आयकर अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र
ख.–अधिकारिता
12[आय-कर प्राधिकारियों की अधिकारिता
120. (1) आय-कर प्राधिकारी, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन ऐसे प्राधिकारियों को, यथास्थिति, प्रदत्त ऐसी सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग और सौंपे गए सभी या किन्हीं कृत्यों का पालन ऐसे निदेशों के अनुसार करेंगे, जो बोर्ड, उन सभी या किन्हीं प्राधिकारियों द्वारा शक्तियों के प्रयोग और कृत्यों के पालन के लिए जारी करे।
(2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड के निदेशों द्वारा किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी को ऐसे सभी या किन्हीं अन्य आय-कर प्राधिकारियों से, जो उसके अधीनस्थ है ऐसी शक्तियों के प्रयोग और कृत्यों के पालन कराने के लिए लिखित आदेश जारी करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकेगा।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट निदेश या आदेश जारी करने में बोर्ड या उसके द्वारा प्राधिकृत अन्य आय-कर प्राधिकारी निम्नलिखित एक या अधिक मापदंडों को ध्यान में रख सकेगा, अर्थात् :--
(क) प्रादेशिक क्षेत्र;
(ख) व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग;
(ग) आय या आय के वर्ग; और
(घ) मामले या मामलों के वर्ग।
(4) उपधारा (1) और (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, साधारण या विशेष आदेश द्वारा और उनमें विनिर्दिष्ट की जाने वाली शर्तों, निर्बंधनों या सीमाओं के अधीन रहते हुए,–
(क) किसी महानिदेशक या निदेशक को किसी अन्य आय-कर प्राधिकारी के ऐसे कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है, जो बोर्ड द्वारा उसे सौंपे जाएं;
(ख) महानिदेशक या मुख्य आयुक्त या आयुक्त को लिखित रूप में यह आदेश जारी करने के लिए सशक्त कर सकता है कि किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र अथवा व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग अथवा आय या आयों के वर्ग अथवा मामलों या मामलों के वर्ग के संबंध में इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन निर्धारण अधिकारी को यथास्थिति प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और सौंपे गए कृत्यों का पालन 13[संयुक्त] आयुक्त 14[या 13[संयुक्त] निदेशक] द्वारा किया जाएगा और जहां कोर्इ आदेश इस खंड के अधीन किया जाता है, वहां इस अधिनियम में किसी अन्य उपबंध के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम में निर्धारण अधिकारी के प्रति निर्देश को ऐसे 13[संयुक्त] आयुक्त 14[या 13[संयुुक्त] निदेशक के प्रति निर्देश समझा जाएगा जिसके द्वारा ऐसे किसी आदेश के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन किया जाना है और इस अधिनियम का ऐसा कोर्इ उपबंध जो ऐसे 13[संयुक्त] आयुक्त के अनुमोदन या मंजूरी की अपेक्षा करता है, लागू नहीं होगा।
(5) उपधारा (1) और (2) में निर्दिष्ट निदेश और आदेश, जहां कार्य के उचित प्रबंध के लिए आवश्यक या समुचित समझा जाए, दो या अधिक निर्धारण अधिकारियों से (चाहे वे एक ही वर्ग के हों या नहीं) अपेक्षा कर सकेंगे कि वे किसी क्षेत्र अथवा व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग अथवा आय या आयों के वर्ग अथवा मामलों या मामलों के वर्ग के संबंध में ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करें और जहां ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन भिन्न-भिन्न वर्ग के निर्धारण अधिकारियों द्वारा समवर्ती रूप से किया जाता है वहां उनमें से निम्नतर पंक्ति का कोर्इ प्राधिकारी ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेगा जो उनमें से कोर्इ उच्चतर प्राधिकारी निदिष्ट करे और साथ ही इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम में निर्धारण अधिकारी के प्रति निर्देश ऐसे उच्चतर प्राधिकारी के प्रति निर्देश समझा जाएगा और इस अधिनियम का कोर्इ उपबंध जो ऐसे प्राधिकारी के अनुमोदन या मंजूरी की अपेक्षा करता है, लागू नहीं होगा।
(6) इस धारा के अधीन जारी किए गए किसी निदेश या आदेश में या धारा 124 में किसी बात के होते हुए भी बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग द्वारा आय की विवरणी देने के प्रयोजन के लिए अथवा इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन कोर्इ अन्य कार्य या बात करने के लिए उक्त व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संबंध में शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करने वाला आय-कर प्राधिकारी ऐसा प्राधिकारी होगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।]
12. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित।
13. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उप" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
14. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

