एफ. नं. 404/72/93-आर्इटीसीसी

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी)

 

नर्इ दिल्ली, दिनांक 29 फरवरी, 2016

 

आधिकारिक ज्ञापन

 

विषय : प्रथम अपील स्तर पर मांग को रोकने के लिए दिशानिर्देश को मुहैया कराने के लिए निर्देश सं. 1914 दिनांक 21.03.1996 का आंशिक संशोधन

 

निर्देश सं. 1914 दिनांक 21.03.1996 में मांग को रोकने के अनुदान की प्रक्रिया सहित शेष मांग की वसूली के लिए अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया से संबंधित बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देश शामिल है।

2. निर्देश के भाग 'ग' में, यह निर्धारित किया गया है कि एक मांग तभी रोकी जाएगी यदि ऐसा करने के लिए वैध कारण हो तथा केवल निर्धारण आदेश के समक्ष एक अपील को दाखिल करना मात्र ही मांग की वसूली को रोकने का उचित कारण नहीं होगा। आगे यह निर्धारित किया गया है कि मांग की अनुमति देने के दौरान, क्षेत्रीय अधिकारियों को उपयुक्त सुरक्षा (बैंक गारंटी आदि) का प्रस्ताव निर्धारिती को देना आपेक्षित हो सकता है तथा/अथवा एकमुश्त अथवा किश्तों में उपयुक्त राशि का भुगतान निर्धारिती को करना आपेक्षित हो सकता है।

3. यह प्रतिवेदित किया गया है कि क्षेत्रीय प्राधिकारी प्राय: शेष मांग को रोकने की स्वीकृति से पूर्व विवादित मांग के अति उच्च अनुपात के प्रतिशत पर जोर दें। प्राय: इसका परिणाम अनुरोध को रोकने की करदाता की मांग में कठिनाई हो सकती है।

4. आयकर आयुक्त (ए) के समक्ष विवादित अनुरोध को रोकने के लिए निबंधन के तौर पर निर्धारिती द्वारा किए जाने हेतु आपेक्षित एकमुश्त भुगतान की मात्रा को रोकने तथा मानकीकृत करने की प्रक्रिया को प्रवाहमय रखने के लिए, निम्नलिखित संशोधित दिशा-निर्देश निर्देश सं. 1914 के आंशिक संशोधन में जारी किए जा रहे हैं।

(क) यदि जहां शेष मांग आयकर आयुक्त (ए) के समक्ष विवादित है तो निर्धारिती अधिकारी विवादित मांग के 15 प्रतिशत के भुगतान पर प्रथम अपील के निपटान तक अनुरोध की रोक की स्वीकृति देंगे जबतक मामला इसके अंतर्गत पैरा (ख) में चर्चित श्रेणी में नहीं आता।

(ख) उस स्थिति में जहां,

(क) निर्धारण अधिकारी का मानना हो कि विवादित मांग का परिवर्धन परिणाम ऐसा हो कि 15 प्रतिशत से अधिक की ऐसी एकमुश्त राशि का भुगतान गांरटीकृत हो (उदाहरण : उस स्थिति में जहां इसी मुद्दे पर परिवर्धन पूर्व के वर्षों में अपीलीय प्राधिकारियों द्वारा पुष्ट किया गया हो अथवा उच्चतम न्यायलय अथवा क्षेत्राधिकारी उच्च न्यायलय का निर्णय राजस्व के पक्ष में हो अथवा परिवर्धन खोज अथवा सर्वेक्षण संचालन आदि में एकत्रित विश्वसनीय प्रमाण पर आधारित हो )

(ख) निर्धारण अधिकारी का मानना है कि विवादित मांग का परिवर्धन परिणाम ऐसा हो कि 15 प्रतिशत से अधिक की ऐसी एकमुश्त राशि का भुगतान गांरटीकृत हो (उदाहरण : उस स्थिति में जहां इसी मुद्दे पर परिवर्धन पूर्व के वर्षों में अपीलीय प्राधिकारियों द्वारा हटाया गया हो अथवा उच्चतम न्यायालय अथवा क्षेत्राधिकारी उच्च न्यायालय का निर्णय निर्धारिती आदि के पक्ष में हो) निर्धारण अधिकारी प्रशासनिक प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त के मामले को संदर्भित करेगा, जो समस्त प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करने के पश्चात् शेष मांग को रोकने की स्वीकृति के लिए एकमुश्त भुगतान के तौर पर निर्धारिती द्वारा दी जाने वाली मांग की मात्रा/अनुपात का निर्णय करेगा।

(ग) यदि जहां मांग की रोक विवादित मांग के 15 प्रतिशत के भुगतान पर निर्धारण अधिकारी द्वारा स्वीकृत होती है तथा निर्धारिती अभी भी असंतुष्ट होता है तो वह निर्धारण अधिकारी के निर्णय के मूल्यांकन के लिए क्षेत्राधिकारी प्रशासनिक प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त से संपर्क कर सकता है।

(घ) निर्धारण अधिकारी याचिका को दाखिल करने के 2 सप्ताह के भीतर रोक याचिका का निपटान करेगा। यदि संदर्भ उक्त पैरा 4(ख) के अंतर्गत प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त को किया गया हो अथवा एक मूल्यांकन याचिका उक्त पैरा 4(ग) के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा दाखिल की गर्इ हो, तो इसे ऐसे मूल्यांकन को दाखिल करने वाले निर्धारिती अथवा ऐसा संदर्भ करने वाले निर्धारण अधिकारी, जो भी स्थिति हो, के 2 सप्ताहों के भीतर प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त द्वारा निपटान भी किया जाएगा।

(ड़) रोक की स्वीकृति में, निर्धारण अधिकारी ऐसी शर्तों को लागू कर सकते है जैसा वह ठीक समझे। वह अन्य विषयों के साथ-साथ निम्न कर सकता है -

  (i) निर्धारिती द्वारा निवर्हन की अनिवार्यता कि वह अपील के पूर्व निपटान में सहयोग करेगा अन्यथा रोक आदेश निरस्त होगा।

  (ii) उपयुक्त अवधि (कह सकते है 6 माह) की समाप्ति के पश्चात् पारित आदेश का मूल्यांकन करने का अधिकारी सुरक्षित रखता है अथवा यदि निर्धारिती अपील के पूर्व निपटान में समन्वय नहीं किया है अथवा जहां एक उच्च अपीलीय प्राधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा उत्तरगामी राय उक्त स्थिति को बदल दें।

 (iii) धारा 245 के प्रावधानों के अनुसार तथा रोक की स्वीकृति के लिए आपेक्षित राशि की सीमा तक मांग के समक्ष उत्पन्न प्रतिदाय, यदि हो, को समायोजित करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

5. इन निर्देशों/दिशा-निर्देशों को उचित अनुपालन के लिए आपके क्षेत्राधिकार में कार्यरत समस्त अधिकारियों की सूचना में लाया जा सकता है।

 

(ए.के. सिन्हा)

निदेशक (आर्इटीसीसी)

 

समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/मुख्य आयुक्त/आयकर महानिदेशक

 

निम्न को प्रति :

 

  1. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष तथा समस्त सदस्य

  2. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में समस्त संयुक्त सचिव तथा आयुक्त

 3. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति), प्रधान आयकर महानिदेशक (राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी) तथा प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)

  4. अपर महानिदेशक (वसूली) तथा (पीआर, पीपी एवं ओएल)

  5. संबंधित पोर्टल पर निर्देशों को चस्पा करने के लिए वेबमैनेजर irsofficersonline.gov.in तथा incometaxindia.gov.in

  6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय (30 प्रतियां)