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अनुमोदित4750घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​शेयरों की पुन: खरीद​

  • "पुन: खरीद" का अर्थ कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 77 क के प्रावधानों के अनुसार कंपनी द्वारा स्वयं के शेयरों को खरीदना है
  • शेयर धारक द्वारा शेयरों (प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचीबद्ध शेयर के तौर पर नही) की पुन: खरीद पर कंपनी द्वारा आय की वितरित कोर्इ आय वितरित आय पर 20 प्रतिशत पर प्रभारित होगा
  • वितरित आय अर्थात् राशि जो ऐसे शेयरों के निगर्मन के लिए कंपनी द्वारा प्राप्त की गर्इ थी, द्वारा सीमितानुसार शेयरों की पुन: खरीद पर कंपनी द्वारा किया गया भुगतान प्रतिफल है
  • हालांकि, कंपनी द्वारा ऐसी पुन: खरीद के संबंध में शेयरधारकों हेतु उत्पन्न आय कर से छूटप्राप्त होगी
  
अनुमोदित1000फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​प्रस्तावना

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(23)(झ) भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 से "फर्म" का अर्थ ग्रहण करती है। भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 निम्नानुसार फर्म को परिभाषित करती है :

"व्यक्ति, जो अन्य के साथ सांझेदारी करता है, को व्यक्तिगत "सांझेदार" कहते हैं तथा समग्र रूप से "एक फर्म" तथा नाम जिसके अंतर्गत उनका व्यापार संचालित होता है को "फर्म का नाम" कहते हैं।

फर्म में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 में परिभाषित सीमित देयता भागीदारी शामिल होगी। सीमित भागीदारी देयता अधिनियम, 2008 की धारा 2(1)(ढ) अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत तथा निर्मित भागीदारी के तौर पर "सीमित देयता भागीदारी" को परिभाषित करती है। ​

  
अनुमोदित2000विदेशी फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​​​स्थाई खाता संख्या​

स्थाई खाता संख्या के लिए कैसे आवेदन करें ?

स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज

  • प्रत्येक व्यक्ति यदि पिछले वर्ष के दौरान उसकी कुल आय अथवा उसके संबंध में अन्य किसी व्यक्ति की कुल आय जहां वह निर्धारणीय है, अधिक होती है
    • भारत से बाहर पंजीकृत कंपनी
    • प्रयोज्नीय प्रपत्र  49कक
    • आपेक्षित दस्तावेज : कंपनी के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता हैं) अथवा भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में वाणिज्यि दूतावास अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।

      भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन

स्थिति को जानें

आवेदक आवेदन प्रपत्र की स्वीकृति पर विशिष्ट संख्या सन्निहित पावती प्राप्त करेगा। इस पावती संख्या का उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति जानें सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) को जानने के लिए किया जा सकता है।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीकों से संपर्क किया जा सकता हैं

  • आयकर विभाग विधि, एनएसडीएल, यूटीआईटीएसएल
  • वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ईमेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस SMS NSDLPAN - space
    पावती संख्या व आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए भेज दें 57575 पर
  • पता आयकर पैन सेवा इकार्इ (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड ई-शासन अवसरंचना लिमिटेड
    द्वारा संचालित),
    पांचवां तल, मंत्री स्टर्लिंग,
    प्लाट नं. 341, सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    NSDL UTI Infrastructure Technology And Services Limited,
    राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड यूटीआई अवसंरचना तकनीक तथा सेवा लिमिटेड,
    प्लाट नं. 3, सेक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 के पास
 
 
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अनुमोदित4000विदेशी फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​​कर भुगतान

कंपनियों पर आयकर

कर जो कंपनियों द्वारा अपनी आय पर दिया जाता है उसे निगमित कर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह कंपनियों पर आयकर (निगमित कर) के तौर पर निर्दिष्ट है।

गैर-निगमित निर्धारिती द्वारा कर भुगतान को आयकर के तौर पर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह आयकर (कंपनी को छोड़कर) के तौर पर निर्दिष्ट होना हैं।

अग्रिम कर की गणना तथा भुगतान कैसे किया जाता है ?

अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का भुगतान किश्तों में किया जाना है। आगे देखें

​ अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर किश्तों में दिया जाना है। आगे देखें

​स्थिति 15 जून तक 15 सितम्बर तक 15 दिसंबर तक 15 मार्च तक
निगमित15 %45 %75 %100 %
गैर-निगमितशून्य %30%60%100%

31 मार्च तक दिया गया कोर्इ कर अग्रिम कर के तौर पर समझा जाता है

अग्रिम कर को जमा करना प्रासंगिक कॉलम अर्थात् अग्रिम कर का चयन कर चालान आर्इटीएनएस 280 के माध्यम से किया जाता है

कर की गणना कैसे करें ?

कुल आय, अर्थात् कर हेतु देययोग्य आय, का पता लगाने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी आगे देखें

वर्ष के लिए कुल आय और कर देयता की गणना​

​कुल आय जानने के बाद, यानी, अगले कदम की गणना करने के लिए वर्ष के कर देयता के लिए उत्तरदायी आय हैं। इस संबंध में टैक्स देयता की निर्धारित दरों को लागू करने के लिए गणना की जाती हैं। कर की दरों के लिए, ''कर की दर'' खंड देखें। तालिका के बाद करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मदद मिलेगी।

वर्ष के लिए कुल आय और कर देयता की गणना

विवरण राशि
वेतन से आय ------
गृह संपत्ति से आय ------
मुनाफा और व्यवसाय या पेशे से लाभ ------
पूॅजीगत लाभ ------
अन्य स्त्रोतों से लाभ ------
सकल कुल आय ------
कम: अध्याय छह ए के तहत कटौती (यानी 80यू के लिउए धारा 80 सी के तहत) ------
कुल आय (यानी कर योग्य आय) ------
लागू दरों पर गणना करने के लिए कर योग्य आय ------
कम: खंड 87ए के तहत छूट (बाद में सवाल जवाब पर चर्चा) ------
छूट के बाद टैक्स देयता ------
जोड़: अधिभार (बाद में सवाल जवाब पर चर्चा) ------
अधिभार के बाद टैक्स देयता ------
जोड़े: अधिभार के बादकर देयता पर शिक्षा उपकर 2 प्रतिशत ------
जोड़े: अधिभार के बादकर देयता पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर 1 प्रतिशत ------
86,89,90,90ए और 91 धाराओं के तहत छूट से पहले टैक्स देनदारी(यदि हो तो)(*) ------
कम: 86,89,90,90ए और 91 धाराओं के तहत छूट (यदि हो तो) ------
पूर्व भुगतान से पहले वर्ष के लिए टैक्स देनदारी ------
कम: टीडीएस, टीसीएस और एडंवास टैक्स के रूप में पूर्व भुगतान करो ------
देय टैक्स/लौटाया जाने वाला प्रतिदेय ------

(*) धारा 86 के तहत छूट एक व्यक्ति के संघ के सदस्य (एओपी) या व्यक्तियों (बीओआर्इ) का निकाय एओपी/बीओआर्इ से ऐसे सदस्य द्वारा प्राप्त आय का सम्मान करने के लिए उपलब्ध हैं।

धारा 89 के तहत छूट (यानी, राहत), वेतन उपदान आदि की बकाया राशि की दिशा में प्राप्त राशि के संबंध में एक वेतन-भोगी कर्मचारी को उपलब्ध हैं।

धारा 90, 90क और 91 के तहत छूट दो गुनी आय लगान के संबंध में एक करदाता के लिए उपलब्ध हैं। यानी, जो आयकर विदेशों के साथ ही भारत में लगाया जाता हैं।

ध्यान दें: गैर निगमित कर दाताओं के मामले में कॉरपोरेट करदाताओं और वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी) के संबंधित प्रावधानों के लिए ''मैट/एएमटी'' पर ट्यूटोरियल देखें

न्यूनतम वैकल्पिक कर पर ट्यूटोरियल

कर का भुगतान कैसे करें ?

कंपनियों की स्थिति में र्इ-भुगतान अनिवार्य है

  
अनुमोदित7000एओपी / बीओआई; एचयूएफ; एलएलपी; कर संग्राहक; घरेलू कंपनी; न्यास; फर्म; विदेशी फर्म; व्यक्तिगत; सहकारी संस्थाएं; कर कटौतीकर्ता; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​अपील

आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:

  
अनुमोदित3000एओपी / बीओआई; एचयूएफ; घरेलू कंपनी; न्यास; फर्म; विदेशी फर्म; सहकारी संस्थाएं; एलएलपीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​​शीर्ष आय

गृह संपत्ति से आय

कराधान के लिए शर्तें

  • गृह संपत्ति में उसका कोर्इ भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए
  • करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए
  • गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए

व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति

निम्नलिखित आय व्यापार अथवा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :

  • पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
  • किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोर्इ मुआवजा अथवा अन्य भुगतान

पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय

प्रभार्यता के लिए शर्तें

  • पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
  • यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए
  • स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए

अन्य स्रोतों से आय

अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी

  
अनुमोदित1000एचयूएफश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ)

वेतन में निम्न को शामिल करने के लिए स्पष्ट है

  • हिन्दू अविभाजित परिवार ('एचयूएफ') को आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् 'अधिनियम' के तौर पर संदर्भित) की धारा 2(31) के अंतर्गत एक 'व्यक्ति' के तौर पर समझा जाता है। एचयूएफ अधिनियम के अंतर्गत मूल्यांकन के उद्देश्य के लिए पृथक उद्यम हैं।
  • हिन्दू कानून के अंतर्गत, एक एचयूएफ एक परिवार है जिसमें सामान्य पूर्वजों से समस्त नजदीकी वंशज व्यक्ति शामिल हों तथा जिसमें उनकी पत्नियां तथा अविवाहित पुत्रियां भी शामिल हों। एक एचयूएफ को अनुबंध के अंतर्गत सृर्जित नहीं किया जा सकता, यह हिन्दू परिवार में स्वत: ही सृजत होता है
  • जैन तथा सिक्ख परिवार यद्यपि हिन्दू कानून द्वारा शासी नही है लेकिन अधिनियम के अंतर्गत उन्हें एचयूएफ के तौर पर समझा जाता है

हिन्दू अविभाजित परिवार का मूल्यांकन :-

एक एचयूएफ अधिनियम के अंतर्गत पृथक मूल्यांकनीय उद्यम के तौर पर प्राधिकृत है। उसकी आय को मूल्यांकित किया जा सकता है यदि निम्नलिखित दो शर्तें परिपूर्ण होती है :

  • वहां सहदायिकी होनी चाहिए। इस संबंध में, यह निर्दिष्ट करना उपयुक्त होगा कि एक बार संयुक्त परिवार की आय एचयूएफ के तौर पर मूल्यांकित हो तो इसे ऐसे उत्तरगामी मूल्यांकन वर्षों में मूल्यांकित किया जाना जारी रहता है जबतक विभाजन का सहदायक द्वारा दावा न हो
  • वहां संयुक्त परिवार की संपत्ति होनी चाहिए जिसमें इसके सदस्यों द्वारा स्थानांतरित संपत्ति तथा पैतृक संपत्ति की सहायता सहित प्राप्त संपत्ति, पैतृक संपत्ति शामिल हो

पैतृक संपत्ति : पैतृक संपत्ति उस संपत्ति के तौर परिभाषित हो सकती है जिसमें एक व्यक्ति अपने किसी भी तीन करीबी पुरूष पूर्वजों से पैतृक संपत्ति पाता है अर्थात् अपने पिता, दादा तथा परदादा इसलिए, किसी अन्य संबंध से प्राप्त पैतृक संपत्ति को पैतृक संपत्ति के तौर पर नहीं समझा जाता। निम्नलिखित परिवारों द्वारा संघटित पैतृक संपत्ति से आय एचयूएफ की आय के तौर पर करारोपित है :

  • क) विधवा माता तथा पुत्र (नाबालिग अथवा प्रमुख हो सकता है) का परिवार;
  • ख) पति तथा पत्नी का परिवार, जिसमें बच्चे न हों;
  • ग) मृत भाइयों की दो विधवाओं का परिवार;
  • घ) दो अथवा उससे अधिक भार्इयों का परिवार;
  • ड़) चाचा तथा भतीजा का परिवार;
  • च) माता, पुत्र तथा पुत्र की पत्नी का परिवार;
  • छ) पुरूष तथा उसके स्वर्गीय भार्इ की पत्नी का परिवार।

टिप्पणी

संयुक्त परिवार से पुत्री द्वारा संघटित संपत्ति उसकी निजी संपत्ति होगी। उससे प्राप्त होने वाली कोर्इ आय केवल व्यक्तिगत स्थिति में उसके हाथों कर हेतु वसूलनीय है। यह वंश की क्षमता में संपत्ति प्राप्त करने वाले किसी कानूनी उत्तराधिकारी हेतु भी लागू होगी।

हिन्दू अविभाजित परिवार की कर योग्यता

एचयूएफ की आय की गणना के लिए, व्यक्ति को विभिन्न प्रमुख आय के अंतर्गत अपनी आय को पहले सुनिश्चित करना होगा (अधिनियम की धारा 10 से 13क के अंतर्गत छूट आय को नजरअंदाज करते हुए)। निम्नलिखित बिंदु आय की गणना के दौरान ध्यान में रखने चाहिए

  
अनुमोदित2000एचयूएफश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​​​​​​​​​स्थाई खाता संख्या​

किसे स्थाई खाता संख्या प्राप्त करनी है ?

स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :

  • प्रत्येक व्यक्ति यदि पिछले वर्ष के दौरान उसकी कुल आय अथवा किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह निर्धारणीय है, से अधिक होती है
  • प्रत्येक व्यक्ति जो उस निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन करने का इच्छुक है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।
आगे देखें

​पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--

 •   प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।

 •   एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।

 •   उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।

​​स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा भी प्राप्त किया जाना है :

  • प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय अथवा उसके संबंध में किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय पिछले वर्ष के दौरान मूल्यांकित है जो अधिकतम राशि सो अधिक है जो कर हेतु वसूलनीय नही है
  • एक धर्मांर्थ न्या जिसे धारा 139(4क) के अंतर्गत विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है
  • प्रत्येक व्यक्ति जो किसी व्यापार अथवा पेशे का निष्पादन करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति किसी भी पिछले वर्ष में पांच लाख से अधिक है अथवा अधिक होने की संभावना है
  • प्रत्येक आयातक/निर्यातक जिसे आयात निर्यात कोड प्राप्त करना आपेक्षित है
  • प्रत्येक व्यक्ति जो स्रोत पर कर कटौती के पश्चात् किसी राशि/आय को प्राप्त करने का हकदार है
  • कोर्इ व्यक्ति जो निजी गोदाम जिसमें उत्पाद शुल्क योग्य उत्पाद का भंडारण होता है का पंजीकृत व्यक्ति अथवा उत्पाद शुल्क योग्य उत्पाद का उत्पादक अथवा विनिर्माता अथवा उत्पाद शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है तथा ऐसे व्यक्ति का प्राधिकृत एजेंट
  • व्यक्ति जो केंद्रीय उत्पाद नियम, 1944 के अंतर्गत पंजीकरण की अपेक्षा वाले नियम 57कड़ के अंतर्गत इनवाइस जारी करता है
  • एक व्यक्ति जो सेवा कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है तथा उसका एजेंट
  • केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम तथा प्रासंगिक राज्य अथवा संघ शासित प्रदेश का सामान्य बिक्री कर नियम के अंतर्गत पंजीकृत व्यक्ति
  • प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक है जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है

उक्त किसी भी श्रेणी में न आने वाला व्यक्ति स्वैच्छिक रूप से पैन के लिए आवेदन कर सकता है।

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?

