्ति के समय बही लाभों में शामिल करने के लिए
  2 परिभाषित लाभ योजनाओं का पुर्नमूल्यांकन (भारतीय एएस 19) पुर्नपरिमाप प्राप्ति तथा उत्पन्न हानियों के तौर पर प्रति वर्ष बही लाभ में शामिल करने के लिए
  3 अन्य व्यापक आय के माध्यम से उचित कीमत पर नामित इक्विटी साधनों में निवेश द्वारा प्राप्ति तथा हानि प्राप्ति के समय बही लाभों में शामिल किए जाने के लिए

10. समिति ने भारतीय एएस को पहली बार अपनाने के समय के प्रभाव का भी विचार-विमर्श किया है। लेखांकन नीतियां जो एक उद्यम प्रथम बार प्रयोग के समय भारतीय एएस तुलन पत्र में इसके खुलने में प्रयुक्त करती हो इसके भारतीय जीएएपी वित्तीय विवरणों में पहले प्रयुक्त से भिन्न हो सकता है। एक उद्यम को भारतीय एएस के परिवर्तकाल की तिथि पर रखे हुए अर्जन/निक्षेप में प्रत्यक्ष रूप से इन समायोजनों पर रिकॉर्डिड करना आपेक्षित है। समिति ने सिफारिश किया है कि इन मदों का कर्इ तत्पश्चात् बही लाभ की गणना में शामिल लाभ तथा हानि खाते के विवरण हेतु कभी पुर्नवर्गीकृत नहीं होगा। तद्नुसार, समिति ने निम्नलिखित की सिफारिश की है -

   I. जो समायोजनाएं निग्रह में अंकित होती हैं तथा जो तत्पश्चात् लाभ तथा हानि खाते के लिए पुर्नवर्गीकृत होगी, उस वर्ष में बही लाभों में शामिल होनी चाहिए जिसमें यह लाभ तथा हानि खाते के लिए पुर्नमूल्यांकित होती है।

  II. जो समायोजनाएं अन्य समग्र आय में अंकित होती हैं तथा जो तत्पश्चात् लाभ तथा हानि खाते के लिए कभी पुर्नवर्गीकृत नहीं होती (जैसा उक्त पैरा 9.III में चर्चित है), उक्त पैरा 9.III में मुहैया कराए अनुसार बही लाभ में शामिल होना चाहिए।

 III. अन्य समस्त समायोजनएं रोके हुए अर्जन में अंकित हो तथा जो लाभ तथा हानि खाते हेतु तत्पश्चात् कभी पुर्नवर्गीकृत नहीं होगी, भारतीय एएस के पहले अपनाने के वर्ष में बही लाभ में शामिल होनी चाहिए।

धारा 115ञख को बही लाभ की गणना के लिए कुछ समायोजनाओं के लिए पहले ही मुहैया कराया गया है। उक्त समायोजनाएं धारा 115ञख के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार होगी (उदाहरण किसी परिसंपत्ति की राशि में कमी के लिए प्रावधानानुसार निर्धारित राशि बही लाभ हेतु जोड़ी जानी आवश्यक है तथा तद्नुसार उक्त निर्दिष्ट किसी समायोजनाओं में शामिल नहीं होगी)

11. यह ध्यान दिया जा सकता है कि समय-समय पर समिति के संदर्भों की शर्तों के कार्यक्षेत्र के विस्तार के कारण दिए गए समय में समिति उन क्षेत्रों को पहचानने के उद्देश्य के लिए भारतीय एएस/आर्इसीएआर्इ दिशानिर्देश टिप्पणी की जांच पर इसके संभव प्रयास को पूर्ण करने में सक्षम नहीं हुर्इ है जहां अतिरिक्त आर्इसीडीएस को अधिसूचित किए जाने की आवश्यकता हो।

 

(एम पी लोहिया)

संयोजक, मैट-भारतीय लेखांकन मानक समिति

संलग्न : उक्तानुसार

निम्न को प्रति :

  1) सदस्य (एल तथा सी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

  2) संयुक्त सचिव (टीपीएल-I), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

 

परिशिष्ट - क

एम. पी. लोहिया संयोजक
पूर्व भारतीय राजस्व सेवा मैट-भारतीय लेखांकन मानक समिति
  मुंबर्इ,
  27 जुलार्इ, 2015

श्रीमती अनिता कपूर

अध्यक्ष,

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड,

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली-110001

 

महोदया,

 

