आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80कख

सकल कुल आय में सम्मिलित आय के निर्देश में कटौतियों का किया जाना

धारा

धारा संख्या

80कख

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2016

सकल कुल आय में सम्मिलित आय के निर्देश में कटौतियों का किया जाना

सकल कुल आय में सम्मिलित आय के निर्देश में कटौतियों का किया जाना

8[सकल कुल आय में सम्मिलित आय के निर्देश में कटौतियों का किया जाना

980कख. जहां इस अध्याय में शामिल किसी धारा के अधीन 10[***] कोर्इ कटौती "ग–कतिपय आय की बाबत कटौतियां" शीर्ष के अधीन उस धारा में विनिर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय की बाबत, जो निर्धारिती की सकल कुल आय में सम्मिलित है, की जानी है या अनुज्ञात की जानी है, वहां उस धारा में किसी बात के होते हुए भी, उस धारा के अधीन कटौती की संगणना करने के प्रयोजन के लिए, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित उस प्रकृति की आय की रकम ही (इस अध्याय के अधीन कोर्इ कटौती करने से पहले) उस प्रकृति की आय की रकम समझी जाएगी जो निर्धारिती द्वारा प्राप्त या व्युत्पन्न होती है और जो उसकी सकल कुल आय में सम्मिलित है।]

 

8. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से अंत:स्थापित।

9. सुसंगत केस लॉज़ देखिए।

10. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से "(धारा 80ड के सिवाय)" शब्दों का लोप किया गया।

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

 

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

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