इनकार के खिलाफ पंजीकरण और अपील का इनकार
पंजीकरण से इनकार और इनकार के खिलाफ अपील I
58.(1) यदि शेयरों द्वारा सीमित कोई निजी कंपनी, चाहे कंपनी के लेखों के तहत या अन्यथा किसी भी शक्ति के अनुसरण में, कंपनी में किसी सदस्य के किसी भी प्रतिभूति या हित के अधिकार के हस्तांतरण, या कानून के संचालन द्वारा संचरण को पंजीकृत करने से इनकार करती है, तो वह उस तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर, जिस दिन हस्तांतरण का साधन, या इस तरह के संचरण की सूचना, जैसा भी मामला हो, कंपनी को दी गई थी, हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती को या इस तरह के संचरण की सूचना देने वाले व्यक्ति को, जैसा भी मामला हो, ऐसे इनकार के कारणों को बताते हुए इनकार की सूचना भेजेगी।
(2) उपधारा (1) पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी सार्वजनिक कंपनी में किसी सदस्य की प्रतिभूतियां या अन्य हित स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय होंगे:
बशर्ते कि प्रतिभूतियों के हस्तांतरण के संबंध में दो या अधिक व्यक्तियों के बीच कोई अनुबंध या व्यवस्था अनुबंध के रूप में प्रवर्तनीय होगी।
(3) हस्तांतरिती नोटिस की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर या यदि कंपनी द्वारा कोई नोटिस नहीं भेजा गया है, तो उस तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर, जिसको हस्तांतरण का साधन या प्रेषण की सूचना, जैसा भी मामला हो, कंपनी को दी गई थी, इनकार के खिलाफ न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है।
(4) यदि कोई सार्वजनिक कंपनी, पर्याप्त कारण के बिना , उस तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर प्रतिभूतियों के हस्तांतरण को पंजीकृत करने से इनकार करती है, जिस तारीख को हस्तांतरण के साधन या संचरण की सूचना, जैसा भी मामला हो, कंपनी को दी जाती है, तो हस्तांतरिती, ऐसे इनकार के साठ दिनों की अवधि के भीतर या जहां कंपनी से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है, हस्तांतरण के साधन या संचरण की सूचना की डिलीवरी के नब्बे दिनों के भीतर, न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है।
(5) न्यायाधिकरण, उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन की गई अपील पर विचार करते समय, पक्षकारों को सुनने के पश्चात, अपील को खारिज कर सकता है, या आदेश द्वारा-
| (क) | निर्देश दे सकेगा कि कंपनी द्वारा स्थानांतरण या संप्रेषण पंजीकृत किया जाएगा और कंपनी आदेश की प्राप्ति के दस दिन की अवधि के भीतर ऐसे आदेश का अनुपालन करेगी; या | |
| (ख) | रजिस्टर में सुधार करने का निर्देश दें तथा कंपनी को यह भी निर्देश दें कि यदि किसी पीड़ित पक्ष को कोई क्षति हुई हो तो वह उसकी भरपाई करे। |
(6) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन न्यायाधिकरण के आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे कम से कम एक वर्ष के कारावास से, किन्तु तीन वर्ष तक के कारावास से, तथा कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने से, किन्तु पांच लाख रुपये तक के जुर्माने से, दण्डित किया जाएगा।

