धारा 2 में संशोधन
अध्याय 3
प्रत्यक्ष कर
आय-कर
धारा 2 का संशोधन
3. आय-कर अधिनियम की धारा 2 में, -
(i) खंड (14) के अंत में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा और 1 अप्रैल, 1962 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् :-
'स्पष्टीकरण -शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "संपत्ति" के अंतर्गत किसी भारतीय कंपनी में या उसके संबंध में कोई अधिकार, जिनमें प्रबंध या नियंत्रण के अधिकार अथवा किसी भी प्रकार के कोई अन्य अधिकार हैं, सम्मिलित हैं और सदैव से सम्मिलित समझे जाएंगे ; ';
(ii) खंड (16) में, "या आयुक्त" शब्दों के पश्चात्, "या आय-कर निदेशक" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे और 1 अप्रैल, 1988 से अंतःस्थापित किए गए समझे जाएंगे;
(iii) खंड (19कक) के उपखंड (iv) में, "आनुपातिक आधार पर" शब्दों के स्थान पर, "उस दशा के सिवाय आनुपातिक आधार पर, जहां पारिणामिक कंपनी स्वयं अविलयित कंपनी की एक शेयरधारक है," शब्द 1 अप्रैल, 2013 से रखे जाएंगे;
(iv) खंड 24 में, उपखंड (xv) के पश्चात्, निम्नलिखित उपखंड 1 अप्रैल, 2013 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :--
"(xvi) शेयरों के निर्गमन के लिए प्राप्त ऐसा कोई प्रतिफल, जो धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (viiख) में निर्दिष्ट शेयरों के उचित बाजार मूल्य से अधिक है ;";
(v) खंड (47) में, स्पष्टीकरण को उसके स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार संख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा और 1 अप्रैल, 1962 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् : -
'स्पष्टीकरण 2-शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "अंतरण" के अंतर्गत किसी करार द्वारा (चाहे वह भारत में किया गया हो या भारत के बाहर) या अन्यथा प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः, आत्यंतिक रूप से या सशर्त, स्वैच्छिक रूप से या अस्वैच्छिक रूप से, किसी आस्ति या उसमें के किसी हित का व्ययन या त्यजन या किसी आस्ति में, किसी भी रीति में, किसी हित का सृजन, इस बात के होते हुए भी सम्मिलित है और सदैव से सम्मिलित समझा जाएगा कि अधिकारों के ऐसे अंतरण का उल्लेख इस रूप में किया गया है कि वह भारत के बाहर रजिस्ट्रीकृत या निगमित कंपनी के किसी शेयर या शेयरों का अंतरण करके किया गया है या उस पर निर्भर है या उससे उद्भूत हुआ है ; '।
[वित्त अधिनियम, 2012]

