प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया।
धारा 139क के उपबंधों का पालन करने में असफलता के लिए शास्ति
272ख. 30[प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। मूल धारा 272ख कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।]
30. लोप से पूर्व धारा 272ख, जो कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से संशोधित की गर्इ थी, इस प्रकार थी :
"(1) यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 139क के उपबंधों का पालन करने में असफल रहता है तो वह निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित आदेश पर, शास्ति के रूप में ऐसी राशि का संदाय करेगा जो पांच सौ रुपए तक हो सकेगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोर्इ भी आदेश उस समय तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति को जिस पर शास्ति अधिरोपित की जानी प्रस्तावित है, उस मामले में सुने जाने का अवसर न दे दिया जाए।"
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

