आदि सम्मन के संबंध में अधिकारियों की शक्तियों, दस्तावेजों का उत्पादन और सबूत देने के लिए,
समन जारी करने, दस्तावेज प्रस्तुत करने और साक्ष्य देने आदि के संबंध में प्राधिकारियों की शक्तियां।
50.(1) धारा 13 के प्रयोजनों के लिए निदेशक को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो निम्नलिखित विषयों के संबंध में किसी वाद की सुनवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात:-
| (क) | खोज और निरीक्षण; | |
| (ख) | किसी भी व्यक्ति, जिसमें [रिपोर्टिंग इकाई] का कोई अधिकारी भी शामिल है, की उपस्थिति सुनिश्चित करना और शपथ पर उसकी जांच करना; | |
| (ग) | अभिलेखों को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना; | |
| (घ) | शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना; | |
| (ड़) | साक्षियों और दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करना; और | |
| (च) | कोई अन्य विषय जो निर्धारित किया जा सकता है। |
(2) निदेशक, अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक या सहायक निदेशक को किसी भी व्यक्ति को बुलाने की शक्ति होगी, जिसकी उपस्थिति वह आवश्यक समझे, चाहे इस अधिनियम के तहत किसी जांच या कार्यवाही के दौरान साक्ष्य देने या कोई रिकॉर्ड पेश करने के लिए।
(3) इस प्रकार बुलाए गए सभी व्यक्ति, जैसा कि अधिकारी निर्देश दे, स्वयं या प्राधिकृत एजेंटों के माध्यम से उपस्थित होने के लिए बाध्य होंगे और जिस विषय के संबंध में उनसे पूछताछ की जा रही हो, उस पर सत्य बताने या बयान देने के लिए बाध्य होंगे तथा ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बाध्य होंगे, जिनकी आवश्यकता हो।
(4) उपधारा (2) और (3) के अधीन प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी।
(5) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किसी नियम के अधीन रहते हुए, उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई अधिकारी इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में अपने समक्ष पेश किए गए किसी अभिलेख को, जितनी वह ठीक समझे, परिबद्ध कर सकेगा और ऐसी अवधि के लिए अपनी अभिरक्षा में रख सकेगा:
बशर्ते कि सहायक निदेशक या उप निदेशक नहीं करेगा-
| (क) | ऐसा करने के कारणों को दर्ज किए बिना किसी भी रिकॉर्ड को जब्त करना; या | |
| (ख) | [संयुक्त निदेशक] की पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए बिना, ऐसे किसी भी अभिलेख को तीन महीने से अधिक अवधि के लिए अपनी अभिरक्षा में नहीं रखेगा। |

