निर्देश सं. 07/2015

एफ. नं. 385/21/2015-आर्इटी(ख)

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली

26 अगस्त, 2015

सेवा में,

समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/आयकर महानिदेशक

विषय : अप्रतिलभ्य कर, 2015 की वसूली के परिणामस्वरूप सूचनाकर्ता को पुरस्कार की स्वीकृति के लिए दिशा-निर्देश

 

महोदय/महोदया

 

निवेदक को पुरस्कार के अनुदान के लिए दिशा-निर्देश, 2007 के अधिक्रमण में, मैं निर्देश देता हूं कि निम्नलिखित दिशा-निर्देश कर चूककर्तांओं जिनके नाम आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 287 के अंतर्गत सार्वजनिक डोमेन में प्रकाशित हुए हैं, की कर वसूली के परिणामस्वरूप सूचनाकर्ता को पुरस्कार की स्वीकृति नियमित करेगा।

1. अल्प शीर्षक

इन दिशा-निर्देशों को 'अप्रतिलभ्य कर की वसूली 2015 के परिणामस्वरूप सूचनाकर्ता को पुरस्कार की स्वीकृति के लिए दिशा-निर्देश' कहा जा सकता है।

2. दिशा-निर्देशों का प्रयोग

 (i) ये दिशा-निर्देश उन सूचनाकर्ताओं के लिए पुरस्कार का भुगतान तथा स्वीकृति को नियमित करेगा जो 31.03.2015 को अथवा उसके पश्चात् व्यक्तियों की परिसंपत्ति/ठिकानों की विशिष्ट तथा विश्वसनीय सूचना मुहैया कराएगा जिसका परिणाम आयकर अधिनियम, 1961 तथा संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के अंतर्गत पहले ही लगाए गए कर, जुर्माने, ब्याज अथवा अन्य राशि का संग्रहण होगा। 31.03.2015 से पूर्व उपलब्ध करार्इ गर्इ सूचना के लिए पुरस्कार के अनुदान तथा भुगतान 'सूचना हेतु पुरस्कार की स्वीकृति हेतु दिशा-निर्देश, 2007' द्वारा नियमित रहेंगे।

(ii) ये दिशा-निर्देश लागू होंगे यदि क्षेत्राधिकारी प्रधान मुख्य आयुक्त/मुख्य आयुक्त संतुष्ट होता है कि कर चूककर्ता निर्धारिती की पहचान अथवा उसकी परिसंपत्ति की खोज के लिए विभाग द्वारा किए गए समस्त संभव प्रयासों के बावजूद तथा सूचनाकर्ता द्वारा मुहैया करार्इ गर्इ सूचना के परिणामस्वरूप कर वूसली नहीं हो सकती।

3. पुरस्कार राशि

   i. व्यक्ति उपलब्ध करार्इ गर्इ सूचना के परिणामस्वरूप किसी प्रशासनिक अथवा न्यायिक कार्रवार्इ के परिणामस्वरूप एकत्रित कर पर आधारित पुरस्कार के लिए पात्र होगा। एकत्रित कर की प्रमात्रा केवल समस्त निर्धारण के अंतिम होने तथा कोर्इ अपील/संशोधन/अन्य मुकद्मा लंबित नहीं हैं, के बाद ही निर्धारित की जाएगी।

  ii. पुरस्कार कर के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, उसकी वसूली सूचनाकर्ता द्वारा मुहैया करार्इ गर्इ सूचना/दस्तावेजों हेतु प्रत्यक्ष रूप से रोप्य है, जो रू. 15 लाख की अधिकतम सीमा के अनुसार होगी। पूर्ण बोर्ड नीचे पैराग्राफ 4 में निर्दिष्ट समिति की सिफारिशों के आधार पर रू. 15 लाख के अधिकतम सीमा के अनुसार राहत दे सकता है।

  iii. पुरस्कार सूचनाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सूचना हेतु प्रत्यक्ष रूप से रोप्य वसूली के संबंध में प्रसंस्करित तथा अनुदान होनी चाहिए जो विभाग की सूचना में नहीं थी। इसे प्रभावी बनाने के लिए कोर्इ प्रस्ताव अप्रतिलभ्य करों से की गर्इ वसूलियों के पश्चात् विचारनीय होना चाहिए तथा कोर्इ भी अग्रिम मुकद्मेबाजी नहीं होनीं चाहिए। प्रतिफल करदाता जिसके बारे में सूचना दी गर्इ है, की स्थिति में कर वसूली के संदर्भ में ही दिया जाएगा।

