कुछ कंपनियों के संबंध में समझी गर्इ आय
11[कुछ कंपनियों के संबंध में समझी गर्इ आय
115ञक. (1) इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कंपनी, निर्धारिती की दशा में 1 अप्रैल, 1997 को या उसके पश्चात् 12[किंतु 1 अप्रैल, 2001 के पूर्व] (जिसे इसमें आगे सुसंगत पूर्ववर्ष कहा गया है), प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की बाबत इस अधिनियम के अधीन संगणित कुल आय, उसके बही लाभ के तीस प्रतिशत से कम है तो सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कर से प्रभार्य ऐसे निर्धारिती की कुल आय ऐसे बही लाभ के तीस प्रतिशत के बराबर राशि समझी जाएगी।
(2) प्रत्येक निर्धारिती, जो कंपनी हो, इस धारा के प्रयोजनों के लिए सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए अपना लाभ और हानि लेखा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की छठी अनुसूची के भाग 2 और 313 के उपबंधों के अनुसार तैयार करेगा :
परन्तु लाभ और हानि लेखा तैयार करते समय अवक्षयण उसी पद्धति और दर पर परिकलित किया जाएगा जिसे अपनी साधारण वार्षिक बैठक में कंपनी के समक्ष रखे लाभ और हानि लेखा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 210 के उपबंधों के अनुसार तैयार करने के प्रयोजनों के लिए अवक्षयण परिकलित करने के लिए अपनार्इ जाती है :
परन्तु यह और कि जहां कंपनी ने कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन वित्तीय वर्ष अपनाया है या अपनाती है जो अधिनियम के अधीन पूर्ववर्ष से भिन्न है तो अवक्षयण के परिकलन के लिए पद्धति और दर उसी पद्धति और दर के समरूप होगी जो सुसंगत पूर्ववर्ष में आने वाले ऐसे वित्तीय वर्ष के लिए या उसके भाग के लिए अवक्षयण परिकलित करने के लिए अपनार्इ गर्इ है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए 'बही लाभ' से वह शुद्ध लाभ अभिप्रेत है जो उपधारा (2) के अधीन तैयार सुसंगत पूर्ववर्ष के लाभ और हानि लेखा में दर्शाया गया है; जिसमें निम्नलिखित रकम जोड़ दी गर्इ हो–
(क) संदत्त या संदेय आय-कर राशि, और उसके लिए व्यवस्था; या
(ख) किन्हीं आरक्षितियों में अग्रनीत राशियां, चाहे उन्हें कुछ भी कहें; या
(ग) अभिनिश्चित दायित्वों से भिन्न, दायित्व पूरे करने के लिए की गर्इ व्यवस्था के लिए अलग रखी गर्इ रकम या रकमें; या
(घ) समनुषंगी कंपनियों की हानियों के लिए व्यवस्था के रूप में रकम; या
(ड़) संदत्त या प्रस्तावित लाभांशों की राशि या राशियां; या
(च) किसी आय से संबंधित व्यय राशि या राशियां जिन्हें अध्याय 3 का कोर्इ उपबंध लागू होता है;
13क[(छ) किसी आस्ति के मूल्य में कमी के लिए उपबंध किए जाने के रूप में अलग रखी गर्इ रकम या रकमें,
यदि खंड (क) से (छ) में निर्दिष्ट कोर्इ रकम लाभ और हानि लेखा में विकलित की जाती है और उसमें से निम्नलिखित राशि घटा दी जाती है,–]
(i) किन्हीं आरक्षितियों या व्यवस्थाओं में से निकाली गर्इ रकम यदि ऐसी कोर्इ रकम लाभ और हानि लेखा में जमा की जाती है :
परन्तु जहां किसी पूर्ववर्ष में निर्धारिती को (सुसंगत पूर्ववर्ष सहित) यह धारा लागू होती है वहां 1 अप्रैल, 1997 से प्रारंभ होने वाले 14[किंतु 1 अप्रैल, 2001 से पूर्व समाप्त होने वाले] निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में सृजित आरक्षितियों या की गर्इ व्यवस्थाओं में से निकाली गर्इ रकम, बही लाभ में से तब तक कम नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसे वर्ष के बही लाभ में इस स्पष्टीकरण के अधीन उन आरक्षितियों या व्यवस्थाओं को न जोड़ दिया गया हो (जिनमें से उक्त रकम निकाली गर्इ थी) ; या
(ii) आय की रकम जिस पर अध्याय 3 का कोर्इ उपबंध लागू होता है यदि ऐसी कोर्इ रकम लाभ और हानि लेखा में जमा कर दी जाए; या
15[(iii) अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की राशि, लेखा बहियों के अनुसार इनमें से जो भी कम हो।
स्पष्टीकरण– इस खंड के प्रयोजनों के लिए–
(क) हानि के अंतर्गत अवक्षयण नहीं आएगा ;
(ख) इस खंड के उपबंध तब लागू नहीं होंगे, यदि अग्रनीत हानि या शेष अवक्षयण की राशि शून्य है; या]
(iv) विद्युत जनन या विद्युत जनन और वितरण के कारबार में से किसी औद्योगिक उपक्रम द्वारा प्राप्त लाभ-राशि; या
