आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 6

भारत में निवास

धारा

धारा संख्या

6

अध्याय शीर्षक

अध्याय II - कार्यभार के आधार

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

भारत में निवास

भारत में निवास

भारत में निवास

396. इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए,–

(1)  कोर्इ व्यक्ति किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी तब कहा जाता है जबकि वह,–

(क)  उस वर्ष में कुल मिलाकर एक सौ बयासी या अधिक दिनों की कालावधि या कालावधियों तक भारत में रहा हो; या

(ख)  40[***]

(ग)  उस वर्ष के पूर्ववर्ती चार वर्षों के भीतर कुल मिलाकर तीन सौ पैंसठ या अधिक दिनों की कालावधि या कालावधियों तक भारत में होते हुए उस वर्ष कुल मिलाकर साठ या अधिक दिनों की कालावधि या कालावधियों तक भारत में रहा हो।

41[41क[स्पष्टीकरण 1.]–ऐसे व्यष्टि की दशा में,–

(क)  जो भारत का नागरिक है, 42[जो वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 (1958 का 44) की धारा 3 के खंड (18) में यथापरिभाषित भारतीय पोत43 के कर्मीदल के सदस्य के रूप में या] भारत से बाहर नियोजन के प्रयोजनों के लिए किसी पूर्ववर्ष में भारत छोड़ देता है, उपखंड (ग) के उपबंध उस वर्ष के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें ‘‘साठ दिन’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘एक सौ बयासी दिन’’ शब्द प्रतिस्थापित किए गए थे;

(ख)  जो भारत का नागरिक है या धारा 115ग के खंड(ड़) के स्पष्टीकरण के अर्थ में भारतीय मूल का व्यक्ति है, जो भारत के बाहर रहते हुए किसी पूर्ववर्ष में भारत में आता है, उपखंड (ग) के उपबंध उस वर्ष के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें आने वाले ‘‘साठ दिन’’ शब्दों के स्थान पर “एक सौ 44[बयासी] दिन” प्रतिस्थापित किए गए थे।]

44क[स्पष्टीकरण 2 - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यष्टि की दशा में, जो भारत का नागरिक है और भारत से विदेश को जाने वाले पोत के कर्मीदल का सदस्य है, ऐसी समुद्र यात्रा के संबंध में, भारत में रहने की कालावधि या कालावधियां ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अध्यधीन अवधारित की जाएंगी, जो विहित की जाएं।]

(2)  कोर्इ हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब, फर्म या अन्य व्यक्तियों का संगम हर दशा में किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी कहा जाता है सिवाय उस दशा में जिसमें उस वर्ष के दौरान उसके कामकाज45 का नियंत्रण और प्रबंध45 संपूर्णत:45 भारत के बाहर स्थित रहा है।

(3)  कोर्इ कंपनी किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी, तब कही जाती है, यदि,–

(i)  वह एक भारतीय कंपनी है; या

(ii)  उस वर्ष के दौरान उसके कामकाज45 का नियंत्रण और प्रबंध45 संपूर्णत:45 भारत में स्थित रहा है।

                  

वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2016 से धारा 6 के विद्यमान खंड (3) के स्थान पर निम्नलिखित खंड (3) रखा जाएगा :

(3)  कोर्इ कंपनी किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी कही जाएगी, यदि,–

(i)  वह एक भारतीय कंपनी है; या

(ii)  उस वर्ष में उसके प्रभावी प्रबंध का स्थान भारत में रहा है।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए ‘‘प्रभावी प्रबंध का स्थान’’ से ऐसा स्थान अभिप्रेत है जहां किसी इकार्इ के कारबार के संपूर्ण संचालन के लिए आवश्यक प्रमुख प्रबंध संबंधी और वाणिज्यिक विनिश्चय, सारवान् रूप में किए जाते हैं।

                  

(4)  हर अन्य व्यक्ति प्रत्येक दशा में किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी कहा जाता है सिवाय उस दशा के, जिसमें उस वर्ष के दौरान उसके कामकाज का नियंत्रण और प्रबंध संपूर्णत: भारत के बाहर स्थित रहा है।