  • 1) ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड की वेबसाइट से किया जा सकता है।
  • स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन स्थाई खाता संख्या केंद्र पर जमा किया जा सकता है
  • पैन आवेदन फार्म डाउनलोड.
  • स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज
    • लागू होने वाला प्रपत्र 49क
    • आवेदन के लिए आपेक्षित दस्तावेज (क) आवेदन की तिथि पर समस्त सहदायकों का नाम, पिता का नाम, पता निर्दिष्ट करते हुए हिन्दू अविभाजित परिवार के कर्ता द्वारा शपथपत्र तथा
       ​(ख) पहचान, पता तथा जन्म तिथि के प्रमाण के तौर पर हिन्दू अविभाजित परिवार के कर्ता के संबंध में व्यक्ति की स्थिति में प्रयोज्नीय किसी दस्तावेज की प्रति

स्थिति का पता लगाएं

आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ​ ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती है।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है

  • विधि आयकर विभाग एवं सेवा लिमिटेड विधि यूटीआईटीएसएल वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ई-मेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए SMS NSDLPAN - स्पेस
    पावती संख्या और भेज दें 57575 पर
  • पता - एनएसडीएल आयकर पैन सेवा इकार्इ ((राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड,
    ई-शासन अवसंरचना लिमिटेड), पांचवां तल, मंत्री स्टरलिंग, प्लाट नं. 341,
    सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लो चौक के निकट, पुणे - 411 016,
    यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड, प्लाट नं. 3, सैक्टर 11,
    सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 द्वारा संचालित)
​​
​​​
  
अनुमोदित6000एओपी / बीओआई; एचयूएफ; एलएलपी; घरेलू कंपनी; न्यास; फर्म; विदेशी फर्म; व्यक्तिगत; सहकारी संस्थाएं; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​प्रतिदाय

​​प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें

प्रतिदाय/मांग स्थिति देखनें के लिए, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें :

  1. यूजर आर्इडी, पासवर्ड, जन्म तिथि/निगमन की तिथि तथा कैपचा के साथ र्इ-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
  2. मेरा खाता पर जाएं तथा "प्रतिदाय/मांग स्थिति" पर क्लिक करें.
  3. निम्न विवरण प्रदर्शित होगा
    • निर्धारण वर्ष
    • स्थिति
    • कारण (प्रतिदाय असफलता यदि हो, के लिए)
    • भुगतान की विधि प्रदर्शित होगी
करदाता अब प्रतिदाय/मांग स्थिति को देख सकते हैं

प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)

प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें :

  1. यूजर आर्इडी, पासवर्ड, जन्म तिथि/निगमन की तिथि तथा कैपचा के साथ र्इ-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
  2. मेरा खाता पर जाएं तथा "प्रतिदाय पुन: निगर्मन अनुरोध" पर क्लिक करें
  3. पैन, निर्धारण वर्ष, सीपीसी संप्रेषण संदर्भ संख्या, प्रतिदाय अनुक्रम संख्या (143(1) पर उपलब्ध) सूचना आदेश प्रविष्टि करें तथा ''मान्य' बटन पर क्लिक करें
  4. मान्यकरण के पश्चात्, करदाता विकल्प से प्रतिदाय पुननिगर्मन की विधि का चयन कर सकते है
    प्रतिदाय पुननिगर्मन की दो विधियां हैं :
    • र्इसीएस
    • कागजी तौर पर (चेक)
  5. करदाता 'क्या आप बैंक खाता विवरण अद्यतन करना चाहते हैं' कोष्ठक के अंतर्गत विकल्प से बैंक खाता विवरण अद्यमत करने का चयन कर सकते हैं ?
    ''यदि करदाता ''हां' का चयन करते हैं, तो करदाता को अतिरिक्त कोष्ठक अर्थात् बैंक खाता संख्या, खाते का प्रकार तथा आर्इएफसीएस कोड/एमआर्इसीआर कोड में विवरण दाखिल करना होगा
  6. करदाता पते का चयन कर सकते हैं जिसके लिए चेक को ड्रापडाउन 'श्रेणी' के अंतर्गत भेजा जाना है
    • यदि करदाता 'आर्इटीआर पते' का चयन करते हैं तो आर्इटीआर अपलोडिड में उपलब्ध कराए गए पते का प्रयोग होगा
    • यदि करदाता ' पैन पते' का चयन करते हैं तो पैन में उपलब्ध कराए गए पते का प्रयोग होगा
    • यदि करदाता 'नया पता' का चयन करते हैं तो करदाता को अतिरिक्त कोष्ठक प्रदर्शन में विवरण को प्रविष्ट करना होगा
  7. करदाता विवरण मान्य करने के लिए "'जमा करें" पर क्लिक करें
    सफलतापूर्वक मान्यकरण पर, करदाता सफलता संदेश प्राप्त करेगा
यहां करदाता द्वारा प्रतिदाय पुननिर्गम की प्रक्रिया का अंत होता है
  
अनुमोदित5000एचयूएफश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56
​​​​​​​​​​​​​विवरणी दाखिलीकरणकिसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ? प्रत्येक हिन्दू अविभाजित परिवार को आय की विवरणी को दाखिल करना चाहिए जिसकी कुल आय (किसी अन्य व्यक्ति की आय जिसके संबंध में वह निर्धारणीय है, सहित) धारा 10क, 10ख अथवा 10खक अथवा अध्याय VIक (अर्थात् धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कटौती) को लागू किए बिना अधिकतम राशि, जो कर हेतु वसूलनीय नहीं है अर्थात् छूट सीमा से अधिक है, से अधिक है। कुल आय की गणना आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज आईटीआर विवरणी प्रपत्र कम प्रपत्र संलग्नता हैं तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नही हैं। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जानें चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जानें पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए। हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक,80-झख,80-झग,80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115ञख अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे। ​ आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?आय की विवरणी को या तो आयकर विभाग के स्थानीय कार्यालय में हार्ड प्रति के रूप में अथवा www.incometaxindiaefiling.gov.in पर इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल किया जा सकता है। आयकर विवरणी   आईटीआर 2 व्यष्टिको और हि. अ. कु के लिए, जिनकी कारबार या वृति के लाभ और अभिलाभ से आय नहीं है पीडीएफ आईटीआर 3 कारबार या वृत्ति से लाभ या अभिलाभ से आय प्राप्त करने वाले व्यष्टियो और हिन्दू अविभक्त कुटुंब के लिए पीडीएफ आईटीआर 4 (एलएलपी से भिन्न) व्यष्टिकों, हिन्दू अवियक्त कुटुम्ब और प्रमों के लिए जिनकी कुल आय 50 लाख रु. तक है और जिसकी गणना धारा 44 कघ, 44कघ या 44कङ के अधीन की जाती है पीडीएफ​ पिछले वर्ष का विवरणी प्रपत्र देखें ​ आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथिआय की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं : हिन्दू अविभाजित परिवार जिसके खाते अंकेक्षित होनें हैं हेतु 30 सितम्बर अन्य समस्त मामलों में 31 जुलार्इ निर्धारिती, जिसे प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, के अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन करने की स्थिति में नियत तिथि 30 नवंबर है। पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल करना हां, बशर्ते मूल विवरणी को नियत तिथि से पूर्व दाखिल किया गया हो तथा विभाग ने निर्धारण को परिपूरित न किया हो। यह अपेक्षा की जाती है कि मूल विवरणी में त्रुटि सही तथा प्रमाणिक प्रकार की हो तथा किसी जानबूझकर त्रुटि का संशोधन न हो। हालांकि, विलंबित विवरणी (नियत तिथि के पश्चात् दाखिल विवरणी के तौर पर) को संशोधित नही किया जा सकता। विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर अथवा निर्धारण की समाप्ति से पूर्व जो भी पहले हो, के भीतर संशोधित किया जा सकता है। क्या नियत तिथि के पश्चात् विवरणी को दाखिल किया जा सकता है ? क्या नियत तिथि के पश्चात् विवरणी को दाखिल किया जा सकता है ? X ​​हां, यदि कोई निर्धारित नियत तारीख को या उससे पहले आयकर विवरणी दाखिल नहीं कर सका है तो वह विलम्बित विवरणी दाखिल कर सकता हैं। विलम्बित विवरणी निर्धारण वर्ष की समाप्ति या निर्धारण पूर्ण किए जाने से एक वर्ष, जो भी पहले हो की अवधि के भीतर दायर की जा सकती है। निर्धारित नियत तिथि के बाद दाखिल की गई विवरणी को विलम्बित विवरणी कहा जाता है। जैसा कि पिछले एफएक्यू में चर्चा की गई है विलम्बित विवरणी पर ब्याज व दंड देय होता है। E.g., विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि को आदेश [एफ.सं. 225/157/2019-आईटीए.II], दिनांक 23.07.2019 के मार्फत 31 जुलार्इ, 2019 से 31 अगस्त, 2019 तक बढ़ा दी गई है।​ मुझे प्रमाण के तौर पर दाखिल विवरणी की प्रति को रखना अनिवार्य हैं तथा कितने समय के लिए ?​ ​​ मुझे प्रमाण के तौर पर दाखिल विवरणी की प्रति को रखना अनिवार्य हैं तथा कितने समय के लिए ? X हाँ ।​ ​​विभिन्न घोषणाएं हैं जो नियोक्ता द्वारा जारी प्रपत्र 16 में प्रतिबिंबित नहीं होतीं . क्या मैं मेरी विवरणी में उनका दावा कर सकता हूं ? ​​विभिन्न घोषणाएं हैं जो नियोक्ता द्वारा जारी प्रपत्र 16 में प्रतिबिंबित नहीं होतीं . क्या मैं मेरी विवरणी में उनका दावा कर सकता हूं ? X ​हां।​   आय की विवरणी को दाखिल करने पर समस्त अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें ​​​
  
अनुमोदित4000एचयूएफश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56
​​​​​​​​​​​​​​​​​​​कर भुगतानआयकर का भुगतान किसे करना चाहिए ?वित्त वर्ष 2020-21 के लिए, यदि आप रू. 2,50,000 से अधिक की आय कमाने वाले हिन्दू अविभाजित परिवार है तो आपको आयकर का भुगतान करने की आवश्यकता है। कराधान की जांच के लिए यहां क्लिक करें कर की गणना कैसे करें ? कुल आय अर्थात् कर हेतु देय राशि, को सुनिश्चित करने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना करना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी। आगे देखें​

​ ​​​ ​ ​

कर भुगतान कैसे करें ?

आयकर भुगतान करने के दो तरीके है तथा व्यक्ति कर का भुगतान करने के लिए किसी भी एक विधि को चुन सकते है

  • किसे अग्रिम कर का भुगतान करना है ?

    किसे अग्रिम कर का भुगतान करना है ?

    प्रत्येक व्यक्ति जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक है अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि निम्नलिखित व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं भले ही उनकी कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक हो :

    व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं

      • धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना का चुनाव करने वाले करदाता उस व्यापार के संबंध में अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं जिसके लिए धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को अपनाया गया है।

      • व्यापार अथवा पेशे से कोर्इ आय प्राप्त न करने वाला निवासी वरिष्ठ नागरिक (अर्थात् प्रासंगिक वित्त वर्ष के दौरान 60 वर्ष अथवा अधिक का व्यक्ति) अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं

  • अग्रिम कर को कैसे आंका तथा भुगतान किया जाता है ?

    कर/अग्रिम कर का भुगतान कैसे करें ?

    अग्रिम कर को वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का निम्नानुसार किश्तों में भुगतान किया जाना है :

    स्थिति 15 जून तक 15 सितम्बर तक 15 दिसंबर तक 15 मार्च तक
    निगमित15 प्रतिशत45 प्रतिशत75 प्रतिशत100 प्रतिशत
    गैर-निगमितशून्य30 प्रतिशत60 प्रतिशत100 प्रतिशत

    31 मार्च तक दिए गए किसी भी कर को अग्रिम कर के तौर पर समझा जाएगा।

    ​​अग्रिम कर को प्रासंगिक कॉलम, अर्थात् अग्रिम कर पर चिन्ह लगाकर आर्इटीएनएस 280 चालान के माध्यम जमा किया जाना है।

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अनुमोदित2000व्यक्तिगत; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​स्थाई खाता संख्या

किसे स्थाई खाता संख्या प्राप्त करनी है ?

स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :

  • प्रत्येक व्यक्ति यदि पिछले वर्ष के दौरान उसकी कुल आय अथवा किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह निर्धारणीय है, अन्य ​से अधिक होती है;
    • की स्थिति में बुनियादी छूट की सीमा
    • व्यक्ति रू. 2,50,000.00
    • 60 वर्ष लेकिन 80 वर्ष की आयु से कम का निवासी व्यक्ति रू. 3,00,000.00
    • 80 वर्ष से अधिक के निवासी व्यक्ति रू. 5,00,000.00
  • प्रत्येक व्यक्ति जो उस निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन करने का इच्छुक है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।
आगे देखें

​पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--

 •   प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।

 •   एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।

 •   उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?

 

स्थिति का पता लगाएं

आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती हैं।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है

  • विधि आयकर विभाग राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड
  • वेबसाइट​ www.incometa​xindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • र्इ-मेल आर्इडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए SMS NSDLPAN स्पेस
    पावती संख्या और भेज दें 57575 पर एनएसडीएल ​
  • पता आयकर पैन सेवा इकाई
    (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, ई-शासन अवसंरचना लिमिटेड द्वारा संचालित​),
    पांचवां तल, मंत्री स्टरलिंग,
    प्लाट नं. 341,
    सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लो चौक के निकट, पुणे - 411016,
    यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड,
    प्लाट नं. 3, सैक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 द्वारा संचालित)
 
 
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अनुमोदित3000व्यक्तिगत; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​​​​शीर्ष आय​

शीर्ष वेतनों के अंतर्गत आय

निम्न शामिल करने के लिए वेतन परिभाषित है :

  • मजदूरी
  • पेंशन
  • वार्षिकी
  • उपादान
  • वेतन अथवा मेहनताना के स्थान पर अथवा के अतिरिक्त शुल्क, कमीशन, अनुलाभ, लाभ

गृह संपत्ति से आय

कराधान के लिए शर्तें

  • गृह संपत्ति में उसका कोर्इ भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए;
  • करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए;
  • गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए।

व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति

निम्नलिखित आय व्यापार तथा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :

  • पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
  • किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोर्इ मुआवजा अथवा अन्य भुगतान

पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय

प्रभार्यता के लिए शर्तें:

  • पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
  • यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए;
  • स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए

अन्य स्त्रोतों से आय

अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी।

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अनुमोदित4000व्यक्तिगत; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​​​​​​​कर भुगतान

आयकर का भुगतान किसे करना चाहिए ?

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए, एक व्यक्ति को आयकर देना आवश्यक है यदि उसकी कुल आय रु. 2,50,000 से अधिक होती है । 60 वर्ष या उससे अधिक या 80 वर्ष से कम के घरेलु व्यक्ति की स्थिति में मूल छूट की सीमा रु. 3,00,0000 है और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के निवासी के व्यक्ति के लिए सीमा रु. 5,00,000 है!

कर की गणना कैसे करें ?

कुल आय अर्थात् कर हेतु देय राशि, को सुनिश्चित करने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना करना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी। आगे देखें​

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कर भुगतान कैसे करें ?

आयकर भुगतान करने के दो तरीके है तथा व्यक्ति कर का भुगतान करने के लिए किसी भी एक विधि को चुन सकते है

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अनुमोदित5000व्यक्तिगत; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​विवरणी दाखिलीकरण

किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?

प्रत्येक उस व्यक्ति को आय की विवरणी को दाखिल करना चाहिए जिसकी कुल आय (किसी अन्य व्यक्ति की आय जिसके संबंध में वह निर्धारणीय है, सहित) धारा 10(38), 10क, 10ख अथवा 10खक अथवा अध्याय VIक (अर्थात् धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कटौती) को लागू किए बिना अधिकतम राशि, जो कर हेतु वसूलनीय नही है अर्थात् छूट सीमा से अधिक है, ​

आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज

आर्इटीआर विवरणी प्रपत्र बिना प्रपत्र संलग्नता हैं तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नही हैं। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जाने चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जाने पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक, 80झख,80-झग, 80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115फब अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित हैं वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे।

आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?

