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धारा 9

लोक सेवक के साथ व्यक्तिगत प्रभाव के व्यायाम के लिए, संतुष्टि लेते हुए

धारा

धारा संख्या

9

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - अपराध और दंड

अधिनियम

भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम 1988

वर्ष

लोक सेवक के साथ व्यक्तिगत प्रभाव के व्यायाम के लिए, संतुष्टि लेते हुए

किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध

[किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध

9. (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किया गया है, वहां ऐसा संगठन जुर्माने से दंडनीय होगा, यदि ऐसे वाणिज्यिक संगठन से सहबद्ध कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को कोई अनुचित लाभ देता है या देने का वादा करता है, जिसका आशय यह है कि-

(क)   ऐसे वाणिज्यिक संगठन के लिए व्यवसाय प्राप्त करना या बनाए रखना; या
(ख)   ऐसे वाणिज्यिक संगठन के लिए कारोबार के संचालन में लाभ प्राप्त करना या बनाए रखना:
  बशर्ते कि वाणिज्यिक संगठन के लिए यह साबित करना बचाव होगा कि उसके पास ऐसे दिशानिर्देशों के अनुपालन में पर्याप्त प्रक्रियाएं हैं, जो उसके साथ सहबद्ध व्यक्तियों को ऐसा आचरण करने से रोकने के लिए निर्धारित की जा सकती हैं।

(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यक्ति के बारे में यह कहा जाता है कि उसने किसी लोक सेवक को कोई अनुचित लाभ दिया है या देने का वचन दिया है, यदि उसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उसने धारा 8 के अधीन अपराध किया है, चाहे ऐसे व्यक्ति पर ऐसे अपराध के लिए अभियोजन चलाया गया हो या नहीं।

(3) धारा 8 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—

(क)   "वाणिज्यिक संगठन" का अर्थ है -
(झ)   एक निकाय जो भारत में निगमित है और जो भारत में या भारत के बाहर कारोबार करता है;
(ii)   कोई अन्य निकाय जो भारत के बाहर निगमित है और जो भारत के किसी भाग में कारोबार या कारोबार का भाग चलाता है;
(iii)   भारत में गठित साझेदारी फर्म या व्यक्तियों का कोई संघ जो भारत में या भारत के बाहर कारोबार करता है; या
(iv)   कोई अन्य साझेदारी या व्यक्तियों का संघ जो भारत के बाहर गठित है और जो भारत के किसी भी भाग में व्यवसाय, या व्यवसाय का भाग चलाता है;
(ख)   "व्यवसाय" में व्यापार या पेशा या सेवा प्रदान करना शामिल है;
(ग)   किसी व्यक्ति को वाणिज्यिक संगठन से सहयुक्त कहा जाता है, यदि ऐसा व्यक्ति वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं प्रदान करता है, बिना किसी वादे के या कोई अनुचित लाभ दिए जाने के, जो उपधारा (1) के अधीन अपराध बनता है।

स्पष्टीकरण 1.- जिस हैसियत से कोई व्यक्ति वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं प्रदान करता है, उसका इस बात पर ध्यान दिए बिना कोई महत्व नहीं होगा कि ऐसा व्यक्ति ऐसे वाणिज्यिक संगठन का कर्मचारी या एजेंट या सहायक है।

स्पष्टीकरण 2.- वह व्यक्ति वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं प्रदान करने वाला व्यक्ति है या नहीं, इसका निर्धारण सभी सुसंगत परिस्थितियों के संदर्भ में किया जाएगा, न कि केवल ऐसे व्यक्ति और वाणिज्यिक संगठन के बीच संबंध की प्रकृति के संदर्भ में।

स्पष्टीकरण 3.- यदि व्यक्ति वाणिज्यिक संगठन का कर्मचारी है, तो जब तक विपरीत साबित न हो जाए, यह माना जाएगा कि ऐसा व्यक्ति ऐसा व्यक्ति है जिसने वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं प्रदान की हैं।

(4) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 7क, 8 और इस धारा के अधीन अपराध संज्ञेय होगा।

(5) केन्द्रीय सरकार, विभागों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से और वाणिज्यिक संगठनों से संबद्ध व्यक्तियों को किसी व्यक्ति, जो लोक सेवक है, को रिश्वत देने से रोकने के उद्देश्य से, ऐसे दिशानिर्देश निर्धारित करेगी, जिन्हें आवश्यक समझा जाए और जिन्हें ऐसे संगठनों द्वारा अनुपालन के लिए लागू किया जा सके । ]


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