आदि धर्मार्थ वस्तुओं, के साथ कंपनियों का गठन
धर्मार्थ उद्देश्यों के साथ कंपनियों का गठन, आदि।
8.(1) जहां यह केन्द्रीय सरकार के समाधानप्रद रूप में साबित हो जाता है कि कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का संघ, जो इस अधिनियम के अधीन लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत होने के लिए प्रस्तावित है -
| (क) | उसके उद्देश्य वाणिज्य, कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, अनुसंधान, समाज कल्याण, धर्म, दान, पर्यावरण संरक्षण या ऐसे किसी अन्य उद्देश्य को बढ़ावा देना है; | |
| (ख) | वह अपने लाभ, यदि कोई हो, या अन्य आय को अपने उद्देश्यों को बढ़ावा देने में लगाने का इरादा रखता है; और | |
| (ग) | अपने सदस्यों को किसी लाभांश के भुगतान को प्रतिषिद्ध करने का इरादा रखता है, |
वहां केन्द्रीय सरकार, ऐसी रीति से जारी की गई अनुज्ञप्ति द्वारा, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, और ऐसी शर्तों पर, जो वह उचित समझे, उस व्यक्ति या व्यक्तियों के संघ को, उसके नाम में, यथास्थिति, "लिमिटेड" या "प्राइवेट लिमिटेड" शब्द जोड़े बिना, इस धारा के अधीन लिमिटेड कंपनी के रूप में रजिस्ट्रीकृत होने दे सकेगी, और तब रजिस्ट्रार, विहित प्ररूप में आवेदन करने पर, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के संघ को इस धारा के अधीन कंपनी के रूप में पंजीकृत करेगा।
(2) इस धारा के तहत पंजीकृत कंपनी को सभी विशेषाधिकार मिलेंगे और वह लिमिटेड कंपनियों के सभी दायित्वों के अधीन होगी।
(3) एक फर्म इस धारा के तहत पंजीकृत कंपनी की सदस्य हो सकती है।
(4) ( i ) इस धारा के अधीन पंजीकृत कोई कंपनी केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना अपने ज्ञापन या अनुच्छेदों के उपबंधों में परिवर्तन नहीं करेगी।
( ii ) इस धारा के तहत पंजीकृत कंपनी निर्धारित शर्तों का पालन करने के बाद ही खुद को किसी अन्य तरह की कंपनी में बदल सकती है .
(5) जहां केन्द्रीय सरकार के समाधानप्रद रूप में यह साबित हो जाता है कि इस अधिनियम के अधीन या किसी पूर्ववर्ती कम्पनी विधि के अधीन पंजीकृत कोई लिमिटेड कम्पनी उपधारा (1) के खण्ड ( क ) में विनिर्दिष्ट किसी उद्देश्य से तथा उस उपधारा के खण्ड ( ख ) और ( ग ) में क्रमश: उल्लिखित निर्बन्धनों और प्रतिषेधों के साथ बनाई गई है, वहां वह अनुज्ञप्ति द्वारा कम्पनी को इस धारा के अधीन ऐसी शर्तों के अधीन, जिन्हें केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, पंजीकृत करने की अनुमति दे सकता है और उसके नाम में से, यथास्थिति, "लिमिटेड" या "प्राइवेट लिमिटेड" शब्द हटाकर उसका नाम परिवर्तित करने की अनुमति दे सकता है और तत्पश्चात् पंजीयक, निर्धारित प्ररूप में आवेदन करने पर, ऐसी कम्पनी को इस धारा के अधीन पंजीकृत करेगा और इस धारा के सभी उपबन्ध उस कम्पनी पर लागू होंगे।
(6) केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, इस धारा के अधीन पंजीकृत किसी कंपनी को दिए गए लाइसेंस को रद्द कर सकेगी यदि कंपनी इस धारा की किसी अपेक्षा का या उन शर्तों में से किसी का उल्लंघन करती है जिनके अधीन लाइसेंस जारी किया जाता है या कंपनी के कार्य कपटपूर्ण ढंग से या कंपनी के उद्देश्यों का उल्लंघन करने वाले या लोकहित के प्रतिकूल ढंग से संचालित किए जाते हैं, और इस अधिनियम के अधीन कंपनी के विरुद्ध किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कंपनी को अपनी स्थिति परिवर्तित करने और अपने नाम में, यथास्थिति, "लिमिटेड" या "प्राइवेट लिमिटेड" शब्द जोड़ने के लिए निर्देश दे सकेगी और तत्पश्चात रजिस्ट्रार, उपधारा (7) के अधीन की जाने वाली किसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करने पर, कंपनी को तदनुसार पंजीकृत करेगाः
