आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 215

निर्धारिती द्वारा देय ब्याज

धारा

धारा संख्या

215

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2008

निर्धारिती द्वारा देय ब्याज

निर्धारिती द्वारा देय ब्याज


निर्धारिती द्वारा संदेय ब्याज

89215. 90[91(1) जहां किसी वित्तीय वर्ष में निर्धारिती ने 92[अग्रिम कर का भुगतान, धारा 209क या धारा 212 के अंतर्गत अपने स्वयं के प्राक्कलन के (जिसके अंतर्गत संशोधित प्राक्कलन भी है) आधार पर किया है] और इस प्रकार भुगतान किया गया अग्रिम कर निर्धारित कर के पचहत्तर प्रतिशत से कम है, वहां उक्त वित्तीय वर्ष के ठीक आगामी अप्रैल के प्रथम दिन से नियमित निर्धारण की तारीख तक

93[पंद्रह] प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज निर्धारिती द्वारा उतनी रकम पर संदेय होगा जितनी से कि इस प्रकार भुगतान किया गया कर निर्धारित कर से कम पड़ता है :]

94[परन्तु ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो कंपनी है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पचहत्तर प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "तिरासी सही एक बटा तीन प्रतिशत" शब्द रखे गए हों।]

95[(2) जहां नियमित निर्धारण पूर्ण होने की तारीख के पूर्व निर्धारिती द्वारा धारा 140क के अधीन या अन्यथा कर संदाय किया जाता है, वहां–

(i) ब्याज पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार उस तारीख तक परिकलित किया जाएगा जिसको कर इस प्रकार संदाय किया जाता है; और

(ii) तत्पश्चात् ब्याज पूर्वोक्त दर से उस रकम पर परिकलित किया जाएगा जितनी से इस प्रकार संदत्त कर (जहां तक वह अग्रिम कर के अधीन आय से संबद्ध है) निर्धारित कर से कम पड़ता है।]

96[(3) जहां धारा 147 या धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अंतर्गत किसी आदेश 97[या धारा 245घ की उपधारा (4) के अंतर्गत समझौता आयोग के किसी आदेश] के परिणामस्वरूप, ऐसी रकम जिस पर उपधारा (1) के अंतर्गत ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ार्इ गर्इ है, या घटार्इ गर्इ है वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा दिया जाएगा या घटा दिया जाएगा; और–

(i) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज बढ़ाया जाता है वहां 98[निर्धारण] अधिकारी संदेय राशि उल्लिखित करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना धारा 156 के अधीन सूचना समझी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;

(ii) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज घटाया जाता है, वहां दिए गए ब्याज का आधिक्य, यदि कोर्इ हो, वापस किया जाएगा।]

(4) ऐसी दशाओं में और ऐसी परिस्थितियों के अंतर्गत, जैसी विहित99 की जाएं, 98[निर्धारण] अधिकारी निर्धारिती द्वारा इस धारा के अधीन संदेय ब्याज को घटा सकेगा या छोड़ सकेगा।

1[(5) इस धारा और धारा 217 और 273 में "निर्धारित कर" का अर्थ है नियमित निर्धारण के आधार पर अवधारित कर (जैसा वह धारा 192 से 194 तक, धारा 194क 2[, धारा 194ग] 3[, धारा 194घ] 4[, धारा 195 और धारा 196क] के उपबंधों के अनुसार कटौती योग्य कर की रकम को घटा कर आए जहां तक कि ऐसा कर अग्रिम कर के अंतर्गत आय से संबंधित है और जहां तक वह उस वर्ष के लिए, जिसके लिए नियमित निर्धारण किया जाता है, अधिनियमित वित्त अधिनियम द्वारा नियत की गर्इ कर की दरों से परिवर्तन के कारण नहीं है।]

5[(6) जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, धारा 147 के अंतर्गत कोर्इ निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किया गया निर्धारण इस धारा और धारा 216, धारा 217 और धारा 273 के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।]

 

89. तारीख 19.10.1973 का पत्र [फा.सं. 400/40/73-आर्इ.टी.सी.सी.] और तारीख 21.7.1987 का परिपत्र सं. 492 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

90. वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1970 से प्रतिस्थापित।

91. देखिए नियम 40 और 119क।

92. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से "स्वयं अपने प्राक्कलन के आधार पर धारा 212 के अंतर्गत अग्रिम कर का संदाय किया है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

93. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से "बारह" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से "नौ" के स्थान पर "बारह" प्रतिस्थापित किया गया था।

94. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.9.1980 से अंत:स्थापित।

95. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से प्रतिस्थापित। आरंभ में, उपधारा (2) वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 1.4.1963 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी जिसका बाद में वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1970 से संशोधन किया गया था।

96. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से प्रतिस्थापित।

97. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

99. नियम 40 देखिए।

1. वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।

2. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से अंत:स्थापित।

3. वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से अंत:स्थापित।

4. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "और धारा 195" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

5. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

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