 iv. इन दिशा-निर्देशों के अनुसार पुरस्कार विवेकाधीन हैं तथा अनुग्रह राशि के रूप में होगा जो, इन दिशानिर्देशों के अनुसार, पुरस्कार अनुदान हेतु सक्षम प्राधिकारी के संपूर्ण अधिकार में स्वीकृत होगा। पुरस्कार की स्वीकृति से संबंधित किसी निर्णय के समक्ष इस संबंध में कोर्इ प्रतिनिधित्व अथवा याचिका सूचनाकर्ता अथवा किसी व्यक्ति द्वारा विचारनीय नहीं होगी तथा दावे का परिणाम न्यायालय में विवादित नहीं होगा।

  v. इन दिशा-निर्देशों के अंतर्गत पुरस्कार अनुग्रह राशि के रूप में हैं तथा तद्नुसार, सूचनकर्ता द्वारा किए गए उसका नियतन स्वीकृत नहीं होगा। हालांकि, पुरस्कार अनुदान हेतु सक्षम प्राधिकारी सूचनकर्ता के वारिस अथवा प्रत्याशी को ऐसी पुरस्कार राशि अनुदान में दे सकते हैं जो ऐसी राशि से अधिक नहीं होगी जो सूचनाकर्ता, जो मरा नहीं था, को देय हो गर्इ होती।

4. पुरस्कार अनुदान हेतु सक्षम प्राधिकारी

पुरस्कार अनुदान हेतु सक्षम प्राधिकारी प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त होगा जिसके प्रभार में बकाया, जिससे वसूली की है, अभिलिखित हैं। हालांकि, जहां किसी स्थिति में पुरस्कार की राशि रू. 1,00,000/- से अधिक होती है तो इसे संबंधित मुख्य आयुक्त के तौर पर क्षेत्र के प्रधान मुख्य आयुक्त (प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त) तथा प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त द्वारा नामित मुख्य आयकर आयुक्त सन्निहित तीन अधिकारियों की समिति द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। यदि प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त संबंधित मुख्य आयकर आयुक्त है तो वह समिति के सदस्य के तौर पर एक अथवा अधिक मुख्य आयुक्त को नामित करेगा।

5. दिशा-निर्देशों के उद्देश्य के लिए सूचनाकर्ता

   i. एक व्यक्ति को इन दिशा-निर्देशों के अनुसार पुरस्कार के लिए पात्र सूचनाकर्ता के तौर पर समझा जाएगा यदि वह अप्रतिलभ्य करों के विषय में परिसंपत्ति/अनुसरणीय निर्धारिती के संबंध में विशिष्ट सूचना को प्रस्तुत करता है। हालांकि, पुरस्कार का दावा मामलों तक ही सीमित होगा जहां कार्रवार्इ सूचना के अनुसार वास्तव मंजूर की जाती है। उपलब्ध करार्इ गर्इ सूचना तथ्यों/दस्तावेजों द्वारा समर्थित होनी चाहिए तथा काल्पिनिक, अस्पष्ट सामान्य प्रकृति की अथवा "सूझबूझ पूर्ण अटकल" नहीं होनी चाहिए।

  ii. यदि जहां दस्तावेज अथवा समर्थित प्रमाण सूचनाकर्ता को ज्ञात हैं लेकिन उसके अधिकार में नहीं हैं तो सूचनाकर्ता को इन दस्तावेजों का वर्णन करना चाहिए तथा अपनी सर्वोत्तम क्षमता के अनुसार उसकी स्थिति को अभिज्ञात करना चाहिए।

  iii. सूचना को प्राप्त करने के लिए नोडल अधिकारी (अतिरिक्त/संयुक्त आयकर आयुक्त के पद से नीचे के पद का न हो) के तौर पर नामित अधिकारियों को पब्लिक डोमेन अथवा किसी अन्य प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालय में उसके नाम पर प्रकाशन के मार्फत निर्दिष्टानुसार निर्धारिती के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर आयुक्त क्षेत्राधिकार को जमा किया जा सकता है। किसी अन्य प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त द्वारा प्राप्त सूचना क्षेत्राधिकारी प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त को 15 दिनों के भीतर अग्रेषित किया जाना चाहिए।

iv.  क्षेत्राधिकारी प्रधान आयकर आयुक्त परिशिष्ट - क में उपलब्धानुसार कार्रवार्इ योग्य जानकारी के रूप की जाँच करने तथा निर्णय के लिए प्राधिकारी के तौर पर कार्य करेंगे

