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आयकर नियम, १९६२ के संशोधित नियम ११४ई के अनुसार, वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर) नीचे दी गई तालिका के कॉलम (२) में उल्लिखित प्रत्‍येक व्‍यक्ति द्वारा उक्‍त ता‍लिका के कॉलम (३) में अनुरूपी प्रविष्टि में निर्दिष्‍ट स्‍वरूप तथा मूल्‍य के ऐसे सभी लेन-देनों (ट्रांजेक्शन) के संबंध में प्रस्‍तुत किया जाना चाहिए जो १ अप्रैल २००४ से शुरू हो रहे वित्‍तीय वर्ष के दौरान या उसके बाद उसके द्वारा रजिस्टर या दर्ज किये जाते हैं. क्र.सं.(१) व्‍यक्ति की श्रेणी (२) ट्रांजेक्शन का स्‍वरूप एवं मूल्‍य (३) १ बैंकिंग कंपनी जिस पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम, १९४९ (१९४९ का १०) लागू होता है (उस अधिनियम की धारा ५१ में उल्लिखित किसी बैंक या बैंकिंग संस्‍था सहित). उस बैंक में अनुरक्षित व्‍यक्ति के किसी बचत बैंक खाते में वर्ष में कुल १० लाख रुपये या इससे अधिक की नकदी जमाराशियां. २ बैंकिंग कंपनी जिस पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम, १९४९ (१९४९ का १०) लागू होता है (उस अधिनियम की धारा ५१ में उल्लिखित किसी बैंक या बैंकिंग संस्‍था सहित) अथवा क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कोई अन्‍य कंपनी या संस्‍था. किसी व्‍यक्ति को जारी किये गये क्रेडिट कार्ड के संबंध में उत्‍पन्‍न बिलों के प्रति उस व्‍यक्ति द्वारा वर्ष में किये गये कुल २ लाख रुपये या इससे अधिक के भुगतान. ३ म्‍यूच्‍युअल फंड का ट्रस्‍टी या म्‍यूच्‍युअल फंड के कार्यों का प्रबंध उस फंड के यूनिट्स खरीदने के लिए किसी व्‍यक्ति से दो लाख रुपये या इससे अधिक राशि की प्राप्ति. ४ बांड या डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्‍था कंपनी या संस्‍था द्वारा जारी बांडों या डिबेंचरों को खरीदने के लिए किसी व्‍यक्ति से पांच लाख रुपये या इससे अधिक राशि की प्राप्ति. ५ सार्वजनिक या राइट्स निर्गम के जरिए शेयर जारी करने वाली कंपनी कंपनी द्वारा जारी शेयरों को खरीदने के लिए किसी व्‍यक्ति से एक लाख रुपये या इससे अधिक राशि की प्राप्ति. ६ रजिस्‍ट्रीकरण अधिनियम, १९०८ की धारा ६ के अंतर्गत नियुक्‍त रजिस्‍ट्रार या उप – रजिस्‍ट्रार किसी व्‍यक्ति द्वारा तीस लाख रुपये या इससे अधिक मूल्‍य की अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री. ७ भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, १९३४ की धारा ३ के अंतर्गत गठित भारतीय रिजर्व बैंक का अधिकारी व्‍यक्ति जो इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विधिवत् प्राधिकृत है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी बांडों के लिए किसी व्यक्ति से वर्ष में कुल पांच लाख रुपये या इससे अधिक राशि की प्राप्ति. ​

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