विषय : भारतीय एएस शिकायती कंपनियों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 के कुछ प्रावधानों के प्रयोग के संबंध में एमसीए से स्पष्टीकरण/दिशा-निर्देश की मांग के लिए अनुरोध - संबंधी

 

कृपया अभिग्रहण तथा तत्पश्चात् के वर्ष में भारतीय लेखांकन मानक (भारतीय एएस) शिकायत कंपनियों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 ('द एक्ट') की धारा 115ञख के अंतर्गत न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के उद्ग्रहण के उद्देश्य के लिए बही लाभ की गणना के लिए ढ़ांचे से संबंधित परस्पर सुझाव हेतु इस समिति सहित एफ. नं. 133/23/2015-टीपीएल दिनांक 8 जून, 2015 से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आदेश को संदर्भित करें। समिति ने भारतीय एएस शिकायत कंपनियों के बही लाभ की गणना के लिए ढ़ांचे को सुझाने के लिए आयोजित इसकी बैठक के दौरान कंपनी अधिनियम, 2013 की प्रासंगिक धाराओं तथा भारतीय एएस तथा अधिनियम की धारा 115ञख के प्रावधानों पर ब्यौरेवार चर्चा की है।

2. "बही लाभ" अर्थात् कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार तैयार लाभ तथा हानि खाते में चर्चित निविल लाभ, के आधार पर मैट के उदग्रहण के लिए मुहैया अधिनियम की धारा 115ञख के प्रावधान। बही लाभ को निर्धारित करने के लिए, अधिनियम की धारा 115ञख को अग्रेषित हानि/अनवशोषित मूल्यह्रास, परिसंपत्तियों की पुर्नमूल्यांकन, लाभांश का वितरण आदि के लिए मुख्यत: आयकर, लाभों का विनियोग, समायोजन से संबंधित मदों के लिए कुछ समायोजनओं के लिए मुहैया कराया गया हैं। अग्रेषित हानि/अनवशोषित मूल्यह्रास को लाने के लिए समायोजन कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 205 में शामिल प्रावधानों के आधार पर मुहैया कराया गया हैं जो लाभांश के वितरण के लिए उपलब्ध राशि को निर्धारित करने के लिए गणना तंत्र को मुहैया कराती हैं। समायोजन इंगित करता हैं कि अधिनियम की धारा 115ञख के प्रावधान कर से पहले सांधित लाभ की गणना की मांग करते हैं जो उपयुक्तता/वितरण के लिए उपलब्ध हैं। इसलिए, वितरणीय लाभ के बीच अंतनिर्हित संबंध होना दिखार्इ देता हैं जो अधिनियम की धारा 115ञख के अंतर्गत उदग्रहण मैट के लिए कर आधार तथा कंपनियों के अंतर्गत लाभांश के भुगतान के लिए उपलब्ध है।

3. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 123 में एक कंपनी द्वारा लाभांश की घोषणा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। धारा परस्पर मुहैया कराती है कि लाभांश कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची II के प्रावधानों के अनुसार मूल्यह्रास के लिए उपलब्ध कराने के पश्चात् वर्तमान वर्ष के लिए लाभों में से अथवा पूर्व के वर्ष के लाभ में से घोषित किया जाएगा। आगे यह मुहैया कराया जाता है कि लाभ की अपर्याप्तता की स्थिति में, लाभांश को पूर्व के वर्षों के संचित लाभों में से घोषित किया जा सकता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस उद्देश्य के लिए वह निक्षेप का अर्थ केवल निशुल्क निक्षेप होगा। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(43) मुहैया कराती है कि निशुल्क निग्रह उचित कीमत पर देयता अथवा परिसंपत्ति के परिमाप पर लाभ अथवा हानि खाते में निग्रह सहित इक्विटी में प्राधिकृत देयता के अथवा एक परिसंपत्ति की वहनीय राशि में किसी परिवर्तन अथवा परिसंपत्ति के पुर्नमूल्यांकन, काल्पनिक प्राप्ति अथवा अचेतन लाभ प्रदर्शित करते हुए किसी राशि को शामिल नहीं करेगा।

4. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 129 वार्षिक साधारण बैठक में वित्तीय विवरण की अविशेषज्ञता की अपेक्षा करती है। भारतीय एएस शिकायत कंपनियों के लिए, वित्तीय विवरण में इक्विटी में परिवर्तन के तुलन पत्र, लाभ व हानि खाता तथा विवरण शामिल होगा। एक भारतीय एएस शिकायत कंपनी को निम्नलिखित तीन भागों में अपने लाभ तथा हानि खाते को द्विभाजन करना आपेक्षित होगा।