आय की विवरणी को या तो आयकर विभाग के स्थानीय कार्यालय में हार्ड प्रति के रूप में अथवा www.incometaxindiaefiling.gov.in पर इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल किया जा सकता है।

  • आयकर विवरणी
  • आईटीआर 1 (सहज) ऐसे व्यष्टिको के लिए, जो मामूली तौर पर निवासी से भिन्न निवासी है, जिनकी वेतन, एक गृह सम्पत्ति, अन्य स्रोतों (ब्याज आदि) से और कृषि से पचास लाख रूपए तक आये है
  • आईटीआर 2 व्यष्टिको और हि. अ. कु के लिए, जिनकी कारबार या वृति के लाभ और अभिलाभ से आय नहीं है
  • आईटीआर 3कारबार या वृत्ति से लाभ या अभिलाभ से आय प्राप्त करने वाले व्यष्टियो और हिन्दू अविभक्त कुटुंब के लिए
  • आईटीआर 4 (एलएलपी से भिन्न) व्यष्टिकों, हिन्दू अवियक्त कुटुम्ब और प्रमों के लिए जिनकी कुल आय 50 लाख रु. तक है और जिसकी गणना धारा 44 कघ, 44कघ या 44कङ के अधीन की जाती है
  • पिछले वर्ष का विवरणी प्रपत्र देखें

आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि

आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं :

  • व्यक्ति/अविभाजित हिंदु परिवार जिनके खाते अंकेक्षित होने हैं, फर्म के कार्यरत सहभागी जिनके खाते अंकेक्षित होने हैं हेतु निर्धारण वर्ष का 30 सितम्बर
  • अन्तर्राष्ट्रीय लेनदेन या निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन करने वाले एक निर्धारित की स्थिति में जिस प्रपत्र सं. 3गड़ख को प्रस्तुत करना आवश्यक है! निर्धारण वर्ष का 30 नवंबर
  • अन्य समस्त मामलों में निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई

पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल करना

हां

विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर अथवा निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पूर्व जो भी पहले हो, के भीतर संशोधित किया जा सकता है।

​​
  
अनुमोदित2000फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​स्थाई खाता संख्या

​स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?

पैन का अर्थ है स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या हैं। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड के प्रारूप में जारी किया जाता हैं (साधारण पैन के तौर पर प्रसिद्ध)। नीचे दिया गया पैन का वर्णन है : एएलडब्ल्यूएफजी5809एल

स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता हैं। एक सांझेदार फर्म को शब्द "एफ" से प्रदर्शित किया जाता है। (एएलडब्ल्यूएफजी5809एल)

स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?

स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :

  • प्रत्येक व्यक्ति जो किसी व्यापार अथवा पेशे का निष्पादन करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति किसी भी पिछले वर्ष में पांच लाख से अधिक है अथवा अधिक होने की संभावना हैं
  • प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक हैं जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य हैं
आगे देखें ​​

​पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--

 •   प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।

 •   एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।

 •   उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।

​​

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?

वैसे ही जैसे व्यक्ति के मामले में किया है (तब तक पैन आवेदन पत्र डाउनलोड करें)

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स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क है ?

आवेदक को रू. 93 + सेवा कर का भुगतान करना होगा। यदि पैन कार्ड को भारत से बाहर प्रेषित करना हैं तो रू. 879​+ सेवा कर का अतिरिक्त प्रभार आवेदक द्वारा दिया जाना हैं।

स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?

भारत में सांझेदार फर्म को पैन आवेदन पत्र के साथ सांझेदारी विलेख की प्रति अथवा फर्म के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति को जमा कराना होगा।

सांझेदार फर्म के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :

  • देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता हैं) अथवा भारतीय दूतावाास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित हैं में कांसुलेट अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।
  • भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन

किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करना है ?

पैन के लिए आवेदन पर फर्म के किसी सहभागी द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा (हस्ताक्षर न कर पाने की स्थिति में बाएं अंगूठे का निशान)

स्थिति का पता लगाएं

आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अव​संरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती हैं।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है

  • आयकर विभाग राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, यूटीआर्इ अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड विधि
  • Website www.incometa​xindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ई-मेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए SMS NSDLPAN स्पेस
    पावती संख्या और भेज दें 57575 पर
  • पता आयकर पैन सेवा इकाई
    (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, ई-शासन अवसंरचना लिमिटेड),
    पांचवां तल, मंत्री स्टरलिंग,
    प्लाट नं. 341,
    सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लो चौक के निकट, पुणे - 411016,
    यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड,
    प्लाट नं. 3, सैक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 द्वारा संचालित)
 
 
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अनुमोदित7500फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​सहभागी पारिश्रमिक

एक सांझेदार को कितना पारिश्रमिक अथवा ब्याज का भुगतान किया जा सकता हैं ?

  • (क) सांझेदार को ब्याज का भुगतान सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार किया जाएगा। हालांकि यह 12 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक नही होगा;
  • (ख) सांझेदार हेतु देययोग्य पारिश्रमिक सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार किया जाएगा। हालांकि यह निम्नलिखित सीमा से अधिक नही होगा;
    • बही लाभ के प्रथम रू. 3 लाख पर अथवा हानि की स्थिति में - रू. 1,50,000 अथवा बही लाभ का 90 प्रतिशत, जो भी अधिक हो,
    • बही लाभ के शेष पर - बही लाभ का 60 प्रतिशत

सांझेदार को दिए गए वेतन अथवा ब्याज की कटौती

अपने सांझेदार को सांझेदार फर्म द्वारा दी गर्इ निम्नलिखित राशि ऐसी फर्म की कटौती के तौर पर स्वीकार्य नहीं होगी:

  • (1) गैर-कार्यरत सांझेदार को दिए गए वेतन, बोनस, कमीशन अथवा पारिश्रमिक;
  • (2) सांझेदार को दिया गया पारिश्रमिक अथवा ब्याज जो सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार नही हैं
  • (3) यदि सांझेदार को दिया गया पारिश्रमिक अथवा ब्याज सांझेदारी विलेख की शर्तों के अनुसार हैं लेकिन वें सांझेदारी विलेख की तिथि की किसी पूर्व अवधि से संबंधित हैं
  • (4) सांझेदार को दिया गया ब्याज सांझेदारी विलेख की शर्तों के अनुसार हैं लेकिन यह 12 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक है
  • (5) सांझेदार को दिया गया पारिश्रमिक सांझेदारी विलेख के अनुसार हैं लेकिन यह निम्नलिखित स्वीकार्य सीमा से अधिक हैं;
    • (क) बही लाभ के प्रथम रू. 3 लाख पर अथवा हानि की स्थिति में - रू. 1,50,000 अथवा बही लाभ का 90 प्रतिशत, जो भी अधिक हो;
    • (ख) बही लाभ के शेष पर - बही लाभ का 60 प्रतिशत

टिप्पणी :

'बही लाभ' अर्थात् फर्म के समस्त सांझेदारों को दिया गया अथवा देययोग्य पारिश्रमिक की कुल राशि को बढ़ाकर 'व्यापार अथवा पेशे' शीर्षक के अंतर्गत आंके गए निविल लाभ हैं यदि ऐसी राशि निविल लाभ की गणना के समय काटा जाता है।

  
अनुमोदित5000फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?

हां, प्रत्येक सीमित देयता सांझेदारी ('फर्म') को आय अथवा हानि की राशि के बावजूद आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है।

आय की विवरणी के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?

फर्म आईटीआर 5 में अपनी आय की विवरणी को दाखिल कर सकता है

क्या विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?

फर्म के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है। एक फर्म इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत आय की विवरणी को भी दाखिल कर सकता है। हालांकि, धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराने के लिए उत्तरदायी फर्म को डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है

विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि ?

विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि ?

फर्म द्वारा विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं :

  • ब्यौरेवार नियत तिथि
  • फर्म जिन्हें आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराने की आवश्यकता है, के लिए निर्धारण वर्ष की 31 अक्टूबर
  • फर्म​ जिन्हें धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, के लिए निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर
  • अन्य किसी मामले में निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई।
  
अनुमोदित4000एलएलपीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी) पर कर की दर क्या हैं ?

  • (क) आयकर:

    एलएलपी अपनी कुल आय पर 30 प्रतिशत की स्थिर दर पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है

    अधिभार : आयकर (जैसे कि ऊपर गणना की गर्इ है) की राशि ऐसे कर पर 10 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा आगे बढ़ार्इ जाएगी जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो। हालांकि अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा (आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ रूपए से अधिक हो, की राशि के अतिरिक्त एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के रूप में देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी)

    शिक्षा उपकर तथा उच्च तथा माध्यमिक शिक्षा उपकर: आयकर की राशि तथा प्रयोज्नीय अधिभार ऐसे आयकर तथा अधिभार के क्रमश: दो प्रतिशत तथा एक प्रतिशत की दर पर गणना कर आगे शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा उपकर द्वारा बढ़ार्इ जाएगी।

  • (ख) वैक्लिपिक न्यूनतम कर : एलएलपी द्वारा देययोग्य कर धारा 115ग के अनुसार "समायोजित कुल आय' के 18.5 प्रतिशत (अधिभार, शिक्षा उपकर तथा उच्च माध्यमिक शिक्षा उपकर ) से कम नही होनी चाहिए

कर का भुगतान कैसे करें ?

कर निम्नलिखित किसी भी विधि में दिया जा सकता हैं :

टिप्पणी :

करों का र्इ-भुगतान एक सीमित देयता साझेदार के लिए अनिवार्य है जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराने के लिए उत्तरदायी है

​​
  
अनुमोदित2000एलएलपीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​​​​​​स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?

पैन का अर्थ है स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या है। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड के प्रारूप में जारी किया जाता है (साधारण पैन के तौर पर प्रसिद्ध)। नीचे दिया गया पैन का वर्णन है : ALWFG5809L​

स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता है। एक सांझेदार फर्म को शब्द "एफ" से प्रदर्शित किया जाता है। (ALWFG5809L)

स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?

स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त की जानी है :

  • प्रत्येक व्यक्ति जो किसी व्यापार अथवा पेशे का निष्पादन करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति किसी भी पिछले वर्ष में पांच लाख से अधिक है अथवा अधिक होने की संभावना है
  • प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक है जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है
आगे देखें

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​पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--

 •   प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।

 •   एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।

 •   उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?

स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क हैं ?

आवेदक को रू. 93 + सेवा कर का भुगतान करना होगा। यदि पैन कार्ड को भारत से बाहर प्रेषित करना हैं तो रू. 771+ सेवा कर का अतिरिक्त प्रभार आवेदक द्वारा देना पड़ेगा।

स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?

भारत में पंजीकृत सीमित देयता साझेदारी ('एलएलपी') को पैन आवेदन पत्र के साथ सांझेदारी विलेख की प्रति अथवा एलएलपी के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति को जमा कराना होगा।

एलएलपी के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :

  • देश, जहां आवेदक स्थित हैं, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता है) अथवा भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में कांसुलेट अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।
  • भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन

किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करना हैं ?

पैन के लिए आवेदन पर सीमित देयता साझेदारी के किसी सहभागी द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा (हस्ताक्षर न कर पाने की स्थिति में बाएं अंगूठे का निशान)

स्थिति का पता लगाएं

आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआर्इ अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती हैं।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है

  • आयकर विभाग राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड विधि
  • Website www.incometa​xindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ई-मेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए SMS NSDLPAN स्पेस
    पावती संख्या और भेज दें 57575 पर
  • पता आयकर पैन सेवा इकाई
    (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, ई-शासन अवसंरचना लिमिटेड),
    पांचवां तल, मंत्री स्टरलिंग,
    प्लाट नं. 341,
    सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लो चौक के निकट, पुणे - 411016,
    यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड,
    प्लाट नं. 3, सैक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 द्वारा संचालित)
 
 
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अनुमोदित8000एलएलपीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​सहभागी पारिश्रमिक

एक सांझेदार को कितना पारिश्रमिक अथवा ब्याज का भुगतान स्वीकार्य है ?

  • (क) सांझेदारों को देययोग्य ब्याज 12 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक नहीं होगा।
  • ख) सांझेदारों को देययोग्य पारिश्रमिक निम्नलिखित सीमा से अधिक नहीं होगा:
    • बही लाभ के प्रथम रू. 3 लाख पर अथवा हानि की स्थिति में - रू. 1,50,000 अथवा बही लाभ का 90 प्रतिशत, जो भी अधिक हो;
    • बही लाभ के शेष पर - बही लाभ का 60 प्रतिशत

सांझेदार को दिए गए वेतन अथवा ब्याज की कटौती

अपने सांझेदार को सीमित देयता सांझेदारी द्वारा दिया गया निम्नलिखित भुगतान कटौती के तौर पर स्वीकार्य नहीं होगा;

  • (1) गैर-कार्यरत सांझेदार को दिए गए वेतन, बोनस, कमीशन अथवा पारिश्रमिक;
  • (2) सांझेदारों को दिया गया पारिश्रमिक अथवा ब्याज जो सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार नही है
  • (3) यदि सांझेदारों को दिया गया पारिश्रमिक अथवा ब्याज सांझेदारी विलेख की शर्तों के अनुसार हैं लेकिन वह सांझेदारी विलेख की तिथि की किसी पूर्व अवधि से संबंधित है
  • (4) सांझेदार को दिया गया ब्याज 12 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक हो;
  • (5) सांझेदारों को दिया गया पारिश्रमिक सांझेदारी विलेख के अनुसार है लेकिन यह निम्नलिखित स्वीकार्य सीमा से अधिक हैं:
    • (क) बही लाभ के प्रथम रू. 3 लाख पर अथवा हानि की स्थिति में - रू. 1,50,000 अथवा बही लाभ का 90 प्रतिशत, जो भी अधिक हो;
    • (ख) बही लाभ के शेष पर - बही लाभ का 60 प्रतिशत

टिप्पणी :

'बही लाभ' अर्थात् फर्म के समस्त सांझेदारों को दिया गया अथवा देययोग्य पारिश्रमिक की कुल राशि को बढ़ाकर 'व्यापार अथवा पेशे' शीर्षक के अंतर्गत आंके गए निविल लाभ हैं यदि ऐसी राशि निविल लाभ की गणना के समय काटा जाता हैं।

  
अनुमोदित1250कर संग्राहकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​कर कटौती खाता संख्या का अर्थ

कर संग्रह खाता संख्या आयकर विभाग (तत्पश्चात् "टैन" के रूप में संदर्भित) द्वारा जारी 10 अंकीय अक्षरांकीय संख्या हैं। कर कटौती खाता संख्या समस्त व्यक्तियों, जो स्रोत पर कर संग्रहण ('टीसीएस') के लिए उत्तरदायी हैं, द्वारा प्राप्त करना आपेक्षित हैं।

नीचे कर कटौती खाता संख्या का उदहारण दिया गया है।

DELM12345L

कर कटौती खाता संख्या के प्रथम 3 अक्षर क्षेत्राधिकार कोड दर्शाते हैं, चतुर्थ अक्षर कर कटौती खाता संख्या धारक का शुरूआती नाम है। कर कटौती खाता संख्या की अगले 5 अंक 00001 से 99999 के बीच सिस्टम द्वारा उत्पन्न अंक हैं तथा अंतिम अक्षर अर्थात् दसवां अक्षर वर्णानुक्रमक जांच अंक हैं।

कर कटौती खाता संख्या के लिए आवेदन करने हेतु उत्तरदायी व्यक्ति

प्रत्येक व्यक्ति जो स्रोत पर कर संग्रहण के लिए उत्तरदायी हैं उसे कर कटौती खाता संख्या प्राप्त करना आपेक्षित हैं

कर कटौती खाता संख्या की प्रासंगिकता

निम्नलिखित दस्तावेजों में कर कटौती खाता संख्या को उद्धृत करना अनिवार्य है:

  • (क) स्रोत पर कर संग्रहण अर्थात् विवरणी
  • (ख) स्रोत पर कर संग्रहण के भुगतान के लिए चालान
  • (ग) स्रोत पर कर संग्रहण प्रमाणपत्र
  • (घ) अन्य दस्तावेज जिन्हें निर्धारित किया जा सकता हैं

जुर्माना :

यदि एक व्यक्ति कर कटौती खाता संख्या के लिए आवेदन करने में अथवा उद्धृत करने में अथवा उक्त निर्दिष्ट दस्तावेजों में गलत कर कटौती खाता संख्या उद्धृत करता है तो उस पर रू. 10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

कर कटौती खाता संख्या प्राप्त करने की प्रक्रिया

कर कटौती खाता संख्या के आवंटन के लिए आवेदन किसी भी कर सूचना तंत्र सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) में प्रपत्र सं. 49ख में प्रतिरूप में किया जा सकेगा। कर सूचना तंत्र - सुविधा केंद्र का पता केंद्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड-कर सूचना तंत्र वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। वैकल्पिक रूप से एक व्यक्ति केंद्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड-कर सूचना तंत्र वेबसाइट पर कर कटौती संख्या के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।

