आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 89

परिभाषाएँ

धारा

धारा संख्या

89

अध्याय शीर्षक

अधिनियम

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास योजना, 2024 [वित्त (सं. 2) अधिनियम 2024 द्वारा प्रस्तुत]

वर्ष

परिभाषाएँ

परिभाषाएं

परिभाषाएं।

89.(1) इस योजना में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,—

(क)   "अपीलकर्ता" का अर्थ है—
(i)   ऐसा व्यक्ति जिसके मामले में उसके द्वारा या आयकर प्राधिकारी द्वारा या दोनों द्वारा किसी अपीलीय मंच के समक्ष अपील या रिट याचिका या विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है और ऐसी अपील या याचिका विनिर्दिष्ट दिनांक को लंबित है; या
(ii)   ऐसा व्यक्ति जिसने आयकर अधिनियम की धारा 144ग के तहत विवाद समाधान पैनल के समक्ष अपनी आपत्तियां दायर की हैं और विवाद समाधान पैनल ने विनिर्दिष्ट दिनांक को या उससे पहले कोई निर्देश जारी नहीं किया है; या
(iii)   ऐसा व्यक्ति जिसके मामले में विवाद समाधान पैनल ने आयकर अधिनियम की धारा 144ग की उप-धारा (5) के तहत निर्देश जारी किया है और निर्धारण अधिकारी ने विनिर्दिष्ट दिनांक को या उससे पहले उस धारा की उप-धारा (13) के तहत निर्धारण पूरा नहीं किया है; या
(iv)   ऐसा व्यक्ति जिसने आयकर अधिनियम की धारा 264 के तहत पुनरीक्षण के लिए आवेदन दायर किया है और ऐसा आवेदन विनिर्दिष्ट दिनांक को लंबित है;
(ख)   "अपीलीय मंच" का अर्थ है उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय या आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण या आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयुक्त (अपील), जैसा भी मामला हो;
(ग)   "घोषणाकर्ता" का अर्थ है वह व्यक्ति जो धारा 91 के तहत घोषणा दाखिल करता है;
(घ)   "घोषणा" का अर्थ है धारा 91 के तहत दाखिल की गई घोषणा;
(ड़)   "नामित प्राधिकारी" का अर्थ है इस योजना के प्रयोजनों के लिए प्रधान मुख्य आयुक्त द्वारा अधिसूचित अधिकारी, जो आयकर आयुक्त के पद से नीचे न हो;
(च)   "विवादित शुल्क" का अर्थ है आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित वह शुल्क जिसके संबंध में अपीलकर्ता द्वारा अपील दायर की गई है;
(छ)   "विवादित आय" का अर्थ है किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, कुल आय या उसका वह भाग जो विवादित कर से संबंधित है;
(ज)   "विवादित ब्याज" का अर्थ है आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत किसी मामले में निर्धारित ब्याज, जहां—
(i)   ऐसा ब्याज जो विवादित कर पर वसूला नहीं गया है या वसूलनीय नहीं है;
(ii)   ऐसा ब्याज जिसके संबंध में अपीलकर्ता द्वारा अपील दायर की गई है;
(i)   "विवादित जुर्माना" का अर्थ है आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत किसी मामले में निर्धारित जुर्माना, जहां—
(i)   ऐसा जुर्माना जो विवादित आय या विवादित कर, जैसा भी मामला हो, के संबंध में लगाया नहीं गया है या लगाया जाना योग्य नहीं है;
(ii)   ऐसा जुर्माना जिसके संबंध में अपीलकर्ता द्वारा अपील दायर की गई है;
(ञ)   "विवादित कर" का अर्थ है, किसी निर्धारण वर्ष या वित्तीय वर्ष के संबंध में, जैसा भी मामला हो, आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपीलकर्ता द्वारा देय आयकर जिसमें अधिभार और उपकर शामिल हैं (इस अध्याय में आगे इसे कर की राशि कहा गया है), जिसकी गणना निम्नानुसार की जाएगी:—
(क)   ऐसे मामले में जहां विनिर्दिष्ट दिनांक को अपीलीय फोरम के समक्ष कोई अपील, रिट याचिका या विशेष अनुमति याचिका लंबित है, वह कर की राशि जो अपीलकर्ता द्वारा देय होगी यदि ऐसी अपील या रिट याचिका या विशेष अनुमति याचिका उसके विरुद्ध निर्णीत की जानी हो;
(ख)   ऐसे मामले में जहां अपीलकर्ता द्वारा दायर आपत्ति आयकर अधिनियम की धारा 144ग के तहत विवाद निपटान समिति के समक्ष अभी भी लंबित है, निर्दिष्ट दिनांक पर, अपीलकर्ता द्वारा देय कर की राशि यदि विवाद निपटान समिति को मसौदा निर्णय में प्रस्तावित संशोधन की पुष्टि करनी थी;
(ग)   ऐसे मामले में जहां विवाद समाधान पैनल ने धारा 144ग की उप-धारा (5) के तहत कोई निर्देश जारी किया है, और निर्धारण अधिकारी ने विनिर्दिष्ट दिनांक को या उससे पहले उस धारा की उप-धारा (13) के तहत निर्धारण पूरा नहीं किया है, वह कर की राशि जो अपीलकर्ता द्वारा उक्त उप-धारा (13) के तहत निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किए जाने वाले निर्धारण आदेश के अनुसार देय होगी;
(घ)   ऐसे मामले में जहां आयकर अधिनियम की धारा 264 के तहत पुनरीक्षण के लिए आवेदन विनिर्दिष्ट दिनांक को लंबित है, वह कर की राशि जो अपीलकर्ता द्वारा देय होगी यदि ऐसा पुनरीक्षण आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता:
  बशर्तेकि ऐसे मामले में जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में विवाद आयकर अधिनियम की धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के तहत कर क्रेडिट में कमी, या उसके तहत गणना की गई किसी हानि या मूल्यह्रास से संबंधित है, अपीलकर्ता के पास विकल्प होगा कि वह या तो ऐसे कर क्रेडिट या हानि या मूल्यह्रास से संबंधित कर की राशि को विवादित कर की राशि में शामिल करे, या घटाए गए कर क्रेडिट या हानि या मूल्यह्रास को ऐसे तरीके से आगे ले जाए, जैसा निर्धारित किया जाए;
(ट)   "आयकर अधिनियम" का अर्थ है आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43);
(ठ)   "अंतिम दिनांक" का अर्थ है वह दिनांक जो केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित की जाए;
(ड)   "निर्धारित" का अर्थ है इस अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित;
(ढ)   "विनिर्दिष्ट दिनांक" का अर्थ है 22 जुलाई, 2024;
(ण)   "कर बकाया" का अर्थ है—
(i)   विवादित कर की कुल राशि, ऐसे विवादित कर पर वसूलनीय या वसूला गया ब्याज, और ऐसे विवादित कर पर लगाया जाने योग्य या लगाया गया जुर्माना; या
(ii)   विवादित ब्याज; या
(iii)   विवादित जुर्माना; या
(iv)   विवादित शुल्क

(2) यहां प्रयुक्त और अपरिभाषित किंतु आयकर अधिनियम में परिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में उन्हें क्रमशः दिए गए हैं।

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