 क. वर्ष के लिए निविल लाभ अथवा हानि

 ख. उत्तरगामी अवधियों में लाभ अथवा हानि को पुर्नवर्गीकृत करने के लिए अन्य निविल विस्तृत आय (इस भाग में शामिल मदें कुछ घटनाओं के होने पर आगे की अवधि में लाभ तथा हानि खाते में भेजी जाएगी)

 ग. उत्तरगामी अवधियों में लाभ अथवा हानि को पुर्नवर्गीकृत न करने के लिए अन्य निविल विस्तृत आय (इस भाग में शामिल मदों को आने वाली अवधि में लाभ तथा हानि खातों में नहीं भेजी जाएगा)

5. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 123, जैसा ऊपर चर्चा की गर्इ है, काल्पनिक/अचेतन लाभों के निग्रह में से लाभांश के वितरण को रोकता है। हालांकि, लाभांश को काल्पनिक/अचेतन लाभों के संबंध में किसी प्रतिबद्धता के बिना वर्तमान वर्ष/पूर्व के वर्ष के लाभों में से दिए जाने की स्वीकृति है। उचित कीमत लेखांकन भारतीय एएस में सर्वाधिक है, इसलिए, वर्तमान वर्ष/पूर्व के वर्षों की निविल लाभ/निविल अन्य समग्र आय में काल्पनिक/अचेतन लाभ अथवा हानियों की बड़ी राशि शामिल होगी। जैसा कि वर्तमान वर्ष/पूर्व के वर्ष की निविल लाभ/अन्य निविल समग्र आय में शामिल काल्पनिक/अमूर्त प्राप्ति से लाभ के वितरण पर कोर्इ प्रतिबद्धता नहीं है, संकलित निग्रह से लाभांश भुगतान की तुलना में वर्तमान वर्ष/पूर्व के वर्ष की निविल लाभ/अन्य निविल समग्र आय में से लाभांश के वितरण के उद्देश्य के लिए काल्पनिक/अचेतन लाभों के उपचार में अनिरंतरता दिखार्इ देती है। इस अंतर उपचार के पीछे तर्क समिति द्वारा सराहनीय नहीं हो सकता। समिति का यह भी दृष्टिकोण है कि जल्द से जल्द लाभांशों के वितरण तथा मैट के लिए हानि/काल्पनिक/अचेतन प्राप्ति के लिए उठाया गया कदम निरंतर आधार पर होना चाहिए। इसे देखते हुए, यह अनुरोध किया जाता है कि कार्पोरेट मामला मंत्रालय (एमसीए) लाभांश के वितरण के लिए काल्पनिक/अचेतन लाभों हेतु विभिन्न उपचार को मुहैया कराने के लिए आधारभूत सिद्वांतों को संप्रेषित करने के लिए अनुरोध किया जा सकता है जिससे समिति इस मामले में सूचित अवलोकन कर सके।

6. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 197 मुहैया कराती है कि एक सार्वजनिक कंपनी द्वारा देययोग्य कुल प्रबंधकीय पारिश्रमिक उस वर्ष के लिए निविल लाभ के 11 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। कंपनी अधिनियम की धारा 198 जिसमें इस उद्देश्य के लिए लाभ की गणना के लिए तंत्र शामिल है परस्पर मुहैया कराती है कि इस उद्देश्य के लिए लाभ उचित कीमत पर देयता अथवा परिसंपत्ति के परिमापन पर लाभ तथा हानि के खाते में अतिरिक्त राशि सहित इक्विटी में प्राधिकृत देयता अथवा परिसंपत्ति की वहन राशि में कोर्इ परिवर्तन शामिल नहीं होगा। इस प्रतीत होता है कि एक कंपनी को प्रबंधकीय पारिश्रमिक के आधार को निर्धारित करने के लिए तथा लाभांश भुगतान के लिए वितरणीय निग्रह को निर्धारित करने के उद्देश्य के लिए काल्पनिक/अचेतन प्राप्ति को छोड़कर लाभ की गणना करनी होगी। इसके लिए खातों का पुर्नलेखन की आवश्यकता है विशेषकर भारतीय एएस शिकायती कंपनी के लिए। इस देखते हुए, यह अनुरोध किया जाता है कि एमसीए को सूचित करना आपेक्षित हो सकता है कि एमसीए भारतीय एएस शिकायती कंपनियों द्वारा आवेदन में एकरूपता को सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधकीय पारिश्रमिक के लिए आधार अथवा कथित वितरणीय निक्षेप की गणना के लिए किसी दिशानिर्देश को जारी करने के लिए प्रस्तावित है।

