आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 297

निरसन और बचतें

धारा

धारा संख्या

297

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXIII - विविध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2004

निरसन और बचतें

निरसन और बचतें

निरसन और व्यावृत्तियां

297. (1) भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) एतद्द्वारा निरसित किया जाता है।

(2) भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 कर 11) के (जिसे इसमें इसके पश्चात् निरसित अधिनियम कहा गया है) निरसित होते हुए भी–

(क) जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व आय की विवरणी दाखिल की गर्इ है, वहां उस वर्ष के लिए उस व्यक्ति के 45निर्धारण के लिए कार्यवाहियां ऐसे की जा सकेगी और जारी रखी जा सकेंगी मानो यह अधिनियम पारित ही न हुआ हो;

(ख) जहां 31 मार्च, 1962 को समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर वर्ष के लिए किसी व्यक्ति द्वारा आय की विवरणी निरसित अधिनियम की धारा 34 के अधीन सूचना के अनुसरण में दाखिल किए जाने से अन्यथा रूप में, इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् दाखिल की गर्इ है, वहां उस वर्ष के लिए उस व्यक्ति का निर्धारण इस अधिनियम में दी गर्इ प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा;

(ग) किसी आय-कर प्राधिकारी, अपील अधिकरण या किसी न्यायालय के समक्ष अपील, निर्देश या पुनरीक्षण के तौर पर इस अधिनियम के प्रारम्भ पर लम्बित कोर्इ कार्यवाही, ऐसे जारी रखी जाएगी और निपटार्इ जाएगी मानो यह अधिनियम पारित ही न हुआ हो;

(घ) जहां 31 मार्च, 1940 को समाप्त होने वाले वर्ष के पश्चात् किसी निर्धारण वर्ष की बाबत--

(i) निरसित अधिनियम की धारा 34 के अधीन कोर्इ सूचना इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व निकाली गर्इ थी वहां ऐसी सूचना के अनुसरण में की गर्इ कार्यवाहियों को ऐसे जारी रखा जा सकेगा और मानो यह अधिनियम पारित ही न हुआ हो;

(ii) कर से प्रभार्य कोर्इ आय ऐसे अर्थ में निर्धारण से छूट गर्इ थी जैसा उस अभिव्यक्ति का अर्थ धारा 147 में है और ऐसी किसी आय की बाबत निरसित अधिनियम की धारा 34 के अधीन कोर्इ भी कार्यवाहियां इस अधिनियम के प्रारम्भ पर लंबित नहीं है, वहां उस निर्धारण वर्ष की बाबत धारा 148 के अधीन सूचना धारा 149 या धारा 150 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए निकाली जा सकेगी और इस अधिनियम के सब उपबंध तदनुसार लागू होंगे46;

(ड़) 47[इस उपधारा के खंड (छ) और खण्ड (ञ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए] निरसित अधिनियम की धारा 23क, उस निर्धारण वर्ष के लिए जो 31मार्च, 1962 को समाप्त होता है या किसी पूर्वत्तर वर्ष के लिए किसी कंपनी या उसके शेयरधारकों के निर्धारण के संबंध में प्रभावी बनी रहेगी तथा निरसित अधिनियम के उपबंध ऐसे निर्धारण से पैदा होने वाले सब मामलों को इस प्रकार पूरी तरह से और कारगर रीति से लागू होंगे मानो यह अधिनियम पारित ही न हुआ हो;

(च) 1 अप्रैल, 1962 के पूर्व पूरे किए गए किसी निर्धारण की बाबत शास्ति के अधिरोपण के लिए कोर्इ कार्यवाही आरम्भ की जा सकेगी और इस प्रकार अधिरोपित की जा सकेगी मानो यह अधिनियम पारित ही न हुआ हो;

(छ) 31 मार्च, 1962 को समाप्त होने वाले वर्ष या किसी पूर्वतर वर्ष के लिए, किसी निर्धारण की बाबत जो 1 अप्रैल, 1962 को या उसके पश्चात् पूरा किया गया हो, शास्ति अधिरोपण के लिए कोर्इ कार्यवाही आरम्भ की जा सकेगी और ऐसी कोर्इ आस्ति इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित की जा सकेगी;