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि कंपनी को सुनवाई का उचित अवसर न दे दिया जाए:
आगे प्रदान किया गया कि ऐसे प्रत्येक आदेश की एक प्रति पंजीयक को दी जाएगी।
(7) जहां उप-धारा (6) के अधीन कोई लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है, वहां केंद्रीय सरकार, यदि उसका समाधान हो जाता है कि यह लोकहित में आवश्यक है, तो आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकेगी कि कंपनी को इस अधिनियम के अधीन समाप्त कर दिया जाए या इस धारा के अधीन पंजीकृत किसी अन्य कंपनी के साथ समामेलित कर दिया जाए:
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि कंपनी को सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया जाता है।
(8) जहां उप-धारा (6) के तहत लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है और जहां केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में यह आवश्यक है कि इस धारा के अधीन पंजीकृत कंपनी को इस धारा के अधीन पंजीकृत और समान उद्देश्य वाली किसी अन्य कंपनी के साथ समामेलित कर दिया जाए, वहां इस अधिनियम में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा ऐसे समामेलन के लिए उपबंध कर सकेगी जिससे एक एकल कंपनी बनेगी, जिसमें ऐसे गठन, गुण, शक्तियां, अधिकार, हित, प्राधिकार और विशेषाधिकार होंगे तथा ऐसे दायित्व, कर्तव्य और दायित्व होंगे, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं।
(9) यदि इस धारा के तहत पंजीकृत किसी कंपनी के समापन या विघटन पर, उसके ऋणों और देनदारियों की संतुष्टि के बाद कोई परिसंपत्ति बचती है, तो उन्हें इस धारा के तहत पंजीकृत और समान उद्देश्यों वाली किसी अन्य कंपनी को, ट्रिब्यूनल द्वारा लगाई गई शर्तों के अधीन, स्थानांतरित किया जा सकता है, या बेचा जा सकता है और उसकी आय [दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 की धारा 224 के तहत गठित दिवाला और दिवालियापन निधि] में जमा की जा सकती है।
(10) इस धारा के तहत पंजीकृत एक कंपनी केवल इस धारा के तहत पंजीकृत और समान उद्देश्यों वाली किसी अन्य कंपनी के साथ विलय करेगी।
(11) यदि कोई कंपनी इस धारा में अधिकथित किसी अपेक्षा का अनुपालन करने में कोई चूक करती है, तो कंपनी, इस धारा के उपबंधों के अधीन किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जुर्माने से दण्डनीय होगी, जो दस लाख रुपए से कम नहीं होगा, किन्तु एक करोड़ रुपए तक हो सकेगा और कंपनी के निदेशक और प्रत्येक अधिकारी, जो चूक करता है, जुर्माने से दण्डनीय [ *** ] होगा, जो पच्चीस हजार रुपए से कम नहीं होगा, किन्तु [ पच्चीस लाख रुपए ] तक हो सकता है:
बशर्ते कि जब यह साबित हो जाए कि कंपनी के कार्य धोखाधड़ी से संचालित किए गए थे, तो चूक करने वाला प्रत्येक अधिकारी धारा 447 के तहत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा।

