विनिर्दिष्ट क्षेत्र में होटलों और कन्वेंशन केन्द्रों के कारबार से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती
65क[विनिर्दिष्ट क्षेत्र में होटलों और कन्वेंशन केन्द्रों के कारबार से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती
80झघ. (1) जहां किसी निर्धारिती की सकल कुल आय में, किसी उपक्रम द्वारा उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी कारबार से (ऐसे कारबार को इसमें इसके पश्चात् पात्र कारबार कहा गया है) व्युत्पन्न कोर्इ लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं, वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए आरंभिक निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों के शत-प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।
(2) यह धारा ऐसे किसी उपक्रम को लागू होती है, जो–
(i) विनिर्दिष्ट क्षेत्र में अवस्थित होटल के कारबार में लगा हुआ है, यदि ऐसे होटल का निर्माण 1 अप्रैल, 2007 को आरंभ होने वाली और 65ख[31 जुलार्इ, 2010] को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय किया जाता है और उसने कार्य करना आरंभ कर दिया है या वह कार्य करना आरंभ करता है; या
(ii) विनिर्दिष्ट क्षेत्र में अवस्थित किसी कन्वेंशन केन्द्र का निर्माण करने, स्वामित्व धारण करने या प्रचालन के कारबार में लगा हुआ है, यदि ऐसे कन्वेंशन केन्द्र का निर्माण 1 अप्रैल, 2007 को आरंभ होने वाली और 65ग[31 जुलार्इ, 2010] को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय किया जाता है 65घ[; या]।
65ड़[(iii) विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल वाले विनिर्दिष्ट जिले में अवस्थित होटल के कारबार में लगा हुआ है, यदि ऐसे होटल का सन्निर्माण 1 अपै्रल, 2008 को आरंभ होने वाली और 31 मार्च, 2013 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय किया जाता है और उसने कार्य करना आरंभ कर दिया है या आरंभ कर देता है।]
(3) उपधारा (1) के अधीन कटौती केवल उस दशा में उपलब्ध होगी जब,–
(i) पात्र कारबार को पहले से विद्यमान किसी कारबार को विभाजित करके या पुनर्निर्मित करके नहीं बनाया गया है;
(ii) पात्र कारबार को, यथास्थिति, किसी होटल या कन्वेंशन केन्द्र के लिए पूर्व में प्रयुक्त भवन को नए कारबार में अंतरित करके नहीं बनाया गया है;
(iii) पात्र कारबार को किसी प्रयोजन के लिए पूर्व में प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार को अंतरण करके नहीं बनाया गया है।
स्पष्टीकरण–धारा 80झक की उपधारा (3) के स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के उपबंध इस उपधारा के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं;
(iv) निर्धारिती, आय की विवरणी के साथ ऐसे प्ररूप में और ऐसी विशिष्टियों को अंतर्विष्ट करते हुए, जो विहित की जाएं और धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित है, किसी लेखाकार द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित और सत्यापित संपरीक्षा की रिपोर्ट, यह प्रमाणित करते हुए देता है कि कटौती का दावा सही किया गया है।
(4) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपक्रम के लाभों और अभिलाभों के संबंध में निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में, अध्याय 6क में अंतर्विष्ट किसी अन्य धारा या धारा 10कक के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(5) धारा 80झक की उपधारा (5) और उपधारा (8) से उपधारा (11) में अंतर्विष्ट उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन पात्र कारबार को लागू होंगे।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) “कन्वेंशन केन्द्र” से विहित क्षेत्र का ऐसा भवन अभिप्रेत है, जिसमें ऐसे कन्वेंशन हाल हैं जिनका उपयोग सम्मेलन और सेमिनार आयोजित किए जाने के लिए किया जाता है जो उस आकार और संख्या में हों तथा उसमें ऐसी अन्य प्रसुविधाएं और सुख-सुविधाएं हों, जो विहित की जाएं;65च
(ख) “होटल” से केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा वर्गीकृत दो सितारा, तीन सितारा या चार सितारा प्रवर्ग का कोर्इ होटल अभिप्रेत है;
(ग) “आरंभिक निर्धारण वर्ष” से,–
(i) किसी होटल की दशा में, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें होटल कारबार कार्य करना आरंभ करता है, सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है;
(ii) किसी कन्वेंशन केन्द्र की दशा में, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें कन्वेंशन केन्द्र वाणिज्यिक आधार पर प्रचालन करना आरंभ करता है, सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है;
(घ) ‘विनिर्दिष्ट क्षेत्र’ से, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र और फरीदाबाद, गुड़गांव, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के जिले अभिप्रेत हैं।]
65छ[(ड़) ‘‘विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल वाले विनिर्दिष्ट जिले’’ से नीचे दी गर्इ सारणी के स्तंभ (3) में तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट राज्यों के, उक्त सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट, जिले अभिप्रेत हैं :-
सारणी
क्र. सं. |
जिले का नाम |
राज्य का नाम |
(1) |
(2) |
(3) |
1. |
आगरा |
उत्तर प्रदेश |
2. |
जलगांव |
महाराष्ट्र |
3. |
औरंगाबाद |
महाराष्ट्र |
4. |
कांचीपुरम |
तमिलनाडु |
5. |
पुरी |
उड़ीसा |
6. |
भरतपुर |
राजस्थान |
7. |
छतरपुर |
मध्य प्रदेश |
8. |
तंजावुर |
तमिलनाडु |
9. |
बेलारी |
कर्नाटक |
10. |
दक्षिण 24 परगना (2001 की जनगणना के आधार पर कोलकाता नगर क्षेत्र के भीतर आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर) |
पश्चिमी बंगाल |
11. |
चमोली |
उत्तराखंड |
12. |
रायसेन |
मध्य प्रदेश |
13. |
गया |
बिहार |
14. |
भोपाल |
मध्य प्रदेश |
15. |
पंचमहल |
गुजरात |
16. |
कामरूप |
असम |
17. |
गोलपाड़ा |
असम |
18. |
नागांव |
असम |
19. |
उत्तरी गोवा |
गोवा |
20. |
दक्षिणी गोवा |
गोवा |
21. |
दार्जिलिंग |
पश्चिमी बंगाल |
22. |
नीलगिरी |
तमिलनाडु] |
65क. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।
65ख. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से “31 मार्च, 2010” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
65ग. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से “31 मार्च, 2010” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
65घ. धारा 80झघ की उपधारा (2) का खंड (iii) अंत:स्थापित किए जाने को देखते हुए “या” शब्द अंत:स्थापित किया जाना चाहिए।
65ड़. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2009 से अंत:स्थापित।
65च. नियम 18घड. और प्ररूप 10गगखखक देखिए। नियम 12 में उपबंध है कि आय की विवरणी के साथ कोर्इ दस्तावेज या किसी लेखा या फार्म की प्रति या संपरीक्षा की रिपोर्ट अधिनियम के किसी भी उपबंध के अधीन संलग्न करना अपेक्षित नहीं है।
65छ. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2009 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

