आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115ब

परिभाषाएं

धारा

धारा संख्या

115ब

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIज - मामूली लाभ पर आयकर

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2006

परिभाषाएं

परिभाषाएं

83झ[अध्याय 12ज

अनुषंगी फायदों पर आय-कर

क.–कतिपय पदों का अर्थ

परिभाषाएं

115ब. इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,–

() "नियोजक" से अभिप्रेत है,–

(i) कोर्इ कंपनी ;

(ii) कोर्इ फर्म ;

83ञ [(iii) व्यक्तियों का कोर्इ संगम या व्यष्टियों का कोर्इ विकल्प चाहे वह निगमित हो या न हो;]

(iv) कोर्इ स्थानीय प्राधिकरण ; और

(v) प्रत्येक ऐसा कृत्रिम विधिक व्यक्ति, जो पूर्ववर्ती किन्हीं भी उपखंडों के अंतर्गत नहीं आता है;

83ट[परन्तु यह कि धारा 10 के खंड (23ग) के अधीन छूट के लिए पात्र अथवा धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी व्यक्ति को या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 29क के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी राजनैतिक दल को इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए नियोजक नहीं माना जाएगा;]

() "अनुषंगी फायदा कर" या "कर" से धारा 115बक के अधीन प्रभार्य कर अभिप्रेत है।

 

83झ. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अध्याय 12ज, जिसमें धारा 115ब से 115बठ तक है, अंत:स्थापित।

83ञ. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से प्रतिस्थापित प्रतिस्थापन से पूर्व, उपखंड (iii), जो वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था :

"(iii) कोर्इ व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, किंतु धारा 10 के खंड (23ग) के अधीन पात्र या धारा 12कक के अधीन रजिष्ट्रीकृत किसी निधि या न्यास या संस्था को अपवर्जित करते हुए ;"

83ट. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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