धारा 195 का संशोधन
धारा 195 का संशोधन
77. आय-कर अधिनियम की धारा 195 में, -
(क) उपधारा (1) में, -
(i) "किसी ब्याज का" शब्दों के स्थान पर, "किसी ब्याज का जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज नहीं हैं]" कोष्ठक शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;
(ii) स्पष्टीकरण को उसके स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार संख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा और 1 अप्रैल, 1962 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् : -
"स्पष्टीकरण 2-शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि उपधारा (1) का अनुपालन करने और उसके अधीन कटौती करने की बाध्यता, निवासी या अनिवासी सभी व्यक्तियों, को लागू होगी और सदैव से लागू हुई समझी जाएगी तथा विस्तारित होगी और सदैव विस्तारित की गई समझी जाएगी, चाहे अनिवासी व्यक्ति का-
(i) भारत में कोई निवास या कारबार का स्थान या कारोबारी संबंध ; या
(ii) भारत में किसी प्रकार की किसी रीति में कोई अन्य उपस्थिति,
हो या नहीं ।"
(ख) उपधारा (6) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा, 1 जुलाई, 2012 से अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् : -
"(7) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्तियों या मामलों का कोई वर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जहां किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है, या किसी विदेशी कंपनी को किसी राशि का, चाहे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य हो या नहीं, संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति निर्धारण अधिकारी को साधारण या विशेष आदेश द्वारा प्रभार्य राशि के समुचित अनुपात का अवधारण करने के लिए आवेदन करेगा और ऐसे अवधारण पर उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती, राशि के उस अनुपात पर की जाएगी, जो इस प्रकार प्रभार्य है ।"।
[वित्त अधिनियम, 2012]