6. सूचनकर्ता का बयान

जहां कोर्इ सूचना अथवा प्रमाण पुरस्कार की उम्मीद में किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत होती है तो उसे इन दिशा-निर्देशों हेतु परिशिष्ट - ख के अनुसार लिखित विवरण प्रस्तुत करना आपेक्षित है। ऐसा विवरण नोडल अधिकारी, जिसको सूचना प्रस्तुत करनी है, की उपस्थिति में सूचनाकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए। जहां कोर्इ सूचना इस सूचना के पश्चात् प्राप्त होती है कि सूचना को पुरस्कार के दावे की दृष्टि से दिया गया है तो सूचनाकर्ता को ऐसे प्राधिकारी की उपस्थिति में लिखित विवरण हस्ताक्षर करना होगा तथा उनके समक्ष प्रस्तुत होना होगा। समस्त मामलों में मूल विवरण प्रधान आयकर आयुक्त के क्षेत्राधिकार में रखा जाना चाहिए। कोर्इ पुरस्कार स्वीकार्य नहीं होगा यदि सूचनाकर्ता उक्तानुसार संदर्भित लिखित विवरण को देने मना करता है।

7. सूचनाकर्ता को लिखित घोषणा

सूचनकर्ता द्वारा किसी सूचना अथवा दस्तावेजों की प्रस्तुति, इनाम की उम्मीद में, के समय, इसे प्रभावी बनाने के लिए एक घोषणा उसके द्वारा ली जानी चाहिए :-

(क) कि वह अवगत है कि उसके द्वारा प्रस्तुत सूचना अथवा दस्तावेज स्वत: ही उसको किसी पुरस्कार को प्रदान करने का अधिकार नहीं देता तथा कि वह इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी के निर्णय द्वारा बाध्यकारी होगा।

(ख) कि वह अवगत है कि पुरस्कार का प्रदान किया जाना उसके द्वारा प्रस्तुत सूचना की वास्तविकता तथा दस्तावेजों की उपयोगिता पर निर्भर करता है।

(ग) कि पुरस्कार उसके द्वारा प्रस्तुत सूचना के प्रत्यक्ष कारण के तौर पर अधिकतम प्राप्त/सांधित कर से ही संबंधित होगा।

(घ) कि भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के प्रावधान उसके द्वारा पढ़े गए हैं अथवा उसको वर्णित किए गए हैं तथा वह अवगत है कि यदि उसके द्वारा प्रस्तुत सूचना असत्य पार्इ जाती है तो वह अभियोजन के लिए उत्तरदायी होगा।

(ड़) कि वह स्वीकार करता है कि सरकार को उसकी सूचना के परिणामस्वरूप किसी सांधित कर के विवरण से संबंधित किसी पत्र-व्यवहार करने किसी दायित्व के अधीन नहीं हैं।

(च) कि वह स्वीकार करता हैं कि पुरस्कार का भुगतान पुरस्कार देने के लिए सक्षम प्राधिकारी के पूर्ण विवेक में अनुग्रह राशि हैं तथा उसका किसी कानूनी न्यायालय में निर्णय के संशोधन पर विचार करने का अधिकार नहीं है।

8. पुरस्कार की राशि निर्धारण को देखते हुए ध्यान में रखी जाने वाली परिस्थितियां

पुरस्कार राशि के निर्धारण में, पुरस्कार अनुदान हेतु सक्षम प्राधिकारी निम्नलिखित को ध्यान में रखेंगे :

(क) सूचनाकर्ता द्वारा दी गर्इ सूचना की यर्थाथता

(ख) सूचनाकर्ता द्वारा प्रतिपादित मदद की सीमा तथा उसका रूप

(ग) सूचना तथा दस्तावेजों की प्रस्तुति तथा हासिल करने में सूचनाकर्ता द्वारा किए गए व्यय तथा विद्वेष तथा लिया गया जोखिम तथा मुसीबत

(घ) प्रस्तुत सूचना प्रयोग करने में शामिल कार्य प्रमात्रा तथा ऐसे कर के साथ सुविधा सूचना के परिणाम हो सकती है

(ड़) सांधित कर की मात्रा जो सूचना से प्रत्यक्ष रूप से रोप्य हैं तथा सूचनाकर्ता द्वारा आपूर्तित दस्तावेज