7. आगे, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(43) के अंतर्गत निशुल्क निक्षेप की परिभाषा को केवल काल्पनिक/अचेतन लाभों के निष्काषन के लिए मुहैया कराया गया है तथा यह काल्पनिक/अचेतन हानियों के बारे में निष्क्रिय है। इसलिए, एमसीए से निशुल्क निक्षेप की गणना के उद्देश्य के लिए काल्पनिक/अचेतन हानियों के उपचार के लिए स्पष्टता मुहैया कराने का अनुरोध भी किया जा सकता है। भारतीय एएस की प्रस्तावना के साथ, अचेतन/काल्पनिक प्राप्तियों/हानियों को छोड़ने के पश्चात् लाभों की गणना में जटिल गणनाएं शामिल होगी। इसलिए इसे एमसीए से निश्चित करना भी आवश्यक है कि क्या लाभ अथवा प्रबंधकीय परिश्रमिक आदि के वितरण के लिए लाभों की गणना के लिए ऐसी जटिल गणनाओं का परिहार करने के लिए कानून में किसी परिवर्तन का विचार करते हैं।

8. उक्त हेतु संदर्भित आदेश दिनांक 8 जून, 2015 के अनुसार, समिति को 31 जुलार्इ, 2015 तक भारतीय एएस शिकायती कंपनियों की मैट की गणना के निगर्मन पर इसकी अंतरिम रिपोर्ट को जमा करना आपेक्षित था। समिति ने अपनी तीन बैठकों में विवरण में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया था, हालांकि, उक्त निर्दिष्ट कंपनी अधिनियम, 2013 के कुछ प्रावधानों के प्रयोग से संबंधित मुद्दों पर अनिश्चितता के कारण अंतरिम रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसे देखते हुए यह अनुरोध किया जाता है कि मैट की गणना के निगर्मन पर अंतरिम रिपोर्ट को जमा करने के लिए समय सीमा को उपयुक्त रूप से विस्तारित किया जा सकता है।

 

(एम. पी. लोहिया)

संयोजक, मैट-भारतीय लेखांकन मानक समिति

 

 

परिशिष्ट - ख

फाइल सं. 17/134/2015 सीएल V

भारत सरकार

कार्पोरेट कार्य मंत्रालय

पांचवीं मंजिल, ए विंग, शास्त्री भवन

डा. राजेन्द्र प्रसाद रोड़, नर्इ दिल्ली-110001

दिनांक 11 जनवरी, 2016

आधिकारिक ज्ञापन

विषय : भारतीय-एस हेतु विस्थापित कंपनियों के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) देयता की गणना आगे

 

अधोहस्ताक्षरी निम्नानुसार निर्दिष्ट तथा शीर्ष विषय पर पत्रांक सं. 133/23/2015-टीपीएल दिनांक 15.09.2015 को संदर्भित करने का निर्देश देते हैं :

2. राजस्व विभाग द्वारा चिन्हित मुद्दा है कि मैट प्रावधानों के प्रयोग के उद्देश्य के लिए 'बही लाभ' क्या होना चाहिए, अर्थात् इस तथ्य की सहायता से भारतीय एस शिकायती कंपनियों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115ञख कि कंपनी अधिनियम, 2013 (जिसे अभी अधिसूचित होना है) की प्रस्तावित अनुसूची III के अनुसार वह बही लाभ काल्पनिक/अचेतन प्राप्ति, जिसे वर्ष की 'अन्य निविल समग्र व्यापक आय' के तौर पर परिभाषित किया जाता है, में विचार करने/ध्यान में रखने के पश्चात् प्राप्त होता है।

3. यह पहलू कंपनी अधिनियम, 2013 (लाभांश की घोषणा के साथ व्यवहार) तथा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 198 (प्रबंधकीय पारिश्रमिक के उद्देश्य के लिए लाभों की गणना में व्यवहार) के परिपेक्ष में जांच किए जाने हेतु भी आपेक्षित है चूंकि इन प्रावधानों के आधारभूत सिद्धांत उसी के समकक्ष प्रस्तुत होंगे जैसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115ञख में।