(ज) किसी निर्वाचन या घोषणा या विकल्प को, जिसे निर्धारिती ने निरसित अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन किया है या प्रयुक्त किया है और जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, ऐसा निर्वाचन या घोषणा या विकल्प समझा जाएगा जिसे इस अधिनियम के तत्समय उपबंधों के अधीन किया या प्रयुक्त किया गया है;

(झ) जहां इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व ऐसे पूरे किए गए किसी निर्धारण48 की बाबत, ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् कोर्इ प्रतिदाय देय हो जाता है, या पूरे किए गए ऐसे निर्धारण के अधीन किसी देय राशि के संदाय में ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् व्यतिक्रम किया जाता है वहां इस अधिनियम के ऐसे उपबंध जो प्रतिदाय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा संदेय ब्याज और व्यतिक्रम के लिए निर्धारिती द्वारा संदेय ब्याज के बारे में हैं, लागू होंगे;

(ञ) निरसित अधिनियम के अधीन आय-कर, अधिकर, ब्याज, शास्ति के तौर पर या अन्यथा संदेय किसी राशि की वसूली, इस अधिनियम के अधीन, किन्तु ऐसी राशि की वसूली के लिए निरसित अधिनियम के अधीन पहले की गर्इ ऐसी राशि की वसूली की कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, की जा सकेगी;

(ट) निरसित अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन किया गया कोर्इ करार, की गर्इ नियुक्ति, किया गया कोर्इ अनुमोदन, दी गर्इ और मान्यता, निकाला गया कोर्इ निदेश, अनुदेश, अधिसूचना, आदेश या नियम, वहां तक जहां तक इस अधिनियम के तत्संबंधी उपबंधों से असंगत नहीं है, पूर्वोक्त तत्समान उपबंध के अधीन किया गया, की गर्इ, किया गया, दिया गया या निकाला गया समझा जाएगा तथा तदनुसार प्रवृत्त रहेगा;

(ठ) 49निरसित अधिनियम की धारा 60 की उपधारा (1) 50[या धारा 60क] के अधीन निकाली गर्इ और इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त रही कोर्इ अधिसूचना, उस सीमा तक जिस तक इस अधिनियम के अधीन उपबंध नहीं किया गया है, प्रवृत्त बनी रहेगी 51[* * *] :

52[परन्तु केन्द्रीय सरकार ऐसी किसी अधिसूचना को विखंडित या संशोधित कर सकती है जिससे कि तद्धीन कोर्इ छूट, दर में कमी या अन्य उपान्तर विखंडित हो जाए;]

(ड) जहां निरसित अधिनियम के अधीन किसी आवेदन, अपील, निदेश या पुनरीक्षण के लिए विहित अवधि इस अधिनियम के प्रारम्भ पर या उससे पूर्व समाप्त हो गर्इ हो वहां इस अधिनियम की किसी बात का अर्थ यह नहीं लगाया जाएगा कि वह ऐसे आवेदन, अपील, निदेश या, पुनरीक्षण को इस अधिनियम के अधीन किए जाने के लिए केवल इस तथ्य के कारण समर्थ बनाती है कि उसके लिए अधिक लम्बी अवधि विहित है या समुचित प्राधिकारी द्वारा यथोचित मामलों में समय के विस्तारण लिए अन्य उपबंध किया गया है।

 

45. "निर्धारण के लिए कार्यवाहियां" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

46. "इस अधिनियम के सब उपबंध तद्नुसार, लागू होंगे" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

47. वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

48. "ऐसे पूरे किए गए किसी निर्धारण" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

49. 1922 के अधिनियम की धारा 60(1) के अधीन अधिसूचित छूट, जो इस खंड के अधीन जारी बनी हुर्इ है, के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज सर्कुलर्स।

50. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

51. देशी रियासतों के शासक (विशेषाधिकारों का उत्सादन) अधिनियम, 1972 द्वारा 9.9.1972 से "जब तक कि केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे विखंडित न कर दिया जाए" शब्दों का लोप किया गया।

52. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

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