कर कटौती खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए शुल्क

रू. 55 + सेवा कर (जैसा लागू हो) के शुल्क का भुगतान कर कटौती खाता संख्या के लिए आवेदन जमा कराने के दौरान प्रसंस्करण शुल्क के तौर पर किया जाना चाहिए।

  
अनुमोदित3000कर संग्राहकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​केंद्र सरकार के ऋण हेतु टीसीएस को जमा करने के लिए नियत तिथि

स्रोत पर कर संग्रहण निम्नलिखित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार के ऋण हेतु जमा की जाएगी :

  • 1) यदि कर सरकारी कार्यालय द्वारा संग्रहण किया जाता है :
    • जहां कर उसी दिन जब कर एकत्रित हुआ है, को आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना दिया जाता है।
    • जहां कर का भुगतान माह जिसमें कर एकत्रित हुआ है, की समाप्ति से 7 दिन को अथवा उससे पहले आयकर चालान सहित संलग्न होता है।
  • 2) जहां कर माह, जिसमें कर एकत्रित होता है, के अंतिम दिन से एक सप्ताह के भीतर गैर-सरकारी व्यक्ति द्वारा एकत्रित होता है।

स्रोत पर कर संग्रहण की विधि :

स्रोत पर कर संग्रहण निम्नलिखित विधियों में केंद्र सरकार के ऋण हेतु जमा किया जाएगा :

  • 1) र्इ-भुगतान : र्इ-भुगतान निम्न के लिए अनिवार्य है :
    • क) समस्त निगमित निर्धारिती
    • ख) समस्त निर्धारिती (कंपनी के अलावा) जिनके लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के प्रावधान प्रयोज्य है ​
  • 2) वास्तविक विधि : प्राधिकृत बैंक शाखा में चालान सं. 281 की प्रस्तुति द्वारा

टिप्पणी : ​​

जब कर सरकारी कार्यालय द्वारा एकत्रित होता है तो इसे आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना तथा केवल बही समायोजन करके केंद्र सरकार हेतु राशि को प्रेषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में, इसे निर्धारित समय-सीमा के साथ एनएसडीएल को प्रपत्र सं. 24छ को प्रस्तुत करना होगा।

परिणाम यदि चूक स्रोत पर कर संग्रहण के भुगतान में की जाती है

एक संग्राहक को निम्नलिखित परिणामों का सामना करना होगा यदि वह स्रोत पर कर संग्रहण करने में अथवा इसके संग्रहण करने के पश्चात् उसे केंद्र सरकार के खाते हेतु जमा करने में विफल रहता है

  • क) ब्याज उदग्रहण :  यदि स्रोत पर कर संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति इसे एकत्रित नहीं करता अथवा एकत्र करने के पश्चात् सरकार को भुगतान करने में विफल रहता है तो वह तिथि जिस पर ऐसा कर संग्रहनीय था के मुकाबले तिथि जिस पर कर को वास्तविक रूप से एकत्रित किया गया था, से ऐसे कर की राशि पर माह अथवा उसके भाग पर 1 प्रतिशत की दर पर साधारण ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
  • ख) जुर्माने का उदग्रहण : यदि कोर्इ व्यक्ति पूर्ण अथवा कर के किसी भाग को एकत्रित करने में विफल होता है तो ऐसा व्यक्ति धारा 271गक के अंतर्गत जुर्माने के रूप में कर, जो ऐसा व्यक्ति एकत्रित करने में विफल होता है, की राशि के समान कुल पैसों को देने के लिए उत्तरदायी होगा।
  • ग) अभियोजन : यदि एक व्यक्ति उसके द्वारा एकत्रित कर को केंद्र सरकार के ऋण को जमा करने में विफल होता है तो वह ऐसी अवधि के लिए कठोर कारावास के साथ दंडनीय होगा जो जुर्माने सहित कम से कम तीन माह की होगी लेकिन जिसे सात वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।
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अनुमोदित5000कर संग्राहकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​स्रोत पर कर संग्रहण विवरण की प्रस्तुति हेतु उत्तरदायी व्यक्ति

स्रोत पर कर संग्रहण के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति को उसके संबंध में तिमाही विवरण प्रस्तुत करना आपेक्षित हैं

स्रोत पर कर संग्रहण विवरण को दाखिल करने के लिए प्रपत्र

त्रैमासिक स्रोत पर कर संग्रहण विवरण प्रपत्र सं. 27ड़थ में प्रस्तुत किया जाएगा

स्रोत पर कर संग्रहण विवरण दाखिल करने की नियत तिथि

स्रोत पर कर संग्रहण विवरण दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार हैं :—

  • वित्तीय वर्ष की त्रैमासिक समाप्ति नियत तिथि
  • 30 जून वित्तीय वर्ष की 15 जुलाई
  • 30 सितम्बर वित्तीय वर्ष का 15 अक्टूबर
  • 31 दिसंबर वित्तीय वर्ष की 15 जनवरी
  • 31 मार्च वित्त वर्ष जिसमें संग्रहण किया गया के ठीक आगामी वित्त वर्ष की 15 मई

स्त्रोत पर कर संग्रहण विवरण की इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुति

त्रैमासिक स्रोत पर कर संग्रहण विवरण निम्नलिखित किसी भी विधि में इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा:

  • (क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरण की प्रस्तुति; अथवा
  • (ख) प्रपत्र 27क में अथवा इलैक्ट्रानिक प्रपत्र 27 क में विवरण के सत्यापन अथवा इलैक्ट्रॉनिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्यापन सहित इलैक्ट्रॉनिक विवरण की प्रस्तुति
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अनुमोदित4000कर संग्राहकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​स्रोत पर कर संग्रहण दरें

श्रेणी-1

प्रत्येक व्यक्ति, विक्रेता के तौर पर, क्रेता के खाते में विक्रेता द्वारा देययोग्य राशि को खाते में डालने के समय अथवा कथित क्रेता द्वारा ऐसी राशि की प्राप्ति के समय, जो भी पहले हो, आयकर के रूप में ऐसी राशि के कथित तालिका के कॉलम (2) में अनुरूप प्रविष्टि में निर्दिष्ट प्रतिशत के समान राशि नीचे तालिका के कॉलम (1) में निर्दिष्ट किसी भी प्रकार के उत्पाद के खरीददार से एकत्रित करेगा:

  • उत्पाद का प्रकार दर (% में)
  • मानवीय उपयोग के लिए मादक पेय 1
  • तेंदू पत्ते 5
  • वन पट्टेदारी के अंतर्गत प्राप्त टिम्बर 2.5
  • वन पट्टेदारी को छोड़कर किसी अन्य विधि द्वारा प्राप्त टिम्बर 2.5
  • अन्य कोर्इ वन उत्पाद (टिम्बर/तेंदु पत्ते के तौर पर नहीं) 2.5
  • स्क्रैप 1
  • कोयला अथवा लिग्नाइट अथवा लौह अयस्क के तौर पर खनिज 1

श्रेणी-2

प्रत्येक व्यक्ति, जो व्यापार के उद्देश्य के लिए किसी पार्किंग लॉट अथवा टोल प्लाजा अथवा खदान अथवा स्रोत के प्रयोग के लिए एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (बाद में इस धारा में "लार्इसेंस अथवा पट्टेदार" के रूप में संदर्भित) को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे पार्किंग लॉट अथवा टोल प्लाजा अथवा खदान अथवा स्रोत के पूर्ण अथवा किसी भाग में ब्याज अथवा किसी अधिकार का स्थानांतरण अथवा अनुबंध करता है अथवा लाइसेंस अथवा पट्टेदारी की वृत्ति देता हो, को आयकर के रूप में ऐसी राशि के कथित तालिका के कॉलम (3) में अनुरूप प्रविष्टि में निर्दिष्ट प्रतिशत के समान राशि नीचे तालिका के कॉलम(2) में निर्दिष्ट प्रकार के ऐसे लार्इसेंस, अनुबंध अथवा पट्टेदारी के लार्इसेंस अथवा पट्टेदारी से लार्इसेंस अथवा पट्टेदारी, जो भी पहले हो, से ऐसी राशि की प्राप्ति के समय लार्इसेंस अथवा पट्टेदारी के खाते में लार्इसेंस अथवा पट्टेदारी द्वारा देययोग्य राशि को खाते में जमा कराते समय करेंगे।

  • अनुबंध अथवा लार्इसेंस अथवा पट्टेदारी आदि का प्रकार दर (% में)
  • पार्किंग लॉट 2
  • टोल प्लाजा 2
  • खदान तथा स्रोत 2

श्रेणी-3

प्रत्येक व्यक्ति, विक्रेता के तौर पर, जो सोना-चांदी अथवा आभूषण की बिक्री हेतु प्रतिफल के रूप में नकद में किसी राशि को प्राप्त करता हैं, आयकर के रूप में बिक्री प्रतिफल के 1 प्रतिशत के समान राशि से एकत्रित ऐसी नकद राशि की प्राप्ति के समय करेगा, यदि ऐसा प्रतिफल

(i) सोने-चांदी हेतु रू. 2,00,000 से अधिक; अथवा

(ii) आभूषण हेतु रू. 5,00,000 से अधिक

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अनुमोदित4000कर कटौतीकर्ताश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​केंद्र सरकार के खाते में जमा कराने हेतु स्रोत पर कर कटौती को जमा करने के लिए नियत तिथि:

स्रोत पर कर कटौती निम्नलिखित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार के खाते में जमा की जाएगी

  • (1) यदि कटौतीदाता सरकारी कार्यालय है :
    • विवरण नियत तिथि
    • (क) जहां कर आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना दिया जाता है उसी दिन जब कर की कटौती की जाती है
    • (ख) जहां कर का भुगतान आयकर चालान सहित किया जाता है माह, जिसमें धारा 192(1क) के अंतर्गत कटौती की जाती हैं अथवा आयकर देय होता है, की समाप्ति से 7 दिन पर अथवा इससे पूर्व
  • (2) अन्य कटौतीदाता की स्थिति में
    • विवरण नियत तिथि
    • (क) जहां राशि मार्च के महीने में खाते में जमा अथवा भुगतान किया जाता है 30 अप्रैल को अथवा इससे पूर्व
    • (ख) अन्य किसी मामले में माह, जिसमें धारा 1192 की उप-धारा (1क) के अंतर्गत कटौती की जाती है अथवा आयकर देय होता है, की समाप्ति से 7 दिन पर अथवा इससे पूर्व

धारा 194-झक के अंतर्गत काटी गर्इ कोर्इ राशि माह जिसमें कटौती हुर्इ है, की समाप्ति से सात दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार के खाते में ऋण का भुगतान किया जाएगा तथा प्रपत्र सं. 26थख में चालान-सह-विवरण सहित होगा।

स्रोत पर कर कटौती जमा करने की विधि :

स्रोत पर कर कटौती निम्नलिखित विधियों में केंद्र सरकार के खाते में जमा की जाएगी

  • (1) र्इ-भुगतान : र्इ-भुगतान निम्न हेतु अनिवार्य है :
    • (क) समस्त निगमित निर्धारिती
    • (ख) समस्त निर्धारिती (कंपनी के अलावा) जिनपर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के प्रावधान लागू होते हैं
  • (2) भौतिक विधि : : प्राधिकृत बैंक शाखा में चालान सं. 281 की प्रस्तुति द्वारा

टिप्पणी :

जब कर सरकारी कार्यालय द्वारा काटा/एकत्रित किया जाता है तो यह आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना तथा केवल खाता समायोजन करके राशि केंद्र सरकार को प्रेषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को प्रपत्र सं. 24छ प्रस्तुत करना होता है।

परिणाम यदि स्रोत पर कर कटौती के भुगतान में चूक हो

एक कटौतीदाता को निम्नलिखित परिणामों को भुगतना होगा यदि वह स्रोत पर कर कटौती करने में विफल रहता है अथवा कटौती करने के पश्चात् उसे केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु जमा कराने में विफल रहता है।

  • (क) व्यय की अस्वीकार्यता : धारा 40(क)(i) के अनुसार भारत से बाहर अथवा गैर-निवासी को जो प्राप्तकर्ता के हाथों भारत में कर हेतु वसूलनीय है, देययोग्य कोर्इ राशि (वेतन को छोड़कर) कटौती हेतु स्वीकार्य नहीं होगी यदि इसका स्रोत पर कर कटौती के बिना भुगतान होता है अथवा यदि कर कटौती होती है लेकिन विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि तक केंद्र सरकार के साथ जमा नही की जाती।

    हालांकि यदि कर उत्तरगामी वर्ष में काटी अथवा जमा की जाती हैं, जो भी स्थिति हो तो व्यय उस वर्ष में कटौती के रूप में स्वीकार्य होगा।

    उसी प्रकार, धारा 40(क)(iक) के अनुसार निवासी को देययोग्य कोर्इ राशि, जो स्रोत पर कर कटौती का विषय है, 30 प्रतिशत अस्वीकार्यता को आकृष्ट करेगी यदि यह स्रोत पर कर कटौती के बिना भुगतान किया जाता है अथवा यदि कर काटा जाता है लेकिन विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि तक केंद्र सरकार को जमा नही की जाती।

    हालांकि ऐसी राशि के संबंध में कर उत्तरगामी वर्ष में काटी अथवा जमा की जाती है, जो भी स्थिति हो, तो ऐसा अस्वीकार्य व्यय उस वर्ष में कटौती के रूप में स्वीकार्य होगा।

  • (ख) ब्याज का उदग्रहण : आयकर अधिनियम की धारा 201 के अनुसार यदि एक कटौतीदाता स्रोत पर कर कटौती करने में विफल रहता है अथवा इसे काटने के पश्चात् केंद्र सरकार के खाते में जमा करने में विफल रहता है तो उसे चूककर्ता निर्धारिती के तौर पर समझा जाएगा तथा निम्नानुसार साधारण ब्याज देने के लिए उत्तरदायी होगा।
    • (i) तिथि जिस पर कर की कटौती की गर्इ थी, हेतु तिथि जिस पर कर कटौतीयोग्य था, से ऐसे कर की राशि पर एक प्रतिशत प्रति माह अथवा उसके भाग की दर से ;
    • (ii) तिथि जिस पर कर की वास्तविक कटौती की गर्इ, हेतु तिथि जिस पर कर कटौती की गर्इ, से ऐसे कर की राशि पर एक प्रतिशत तथा एक आधा प्रति माह अथवा उसके भाग की दर से।
  • (ग) जुर्माने का उदग्रहण : काटे न गए कर के समान राशि का जुर्माना धारा 271ग के अंतर्गत लगाया जाएगा। जुर्माना धारा 221 के अंतर्गत लगाया जाएगा यदि कटौतीदाता कटौती हेतु विफल रहता है तथा केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु कर का भुगतान करता हैं। जुर्माना निर्धारण अधिकारी के निर्देश की सीमा तक लगाए जाऐंगे, हालांकि जुर्माने की कुल राशि बकाए में कर राशि से अधिक नही होगी।
  • (घ) अभियोजन : यदि एक व्यक्ति उसके द्वारा स्रोत पर कर कटौती को केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु भुगतान करने में विफल रहता है तो वह अवधि जो कम से कम तीन माह की लेकिन जिसे जुर्माने सहित सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, के कठोर करावास सहित दंडनीय होगा।
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अनुमोदित5000कर कटौतीकर्ताश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​स्रोत पर कर कटौती विवरण की प्रस्तुति हेतु उत्तरदायी व्यक्ति

कर की कटौती के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति को उसके संबंध में तिमाही विवरण प्रस्तुत करना आपेक्षित है

स्रोत पर कर कटौती विवरण को दाखिल करने के लिए प्रपत्र

त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण निम्नलिखित प्रपत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा

  • (1) प्रपत्र 24थ - धारा 192 के अंतर्गत वेतन से कर कटौती का विवरण
  • (2) प्रपत्र 27थ - कटौती के संबंध में धारा 193 से 196घ के अंतर्गत कर कटौती का विवरण जो एक गैर-निवासी है (कंपनी के तौर पर नही) अथवा एक विदेशी कंपनी अथवा निवासी लेकिन सामान्य तौर पर निवासी नही है
  • (3) प्रपत्र 26थ - किसी अन्य मामले में धारा 193 से 196घ के अंतर्गत कर की कटौती का विवरण

हालांकि यदि कर धारा 194-झक के अंतर्गत काटा जाता है तो कटौतीदाता को माह जिसमें कटौती की गई हैं, की समाप्ति से सात दिनों की अवधि के भीतर प्रपत्र 26थख में चालान-सह-विवरण प्रस्तुत करना होगा

स्रोत पर कर कटौती विवरण दाखिल करने की नियत तिथि

त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार हैं :—

  • वित्तीय वर्ष की त्रैमासिक समाप्ति यदि कटौतीदाता सरकारी कार्यालय है गैर-सरकारी कटौतीदाता की स्थिति में
  • 30 जून वित्तीय वर्ष की 31 जुलाई वित्तीय वर्ष की 15 जुलाई
  • 30 सितम्बर वित्तीय वर्ष का 31 अक्टूबर वित्तीय वर्ष का 15 अक्टूबर
  • 31 दिसंबर वित्तीय वर्ष की 31 जनवरी वित्तीय वर्ष की 15 जनवरी
  • 31 मार्च वित्त वर्ष जिसमें कटौती की गई है, के ठीक आगामी वित्त वर्ष की 15 मई वित्त वर्ष जिसमें कटौती की गई है के ठीक आगामी वित्त वर्ष की 15 मई

स्रोत पर कर कटौती विवरण की इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुति

त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण निम्नलिखित किसी भी विधि में इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा :

  • (क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरण की प्रस्तुति अथवा;
  • (ख) प्रपत्र 27क में अथवा इलैक्ट्रानिक प्रक्रिया के माध्यम से विवरण के सत्यापन सहित इलैक्ट्रानिक रूप से विवरण की प्रस्तुति।
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अनुमोदित8000न्यासश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​क्या न्याय का पंजीकरण अनिवार्य है ?

