आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 76

धारा 285खक के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

धारा

धारा संख्या

76

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - प्रत्यक्ष कर

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2014

धारा 285खक के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

धारा 285खक के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

धारा 285खक के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

76. आय-कर अधिनियम की धारा 285खक के स्थान पर, निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल, 2015 से रखी जाएगी, अर्थात्:–

‘285खक. वित्तीय संव्यवहार या रिपोर्ट योग्य खाते का विवरण प्रस्तुत करने के लिए बाध्यता–(1) कोर्इ व्यक्ति, जो–

() कोर्इ निर्धारिती है; या

() सरकार के किसी कार्यालय की दशा में विहित व्यक्ति है; या

() कोर्इ स्थानीय प्राधिकारी या अन्य लोक निकाय या संगम है; या

() रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) की धारा 6 के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार है ; या

() मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के अध्याय 4 के अधीन मोटर यानों को रजिस्टर करने के लिए सशक्त रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी है ; या

() भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1998 का 6) की धारा 2 के खंड (ञञ) में यथानिर्दिष्ट महाडाकपाल है ; या

() भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) की धारा 3 के खंड (छ) में निर्दिष्ट कलक्टर है ; या

() प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (च) में निर्दिष्ट मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज है ; या

() भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक का कोर्इ अधिकारी है; या

() निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ड़) में निर्दिष्ट कोर्इ निक्षेपागार है ; या

() कोर्इ विहित रिपोर्टकर्ता वित्तीय संस्था है,

जो किसी विनिर्दिष्ट वित्तीय संव्यवहार को या ऐसे किसी रिपोर्ट योग्य खाते को, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विहित किया जाए, रजिस्टर करने या उसकी लेखा बहियां या उसके अभिलेख वाले अन्य दस्तावेज को रखने के लिए उत्तरदायी है, ऐसे विनिर्दिष्ट वित्तीय संव्यवहार या ऐसे रिपोर्ट योग्य खाते के संबंध में, जो उसके द्वारा रजिस्ट्रीकृत या अभिलिखित किए गए हैं या रखे गए हैं और जिससे संबंधित सूचना इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सुसंगत और अपेक्षित है, एक विवरण, आय-कर प्राधिकारी या ऐसे अन्य प्राधिकारी या अभिकरण को, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत करेगा।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट विवरण, ऐसी अवधि के लिए, ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप तथा रीति में प्रस्तुत किया जाएगा, जो विहित किए जाएं।

(3) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट वित्तीय संव्यवहार" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,–

() माल या संपत्ति या किसी संपत्ति में अधिकार या हित के क्रय, विक्रय या विनिमय का कोर्इ संव्यवहार; या

() कोर्इ सेवा देने के लिए कोर्इ संव्यवहार; या

() किसी संकर्म संविदा के अधीन कोर्इ संव्यवहार; या

() किए गए किसी विनिधान या उपगत किसी व्यय के रूप में कोर्इ संव्यवहार ; या

() कोर्इ ऋण लेने या निक्षेप या प्रतिगृहीत करने के लिए कोर्इ संव्यवहार,

जो विहित किया जाए :

परन्तु बोर्ड, भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के संबंध में भिन्न-भिन्न संव्यवहारों के लिए, ऐसे संव्यवहार की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, भिन्न-भिन्न मूल्य विहित कर सकेगा :

परन्तु यह और कि इस प्रकार विहित किसी वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसे संव्यवहारों का, यथास्थिति, मूल्य या कुल मूल्य पचास हजार रुपए से कम नहीं होगा।

(4) जहां, विहित आय-कर प्राधिकारी का यह विचार है कि उपधारा (1) के अधीन दिया गया विवरण त्रुटिपूर्ण है, वहां वह उस व्यक्ति को, जो ऐसा विवरण प्रस्तुत करता है, त्रुटि की सूचना दे सकेगा और ऐसी सूचना की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर या ऐसी और अवधि के भीतर, जो इस निमित्त किए गए किसी आवेदन पर, विहित आय-कर प्राधिकारी अपने विवेकाधिकार से अनुज्ञात करे, उसे त्रुटि की परिशुद्धि करने का अवसर दे सकेगा और यदि, यथास्थिति, तीस दिन की उक्त अवधि या इस प्रकार अनुज्ञात की गर्इ और अवधि के भीतर त्रुटि की परिशुद्धि नहीं की जाती है तो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे विवरण को अविधिमान्य विवरण माना जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसा व्यक्ति विवरण प्रस्तुत करने में असफल रहा है।

(5) जहां, किसी व्यक्ति ने, जिससे उपधारा (1) के अधीन कोर्इ विवरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है, उसको विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत नहीं किया है, वहां विहित आय-कर प्राधिकारी उस व्यक्ति पर एक सूचना की तामील कर सकेगा, जिसमंस ऐसी सूचना की तामील की तारीख से तीस दिन से अनधिक की अवधि के भीतर उससे ऐसा विवरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी और वह सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर विवरण प्रस्तुत करेगा।

(6) यदि ऐसे किसी व्यक्ति को, उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (5) के अधीन जारी की गर्इ किसी सूचना के अनुसरण में विवरण प्रस्तुत किए जाने पर विवरण में दी गर्इ सूचना में की कोर्इ अशुद्धि जानकारी में आती है या उसका पता चलता है, तो वह दस दिन की अवधि के भीतर उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय-कर प्राधिकारी या अन्य प्राधिकारी या अभिकरण को, उस विवरण में की अशुद्धि की सूचना देगा और सही सूचना ऐसी रीति में देगा, जो विहित की जाए।

(7) केंद्रीय सरकार, इस धारा के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा,–

() उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसे व्यक्तियों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिन्हें विहित आय-कर प्राधिकारी के पास रजिस्ट्रीकृत किया जाना है;

() सूचना की प्रकृति और वह रीति विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिसमें ऐसी सूचना, खंड (क) में निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा रखी जाएगी ; और

() उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी रिपोर्ट योग्य खाते की पहचान के प्रयोजन के लिए उन व्यक्तियों द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली ऐसी सम्यक् तत्परता को विनिर्दिष्ट कर सकेगी।’।

 

 

[वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2014]

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