(च) सूचनाकर्ता हेतु पुरस्कार, 2007 के अनुदान के रूप में पहले से दिए गए पुरस्कार की मात्रा जहां करों के उदग्रहण के लिए कार्यवाही अथवा कार्रवार्इ को उसी सूचनाकर्ता द्वारा मुहैया करार्इ गर्इ सूचना के आधार पर वास्तविक रूप से प्रारंभ किया गया था।

9. सूचनाकर्ता की पहचान की गोपनीयता

सूचनाकर्ता की पहचान को उसे नंबर देकर गुप्त रखा जाएगा यदि उसकी इच्छा है। उसे सूचनाओं अथवा भुगतान किए गए पुरस्कारों से संबंधित किसी सूचना को फिलहाल लागू किए गए किसी कानून के अनुसार को छोड़कर किसी प्राधिकारी को प्रकटीकृत नहीं किया जाएगा।

10. आंतरिक अंकेक्षण पार्टी द्वारा प्रमाणपत्र

जब पुरस्कार की राशि रू. 1 लाख अथवा उससे अधिक हो तो संबंधित प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अथवा मुख्य आयकर आयुक्त, पुरस्कार के अनुमोदन से पूर्व, मामले की जांच करेंगे तथा वसूल किए गए कर की सत्यता से संबंध रखने वाले संबंधित प्रधान आयकर आयुक्त से प्रमाणपत्र प्राप्त करेंगे।

11. कुछ मामलों में पुरस्कार देने पर रोक

कोर्इ पुरस्कार नहीं दिया जाएगा यदि -

   i. सूचनाकर्ता सरकारी कर्मचारी है जो सरकारी कर्मचारी के तौर पर सामान्य कर्त्तव्य के दौरान उसके द्वारा सूचना अथवा प्रमाण को प्रस्तुत करता है।

स्पष्टीकरण : एक व्यक्ति के केंद्र अथवा राज्य अथवा किसी संघ शासित सरकार अथवा राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण अथवा किसी सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, निगम, निकाय, कार्पोरेट अथवा प्रतिष्ठान, अपने द्वारा अथवा केंद्र सरकार अथवा किसी राज्य सरकार अथवा किसी संघ शासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा संस्थापित, के तौर पर नियोजित कर्मचारी को इस पैराग्राफ के उद्देश्य के लिए सरकारी कर्मचारी होने के तौर पर समझा जाएगा; अथवा

   ii. सूचना विभाग हेतु सूचना को प्रकट करने के लिए कानून द्वार आपेक्षित है; अथवा

  iii. सूचनाकर्ता सरकार के साथ अनुबंध के आधार पर सूचना को अभिगम करता है

  iv. योजना केवल उन मामलों में सीमित होगी जहां;

 (क) निर्धारिती का पता न लगाया जा सके,

 (ख) वसूली के लिए कोर्इ/अपर्याप्त परिसंपत्ति हो,

 (ग) स्व: मूल्यांकन कर 6 माह से अधिक के लिए शेष हो,

 (घ) टीडीएस की कटौती की गर्इ हो लेकिन 6 माह से अधिक से जमा न किया गया हो

तथा उनके नाम आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 287 के अंतर्गत पब्लिक डोमेन में प्रकाशित किए गए हों

12. कुछ सूचनाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सूचना का हस्ताक्षेप न करने तथा प्रत्येक सूचनाकर्ता की आंकड़ों का अनुरक्षण

सूचनाकर्ताओं से सूचना, प्रमाण अथवा दस्तावेज प्राप्त करने वाले सक्षम प्राधिकारी को मामले जिसमें उसको सूचना प्रस्तुत करनी है तथा उस सीमा तक सूचना को विश्वसनीय पाया गया है, का विवरण, उसके पूर्ववृत्त का संक्षिप्त विवरण देते हुए प्रत्येक सूचनाकर्ता के आंकड़ों को अनुरक्षित रखना होगा। यदि पाया जाता है कि सूचनाकर्ता का पिछला जीवन, पूर्व में उसके द्वारा प्रस्तुत सूचना का रूप तथा उसका व्यवहार उसके द्वारा प्रस्तुत सूचना, प्रमाण तथा दस्तवेजों की अनदेखी को न्यायसंगत करता है तो मामला संबधित प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त को ऐसे प्राधिकारी द्वारा संदर्भित होना चाहिए तथा यदि उसके द्वारा अनुमोदित होता है तो ऐसे प्राधिकरण के लिए खोला जाएगा कि ऐसे सूचनाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सूचना का हस्तक्षेप न किया जाए।