एक न्यास के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12कख के अंतर्गत पंजीकरण प्राप्त करना अनिवार्य है जिससे धारा 11 के अंतर्गत छूट का दावा कर सके।

पंजीकरण के लिए आवेदन हेतु प्रयोग किए जाने वाला प्रपत्र ?

एक न्यास को प्रपत्र सं. 10क में पंजीकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है

आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज ?

दस्तावेज जिसे आवेदन प्रपत्र सं. 10क सहित प्रस्तुत करना आपेक्षित हो, निम्नानुसार है :

(1) जहां उसकी एक प्रति सहित दस्तावेज, मूल में दस्तावेज, के अंतर्गत एक न्यास गठित किया जाता है अथवा संस्थान संस्थापित होता है तथा जहां दस्तावेज के अंतर्गत की बजाय एक न्यास बनाया जाता है अथवा संस्थान संस्थापित किया जाता है, उसकी एक प्रति के साथ संस्थान के संस्थापन अथवा न्यास के गठन के प्रमाणीकरण वाला दस्तावेज। यदि मूल में दस्तावेज अथवा लेख्य सुविधापूर्वक प्रस्तुत नही किये जा सकते तो यह मूल के स्थान पर एक प्रमाणित प्रति की स्वीकृति हेतु प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त हेतु खोला जाएगा।

(2) जहां न्यास अथवा संस्थान वित्त वर्ष, जिसमें पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, से पूर्व किसी वर्ष अथवा वर्षों के दौरान मौजूद होता हैं तो ऐसे वर्ष अथवा वर्षों (वर्ष जिसमें कथित आवेदन किया गया है के तुरंत उत्तरगामी तीन वर्ष से अधिक नही) जिसके लिए ऐसा खाता बनाया गया है, से पूर्व संबंधित न्यास अथवा संस्थान के खाते की दो प्रति।

स्रोत पर कर संग्रहण जमा करने की विधि :

स्रोत पर कर संग्रहण निम्नलिखित विधियों में केंद्र सरकार के खाते में जमा की जाएगी:

  • 1) र्इ-भुगतान : र्इ-भुगतान निम्न हेतु अनिवार्य है :
    • क) समस्त निगमित निर्धारिती
    • ख) समस्त निर्धारिती (कंपनी के अलावा) जिन पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के प्रावधान लागू होते है ​
  • 2) भौतिक विधि : प्राधिकृत बैंक शाखा में चालान सं. 281 की प्रस्तुति द्वारा

टिप्पणी :

जब कर सरकारी कार्यालय द्वारा एकत्रित किया जाता है तो यह आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना तथा केवल खाता समायोजन करके राशि केंद्र सरकार को प्रेषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर राष्ट्रीय प्रतिभूति निपेक्षागार लिमिटेड को प्रपत्र सं. 24छ प्रस्तुत करना होता है।

परिणाम यदि स्रोत पर कर संग्रहण के भुगतान में चूक हो

एक संग्राहक को निम्नलिखित परिणामों को भुगतना होगा यदि वह स्रोत पर कर संग्रहण एकत्रित करने में विफल रहता है अथवा एकत्र करने के पश्चात् उसे केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु जमा कराने में विफल रहता है

  • क) ब्याज का उदग्रहण : यदि स्रोत पर कर संग्रहण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति इसे एकत्रित नहीं करता अथवा इसे एकत्रित करने के पश्चात् सरकार को भुगतान करने में विफल रहता है तो उसे तिथि, जिस पर एकत्रित किया गया था हेतु तिथि जिस पर कर वास्तव में दिया गया था, से ऐसे कर की राशि पर 1 प्रतिशत प्रति माह अथवा उसके भाग की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करना पडे़गा तथा ऐसा ब्याज प्रत्येक तिमाही के लिए त्रैमासिक विवरण की प्रस्तुति से पूर्व दिया जाएगा।
  • ख) जुर्माने का उदग्रहण : यदि कोर्इ व्यक्ति पूर्ण कर अथवा उसके भाग को संग्रहित करने में विफल रहता है तो ऐसा व्यक्ति धारा 271गक के अंतर्गत जुर्माने के रूप में कर जो ऐसा व्यक्ति संग्रहित करने में विफल रहा, की समान राशि देने के लिए उत्तरदायी होगा।
  • ग) अभियोजन : यदि एक व्यक्ति उसके द्वारा एकत्रित कर को केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु भुगतान करने में विफल रहता है तो वह अवधि जो कम से कम तीन माह की लेकिन जिसे जुर्माने सहित सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, के कठोर करावास सहित दंडनीय होगा।
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अनुमोदित5000न्यासश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​विवरणी दाखिलीकरण

​क्या न्यास के लिए आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?

धारा 139(4क), 139(4ग), 139(4घ) तथा 139(4ड़) में संदर्भित न्यास के लिए आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है।

इसके अतिरिक्त, एक न्यास (उक्त प्रावधान में न आने वाले) को आय की विवरणी दाखिल करना आवश्यक है यदि इसकी सकल कुल आय अधिकतम राशि जो कि कर हेतु वसूलनीय नही है, से अधिक हो।

आय की विवरणी दाखिल करने के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?

एक न्यास जिसे धारा 139(4क), 139(4ग) अथवा 139(4घ) के प्रावधानों के अनुसार आय की विवरणी दाखिल करना आवश्यक हो उसे आयकर विवरणी 7 अन्यथा आयकर विवरणी 5 में विवरणी दाखिल करनी होगी।

क्या न्यास के लिए विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?

एक न्यास के लिए डिजीटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है। एक न्यास इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत आय की विवरणी को भी दाखिल कर सकती है। हालांकि धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराने के लिए उत्तरदायी एक न्यास को डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी दाखिल करना होगा।

विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि ?

न्यास द्वारा विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार है :

  • विवरण नियत तिथि
  • एक न्यास जिसे आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराना आपेक्षित है निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर
  • एक न्यास जिसे धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट करना आपेक्षित हैं निर्धारण वर्ष का 30 नवंबर
  • अन्य किसी मामले में निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई
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अनुमोदित4000न्यासश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​कर की दरें क्या हैं ?

एक न्यास स्लैब दर के अनुसार कर हेतु वसूलनीय है जो व्यक्ति (वरिष्ठ नागरिक अथवा अति वरिष्ठ नागरिक के तौर पर नहीं) हेतु प्रयोज्नीय हैं।

अधिभार : आयकर (जैसा ऊपर आंका गया है) की राशि ऐसे कर के 10 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा आगे बढ़ार्इ जाएगी जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो। हालांकि अधिभार सीमांत राहत (आयकर तथा अधिभार के रूप में देययोग्य कुल आय, जो एक करोड़ रूपए से अधिक हो, के अतिरिक्त एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नही होगी) के अनुसार होगा।

शिक्षा उपकर : आयकर की राशि तथा प्रयोज्नीय अधिभार ऐसे आयकर तथा अधिभार के क्रमश: दो प्रतिशत तथा एक प्रतिशत पर आंके गए शिक्षा उपकर तथा उच्च तथा माध्यमिक शिक्षा उपकर द्वारा बढ़ार्इ जाएगी।

कर का भुगतान कैसे करें ?

आयकर का भुगतान करने की दो विधियां हैं :

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अनुमोदित2000न्यासश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​​​​​​​​​​​​​स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?​

पैन का अर्थ हैं स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या हैं। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड के प्रारूप में जारी किया जाता है (साधारण पैन के तौर पर प्रसिद्ध)। नीचे दिया गया पैन का वर्णन है : एएलडब्ल्यूटीजी5809एल

स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता हैं। एक न्यास (ट्रस्ट) को शब्द ‘‘टी’’ से प्रदर्शित किया जाता है। (e.g. एएलडब्ल्यूटीजी5809एल)

स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?

स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :

  • एक धर्मार्थ न्यास जिसे धारा 139(4क) के अंतर्गत विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है
  • प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक है जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है
आगे देखें

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​पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--

 •   प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।

 •   एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।

 •   उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?

स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क हैं ?

आवेदक को रू. 93 + सेवा कर का भुगतान करना होगा। यदि पैन कार्ड को भारत से बाहर प्रेषित करना है तो रू. 771+ सेवा कर का अतिरिक्त प्रभार आवेदक द्वारा दिया जाना है।

स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?

भारत में पंजीकृत न्यास को स्थाई खाता संख्या के साथ पूर्त्त आयुक्त द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा न्वास विलेख की प्रति को जमा करना होगा।

न्यास के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :

  • ‘‘सुधारक’’ (उस देश के संबंध में जो देश अपोस्टिल सम्मेलन के हस्ताक्षरकर्ता हैं) द्वारा देश, जहां आवेदक स्थित है, में भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा वाणिज्य दूतावास द्वारा अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंकों की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित पंजीकरण के प्रमाणपत्र की प्रति उस देश में जारी की गई हो जहां आवेदक स्थित है।
  • भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन

किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करना हैं ?

पैन के लिए आवेदन पर न्यासी द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा (हस्ताक्षर न कर पाने की स्थिति में बाएं अंगूठे का निशान)

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है

  • आयकर विभाग राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड विधि
  • वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ई-मेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए SMS NSDLPAN - स्पेस
    पावती संख्या और भेज दें 57575 पर
  • पता आयकर पैन सेवा इकाई ((राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड,
    ई-शासन अवसंरचना लिमिटेड), पांचवां तल, मंत्री स्टरलिंग, प्लाट नं. 341,
    सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लो चौक के निकट, पुणे - 411 016,
    यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड, प्लाट नं. 3, सैक्टर 11,
    सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 द्वारा संचालित)
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अनुमोदित1000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​प्रस्तावना

  • ऐसे करदाता द्वारा अर्जित आय की करदेयता निर्धारित करने के लिए करदाता की आवासीय स्थिति निर्धारित करना आवश्यक है।
  • निवासी करदाता की स्थिति में उसकी समस्त आय इस तथ्य के बावजूद भारत में करयोग्य होगी कि करदाता हेतु आय को भारत से बाहर अर्जित अथवा उपार्जित किया गया है। हालांकि, गैर-निवासी की स्थिति में समस्त आय जो भारत से बाहर उपार्जित अथवा अर्जित होती है, भारत में करयोग्य नहीं होगी।

गैर-निवासी का अर्थ

  • धारा 2(30) व्यक्ति, जो निवासी नहीं है, के तौर पर-गैर-निवासी को परिभाषित करती है
  • धारा 6​ विभिन्न करदाताओं के लिए निवास के परीक्षण को निर्धारित करती है

गैर-निवासियों की स्थिति में कर विस्तार

  • गैर-निवासी के हाथों आय करदेयता का रूप
  • आय, जो भारत में अर्जित अथवा उपार्जित होती है, का कराधान
  • आय, जो भारत में अर्जित अथवा उपार्जित होना समझी जाती है, का कराधान
  • आय, जो भारत में प्राप्त होती है, का कराधान
  • आय, जो भारत में प्राप्त होनी समझी जाती हैं, का कराधान
  • भारत से नियंत्रित व्यापार अथवा भारत में स्थापित पेशे से भारत के बाहर उपार्जित आय करारोपित नहीं है
  • उक्त को छोड़कर आय (अर्थात् आय जिसका भारत के साथ कोर्इ संबंध नहीं है) करारोपित नहीं है
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अनुमोदित1214गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56
विविध​​​
  
अनुमोदित/hindi/Pages/international-taxation/dtaa.aspx5000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56

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अनुमोदित/hindi/Pages/international-taxation/advance-ruling.aspx6000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Charts%20%20Tables/International%20Businesses.htm8000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56

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अनुमोदित/hindi/Pages/international-taxation/provision-non-resident.aspx9000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Pages/international-taxation/treaty-comparison.aspx10000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Pages/international-taxation/transfer-pricing.aspx11000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Charts%20%20Tables/Withholding%20tax%20rates.htm12000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Charts%20%20Tables/Tax%20rates%20as%20per%20IT%20Act%20vis-a-vis%20tax%20treaties.htm13000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Pages/utilities/Double-Taxation-Avoidance-Agreements.aspx14000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56

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अनुमोदित/hindi/Pages/international-taxation/withholding-tax.aspx15000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँविविध17-02-2021 17:56
  
अनुमोदित/hindi/Documents/Left%20Menu/Benefits%20available%20only%20to%20Non%20%20Resident%20Person.htm4000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँअनिवासी के प्रकार17-02-2021 17:56

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अनुमोदित1000घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँघरेलू कंपनी17-02-2021 17:56

घरेलू कंपनी

अर्थ ​

धारा 2(22क) के अनुसार, "घरेलू कंपनी" अर्थात् भारतीय कंपनी अथवा अन्य कोर्इ कंपनी जिसकी आय इस अधिनियम के अंतर्गत कर के लिए उत्तरदायी है, के संबंध में ऐसी आय में से देययोग्य लाभांश (वरीय शेयरों पर लाभांश सहित) लाभांश का भारत में घोषित तथा भुगतान करने के लिए निर्धारित व्यवस्था की है

कर दरें

क. आय कर

  • घरेलू कंपनी की स्थिति में कुल आय का 30 प्रतिशत
  • एक घरेलू कंपनी के मामले में जहां पिछले वर्ष 2017-18 में सकल बिक्री या सकल प्राप्ति 250 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। कुल आय का 25 प्रतिशत

आंकी गई आयकर की राशि को अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा -

    • (क) कंपनी की स्थिति में एक करोड़ से अधिक की कुल आय वाला हो किंतु ऐसे आयकर के पांच प्रतिशत की दर पर दस करोड़ से अधिक न हो तथा
    • (ख) कंपनी की स्थिति में ऐसे आयकर के दस प्रतिशत की दर पर दस करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले

बशर्ते कि एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली प्रत्येक कंपनी की स्थिति में लेकिन दस करोड़ रूपए से अधिक न हो, ऐसी आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल आय, आय, जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी :

बशर्ते आगे प्रदान किया जाए कि दस करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली प्रत्येक कंपनी की स्थिति में, ऐसी आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय, दस करोड़ से अधिक है, की राशि की तुलना में दस करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगा।

शिक्षा उपकर

प्रयोज्नीय अधिभार द्वारा बढ़ार्इ गर्इ आय की राशि आगे "आयकर पर शिक्षा उपकर" द्वारा बढ़ार्इ जाएगी जिसे ऐसे आयकर तथा अधिभार के दो प्रतिशत की दर पर आंका जाएगा।

माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर

प्रयोज्नीय अधिभार द्वारा बढ़ार्इ गर्इ आय की राशि आगे "आयकर पर माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर" द्वारा बढ़ार्इ जाएगी जिसे ऐसे आयकर तथा अधिभार के एक प्रतिशत की दर पर आंका जाएगा।

ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर

एक कंपनी बही लाभ के 18.5 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 18.5 प्रतिशत से कम है

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अनुमोदित2000घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

​​​​​​स्थाई खाता संख्या​

स्थाई खाता संख्या के लिए कैसे आवेदन करें ?

