एफ. नं. 504/090/2007-एफटीडी-I

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(विदेशी कर एवं कर अनुसंधान प्रभाग)

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19 फरवरी, 2016

एफएटीसीए तथा सीआरएस के कार्यान्वयन के लिए स्पष्टीकरण

मुद्रा

मार्च 2015 तथा मर्इ 2016 में आने वाले प्रतिवेदन के लिए, समस्त प्रतिवेदन भारतीय रूपए में किया जाना है। 2017 में प्रतिवेदन के लिए, प्रपत्र 61ख तथा योजना मुद्रा के अधिकार तंत्र के लिए क्षेत्र को शामिल करने के लिए संशोधित की जाएगी।

पूर्ववर्ती खाते के तौर पर नया सावधि जमा खाता

2.1 बैंकिंग प्रणाली में, ऐसी प्रक्रियायें हैं जहां सावधि जमा (एफडी) को किसी अतिरिक्त दस्तावेजीकरण के बिना एक मौजूदा ग्राहक जिसके पास उसी वित्तीय संस्थान के पास मौजूदा बचत बैंक खाता है, द्वारा खोला जा सकता है। यह सावधि जमा को मौजूदा बचत बैंक खाते द्वारा नियत पृथक खाता संख्यायें हैं इसलिए, इन्हें बैंकों द्वारा नए खातों के तौर पर वर्गीकृत किया जाता हैं।

2.2 हितधाराक परामर्श के दौरान, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सूचित किया कि ऐसे मामलों में उन निश्चित जमा खातों के लिए कोर्इ अतिरिक्त दस्तावेजीकरण प्राप्त नहीं करना है क्योंकि वह मौजूदा बचत बैंक खातों से वस्तुत: संबधित है तथा समस्त केवार्इसी दस्तावेज मौजूदा बचत बैंक खाते के लिए उपलब्ध हैं।

2.3 इन मामलों में, जहां एफडी खातों के लिए कोर्इ अतिरिक्त दस्तावेजीकरण आपेक्षित नहीं हैं, वित्तीय संस्थान निम्नलिखित शर्तों के अनुसार नए एफडी खातों को पूर्व-मौजूदा खाते के तौर पर समझ सकते हैं :

 क. बचत बैंक खाता एफएटीसीए की स्थिति में 30.06.2014 को अथवा उससे पूर्व खोला जाता है तथा सीआरएस की स्थिति में 31.12.2015 को पूर्व

 ख. संभव प्रयास अनिवार्यता को पूर्व मौजूद बचत बैंक खाते के लिए किए जाने के तौर पर पहले ही किया गया है अथवा प्रक्रिया में है तथा

 ग. खाते को किसी भी संभव प्रयास अनिवार्यता तथा प्रतिवेदन को लागू करने के उद्देश्य के लिए लिंक्ड अथवा एकल खाते अथवा कार्य के तौर पर समझा जाता है।

2.4 उक्त स्थिति मौजूदा बचत बैंक खाते से जुड़ी स्वत: स्वीप सुविधा के लिए भी प्रयोज्य होगी।

वैश्विक अभिरक्षक तथा स्थानीय अभिरक्षक

3.1 वित्त संस्थानों द्वारा जमा किया गया था कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआर्इ) सहित विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में खुले अधिकतर खाते वैश्विक अभिरक्षक (जीसी) के माध्यम से संकुचित हैं जो बदले में भारत में इन विदेशी निवेशकों के पंजीकरण तथा निवेश की सुविधा देने के लिए भारत में स्थानीय उप अभिरक्षकों के साथ नियुक्त अथवा अनुबंध करते हैं। पूछताछ प्राप्त की गर्इ थी कि स्थानीय उप-अभिरक्षक जीसी पर ही उपयुक्त कदम को लागू कर सकता है तथा नाकि जीसी एंड ग्राहकों पर।

3.2 यह निर्णय लिया गया है कि स्थानीय उप-अभिरक्षक को जीसी एंड ग्राहकों द्वारा संघटित खातों पर उपयुक्त कदम उठाना आपेक्षित है। हालांकि, उपयुक्त कदम उठाने के लिए, स्थानीय उप-अभिरक्षक स्व: सत्यापन सहित खाता धारकों के लिए जीसी द्वारा किए गए केवार्इसी/एफएटीसीए/सीआर दस्तावेजीकरण पर निर्भर कर सकता है। आगे, यह स्पष्ट किया जाता है कि संभव प्रयास के लिए बाध्यता तथा प्रतिवेदन उस स्थानीय अभिरक्षक का रहेगा जो खाता धारकों के संबंध में समस्त दस्तावेज का अभिगम करने के लिए भी सक्षम हैं।

एचयूएफ

4.1 कर्इ पूछताछों को एचयूएफ खातों के उपयुक्त कदम के संबंध में प्राप्त किया गया है। मुद्दा है कि उपयुक्त कदम को कर्ता के लिए उठाया जा सकता है अथवा कर्ता सहित समस्त सहदायिकों के लिए।

4.2 इस संबंध में, यह निर्णय लिया गया है कि अनुपालन के लिए, एक एचयूएफ खाते को उद्यम के खाते के तौर पर समझा जाएगा। एचयूएफ खाते के संभव प्रयास पीएमएलए/केवार्इसी प्रक्रिया के अंतर्गत निर्धारितानुसार समान होगा।

एनबीएफसी

5.1 पूछताछ एनबीएफसी द्वारा प्रतिवेदन के संबंध में की गर्इ हैं कि क्या वह निक्षेपागार संस्थान हैं अथवा निवेशगत उद्यम।

5.2 इस संबंध में, यह निर्णय लिया गया है कि एक एनबीएफसी जो निक्षेपागार संस्थान की परिभाषा में निर्दिष्टानुसार बैंकिंग व्यापार अथवा समकक्ष व्यापार के दौरान जमा को स्वीकार करता है, को निक्षेपागार संस्थान के तौर पर समझा जाएगा तथा तद्नुसार प्रतिवेदन करेगा। एक एनबीएफसी जो निवेशगत उद्यम के तौर पर कार्यरत है, तद्नुसार सूचित करेगा।

रिपोर्ट की प्रस्तुति के लिए प्रक्रिया

6. वर्तमान में एफएटीसीए तथा सीआरएस के अंतर्गत पंजीकरण तथा जमा करने के लिए प्रक्रिया प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) द्वारा जारी अधिसूचना सं. 4 दिनांक 4 सितम्बर, 2015 के अनुसार है जो आयकर विभाग की वेबसाइट incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है। हालांकि, रिपोर्ट के पंजीकरण तथा जमा करने की प्रक्रिया को संशोधित किया जा रहा है तथा इसे उक्त संदर्भित वेबसाइट पर उपलब्ध किया जाएगा जैसे तथा जब रोल आउट होगा।