(v) 16[धारा 80झख की उपधारा (4) और उपधारा (5)] में निर्दिष्ट औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े राज्य या जिले में स्थित औद्योगिक उपक्रम द्वारा प्राप्त लाभ राशि, उन निर्धारण वर्षों के लिए ऐसा औद्योगिक उपक्रम 17[धारा 80झख की उपधारा (4) और उपधारा (5) के अधीन लाभ और अभिलाभ] की सौ प्रतिशत कटौती का दावा करने के लिए पात्र है; या
(vi) 18[धारा 80झख की उपधारा (4) के स्पष्टीकरण में दी गर्इ परिभाषा के अनुसार और उस उपधारा में दी गर्इ शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए] किसी मूलभूत सुविधा को विकसित करने, बनाए रखने और चलाने के कारबार से औद्योगिक उपक्रम द्वारा प्राप्त लाभ राशि; या
(vii) उस पूर्ववर्ष से जिसमें उक्त कंपनी रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन एक रुग्ण औद्योगिक कंपनी हो गर्इ है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले और उस निर्धारण वर्ष के साथ समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए जिसमें ऐसी कंपनी का सम्पूर्ण शुद्ध मूल्य संचित हानि के बराबर या उससे अधिक हो जाता है, रुग्ण औद्योगिक कंपनी की लाभ राशि।
स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "शुद्ध मूल्य" का वही अर्थ होगा जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक)19 में है; 20[या]
20[(viii) धारा 80जजग की, यथास्थिति, उपधारा (3) के खंड (क), (ख) या (ग) या उपधारा (3क), के अधीन संगणित और उस धारा की उपधारा (4) और (4क) में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन रहते हुए उस धारा के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ राशि;
(ix) धारा 80जजड़ की उपधारा (3) के अधीन संगणित उस धारा के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ राशि।]
(3) उपधारा (1) की किसी बात से धारा 32 की उपधारा (2), या धारा 32क की उपधारा (3) या धारा 72 की उपधारा (1) के खंड (ii) याधारा 73 या धारा 74 या धारा 74क की उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन पश्चात्वर्ती वर्ष या वर्षों में अग्रनीत की जाने वाली सुसंगत पूर्ववर्ष से संबंधित रकमों के अवधारण पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(4) इस धारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के अन्य सब उपबंध इस धारा में वर्णित हर निर्धारिती को जो कंपनी हो, लागू होंगे।]
11. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
12. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
13. कंपनी अधिनियम, 1956 की छठी अनुसूची के भाग 2 और 3 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट।
13क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1998 से निम्नलिखित के स्थान पर प्रतिस्थापित:
"यदि खंड(क) से (च) में निर्दिष्ट कोर्इ रकम लाभ और हानि लेखा में विकलित की जाती है और उसमें से निम्नलिखित राशि घटा दी जाती है,–"
14. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
15. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.1997 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (iii) और उसका स्पष्टीकरण इस प्रकार थे :
"(iii) अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की राशि, लेखा-बहियों के अनुसार इनमें से जो भी कम है।
स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए हानि में अवक्षयण शामिल नहीं होगा; या"
16. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से "धारा 80झक की उपधारा (2) के खंड (iv) के उपखंड (ख) या उपखंड (ग)" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
17. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से "धारा 80झक की उपधारा (5) के अधीन लाभ और अभिलाभ" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
18. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से "धारा 80झक की उपधारा (12) के अधीन और धारा 80झक की उपधारा (4क) में दी गर्इ शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
19. "शुद्ध मूल्य" की परिभाषा के लिए देखिए परिशिष्ट।
20. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।