 

स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज

  • प्रत्येक व्यक्ति यदि पिछले वर्ष के दौरान उसकी कुल आय अथवा उसके संबंध में अन्य किसी व्यक्ति की कुल आय जहां वह निर्धारणीय है, अधिक होती है
    • भारत में पंजीकृत कंपनी, भारत से बाहर पंजीकृत कंपनी
    • प्रयोज्नीय प्रपत्र 49क, 49कक
    • आपेक्षित दस्तावेज कंपनी के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता है) अथवा भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में वाणिज्यि दूतावास अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।

      भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन।

स्थिति को जानें

आवेदक आवेदन प्रपत्र की स्वीकृति पर विशिष्ट संख्या सन्निहित पावती प्राप्त करेगा। इस पावती संख्या का उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति जाने सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) को जानने के लिए किया जा सकता है।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीकों से संपर्क किया जा सकता है

  • आयकर विभाग विधि, एनएसडीएल, यूटीआईटीएसएल
  • वेबसाइट www.incometa​xindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ईमेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस SMS NSDLPAN - space
    पावती संख्या व और आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए भेज दें 57575 पर
  • पता राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड
    आयकर पैन सेवा इकाई
    (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड ई-शासन अवसरंचना लिमिटेड द्वारा संचालित),
    पांचवां तल, मंत्री स्टेरलिंग, प्लाट नं. 341, सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लों चौक के पास, पुणे - 411 016।
    यूटीआई अवसंरचना तकनीक तथा सेवा लिमिटेड,
    प्लाट नं. 3, सेक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबर्इ पिन - 400614
 
 
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अनुमोदित4000घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँघरेलू कंपनी17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​​​कर भुगतान

कंपनियों पर आयकर

कर जो कंपनियों द्वारा अपनी आय पर दिया जाता है उसे निगमित कर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह कंपनियों पर आयकर (निगमित कर) के तौर पर निर्दिष्ट है।

गैर-निगमित निर्धारिती द्वारा कर भुगतान को आयकर के तौर पर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह आयकर (कंपनी को छोड़कर) के तौर पर निर्दिष्ट होना हैं।

अग्रिम कर की गणना तथा भुगतान कैसे किया जाता है ?

अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का भुगतान किश्तों में किया जाना है। आगे देखें

​ अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर किश्तों में दिया जाना है। आगे देखें

​स्थिति 15 जून तक 15 सितम्बर तक 15 दिसंबर तक 15 मार्च तक
निगमित15 %45 %75 %100 %
गैर-निगमितशून्य %30%60%100%

31 मार्च तक दिया गया कोर्इ कर अग्रिम कर के तौर पर समझा जाता है

अग्रिम कर को जमा करना प्रासंगिक कॉलम अर्थात् अग्रिम कर का चयन कर चालान आर्इटीएनएस 280 के माध्यम से किया जाता है

कर की गणना कैसे करें ?

कुल आय, अर्थात् कर हेतु देययोग्य आय, का पता लगाने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी आगे देखें

वर्ष के लिए कुल आय और कर देयता की गणना​

​कुल आय जानने के बाद, यानी, अगले कदम की गणना करने के लिए वर्ष के कर देयता के लिए उत्तरदायी आय हैं। इस संबंध में टैक्स देयता की निर्धारित दरों को लागू करने के लिए गणना की जाती हैं। कर की दरों के लिए, ''कर की दर'' खंड देखें। तालिका के बाद करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मदद मिलेगी।

वर्ष के लिए कुल आय और कर देयता की गणना

विवरण राशि
वेतन से आय ------
गृह संपत्ति से आय ------
मुनाफा और व्यवसाय या पेशे से लाभ ------
पूॅजीगत लाभ ------
अन्य स्त्रोतों से लाभ ------
सकल कुल आय ------
कम: अध्याय छह ए के तहत कटौती (यानी 80यू के लिउए धारा 80 सी के तहत) ------
कुल आय (यानी कर योग्य आय) ------
लागू दरों पर गणना करने के लिए कर योग्य आय ------
कम: खंड 87ए के तहत छूट (बाद में सवाल जवाब पर चर्चा) ------
छूट के बाद टैक्स देयता ------
जोड़: अधिभार (बाद में सवाल जवाब पर चर्चा) ------
अधिभार के बाद टैक्स देयता ------
जोड़े: अधिभार के बादकर देयता पर शिक्षा उपकर 2 प्रतिशत ------
जोड़े: अधिभार के बादकर देयता पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर 1 प्रतिशत ------
86,89,90,90ए और 91 धाराओं के तहत छूट से पहले टैक्स देनदारी(यदि हो तो)(*) ------
कम: 86,89,90,90ए और 91 धाराओं के तहत छूट (यदि हो तो) ------
पूर्व भुगतान से पहले वर्ष के लिए टैक्स देनदारी ------
कम: टीडीएस, टीसीएस और एडंवास टैक्स के रूप में पूर्व भुगतान करो ------
देय टैक्स/लौटाया जाने वाला प्रतिदेय ------

(*) धारा 86 के तहत छूट एक व्यक्ति के संघ के सदस्य (एओपी) या व्यक्तियों (बीओआर्इ) का निकाय एओपी/बीओआर्इ से ऐसे सदस्य द्वारा प्राप्त आय का सम्मान करने के लिए उपलब्ध हैं।

धारा 89 के तहत छूट (यानी, राहत), वेतन उपदान आदि की बकाया राशि की दिशा में प्राप्त राशि के संबंध में एक वेतन-भोगी कर्मचारी को उपलब्ध हैं।

धारा 90, 90क और 91 के तहत छूट दो गुनी आय लगान के संबंध में एक करदाता के लिए उपलब्ध हैं। यानी, जो आयकर विदेशों के साथ ही भारत में लगाया जाता हैं।

ध्यान दें: गैर निगमित कर दाताओं के मामले में कॉरपोरेट करदाताओं और वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी) के संबंधित प्रावधानों के लिए ''मैट/एएमटी'' पर ट्यूटोरियल देखें

न्यूनतम वैकल्पिक कर पर ट्यूटोरियल

कर का भुगतान कैसे करें ?

कंपनियों की स्थिति में र्इ-भुगतान अनिवार्य है

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अनुमोदित4250घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँघरेलू कंपनी;17-02-2021 17:56

​लाभांश वितरित कर

  • घरेलू कंपनी को लाभांश के रूप में ऐसी कंपनी द्वारा किसी घोषित, वितरित अथवा भुगतित राशि पर वितरित लाभांश का भुगतान करना होगा। लाभांश वितरित कर की दर 15 प्रतिशत है (साथ ही प्रयोज्नीय अधिभार तथा उपकर)
  • घरेलू कंपनी से प्राप्त लाभांश शेयरधारकों के हाथों करयोग्य नहीं हैं। हालांकि, विदेशी कंपनी से प्राप्त कोर्इ लाभांश अथवा भारतीय कंपनी द्वारा धारा 2(22)(ड़) के अंतर्गत प्राप्त समझा गया लाभांश शेयरधारकों के हाथों करयोग्य है
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अनुमोदित4500घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँघरेलू कंपनी17-02-2021 17:56

​​​टन भार कर​

  • कंपनी की स्थिति में, अर्हकारी जहाज संचालन के व्यापार से आय, अपने विकल्प पर अध्याय XII-छ के प्रावधानों के अनुसार आंका जाना है।
  • इसलिए, टन भार कर प्रकल्पित कराधान की योजना है जिसमें जहाज के संचालन द्वारा उत्पन्न काल्पनिक आय जहाज के टन भार के आधार पर निर्धारित होती है

जहाज कंपनियों की आय से संबंधित विशेष प्रावधान

  
अनुमोदित5000घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँघरेलू कंपनी17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​​​विवरणी दाखिलीकरण

किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?

प्रत्येक कंपनी को, निर्धारित प्रपत्र में तथा निर्धारित प्रणाली में तथा उल्लखित ऐसे अन्य विवरण जिसे निर्धारित किया जा सके में पिछले वर्ष के दौरान अपनी आय की विवरणी को नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व दाखिल करना चाहिए।​

आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज

आर्इटीआर विवरणी प्रपत्र कम प्रपत्र संलग्नता हैं तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नही हैं। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जाने चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जाने पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक,80-झख,80-झग,80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115ञख अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे।

आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?

आय की विवरणी को या तो आयकर विभाग के स्थानीय कार्यालय में हार्ड प्रति के रूप में अथवा www.incometaxindiaefiling.gov.in पर इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल किया जा सकता है।

  • आयकर विवरणी विवरण
  • आर्इटीआर 6 ​ धारा 11 के अधीन छूट का दावा करने वाली कंपनियों से भिन्न कंपनियों के लिए
  • आर्इटीआर 7​ उन व्यक्तियों के लिए, जिनके अंतर्गत कंपनियां भी है, जिनसे धारा 139 (4क) या धारा 139 (4ख) या धारा 139 (4ग) या धारा 139 (4घ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित है ​​
  • पिछले वर्ष के विवरणी प्रपत्र देखें

आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि

कंपनी द्वारा आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि 30 सितम्बर है

अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन जिन्हें प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, करने वाले निर्धारिती की स्थिति में नियत तिथि 30 नवंबर है

क्या एक निर्धारिती पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल कर सकता है

हां, बशर्ते मूल विवरणी को नियत तिथि से पूर्व दाखिल किया गया हो तथा विभाग ने निर्धारण को परिपूरित न किया हो। यह अपेक्षा की जाती है कि मूल विवरणी में त्रुटि सही तथा प्रमाणिक प्रकार की हो तथा किसी जानबूझकर त्रुटि का संशोधन न हो। हालांकि, विलंबित विवरणी (नियत तिथि के पश्चात् दाखिल विवरणी के तौर पर) को संशोधित नहीं किया जा सकता।

विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर अथवा निर्धारण की समाप्ति से पूर्व जो भी पहले हो, के भीतर संशोधित किया जा सकता है।

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अनुमोदित4000फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​कर भुगतान

कर की दर क्या हैं ?

  • क) आयकर:

    एक फर्म अपनी कुल आय पर 30 प्रतिशत की सीधी दर पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है

    अधिभार : आयकर (जैसा कि ऊपर आंका गया है) की राशि ऐसे कर के 10 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा आगे बढ़ार्इ जाएगी जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक होती है। हालांकि, अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा (आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ रूपए से अधिक है, के मुकाबले एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी)

    शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर : आयकर की राशि तथा प्रयोज्य अधिभार को माध्यमिक उपकर तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा तथा ऐसे आयकर तथा अधिभार के क्रमश: दो प्रतिशत तथा एक प्रतिशत की दर पर आंका जाएगा।

  • ख) वैकल्पिक न्यूनतम कर :

    एलएलपी द्वारा देययोग्य कर धारा 115ञग के अनुसार "समायोजित कुल आय" के 18.5 प्रतिशत (अधिभार, शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा बढ़ाकर) से कम नहीं हो सकता।

कर का भुगताना कैसे करें ?

करों को निम्नलिखित विधियों में से किसी में भी दिया जा सकता है :

टिप्पणी:

ई-भुगतान उस फर्म के लिए अनिवार्य हैं जिसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के अन्तर्गत अपने खातों को अंकेक्षित करना अनिवार्य है।

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अनुमोदित1000एलएलपीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​प्रस्तावना

एक सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी) सीमित देयता साझेदारी अधिनियम, 2008 के अंतर्गत निर्मित तथा संस्थापित निगमित निकाय है। यह इसके सहभागी से कानूनी रूप से पृथक उद्यम है।

एक सीमित देयता साझेदारी अपनी परिसंपत्ति की संपूर्ण सीमा हेतु उत्तरदायी है लेकिन साझेदार की देयता सीमित देयता साझेदारी में उसके साझेदारों की देयता हेतु सीमित है। चूंकि साझेदार की देयता सीमित देयता साझेदारी में उनके सहमत अंशदान हेतु सीमित है इसलिए इसमें दोनों निगमित संरचना साथ ही साथ सहभागी फर्म ढ़ांचे के पहलू शामिल हैं।

धोखे की स्थिति को छोड़कर साझेदार की कोर्इ व्यक्तिगत देयता नहीं है। इसके अतिरिक्त, एक साझेदार अन्य साझेदार के दुराचार अथवा लापहरवाही के लिए जिम्मेदार अथवा उत्तरदायी नहीं है क्योंकि सीमित देयता साझेदारी की स्थिति में कोर्इ संयुक्त देयता नहीं है।

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अनुमोदित5000एलएलपीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?

हां, प्रत्येक सीमित देयता सांझेदारी ('एलएलपी') को आय अथवा हानि की राशि के बावजूद आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है।

आय की विवरणी के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?

एलएलपी आईटीआर 5 में अपनी आय की विवरणी को दाखिल कर सकता है

आय की विवरणी की प्रस्तुति का तरीका

एलएलपी को निम्नलिखित विधियों में विवरणी को दाखिल करना आपेक्षित है :

  • क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्क्ट्रानिक रूप से; अथवा
  • ख) इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी में आंकड़ों का हस्तांतरण; अथवा
  • ग) इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी में आंकड़ों का हस्तांतरण करें तथा उसके पश्चात् आईटीआर-V में विवरणी के सत्यापन को जमा करें।

हालांकि, एलएलपी के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है यदि इनके खातों को धारा 44कख के अंतर्गत अंकेक्षित किए जाने की आवश्यकता हों।

एलएलपी द्वारा विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं :

  • ब्यौरेवार नियत तिथि
  • एलएलपी जिन्हें आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराने की आवश्यकता है, के लिए निर्धारण वर्ष की 31 अक्टूबर
  • एलएलपी जिन्हें धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, के लिए निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर
  • अन्य किसी मामले में निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई।
  
अनुमोदित1000विदेशी फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​विदेशी कंपनी

अर्थ

धारा 2(23क) के अनुसार "विदेशी कंपनी" का अर्थ जो घरेलू कंपनी नहीं है

कर की दर

क. आयकर

निर्धारण वर्ष 2020-21 तथा निर्धारण वर्ष 2019-20

  • आयकर दर का प्रकार
  • (क) 31 मार्च, 1961 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त रॉयल्टी अथवा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व तथा जहां ऐसा समझौता, किसी भी स्थिति में, केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया हो, सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा प्रतिपादन के लिए शुल्क 50 प्रतिशत
  • अन्य कोर्इ आय 40 प्रतिशत

जमा करें :

  • क) अधिभार : आयकर राशि को ऐसे कर के 2 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तथा ऐसे कर के 5 प्रतिशत की दर पर जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है। हालांकि अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा जो निम्नानुसार होगी :
  • (i) जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
  • (ii) जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो दस करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले दस करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
  • ख) शिक्षा उपकर : आयकर तथा देययोग्य अधिभार की राशि, ऐसे आयकर तथा अधिभार के दो प्रतिशत की दर पर आंके गए शिक्षा उपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।
  • ग) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर : आयकर की राशि तथा प्रयोज्य अधिभार को ऐसे आयकर तथा अधिभार के एक प्रतिशत की दर पर आंके गए माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।

ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर

एक कंपनी बही लाभ के 18.5 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 18.5 प्रतिशत से कम है। हालांकि, एक विदेशी कंपनी आगामी आय पर मैट देने के लिए उत्तरदायी नहीं है यदि सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत उस पर देययोग्य आयकर 18.5 प्रतिशत से कम की दर पर होता है।

  • प्रतिभूति के स्थानांतरण से उत्पन्न पूंजीगत प्राप्ति
  • ब्याज
  • रॉयल्टी तथा
  • तकनीकी सेवा के लिए शुल्क
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अनुमोदित5000विदेशी फर्मश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​​​​​​​विवरणी दाखिलीकरण

किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?