4. उक्त मुद्दे को आर्इसीएआर्इ के साथ विचार में जांचा गया है तथा निम्नलिखित अवलोकन किया गया है :-

  (i) कंपनी अधिनियम, 2013 की भारतीय एएस शिकायती अनुसूची III एनएसीएएस द्वारा सिफारिश की गर्इ हैं तथा मंत्रालय के विचाराधीन है। कथित अनुसूची III आपके संदर्भ के लिए संलग्न है। क्रमांक संख्या XIII, XIV तथा XV में मदें प्रासंगिक हो सकती है।

 (ii) प्रस्तावित अनुसूची III (भाग II) के अनुसार कुल समग्र आय अर्थात् भारतीय शिकायती कंपनियों के लिए प्रस्तावित लाभ व हानि प्रपत्र 'अवधि के लिए लाभ' तथा "अन्य समग्र आय" (अर्थात् अनुसूची III के भाग II की मद XIII तथा XIV का कुल) का कुल है।

 (iii) कि "अन्य व्यापक आय" के घटकों में शामिल हैं :

 (क) पुर्नमूल्यांकन अतिरिक्त (भारतीय एएस 16 तथा भारतीय 38) में परिवर्तन, (ख) परिभाषित लाभ योजना का पारिश्रमिक (भारतीय एएस 19), (ग) विदेशी संचालन के वित्तीय विवरण के स्थानांतर से उत्पन्न लाभ तथा हानि (भारतीय एएस 21), (घ) उचित कीमत पर नामित इक्विटी साधनों में निवेश से लाभ तथा हानि (भारतीय एएस 109), (घक) उचित कीमत पर परिमापित वित्तीय परिसंपत्तियों पर लाभ तथा हानि (भारतीय एएस 109), (ड़) हेजिंग साधनों पर प्राप्ति तथा हानि तथा नकद प्रवाह हेजिंग में हेजिंग साधनों पर प्राप्ति तथा हानि का प्रभावी भाग जो इक्विटी साधानों में हेज निवेश भारतीय एएस 109 के पैराग्राफ 5.7.5 के अनुसार अन्य व्यापक आय के माध्यम से उचित कीमत पर परिमापित होता है (भारतीय एएस 109), (च) लाभ अथवा हानि के माध्यम से उचित कीमत पर नामित विशेष देयता के लिए, उचित कीमत में परिवर्तन की राशि जो देयता के ऋण जोखिम में परिवर्तन हेतु रोप्य है (भारतीय एएस 109), (छ) विकल्पों की समय की कीमत के मूल्य में परिवर्तन जब विकल्प ग्रहण तथा पद की सयम कीमत तथा आंतरिक मूल्य पृथक होती हो जैसे हेजिंग साधन केवल आंतरिक मूल्य में परिवर्तन करता हो (भारतीय एएस 109 का अध्याय 6), (ज) अग्रेषित ग्रहण के अग्रेषित पहलुओं की राशि में परिवर्तन जब अग्रेषित अनुबंध तथा पद के अग्रेषित पहलू तथा स्थान पहलू को पृथक करता हो चूंकि हेजिंग साधन वित्तीय साधन के विस्तार के आधार पर विदेशी मुद्रा की राशि में परिवर्तन तथा तत्व पहलू में ही परिवर्तन करता है जब इसे उस वित्तीय संस्थान के पद से हटाया जाता है जैसे हेजिंग साधन से (भारतीय एएस 109 का अध्याय 6)

5. उक्त 3(iii) में निर्दिष्ट मदें समस्त काल्पनिक/अचेतन प्राप्तियों में निर्दिष्ट मदें हैं तथा इसलिए, इन्हें लाभांश के भुगतान के लिए साथ ही साथ प्रबंधकीय पारिश्रमिक के लिए लाभ की गणना के लिए वितरणीय लाभों पर प्राप्त करने के उद्देश्य से बाहर रखा जाना आपेक्षित है। राजस्व विभाग, इसलिए, मैट प्रावधानों के उद्देश्यों के लिए बही लाभों की गणना के लिए उक्त सिद्धांत को विस्तारित कर सकता है।

6. यह सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के साथ

 

भवदीय

 

(एम. आर. भट)

संयुक्त निदेशक

 

सेवा में,

श्री राजेश कुमार भूत

निदेशक (टीपीएल - III)

वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग,

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड,

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली - 110001

2. गार्ड फाइल