(5)  यदि कोर्इ व्यक्ति आय के किसी स्रोत की बाबत निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में भारत में निवासी है तो वह अपनी आय के स्रोतों में से हर एक की बाबत निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में भारत में निवासी समझा जाएगा।

46[(6)  किसी व्यक्ति के बारे में यह कि वह किसी पूर्ववर्ष में ‘‘साधारणतया निवासी नहीं है’’ तब कहा जाता है जबकि वह व्यक्ति,–

(क)  ऐसा व्यष्टि है जो उस वर्ष के पूर्ववर्ती दस पूर्ववर्षों में से नौ वर्षों में भारत में निवासी न रहा हो या उस वर्ष के पूर्ववर्ती सात पूर्ववर्षों के दौरान ऐसी कालावधि तक या ऐसी कालावधियों तक जो कुल मिलाकर सात सौ उनतीस दिन या उससे कम की हो, भारत में न रहा हो; या

(ख)  ऐसा हिन्दू अविभक्त कुटुंब है जिसका कर्ता उस वर्ष के पूर्ववर्ती दस पूर्ववर्षों में से नौ पूर्ववर्षों में भारत में निवासी न रहा हो या उस वर्ष के पूर्ववर्ती सात पूर्ववर्षों के दौरान ऐसी कालावधि तक या ऐसी कालावधियों तक, जो कुल मिलाकर सात सौ उनतीस दिन या उससे कम हो, भारत में न रहा हो।]

 

39.  सुसंगत केस लाज़ देखिए।

40.  वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से लोप किया गया।

41.  प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से प्रतिस्थापित। मूल स्पष्टीकरण वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से यथा अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से यथा संशोधित किया गया था।

41क. वित अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2015 से विद्यमान स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्याकित किया गया ।

42.  वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।

43.  वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 की धारा 3 के खंड (18) में ‘‘भारतीय पोत’’ को निम्नानुसार परिभाषित किया गया है :

‘(18)  “भारतीय पोत” से इस अधिनियम के अधीन पोत के रूप में रजिस्ट्रीकृत पोत अभिप्रेत है और इसमें इस अधिनियम के प्रारंभ पर भारत के किसी भाग में रजिस्ट्रीकृत कोर्इ ऐसा पोत सम्मिलित है जिसे धारा 22 की उपधारा (2) के परन्तुक के अधीन भारतीय पोत के रूप में मान्यता प्राप्त है;’

44.  वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से ‘‘पचास’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।

44क. वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2015 से अंत:स्थापित ।

45.  ‘‘कामकाज’’, ‘‘नियंत्रण और प्रबंध’’ और ‘‘संपूर्णत:’’ पदों/शब्दों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।

46.  वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (6) इस प्रकार था:

‘(6)  किसी व्यक्ति के बारे में यह कि वह किसी पूर्ववर्ष में ‘‘साधारणतया निवासी नहीं है’’ तब कहा जाता है जबकि वह व्यक्ति,–

(क)  ऐसा व्यक्ति है जो उस वर्ष के पूर्ववर्ती दस पूर्ववर्षों में से नौ में भारत में निवासी न रहा हो या उस वर्ष के पूर्ववर्ती सात पूर्ववर्षों के दौरान ऐसी कालावधि तक अथवा ऐसी कालावधियों तक जो कुल मिलाकर सात सौ तीस दिन या उससे अधिक की हो, भारत में न रहा हो; या

(ख)  ऐसा हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है जिसका कर्ता उस वर्ष के पूर्ववर्ती दस पूर्ववर्षों में से नौ में भारत में निवासी न रहा हो या उस वर्ष के पूर्ववर्ती सात पूर्ववर्षों के दौरान किसी कालावधि तक या ऐसी कालावधियों तक जो कुल मिलाकर सात सौ तीस दिन या उससे अधिक हो, भारत में न रहा हो।’

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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