प्रत्येक कंपनी को, निर्धारित प्रपत्र में तथा निर्धारित प्रणाली में तथा उल्लिखित ऐसे अन्य विवरण जिसे निर्धारित किया जा सके में पिछले वर्ष के दौरान अपनी आय की विवरणी को नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व दाखिल करना चाहिए। ​

आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज

आईटीआर विवरणी प्रपत्र कम प्रपत्र संलग्नता है तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नहीं है। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जाने चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जाने पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक,80-झख,80-झग,80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115ञख अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे।

आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?

आय की विवरणी को या तो आयकर विभाग के स्थानीय कार्यालय में हार्ड प्रति के रूप में अथवा www.incometaxindiaefiling.gov.in पर इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल किया जा सकता है।

  • आयकर विवरणी विवरण
  • आईटीआर 6 धारा 11 के अधीन छूट का दावा करने वाली कंपनियों से भिन्न कंपनियों के लिए
  • आईटीआर 7 उन व्यक्तियों के लिए, जिनके अंतर्गत कंपनियां भी है, जिनसे धारा 139 (4क) या धारा 139 (4ख) या धारा 139 (4ग) या धारा 139 (4घ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित है ​​​
  • पिछले वर्ष के विवरणी प्रपत्र देखें

आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि

कंपनी द्वारा आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि 30 सितम्बर है

अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन करने वाले निर्धारिती की स्थिति में जिन्हें प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, की नियत तिथि 30 नवंबर है

क्या एक निर्धारिती पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल कर सकता है

हां, बशर्ते मूल विवरणी को नियत तिथि से पूर्व दाखिल किया गया हो तथा विभाग ने निर्धारण को परिपूरित न किया हो। यह अपेक्षा की जाती है कि मूल विवरणी में त्रुटि सही तथा प्रमाणिक प्रकार की हो तथा किसी जानबूझकर त्रुटि का संशोधन न हो। हालांकि, विलंबित विवरणी (नियत तिथि के पश्चात् दाखिल विवरणी के तौर पर) को संशोधित नहीं किया जा सकता।

विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर अथवा निर्धारण की समाप्ति से पूर्व जो भी पहले हो, के भीतर संशोधित किया जा सकता है।

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अनुमोदित1100गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​विदेशी कंपनी

अर्थ

धारा 2(23क) के अनुसार "विदेशी कंपनी" का अर्थ है जो घरेलू कंपनी नहीं है

कर की दर

क. आयकर

निर्धारण वर्ष 2015-16 तथा निर्धारण वर्ष 2016-17

  • आयकर दर का प्रकार
  • (क) 31 मार्च, 1961 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त रॉयल्टी अथवा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व तथा जहां ऐसा समझौता, किसी भी स्थिति में, केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया हो, सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा प्रतिपादन के लिए शुल्क 50 प्रतिशत  है।
  • अन्य कोर्इ आय 40 प्रतिशत

जोडे़ं:

  • क) अधिभार : आयकर राशि को ऐसे कर के 2 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तथा ऐसे कर के 5 प्रतिशत की दर पर जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है। हालांकि अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा जो निम्नानुसार होगी :
  • (i) जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
  • (ii) जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो दस करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले दस करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
  • ख) शिक्षा उपकर : आयकर तथा देययोग्य अधिभार की राशि, ऐसे आयकर तथा अधिभार के दो प्रतिशत की दर पर आंके गए शिक्षा उपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।
  • ग) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर : आयकर की राशि तथा प्रयोज्य अधिभार को ऐसे आयकर तथा अधिभार के एक प्रतिशत की दर पर आंके गए माध्यमिक तथा उच्च शिक्षाउपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।

ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर

एक कंपनी बही लाभ के 18.5 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 18.5 प्रतिशत से कम है। हालांकि, प्रभावी निर्धारण वर्ष 2016-17 से, एक विदेशी कंपनी आगामी आय पर मैट देने के लिए उत्तरदायी नहीं है यदि सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत उसपर देययोग्य आयकर 18.5 प्रतिशत से कम की दर पर होता है।

  • प्रतिभूति के स्थानांतरण से उत्पन्न पूंजीगत प्राप्ति
  • ब्याज
  • रॉयल्टी तथा
  • तकनीकी सेवा के लिए शुल्क

वर्ष 2015 के लिए नियत तिथि

शनिवार, मार्च 14, 2015

​​निर्धारण वर्ष 2015-16 के लिए अग्रिम आयकर की तीसरी किश्त (कंपनी को छोड़कर निर्धारिती की स्थिति में) अथवा चौथी किश्त (कंपनी की स्थिति में)​

सोमवार, मार्च 30, 2015

​​​निर्धारिती की स्थिति में निर्धारण वर्ष 2014-15 के लिए आय तथा संपत्ति की वार्षिक विवरणी के लिए संशोधित नियत तिथि यदि उसे जम्मू-कश्मीर राज्य- आदेश (एफ. नं. 225/268/2015-आर्इटीए.II), दिनांक 28.11.2014, में करदाताओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन से संबंधित धारा 92ड़ के अंतर्गत रिपोर्ट को जमा करना आपेक्षित है।

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अनुमोदित2000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँअनिवासी के प्रकार17-02-2021 17:56

​​​​​​​​गैर-निवासी भारतीय/भारतीय मूल का व्यक्ति

स्थार्इ खाता संख्या आवेदन के लिए दिशा-निर्देश

एक गैर-निवासी भारतीय (एनआरआर्इ) यूटीआर्इ अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड के पैन आवेदन केंद्र पर आपेक्षित दस्तावेज तथा निर्धारित शुल्क के साथ प्रपत्र सं. 49क को जमा करके पैन के लिए आवेदन कर सकता है। वह यूटीआर्इ अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भी कर सकता है।

कैसे निर्धारित करें कि व्यक्ति एनआरआर्इ है ?

'गैर-निवासी भारतीय' एक व्यक्ति है जो भारतीय नागरिक अथवा भाारतीय मूल का नागरिक है तथा जो भारत में निवासी नहीं है। इसलिए, निर्धारित करने के लिए कि व्यक्ति एक गैर-निवासी है.................

कर से छूट प्राप्त आय

निम्नलिखित आय गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआर्इ) के हाथों कर से छूट प्राप्त है

  • 1) केंद्र सरकार द्वारा 01-06-2002 से पूर्व जारी अधिसूचित बचत प्रमाणपत्र पर ब्याज यदि यह भारत से बाहर के देश से प्रेषित परिवर्तनीय विदेशी विनिमय में अभिदा होता है [धारा 10(4ख)]
  • 2) विदेशी विनिमय में खरीदे गए अधिसूचित बांड (01-06-2002 से पूर्व अधिसूचित) पर ब्याज (कुछ शर्तों के अनुसार) [धारा 10(15)(iiकघ)]
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अनुमोदित1000कर कटौतीकर्ताश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

कर कटौतीकर्ता​

प्रस्तावना

करों के त्वरित तथा दक्ष संग्रहण के लिए, आयकर अधिनियम में आय के उत्सर्जन के बिंदु पर कर की कटौती की प्रणाली को अनिगमित किया गया है। इस प्रणाली को "स्रोत पर कर कटौती" कहा जाता है जिसे टीडीएस के तौर पर जाना जाता है। इस प्रणाली के अंतर्गत, कर आय के उद्गम के बिंदु पर काटा जाता है। कर दाता द्वारा काटा जाता है तथा इसे अदाता की ओर से दाता द्वारा सरकार को प्रत्यक्ष रूप से प्रेषित किया जाता है।

वर्तमान में स्रोत पर कर कटौती का प्रावधान विभिन्न भुगतान जैसे वेतन, ब्याज, कमीशन, दलाली, पेशेवर शुल्क, रायल्टी आदि हेतु लागू होता है।​

  
अनुमोदित1250कर कटौतीकर्ताश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

कर कटौती खाता संख्या का अर्थ

कर कटौती खाता संख्या आयकर विभाग (तत्पश्चात् "टैन" के रूप में संदर्भित) द्वारा जारी 10 अंकीय अक्षरांकीय संख्या है। टैन को समस्त व्यक्तियों, जो स्रोत पर कर कटौती ('टीडीएस') के लिए उत्तरदायी है, द्वारा प्राप्त करना आपेक्षित है केवल उन व्यक्ति की स्थिति को छोड़कर जो धारा 194-झक के अंतर्गत स्रोत पर कर कटौती के लिए उत्तरदायी है।

निम्नलिखित एक उदाहरणात्मक कर कटौती खाता संख्या है :

DELM12345L

टैन के प्रथम 3 अक्षर क्षेत्राधिकार कोड का प्रतिनिधित्व करते है, चौथा अक्षर टैन धारक के नाम का प्रारंभिक शब्द है। टैन के अगले 5 अंक 00001 से 99999 के बीच सिस्टम उत्सर्जित संख्या है तथा अंतिम अक्षर अर्थात् दसवां अक्षर वर्णमाला जांच अंक है।

टैन के लिए आवदेन करने वाला उत्तरदायी व्यक्ति

प्रत्येक व्यक्ति जो स्रोत पर कर कटौती करने के लिए उत्तरदायी है को टैन प्राप्त करना आपेक्षित है। हालांकि, एक व्यक्ति जिसे धारा 194-झक के अंतर्गत कर कटौती करना आपेक्षित है टैन के स्थान पर पैन का प्रयोग कर सकता है क्योंकि उसे टैन प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है।

टैन की प्रासंगिकता

निम्नलिखित दस्तावेजों में टैन को उद्धृत करना अनिवार्य है :

  • (क) टीडीएस विवरण अर्थात् विवरणी
  • (ख) टीडीएस के भुगतान के लिए चालान
  • (ग) टीडीएस प्रमाणपत्र
  • (घ) अन्य दस्तावेज जिसे निर्धारित किया जा सके

जुर्माना

यदि एक व्यक्ति टैन के लिए आवेदन करने में अथवा उद्धृत करने में विफल होता है अथवा उक्त निर्दिष्ट दस्तावेजों में गलत टैन उद्धृत करता है तो रू. 10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

टैन को प्राप्त करने की प्रक्रिया

टैन के आवंटन के लिए आवेदन किसी भी टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर प्रपत्र 49 ख में प्रतिलिपि में किया जाएगा। टिन-एफसी का पता राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड-टिन वेबसाइट पर उपलब्ध है। वैकल्पिक रूप से कोर्इ व्यक्ति एनएसडीएल-टिन वेबसाइट पर ऑनलाइन टैन के लिए आवेदन कर सकता है।

टैन को प्राप्त करने के लिए शुल्क

रू. 55 का शुल्क +  सेवा कर (जैसा लागू हो) टैन के लिए आवेदन जमा करते समय प्रसंस्करण शुल्क के तौर पर दिया जाना चाहिए।

  
अनुमोदित5500कर कटौतीकर्ताश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​​कर कटौती

स्रोत पर कर कटौती दर

एक कटौतीदाता को वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के साथ पठित आयकर अधिनियम ('अधिनियम') के प्रासंगिक प्रावधान में निर्दिष्टानुसार दरों के अनुसार स्रोत पर कर कटौती कराना आपेक्षित है। हालांकि, यदि प्राप्तकर्ता का पैन धारा 206कक के अनुसार कटौतीदाता को सूचित नहीं किया जाता तो कर को निम्नलिखित उच्च दरों पर स्रोत पर कर कटौती होगी :

  • क) इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान में निर्दिष्ट दर पर; अथवा
  • ख) प्रभावी दर अथवा दरों पर; अथवा
  • ग) 20 प्रतिशत की दर पर

आगे जहां अधिसूचित क्षेत्राधिकार में स्थित कोर्इ व्यक्ति कोर्इ राशि अथवा आय प्राप्त करने के लिए पात्र है जिस पर कर टीडीएस के अनुसार है तो कर निम्नलिखित उच्चतम दर पर धारा 94क(5) के अनुसार काटी जाएगी :

  • क) प्रभावी दर अथवा दरों पर;
  • ख) इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों में निर्दिष्ट दर पर;
  • ग) 30 प्रतिशत की दर पर।

शुरूआती सीमा

विभिन्न भुगतानों के संबंध में, अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं स्रोत पर कर कटौती के लिए प्रारंभिक सीमा को निर्धारित करता है। उस प्रारंभिक सीमा से कम कोर्इ भुगतान टीडीएस के अनुसार नहीं होगा।

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अनुमोदित1000न्यासश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

प्रस्तावना

धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए बनाया गया न्यास जो वाणिज्यिक गतिविधि करने का इच्छुक नहीं है, को आयकर अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न लाभ अन्य विषयों के साथ-साथ, धारा 11 के अंतर्गत छूट की स्वीकृति हैं।

शब्द धार्मिक उद्देश्य आयकर अधिनियम के अंतर्गत परिभाषित नहीं है। हालांकि, अधिनियम की धारा 2(15) गरीबों को राहत, शिक्षा, चिकित्सा सुविधा, पर्यावरण संरक्षण (जलोत्सारण क्षेत्र, वन तथा वन्य जीव सहित) तथा स्मारकों अथवा स्थानों का संरक्षण अथवा कलात्मक अथवा ऐतिहासिक हित तथा सामान्य जन उपयोगिता के अन्य किसी उद्देश्य की उन्नति को शामिल करने हेतु "धर्मार्थ उद्देश्य" को परिभाषित करता है।

बशर्ते कि सामान्य जन उपयोगिता के अन्य किसी उद्देश्य की उन्नति धर्मार्थ उद्देश्य नहीं होगा यदि इसमें ऐसी गतिविधि से आय के उपकर अथवा शुल्क अथवा अन्य किसी प्रतिफल, अवधारण अथवा प्रयोग की प्रकृति बावजूद, के लिए किसी व्यापार, वाणिज्य अथवा व्यवसाय के संबंध में किसी सेवा के प्रतिपादन की किसी गतिविधि अथवा व्यापार, वाणिज्य अथवा व्यवसाय के रूप में किसी गतिविधि का निवर्हन शामिल है [यदि ऐसी गतिविधि से प्राप्त कुल राशि पिछले वर्ष में रू. 25 लाख से अधिक है]

  
अनुमोदित9000न्यासश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​न्यास हेतु छूट

धर्मार्थ तथा धार्मिक न्यास की आय कुछ शर्तों के अनुसार कर से छूट प्राप्त है। छूट विभिन्न प्रावधान अन्य विषयों के साथ धारा 10, धारा 11 आदि के अंतर्गत न्यास हेतु उपलब्ध हैं। न्यास हेतु उपलब्ध कुछ छूट निम्नानुसार हैं :

  • 1) धारा 11 उस सीमा तक जहां ऐसी आय भारत में धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए लागू होती है, पूर्णता धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए न्यास के अंतर्गत धारित संपत्ति से व्युत्पन्न आय के लिए छूट उपलब्ध कराती है। हालांकि, यह छूट कुछ शर्तों के अनुसार दी जाएगी।
  • 2) धारा 12 को देखते हुए, पूर्णता धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्यों के लिए बनाए गए न्यास द्वारा अथवा पूर्णता ऐसे उद्देश्यों के लिए संस्थापित संस्थान द्वारा प्राप्त स्वैच्छिक अंशदान के रूप में आय कर से भी छूट प्राप्त होगी (कुछ शर्तों के अनुसार)
  • 3) चुनिंदा न्यास द्वारा प्राप्त कोर्इ स्वैच्छिक अंशदान उसकी कुल आय में शामिल नहीं होगी (कुछ शर्तों के अनुसार)
  • 4) शैक्षणिक संस्थान की आय धारा 10(23ग) (iiiकख)/(iiiकघ)/(vi) के अंतर्गत छूट का विषय है
  • 5) अस्पताल अथवा अन्य संस्थान की आय छूट प्राप्त करने के लिए पात्र होगा यदि वह धारा 10(23ग)(iiiकग)(iiiकड़)(viक) के अंतर्गत निर्धारित शर्तों को पूरा करता है।
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अनुमोदित1000एओपी / बीओआईश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

प्रस्तावना​

व्यक्तियों का संघ (एओपी) अथवा व्यक्तियों की निकाय (बीओआर्इ), चाहे निगमित हो अथवा नहीं, को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(31) के अंतर्गत "व्यक्ति" के तौर पर समझा जाता है। इसलिए, एओपी अथवा बीओआर्इ को आयकर अधिनियम के अंतर्गत मूल्यांकन के उद्देश्य के लिए पृथक उद्यम के तौर पर समझा जाता है।

यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक एओपी अथवा बीओआर्इ को व्यक्ति के तौर पर होना समझा जाएगा, चाहे हो अथवा नहीं कि उन्होंने आय, लाभ अथवा प्राप्ति की व्युत्पत्ति के उद्देश्य से संस्थापित अथवा सुस्थित अथवा निगमित किया गया था।​

  
अनुमोदित2000एओपी / बीओआईश्रेणी सूची10-01-2020हाँ26-02-2021 21:10

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स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?