13. बिल का संरेखण

मामलों जहां ऐसा प्राधिकारी स्वयं पुरस्कार देने में सक्षम है, में पुरस्कार अनुदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के आदेश तथा जहां पैराग्राफ 4 में संदर्भित समिति के साथ अधिकृत निर्णय लागू हैं, उसमें संदर्भित समिति का अनुदान, मंजूर आवंटन के समक्ष खजाने पर बिल के संरेखण के लिए उपयुक्त प्राधिकारी को संस्थापित करेगा।

14. पुरस्कार से संबंधित व्यय नियंत्रण तथा अंकेक्षण

पुरस्कार के लिए व्यय का नियंत्रण तथा अंकेक्षण समय-समय पर इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से जारी निर्देशों को अधिशासी करेगा।

15. हिन्दी संस्करण अनुसरित होगा

 

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार

 

निम्न को प्रति :

  1. अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

  2. अनुपालन के लिए उनके आंचलिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत संबंधित प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/आयकर महानिदेशक अतिरिक्त महानिदेशक/ प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त (टीडीएस) के सदय निर्देश के अनुरोध के साथ समस्त सदस्य, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

  3. अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के समस्त अन्य अधिकारी

  4. आयकर निदेशक (पीआरएंड(एंडओएल)), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली

  5. भारतीय नियंत्रक एंव महालेखा परीक्षक

  6. आयकर महानिदेशक (सर्तकता), नर्इ दिल्ली

  7. संयुक्त सचिव तथा कानूनी सलाहकार, कानून तथा न्यायिक मंत्रालय, नर्इ दिल्ली

  8. समस्त आयकर निदेशक, नर्इ दिल्ली

  9. आयकर महानिदेशक (एनएडीटी), नागपुर

10. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का आर्इटीसीसी प्रभाग (3 प्रतियां)

11. डीजीआर्इटी (पद्धति), नर्इ दिल्ली

 

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार

 

परिशिष्ट-क

वाद-योग्य सूचना के निर्णय हेतु आंतरिक दिशा-निर्देश

  1. सूचना नवीनतम जानकारी होनी चाहिए

  2. सूचना निम्न को दर्शाते हुए लिखित होनी चाहिए

   I. चल संपत्ति जिसके द्वारा वसूली की जा सकती है

    i. बैंक का नाम/शाखा

    ii. खाता संख्या

   iii. शेष के रूप में निर्दिष्ट राशि

   iv. शेयर/डिबेंचर तथा अन्य किसी परक्राम्य लिखत का प्रमाण

  II. अचल संपत्ति

  क. रियल एस्टेट में निवेशित दुकान, अज्ञात संपत्ति

  ख. न्याय व्यवस्था अथवा अन्य किसी प्रसंग द्वारा संभावित विरासत

  ग. संपत्ति की खरीद अथवा बिक्री अथवा स्वामित्व का प्रमाण

III. विदेशी बैंक खाते में निवेश, परिसंपत्ति

  3. वाद-योग्य के तौर पर सूचना के व्यावहार के लिए अनिवार्य शर्तें :

(क)  सूचना प्रमाण द्वारा समर्थित होनी चाहिए

(ख)  यह लिखित में होनी चाहिए

(ग) सूचना प्रमाणिक होनी चाहिए तथा केवल संदेहास्पद, अनुमानित अथवा काल्पनिक आधारित नहीं होनी चाहिए

(घ)  प्रमाण दर्शित तथा प्रत्यक्ष, वाद-योग्य होने चाहिए तथा फर्म/कंपनी आदि के परिमापन, भाग के पश्चात् प्राप्ति पर संचालित न हो

(ड़)  सूचना विभाग हेतु ज्ञात न हो। यदि बाद में यह पाया जाता है कि सूचना अज्ञात नहीं है तो पुरस्कार नहीं दिया जाएगा।

 

 

परिशिष्ट ख

शेष मांग की वसूली के लिए परिसंपत्ति/निर्धारिती से संबंधित सूचना की प्रस्तुति के लिए विवरण का प्रपत्र

