अन्य रकम
अन्य राशियां
31195. 32[(1) 33कोर्इ व्यक्ति, जो किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है, या किसी विदेशी कंपनी को, किसी ब्याज का (जो प्रतिभूतियों पर ब्याज नहीं है) या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य किसी अन्य राशि का (जो "वेतन" 34[* * *] शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय नहीं है) संदाय करने के लिए दायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से संदाय करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, प्रवृत्त दरों के अनुसार उस पर आय-कर की कटौती करेगा :
35[परन्तु सरकार या धारा 10 के खंड (23घ) के अर्थांतर्गत पब्लिक सेक्टर बैंक या उस खंड के अर्थांतर्गत लोक वित्तीय संस्था द्वारा संदेय ब्याज की दशा में कर की कटौती उसके संदाय के समय केवल नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से की जाएगी :
36[* * *]
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां यथापूर्वोक्त ब्याज या अन्य राशि ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "संदेय ब्याज खाते" या "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
(2) जहां किसी अनिवासी को इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य ऐसी किसी राशि के (जो 37[***] प्रतिभूतियों पर ब्याज 37[* * *] 38[* * *] और वेतन से भिन्न है) संदाय के लिए उत्तरदायी व्यक्ति यह समझता है कि ऐसी संपूर्ण राशि ऐसी आय नहीं होगी जो पाने वाले के मामले में प्रभार्य हो, वहां वह 39[निर्धारण] अधिकारी से आवेदन कर सकेगा कि वह 40[साधारण या विशेष आदेश द्वारा,] ऐसी राशि का इस प्रकार प्रभार्य समुचित अनुपात अवधारित करे और ऐसे अवधारण पर उस राशि के केवल उसी अनुपात में, जो इस प्रकार प्रभार्य है, उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती की जाएगी।
41[* * *]
42[(3) उपधारा (5) के अधीन बनाए गए नियमों43 के अधीन रहते हुए, कोर्इ व्यक्ति जो ऐसा कोर्इ ब्याज या अन्य राशि, जिस पर आय-कर की कटौती उपधारा (1) के अधीन की जानी हो, प्राप्त करने का हकदार हो 44[निर्धारण] अधिकारी से एक ऐसा प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए विहित फार्म में आवेदन कर सकेगा, जो ऐसा ब्याज या अन्य राशि उस उपधारा के अधीन कटौती किए बिना प्राप्त करने के लिए उसे प्राधिकृत करे और जहां ऐसा प्रमाणपत्र दिया जाए, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस व्यक्ति को, जिसे प्रमाणपत्र दिया गया हो, ऐसे ब्याज या अन्य राशि के संदाय के लिए उत्तरदायी हो, जब तक वह प्रमाणपत्र प्रवृत्त बना रहे, उस ब्याज या अन्य राशि का भुगतान उस पर उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती किए बिना करेगा।]
(4) उपधारा (3) के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र उसमें विनिर्दिष्ट कालावधि की समाप्ति तक अथवा यदि वह उस कालावधि की समाप्ति से पूर्व ही 45[निर्धारण] अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया जाए तो ऐसे रद्द किए जाने तक प्रवृत्त रहेगा।
(5) बोर्ड, निर्धारितियों की सुविधा और राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे नियम बना सकेगा जिनमें वे मामले, जिनमें और वे परिस्थितियां विनिर्दिष्ट होंगी जिनके अंतर्गत उपधारा (3) के अधीन प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वे शर्तें जिनके अधीन, ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा और उससे संबद्ध सभी अन्य विषयों का उपबंध होगा।]
31. परिपत्र सं. 370, तारीख 3.10.1983, पत्र [फा.सं. 391/3/78-एफ.टी.डी.], तारीख 9.7.1984, परिपत्र सं. 152, तारीख 27.11.1974, पत्र [फा.सं. 12/29/6-आर्इ.टी.(बी.)], तारीख 1.6.1965, परिपत्र सं. 43, तारीख 20.6.1970, परिपत्र सं. 20(II-4), तारीख 3.8.1961, परिपत्र सं. 588, तारीख 2.1.1991, परिपत्र सं. 695, तारीख 28.11.1994, परिपत्र सं. 723, तारीख 19.9.1995, परिपत्र सं. 728, तारीख 30.10.1995, परिपत्र सं. 734, तारीख 24.1.1996, परिपत्र सं. 740, तारीख 17.4.1996, परिपत्र सं. 759, तारीख 18.11.1997, ए.डी. (एम.ए. सीरीज़) परिपत्र सं. 48, तारीख 29.11.1997 भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी, परिपत्र सं. 767, तारीख 22.5.1998, परिपत्र सं. 769, तारीख 6.8.1998, परिपत्र सं. 786, तारीख 7.2.2000 और परिपत्र सं. 790, तारीख 20.4.2000 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
32. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1975 से तथा वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से यथा संशोधित निम्नलिखित उपधारा (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित :
'(1) कोर्इ व्यक्ति जो किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है, अथवा किसी कंपनी को, जो न तो भारतीय कंपनी है और न ही ऐसी कंपनी है जिसने भारत के भीतर घोषणा संबंधी और लाभांश का संदाय करने संबंधी विहित ठहराव किए हैं, किसी ब्याज का जो "प्रतिभूतियों पर ब्याज" नहीं है, या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य किसी अन्य राशि का, जो लाभांश नहीं है, संदाय करने के लिए उत्तरदायी है उसका भुगतान करते समय, जब तक कि वह उस अभिकर्ता के रूप में उस पर किसी आय-कर का भुगतान करने के लिए स्वयं दायी न हो, प्रवृत्त दरों के अनुसार आय-कर की कटौती करेगा :
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात उन संव्यवहारों के अनुक्रम में, जिसके संबंध में भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति धारा 163 की उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन पाने वाले का अभिकर्ता नहीं समझा जाता है, किए गए किसी भुगतान को लागू नहीं होगी :
परन्तु यह और कि किसी राशि से, जो अल्पकालिक पूंजी आस्तियों से भिन्न पूंजी आस्तियों से संबंधित "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय है, जिसका ऐसी कंपनी को संदाय किया गया है, जो न तो भारतीय कंपनी है और न ऐसी कंपनी है जिसने भारत के भीतर घोषणा संबंधी और लाभांशों का संदाय करने संबंधी विहित ठहराव किए हैं, आय-कर की कटौती ऐसी रकम पर आय-कर की राशि के बराबर वह राशि होगी जो धारा 115 के खंड (i) के उपबंधों के अनुसार संगणित की गर्इ हो।'
33. नियम 26, 28(1), 28कक, 29ख, 30, 31 और 37क तथा फार्म सं. 13, 15कक, 15ग, 15घ, 15ड़, 16क और 27 देखिए।
34. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से "या लाभांश" शब्दों का लोप किया गया।
35. प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
36. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से लोप किया गया। लोप से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से यथा अंत:स्थापित दूसरा परन्तुक इस प्रकार था:
"परन्तु यह और कि धारा 115ण में निर्दिष्ट किसी लांभांश की बाबत ऐसी कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।"
37. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से "ब्याज, जिसके अंतर्गत" तथा "भी है", का लोप किया गया।
38. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से ",लाभांश" का लोप किया गया।
39. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
40. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.3.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से "विहित रीति में" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, "विहित रीति में" पद को, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से "साधारण या विशेष आदेश द्वारा" के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।
41. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से यथा अंत:स्थापित परन्तुक इस प्रकार था :
"परन्तु यह कि यह उपधारा किसी विदेशी कंपनी को धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (v) में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में किसी संदाय को या खंड (vi) में निर्दिष्ट स्वामिस्व को या खंड (vii) में निर्दिष्ट तकनीकी सेवाओं से संबंधित फीसों को लागू नहीं होगी।"
42. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।
43. नियम 29ख और फार्म सं. 15ग से 15ड़ देखिए।
44. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
45. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