पैन का अर्थ है स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या है। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड के प्रारूप में जारी किया जाता है

स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता है। एक एओपी को शब्द "ए" से प्रदर्शित किया जाता है (अर्थात् एएलडब्ल्यूएजी5809एल) तथा एक बीओआई को शब्द 'बी' से प्रदर्शित किया जाता है  (अर्थात् एएलडब्ल्यूबीजी5809एल)

स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?

स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :

  • प्रत्येक व्यक्ति जो किसी व्यापार अथवा पेशे का निष्पादन करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति किसी भी पिछले वर्ष में पांच लाख से अधिक है अथवा अधिक होने की संभावना हैं
  • प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक हैं जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य हैं
आगे देखें

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​पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--

 •   प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।

 •   एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।

 •   उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?

वैसे ही जैसे व्यक्ति के मामले में किया है (तब तक पैन आवेदन पत्र डाउनलोड करें)

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स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क है ?

आवेदक को रू. 93 + सेवा कर का भुगतान करना होगा। यदि पैन कार्ड को भारत से बाहर प्रेषित करना हैं तो रू. 771+ सेवा कर का अतिरिक्त प्रभार आवेदक द्वारा दिया जाना हैं।

स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना

भारत में संस्थापित अथवा पंजीकृत व्यक्तियों की निकाय अथवा व्यक्तियों के संघ (न्यास को छोड़कर) को पैन आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा:

क) अनुबंध की प्रति; अथवा

ख) सहकारी संस्था के दान आयुक्त अथवा पंजीयक अथवा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी पंजीकरण संख्या के प्रमाणपत्र की प्रति; अथवा

ग) ऐसे व्यक्ति की पहचान तथा पते के संस्थापन के लिए किसी केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार के विभाग से व्युत्पत्त अन्य कोई दस्तावेज।

व्यक्तियों के संघ (न्यास को छोड़कर) अथवा व्यक्तियों की निकाय के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :

क) देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता हैं) अथवा भारतीय दूतावाास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में वाणिज्यि दूतावास अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।

ख) भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन।

किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करने हैं ?

पैन के लिए आवेदन पर एओपी अथवा बीओई, जैसी भी स्थिति हो, के किसी प्राधिकृत हस्ताक्षरी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा (हस्ताक्षर न कर पाने की स्थिति में बाएं अंगूठे का निशान)

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​स्थिति का पता लगाएं

आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती हैं।

संपर्क सहायता

आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है

  • आयकर विभाग राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड विधि
  • Website www.incometa​xindia.gov.in www.tin-nsdl.com www.utiitsl.com
  • कॉल सेंटर 1800-180-1961 020-27218080 1800220306
  • ई-मेल आईडी tininfo@nsdl.co.in
  • एसएमएस आवेदन स्थिति प्राप्त करने के लिए SMS NSDLPAN स्पेस
    पावती संख्या और भेज दें 57575 पर
  • पता आयकर पैन सेवा इकार्इ
    (राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, ई-शासन अवसंरचना लिमिटेड),
    पांचवां तल, मंत्री स्टरलिंग,
    प्लाट नं. 341,
    सर्वे नं. 997/8, मॉडल कॉलोनी,
    दीप बंग्लो चौक के निकट, पुणे - 411016,
    यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड,
    प्लाट नं. 3, सैक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 द्वारा संचालित)
 
 
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अनुमोदित4000एओपी / बीओआईश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​कर भुगतान

कर की दर क्या है ?

क. आयकर :

एओपी/बीओआर्इ की कर देयता एओपी/बीओआर्इ के सदस्यों के शेयर ज्ञात हैं अथवा नही पर निर्भर करती है

1) जहां सदस्यों के शेयर ज्ञात है

जहाँ एओपी/बीओआर्इ में सदस्यों के व्यक्तिगत शेयर ज्ञात हों तो एओपी/बीओआर्इ की कर देयता को निम्नानुसार निर्धारित किया जाएगा:

क. जहाँ किसी भी सदस्य की आय अधिकतम राशि जो आयकर हेतु वसूलनीय नही है, से अधिक होती है (अर्थात् मूल छूट सीमा)

इस स्थिति में, एओपी/बीओआर्इ की आय व्यक्ति हेतु लागू होने वाली दी पर करयोग्य होगी

लेकिन यदि एओपी/बीओआर्इ के किसी सदस्य की कुल आय अधिकतम सीमांत दर से अधिक दर पर करयोग्य होता है तो एओपी/बीओआर्इ की आय निम्नानुसार कर हेतु वसूलनीय होगी:

   -  ऐसे सदस्य हेतु रोप्य आय का भाग उस सदस्य हेतु लागू ऐसी उच्च दर पर करयोग्य होगी

   -  आय का शेष भाग कर की अधिकतम सीमांत दर पर करयोग्य होगा (अर्थात् 30 प्रतिशत साथ ही अधिभार, र्इसी तथा एसएचर्इसी जो लागू हो)

ख. जहां एओपी/बीओआर्इ के किसी सदस्य की आय अधिकतम राशि,  जो आयकर हेतु वसूलनीय नहीं है (अर्थात मूल छूट सीमा), से अधिक हो तो

इस स्थिति में, एओपी/बीओआर्इ की आय कर की अधिकतम सीमांत दर पर करयोग्य होगी (अर्थात् 30 प्रतिशत साथ ही अधिभार, र्इसी तथा एसएचर्इसी जो लागू हो)

लेकिन यदि एओपी/बीओआर्इ के किसी सदस्य की कुल आय अधिकतम सीमांत दर से अधिक दर पर करयोग्य होती है तो एओपी/बीओआर्इ की आय निम्नानुसार कर हेतु वसूलनीय होगी

  -  ऐसे सदस्य हेतु रोप्य आय का भाग उस सदस्य हेतु लागू ऐसी उच्च दर पर करयोग्य होगी

  -  आय का शेष भाग कर की अधिकतम सीमांत दर पर करयोग्य होगा (अर्थात् 30 प्रतिशत साथ ही अधिभार, र्इसी तथा एसएचर्इसी जो लागू हो)

2) जहां सदस्यों के शेयर ज्ञात न हों

ऐसी स्थिति में एओपी/बीओआर्इ की आय अधिकतम सीमांत दर पर करयोग्य होगी (अर्थात् 30 प्रतिशत साथ ही अधिभार, र्इसी तथा एसएचर्इसी जो लागू हो)। लेकिन यदि एओपी/बीओआर्इ के किसी सदस्य की आय अधिकतम सीमांत दर से अधिक की दर पर करयोग्य होती है तो एओपी/बीओआर्इ की कुल आय कर की ऐसी उच्च दर पर कर हेतु वसूलनीय होगी

इस धारा के प्रयोजन के लिए, एओपी/बीओआर्इ की आय में एओपी अथवा बीओआर्इ के सदस्यों के व्यक्तिगत शेयर अनिर्धारित अथवा अज्ञात के तौर पर समझे जाऐंगे यदि ऐसे शेयर तत्पश्चात् किसी भी समय अथवा ऐसे एओपी अथवा बीओआर्इ के गठन की तिथि पर अनिर्धारित अथवा अज्ञात हैं।

ख. वैकल्पिक न्यूनतम कर :

एओपी/बीओआर्इ द्वारा देययोग्य कर धारा 115ञग के अनुसार "समायोजित कुल आय" के 18.5 प्रतिशत (अधिभार, र्इसी तथा एसएचर्इसी द्वारा बढ़ोत्तरी) से कम नहीं हो सकता। हालांकि, वैकल्पिक न्यूनतम कर से संबंधित प्रावधान उन एओपी अथवा बीओआर्इ हेतु लागू नहीं होंगे जिनकी समायोजित कुल आय बीस लाख रूपए से अधिक न हो

कर का भुगताना कैसे करें ?

करों को निम्नलिखित विधियों में से किसी में भी दिया जा सकता है :

टिप्पणी :

र्इ-भुगतान उन एओपी/बीओआर्इ के लिए अनिवार्य है जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों के अंकेक्षण के लिए उत्तरदायी हैं।

  
अनुमोदित5000एओपी / बीओआईश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56

​​विवरणी दाखिलीकरण

क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?

प्रत्येक एओपी/बीओआई चाहे निगमित हो अथवा नहीं, को आय की विवरणी दाखिल करना होगा यदि उनकी कुल आय (किसी अन्य व्यक्ति की आय सहित जिसके संबंध में वह निर्धारणीय है) धारा 10क, 10ख अथवा अध्याय VIक (अर्थात् धारा 80ग से 80प के अन्तर्गत कटौती) के प्रावधानों को प्रभावी किए बिना अधिकतम राशि जो कर हेतु वसूलनीय नही है, से अधिक है अर्थात् छूट सीमा से अधिक है

क्या विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?

एओपी/बीओआई के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है। एक एओपी/बीओआई इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत आय की विवरणी को भी दाखिल कर सकता है। हालांकि, धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराने के लिए उत्तरदायी एओपी/बीओआई को डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है

विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि ?

एओपी/बीओआई द्वारा विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं :

  • विशेष नियत तिथि
  • एक एओपी/बीओआई जिसे आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित करना आपेक्षित है, के लिए निर्धारण वर्ष की 30 सितम्बर
  • एक एओपी/बीओआई जिसे धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, के लिए निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर
  • किसी अन्य मामले में निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई
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अनुमोदित3000गैर निवासियोंश्रेणी सूची10-01-2020हाँअनिवासी के प्रकार17-02-2021 17:56

​​​​​​​​विदेशी कंपनी

अर्थ

धारा 2(23क) के अनुसार "विदेशी कंपनी" का अर्थ जो घरेलू कंपनी नहीं है

कर की दर

क. आयकर

निर्धारण वर्ष 2021-22 तथा निर्धारण वर्ष 2020-21

  • आयकर दर का प्रकार
  • (क) 31 मार्च, 1961 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त रॉयल्टी अथवा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व तथा जहां ऐसा समझौता, किसी भी स्थिति में, केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया हो, सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा प्रतिपादन के लिए शुल्क 50 प्रतिशत
  • अन्य कोई आय 40 प्रतिशत

जमा करें :

  • क) अधिभार : आयकर राशि को ऐसे कर के 2 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तथा ऐसे कर के 5 प्रतिशत की दर पर जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है। हालांकि अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा जो निम्नानुसार होगी :
  • (i) जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
  • (ii) जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो दस करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले दस करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
  • ख) शिक्षा उपकर : आयकर तथा देययोग्य अधिभार की राशि, ऐसे आयकर तथा अधिभार के दो प्रतिशत की दर पर आंके गए शिक्षा उपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।
  • ग) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर : आयकर की राशि तथा प्रयोज्य अधिभार को ऐसे आयकर तथा अधिभार के एक प्रतिशत की दर पर आंके गए माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा।

ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर

एक कंपनी बही लाभ के 15 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 5 प्रतिशत से कम है। हालांकि, प्रभावी निर्धारण वर्ष 2016-17 से, एक विदेशी कंपनी आगामी आय पर मैट देने के लिए उत्तरदायी नहीं है यदि सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत उस पर देययोग्य आयकर 15 प्रतिशत से कम की दर पर होता है।

  • प्रतिभूति के स्थानांतरण से उत्पन्न पूंजीगत प्राप्ति
  • ब्याज
  • रॉयल्टी तथा
  • तकनीकी सेवा के लिए शुल्क

वर्ष 2020 के लिए नियत तारीख​

15 मार्च 2020 -

निर्धारण वर्ष 2020-21 के लिए अग्रिम कर की चौथी किश्त​

31 मार्च 2020 -

अंतर्राष्ट्रीय समूह जिसका वह ऐसे समूह का घटक है, के संदर्भ में भारत में निवासी एक मूल उद्यम या वैकल्पिक प्रतिवेदी उद्यम द्वारा पिछले वर्ष 2018-19 के लिए प्रपत्र सं. 3गड़कघ में राष्ट्र-दर-राष्ट्र रिपोर्ट​​

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अनुमोदित3600एओपी / बीओआई; एचयूएफ; एलएलपी; गैर निवासियों; घरेलू कंपनी; न्यास; फर्म; विदेशी फर्म; व्यक्तिगत; वरिष्ठ नागरिकश्रेणी सूची10-01-2020हाँ17-02-2021 17:56
संपत्ति​ की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती

I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:

  1. कर सूचना तंत्र राष्ट्रीय प्रतिभूति निपेक्षागार लिमिटेड की वेबसाइट (www.tin-nsdl.com ) पर लॉग आन करें। .
  2. ''संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती के तहत, ''संपत्ति पर स्रोत पर कर कटौती प्रस्तुत करने के लिए ऑनलाइन प्रपत्र (प्रपत्र 26थख)'' पर क्लिक करें।
  3. संपत्ति की बिक्री पर ''स्रोत पर कर कटौती'' के तौर पर प्रयोज्नीय चालान का चयन करें।
  4. पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।

    (प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :

    1. विक्रेता और खरीदार की स्थार्इ खाता संख्या
    2. विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
    3. संपत्ति का विवरण
    4. भुगतान/जमा की गर्इ राशि और जमा कर का विवरण
  5. आगे बढ़ने के लिए, विधिवत भरा हुआ प्रपत्र सबमिट करें। पुष्टि करने के बाद, एक स्क्रीन पर दो बटन ''प्रपत्र 26थख मुद्रित करें'' और ''बैंक को सबमिट करें'' दर्शाते हुए एक स्क्रीन प्रकट होती है। एक अद्वितीय अभिस्वीकृति संख्या भी स्क्रीन पर प्रदर्शित होती है। भविष्य में उपयोग के लिए इस अभिस्वीकृति संख्या को सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है।

    प्रपत्र मुद्रित करने के लिए ''प्रपत्र 26थख मुद्रित करें'' पर क्लिक करें। फिर इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से आवश्यक अॉनलाइन भुगतान करने के लिए ''बैंक को सबमिट करें'' पर क्लिक करें। फिर विभिन्न बैंकों की इंटरनेट बैंकिंग सुविधा के माध्यम से भुगतान पृष्ठ पर जाएं। अधिकृत बैंकों की सूची के लिए, कृपया https://onlineservices.tin.nsdl.com/etaxnew/Authorizedbanks.html देखें।

  6. सफल भुगतान पर सीआर्इएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से र्इ-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।

II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :

  1. स्थार्इ खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in)  पर लॉगिन करें।
  2. ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
  3. संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थार्इ खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
  4. एक संपुष्टि स्क्रीन दिखार्इ देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
  5. डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखार्इ देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
  6. अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
  7. अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
  • ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें ​​​​​​​​​​​​​​​
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    अनुमोदित4750घरेलू कंपनीश्रेणी सूची10-01-2020हाँ10/23/201517-02-2021 17:56

    ​​​(अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) काले धन और टैक्स अधिनियम, 2015 का अधिरोपण

    • (अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) काले धन और टैक्स अधिनियम के अधिरोपण, 2015 ('काला धन अधिनियम') मई 26, 2015 पर माननीय राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त किया।​
    • अप्रकटीकृत विदेशी आय या तो अभिकलन तीन बार टैक्स के बराबर करने के लिए एक दंड के साथ संपत्ति के मूल्य पर 30% टैक्स के लिए अधिनियम प्रदान करता है। यह आगे इरादतन विदेशी आय या भारत से बाहर आयोजित की संपत्ति पर टैक्स से बच निकलने की कोशिश के मामले में 10 साल ऊपर का मुकदमा चलाने के लिए प्रदान करता है।
    • अधिनियम के काले धन को प्रवृत्त 1 जुलाई 2015 से आता है।​
    • प्रासंगिक अधिनियम के प्रावधानों के काले धन को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें​​​