1 सूचक का पूरा नाम  
2 पिता का नाम  
3 जन्म तिथि  
4 सूचक का पता, पैन/आधार नं.  
5 दूरभाष/मोबाइल नंबर  
6 निर्धारिती का नाम व पैन जिनके संबंध में सूचना प्रस्तुत हुर्इ है  
7 अधिकारी का नाम तथा पद जिनको सूचना प्रस्तुत की  
8 तिथि जिस पर सूचना प्रस्तुत हुर्इ  
9 निर्धारिती की स्थिति तथा/अथवा परिसंपत्ति का विवरण जिससे मांग की वूसली की जा सकती है
10 प्रस्तुत दस्तावेजों का ब्यौरा मूल में  
    केवल उसकी प्रति  
11 सूचना/दस्तावेजों का स्रोत  
(क) विवरण दें कि निर्धारिती के संबध में सूचना/दस्तावेज कैसे प्राप्त किए तथा निर्धारिती के साथ वर्तमान अथवा पहले के संबध का विवरण दें  
(ख) यदि सूचना को अन्य व्यक्ति के माध्यम से प्राप्त किया गया है तो 6 पर व्यक्ति के साथ उसका संबंध  

  •  सूचना विश्वसनीय तथा तथ्यों/दस्तावेजों के साथ समर्थित होनी चाहिए तथा काल्पनिक अथवा सूझबूझ पूर्ण अटकल नहीं होनी चाहिए। समस्त समर्थित सूचना/दस्तावेज संलग्न करें तथा किसी अतिरिक्त सूचना/दस्तावेज की उपलब्धता तथा स्थिति आपके अधिकार में नहीं होनी चाहिए। अतिरिक्त पृष्ठ संलग्न किया जा सकता है यदि उपयुक्त रिक्त स्थान न हो।

  •  विवरण में बैंक, शाखा तथा खाता संख्या, बैक जमा के शेष आदि शामिल होने चाहिए। अचल संपत्ति की स्थिति में, स्वामित्व/क्रय/संपत्ति की बिक्री, न्याय व्यवस्था आदि हेतु प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज होने चाहिए

 

घोषणा

 

मैं घोषणा करता हूँ कि

(क) मैं अवगत हूँ कि मेरे द्वारा प्रस्तुत सूचना अथवा दस्तावेज स्वत: ही मुझे किसी पुरस्कार को प्रदान करने का अधिकार नहीं देता तथा कि मैं इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी के लिए जा सकने वाले निर्णय द्वारा बाध्यकारी होगा।

(ख) मैं अवगत हूँ कि पुरस्कार का प्रदान किया जाना मेरे द्वारा प्रस्तुत सूचना की वास्तविकता तथा दस्तावेजों की उपयोगिता पर निर्भर करता है।

(ग) मैं अवगत हूँ कि पुरस्कार मेरे द्वारा प्रस्तुत सूचना के प्रत्यक्ष कारण के तौर पर अधिकतम प्राप्त/सांधित कर से ही संबंधित होगा।

(घ) भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के प्रावधान मेरे द्वारा पढ़े गए हैं अथवा मुझे वर्णित किए गए हैं तथा मैं अवगत हूँ कि यदि मेरे द्वारा प्रस्तुत सूचना असत्य पार्इ जाती है तो मैं अभियोजन के लिए उत्तरदायी होगा।

(ड़) मैं स्वीकार करता हूँ कि सरकार को मेरी सूचना के परिणामस्वरूप किसी सांधित कर के विवरण से संबंधित किसी पत्र-व्यवहार को करना किसी दायित्व के अधीन नहीं है।

(च) मैं स्वीकार करता हूँ कि पुरस्कार का भुगतान पुरस्कार देने के लिए सक्षम प्राधिकारी के पूर्ण विवेक के अनुसार अनुग्रह राशि हैं तथा उसका किसी कानूनी न्यायालय में निर्णय के संशोधन पर विचार करने का अधिकार नहीं है।

(छ) दिशा-निर्देशों के पैरा 3(v) के प्रावधानों के अनुसार, पुरस्कार मुझे भुगतान किए जाने से पूर्व मृत्यु की स्थिति में, वह .................................................................................................................... को दी जा सकती है।

 

सूचनाकर्ता के हस्ताक्षर

 

अधिकारी के हस्ताक्षर

जिसके समक्ष विवरण हस्ताक्षरित है

 

 

 

...............................

अधिकारी का पद

 

तिथि :

स्थान :

 

 

कृप्या ध्यान दें : सूचनाकर्ता की पहचान सख्त रूप से गुप्त रखी जाएगी